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गन्ना नहीं तो लिब्रहान सही

Posted on 03 December 2009 by admin

संसद के चालू सत्र में गन्ने की कीमत एक प्रमुख मुद्दा था, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज से पहले ही कह चुके थे कि वे गन्ने के मुद्दे पर बोलना चाहते हैं क्योंकि वे किसानों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करना चाहते थे। पर इत्तफाक से गन्ने पर होने वाली बहस एक मीटिंग में तब्दील हो गई। इतने में लिब्रहान रिपोर्ट का बवंडर आ गया तो सुषमा ने राजनाथ से आग्रह किया कि वे उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए लिब्रहान रिपोर्ट पर बोलें। सो अब राजनाथ के लिए यह एक सुनहरा अवसर है संसद और संघ के समक्ष खुद को सार्थक करने के लिए, सो अध्यक्ष जी झारखंड को बिसरा कर लिब्रहान का पाठ याद करने में मुस्तैदी से जुटे हैं।

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पप्पू नहीं है संघ

Posted on 03 December 2009 by admin

जब से संघ ने अडवानी से यह रार ठानी है कि वे अपना नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ें तब से अडवानी भी कोई भी माकूल अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहते जिससे कि संघ को उसकी औकात बताई जा सके। इसी कड़ी में पूर्णिया के भाजपा सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह जिनका इंजिन कूलेंट का एक बड़ा कारोबार है, जब उन्होंने संघ के खिलाफ स्पीच दी तो लोगों को समझने में देर नहीं लगी कि यह पूरी स्पीच अडवानी प्रायोजित है। अडवानी कैंप को उदय सिंह सरीखे कुछ ऐसे सांसदों-नेताओं की तलाश है चाहे उनकी अपनी जमीन न हो पर वह संघ की मिट्टी पलीद कर सके।

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नारी विरोधी गडकरी?

Posted on 03 December 2009 by admin

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘अध्यक्ष एक नई खोज’ के ताजातरीन कड़ी में जब से नितिन गडकरी का नाम जुड़ा है, भगवा पार्टी वाले गडकरी के अतीत को खंगालने में जुट गए हैं और इस बात की पड़ताल भी जारी है कि कथित तौर पर भाजपा को युवा चेहरा प्रदान करने की संघ की मुहिम में गडकरी कितने मौजूं हैं और अब भाजपा में इस बात पर भी बहस शुरू हो गई है कि पार्टी के नए अध्यक्ष का रुख क्या महिला विरोधी है, क्योंकि जब भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में संसद में 33 फीसदी महिला आरक्षण का प्रस्ताव आया था तो सिर्फ एक मत इस प्रस्ताव के विरोध में पड़ा था, सनद रहे कि यह एकमात्र वोट गडकरी का ही था, सो क्या समझा जाए आने वाले दिनों में भगवा राजनीति में महिलाओं का रूतबा घटेगा?

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उड़ान से परेशान

Posted on 28 November 2009 by admin

अभी कुछ रोज पहले एयरइंडिया की भोपाल जाने वाली फ्लाइट में एक अजीब हादसा हो गया। यह फ्लाइट श्रीनगर से आकर भोपाल के लिए दिल्ली से शाम साढ़े छह बजे उड़ान भरती है, और फिर भोपाल से इंदौर और इंदौर से मुंबई जाती है। श्रीनगर से इस उड़ान पर एक गंभीर मरीज को स्ट्रेचर पर लिटा कर दिल्ली लाना था, इसके लिए एयरइंडिया के इंजीनियरों ने विमान के छह सीट खोल दीं और उस जगह में ‘स्ट्रेचर’ फिट कर दिया। जब यह विमान दिल्ली पहुंचा तो एयरइंडिया के काबिल इंजीनियर स्ट्रेचर हटने के बाद मात्र 3 सीट ही जोड़ पाए, जबकि विमान की बुकिंग पूरी तरह फुल थी। सो एयरइंडिया के ग्राउण्ड स्टॉफ ने यात्रियों से अनुरोध किया कि कोई तीन यात्री रुक जाए उन्हें कल की फ्लाइट से भेज दिया जाएगा और एयरइंडिया अपने खर्चे पर उन्हें दिल्ली के किसी पंचतारा होटल में उनके रहने और भोजन का प्रबंध करेगी। खूब हंगामा हुआ कोई यात्री रूकने को तैयार नहीं था। चूंकि विमान की 22वीं पंक्तिवाली सीट नहीं लग पाई थी सो 20 नंबर सीट तक तमाम यात्रियों को विमान में चढ़ा दिया गया और बाकियों को एयरपोर्ट पर ही रोक रखा गया। अंत में तीन यात्रियों को एयरइंडिया ने रूकने के लिए मना ही लिया, उन्हें एयरलाइंस ने कुछ विशेष पैकेज दिए। जब मामला निपट गया तो शेष बचे यात्रियों को भी विमान में सवार कराया गया और जब विमान उड़ान भरने को तैयार हुआ तो मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर भी सपत्नीक विमान में सवार हुए। राज्यपाल को देखते ही विमान में पहले से बैठे यात्रियों ने नारेबाजी शुरू कर दी उन्हें लगा कि राज्यपाल की वजह से ही उनकी उड़ान दो-ढाई घंटे लेट हो गई है, विमान में मौजूद परिचारिकाओं ने यात्रियों को समझाया कि राज्यपाल तो नियत समय पर ही आ गए थे और वे वीआईपी लाऊंज में विमान के उड़ने की प्रतिक्षा कर रहे थे, तब कहीं जाकर यह पूरा मामला शांत हो पाया।

