Posted on 05 September 2009 by admin
हरियाणा में चर्चित कहावत है ‘सीखेगा नाई का, कटेगा जाट का’ भाजपा में यही तो हो रहा है। वरना किसी को नहीं मालूम कि अरुण शौरी ने जो भाजपा और इसके दिग्गज नेताओं को गरियाने का अभियान चलाया है इसमें उन्हें संघ का आशीर्वाद प्राप्त है। काहे को राजनाथ जी ख्वामखाह अपना भाव बढ़ा रहे हैं, शौरी के निशाने पर अडवानी और उनकी मंडली है उनके चहेते और उनके चमचे। सो भाजपा शौरी को ‘सॉरी’ कहने से बच रही है, उनसे मात्र स्पष्टीकरण देने को कहा गया है और वह भी मौखिक, यानी पार्टी में बकायदा वे जमे रहेंगे। और जमकर गोलीबारी भी करते रहेंगे।
Posted on 05 September 2009 by admin
भाजपा नेताओं की कुछ चर्चित गलत फहमियां-राजनाथ सिंह का यह सोचना कि वे निर्णय भी लेते हैं, अडवानी खुद को ‘बिल्डर ऑफ पार्टी’ मानते हैं, आहलूवालिया अपने को ‘आउट साइडर’ नहीं मानते, अनंत कुमार पार्टी अध्यक्ष बनना चाहते हैं और शहनवाज हुसैन लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष, सुंधाशु मित्तल का यह सोचना कि जो अडवानी के खिलाफ हैं वह मित्तल के साथ है, रंजन भट्टाचार्य का यह सोचना कि वे भाजपा को बना-बिगाड़ सकते हैं, शौरी खुद को पार्टी का बड़ा लीडर मानते हैं, जेतली स्वयं को सुपर माइंड, यशवंत सिन्हा-जो लोग अभी भाजपा चला रहे हैं वे बुध्दिहीन हैं, वसुंधरा राजे कि उन्होंने जाट मतदाताओं को भाजपा से जोड़ा, भैरोसिंह शेखावत-कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन, जसवंत का यह मानना कि भाजपावालों को न तो अंग्रेजी आती है और न डिप्लोमेसी, मुरली मनोहर जोशी खुद को अध्यक्ष पद का स्वाभाविक दावेदार ठहराते हैं, सुषमा स्वराज का यह सोचना कि अडवानी अटल की तरह भाजपा के एक महान नेता हैं।
Posted on 27 August 2009 by admin
अडवानी को लेकर संघ की चिंताए बढ़ती ही जा रही है। चिंतन बैठक शुरू होने से पूर्व संघ ने अडवानी को बड़े दुलार-प्यार से समझाया था कि वे पार्टी में युवाओं के आगे आने का मार्ग प्रशस्त करें और पार्टी में युवा नेतृत्व को फलने-फूलने का मौका दें, यानी संघ की अडवानी को अपरोक्ष यही राय थी कि वे हटें, नेता विपक्ष की गद्दी भी खाली करें और पार्टी नेतृत्व की भी। पर जब अडवानी टस से मस नहीं हुए तो संघ को बैकफुट पर आना पड़ा और बयान देना पड़ा कि ‘भाजपा में हमारा दखल नहीं।’ जबकि संघ के लोग अडवानी को लंबे समय से समझा रहे हैं कि आप सोनिया गांधी की तरह बस संसदीय दल का चेयरमैन हो जाइए। पहले अटल जी ने भी इसी परंपरा का अनुसरण किया था, वे नेता विपक्ष नहीं बने थे। पर अडवानी ठहरे चिकने घड़े कहते हैं कि अगर अटल जी का स्वास्थ्य ठीक रहता तो वे नेता विपक्ष जरूर बनते।
Posted on 27 August 2009 by admin
हरियाणा में समय पूर्व ही विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है हुड्डा ने। सो ऐसे में यह सवाल अहम है कि क्या भाजपा-इनलोद का गठबंधन बरकरार रहेगा? पर सूत्र बताते हैं कि इस वक्त भाजपा और चौटाला दोनों ही अपनी ढपली अपना राग गाने में व्यस्त हैं, भाजपा को लगता है कि राज्य में चौटाला का कोई जनाधार बचा ही नहीं है और चौटाला को लगता है कि हरियाणा में भाजपा का कोई नाम लेवा ही नहीं सो दोनों ही पार्टियां अलग-अलग होकर चुनाव लड़ सकती हैं, कांग्रेस के लिए यह निश्चय ही अच्छी खबर है।
Posted on 27 August 2009 by admin
लंच के दौरान बैठक में मौजूद सभी नेताओं ने अपने निष्कासन पर जसवंत का बयान मीडिया में देखा जो कहीं अधिक संतुलित और मर्यादित था तो उनके मन भर आए, लंच से यही नेतागण जब बैठक में वापिस लौट रहे थे तो भारी मन और गीली आंखों के साथ।