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दूर की सोच रहे ठाकुर

Posted on 28 November 2009 by admin

राजनाथ सिंह संघ की इस अतिसक्रियता से दुखी हैं, पिछले दिनों उन्होंने अपने आवास पर कुछ चुनींदा पत्रकारों को लंच दिया और लंच चर्चा के दौरान ही उन्होंने पत्रकारों को इत्तला दी कि वे समय से पूर्व ही इस्तीफा दे रहे हैं यानी अपनी अध्यक्षीय कुर्सी छोड़ अब वे अपना सारा ध्यान यूपी पर केंद्रित करना चाहते हैं, राजनाथ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पद छोड़ने की बाबत अपना आधिकारिक बयान वे शीघ्र जारी कर देंगे। इसके उपरांत राजनाथ ने यूपी में भाजपा के कुछ प्रभावशाली नेताओं को फोन कर अपनी मंशा से अवगत कराया और उनसे कहा कि वे यूपी में जन जागरण अभियान चलाना चाहते हैं, यह और बात है कि इन तमाम नेताओं ने फिलवक्त अपने अध्यक्ष की बात को अनसुनी कर दी है।

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राजनाथ आहत

Posted on 28 November 2009 by admin

लेकिन कल्याण सिंह को पार्टी में लेने से भाजपा ने मना कर दिया है। अडवानी स्वयं इस राय के बताए जाते हैं कि जितनी भी जल्दी हो सके गोविंद और उमा को एनडीए से जोड़ा जाए और इस बाबत उमा ने बकायदा एक पत्र भी लिखा है। मगर इस पूरे अभियान से शिवराज सिंह चौहान की बनियान ढीली पड़ रही है,चौहान कह रहे हैं कि जब मध्य प्रदेश में सरकार अच्छी-भली चल रही है तो क्यों उसे डिस्टर्ब करते हो? वहीं कहीं भाजपा के विदाई कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह यूपी के फैसलों से असंतुष्ट हैं। वैसे भी इस उपचुनाव में खासकर यूपी में भाजपा की जो दुर्गत हुई है उससे राजनाथ आहत बताए जाते हैं और अब वे अपना पूरा ध्यान यूपी पर लगाना चाहते हैं। सो इन्हीं वजहों से फिलहाल उमा का भाजपा में आना टल गया है, सो भाजपा में उमा के शुभचिंतकों ने उन्हें सुझाव दिया है कि फिलहाल अपनी क्षेत्रीय पार्टी को वे एनडीए गठबंधन में शामिल करा लें और जब बाद में हालत ठीक हो जाएं तो उमा को भाजपा में शामिल करा दिया जाए।

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परजीवी मांगे बुध्दिजीवी

Posted on 21 November 2009 by admin

जिस कार्यक्रम से भागवत व संघ की सबसे ज्यादा किरकिरी हुई थी वह रामलीला मैदान वाला प्रोग्राम था, जहां कुर्सियां तो 6 हजार लगी थी, पर भागवत की उस मीटिंग में मात्र 74 लोग उपस्थित थे। जब उस कार्यक्रम की रूपरेखा बनी तो भागवत किंचित कुछ ज्यादा ही जोश में थे, तो उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों के लिए यह आदेश जारी कर दिए थे कि किसी भी पदाधिकारी को 4 से ज्यादा पास नहीं दिए जाएंगे। उस पर भी तुर्रा यह था कि सभा में मौजूद 6 हजार कुर्सियां भी महज बुध्दिजीवियों के लिए थीं, स्वयंसेवकों को तो या खड़े रहना था या फिर जमीन पर बैठना था। अब कोई संघ प्रमुख को बताए जरा कि क्या दिल्ली में भी 6 हजार बुध्दिजीवियों का वास है? और अगर है भी तो उनका नजरिया ‘राइट वालों’ के लिए इतना राइट भी नहीं है।

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अथ श्री भागवत कथा

Posted on 21 November 2009 by admin

अगर संघ अडवानी से त्रस्त है, तो भाजपा भी संघ के नए नेतृत्व से पस्त है। जहां पहले संघ की परंपरा में सर संघ चालक के कार्यक्रम दो वर्ष पूर्व ही तय हो जाते थे, वहीं संघ के नए मुखिया भागवत कुछ इस कदर उत्साही हैं कि अभी उन्होंने हालिया दिनों में यह फरमान जारी कर दिया कि उनके 28 कार्यक्रम, प्रेस कांफ्रेंस सहित लगाए जाएं, अब दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है, भाजपा नेताओं को तो जैसे सांप सूंघ गया हो कोई भी भागवत के प्रोग्राम में अपनी दिलचस्पी नहीं दिखा रहा।

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भाजपा यानी भारतीय जमानत जब्त पार्टी

Posted on 21 November 2009 by admin

बदले राजनैतिक परिदृश्य में भाजपा का नया नामकरण हुआ है-‘भारतीय जमानत जब्त पार्टी,’ विडंबना देखिए, भाजपा को यह नया नाम उनकी पार्टी वालों ने ही दिया है। बीते हरियाणा विधानसभा चुनाव में अपना दम-खम दिखाने के चक्कर में भगवा पार्टी कुछ इस कदर बेदम हुई कि हरियाणा की कुल 90 सीटों में से 72 पर भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। अब जरा यूपी उपचुनाव के नतीजों पर गौर फरमा लीजिए, यूपी की 9 में से 7 विधानसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। यूपी उपचुनाव में भाजपा ने जो सीट अपनी सहयोगी पार्टी जद(यू) के लिए छोड़ी थी वहां जद(यू) उम्मीदवार को मात्र 785 वोट मिले। और इस पर तुर्रा देखिए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह खम्म ठोंककर कह रहे हैं कि दिसंबर में पार्टी की अध्यक्षीय कुर्सी छोड़ने के बाद वे अपना सारा ध्यान यूपी पर लगाएंगे, समझा जाता है कि अध्यक्ष जी को संघ का यह आदेश मिला है कि जिसे शिरोधार्य करने के लिए वे इतने उतावले हो रहे हैं… जब हर शाख पर… बैठा है तो अंजामे भाजपा क्या होगा, आप सहज ही अंदाजा लगा लीजिए।

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पर उपदेश…

Posted on 14 November 2009 by admin

वित्त मंत्री द्वारा आर्थिक संपादकों को डिनर दिए जाने की परंपरा पुरानी है, पर आमतौर पर यह डिनर सरकारी पंचतारा होटल अशोक में होस्ट होता रहा है, पर मान्य परंपराओं के विपरीत इस दफे प्रणब मुखर्जी ने आर्थिक संपादकों को डिनर देने के लिए वह नया-नवेला पंचतारा होटल का चुनाव किया, जहां अब से पहले वह सरकारी होटल हुआ करता था जहां चर्चित तंदूर कांड को अंजाम दिया गया था। बतौर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने साथी कैबिनेट मंत्रियों के लिए फरमान जारी किया हुआ है कि वे अपनी विदेश यात्राओं पर रोक लगाएं, फिजूल खर्ची रोकें और सरकारी खजाने पर चपत लगने से रोके। ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ लगता है माननीय वित्त मंत्री जी का उपदेश सिर्फ साथी मंत्रियों के लिए है, वरना अभी-अभी वे दुबई से लौटे थे कि यूरोपीय संघ की एक बैठक में शामिल होने के लिए स्कॉटलैंड निकल गए हैं…।

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