Posted on 19 February 2010 by admin
पिछले दिनों प्रयात कथावाचक मुरारी बापू की ‘गांधी और मानस’ पर कथा हुई, इस कथा शृंखला की विशेषता रही कि इसमें बापू न सिर्फ महात्मा गांधी और मानस पर बोले अपितु कांग्रेस के युवा गांधी राहुल की मुंबई यात्रा पर भी वे आधा घंटा बोले। इसके अलावा बापू ने अलामा इकबाल की वह गजल पढ़ी जो उन्होंने राम को लेकर लिखी है। €या यह महज इžाफाक है कि बापू की इस कथा यात्रा के सहयात्री बनने के लिए अहमद पटेल, राजीव शु€ला, गुजरात कांग्रेस के विधानसभा में नेता विपक्ष शि€त सिंह गोयल, सिध्दार्थ पटेल और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इरशाद मिर्जा भी शामिल थे। मोदी का जवाब मोदी शैली में देने की रणनैतिक बुनावट का आगाज है ये €या?
Posted on 19 February 2010 by admin
मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के मुयमंत्री अशोक चव्हाण अपने मराठी काऊंटरपार्ट शरद पवार से टकरा गए, फिर मराठी में ही इन दोनों नेताओं की गिरपिट शुरू हो गई, बातों ही बातों में चव्हाण ने पवार से जानना चाहा कि वे चीनी के मूल्यों को कंट्रोल €यों नहीं करते? इस पर पवार ने जो कुछ कहा वह हैरत में डालने वाला है-‘चुप रहो, इतने सालों के बाद तो लगातार घाटा उठा रहे चीनी मिल मालिकों को कुछ मुनाफा कमाने का मौका मिला है, तुहारी भी तो 3 चीनी मिले हैं और ऐसा बेतुका सवाल तुम पूछ रहे हो?’ अब तो देश की जनता ही इनसे कुछ पूछे।
Posted on 19 February 2010 by admin
लगता है सियासत के बदलते दस्तूर को अब पढ़ने में नाकाबिल साबित हो रहे हैं पी.चिदंबरम, वरना €या बात हो गई कि जो दस जनपथ सदैव उन्हें अपनी नजरों में बिठाए रखता था आज पी.सी.को लेकर दस का वह दम नहीं देखा जा रहा, लुंगी वाले ताऊ को तो अब निरंतर यह डर सता रहा है कि कहीं दस जनपथ उन्हें अपनी नजरों से गिरा न दे! पिछले दिनों अपने एक उद्योगपति मित्र की पुत्री की शादी में भाग लेने पी.सी.कोलकाता गए अपने चर्चित-कुचर्चित पुत्र कार्तिक के साथ। पर आधिकारिक तौर पर उनकी इस मीटिंग को दिखलाया गया कि वे न€सली समस्या के समाधान हेतु आहूत एक जरूरी मीटिंग में भाग लेने कोलकाता गए हैं। ताजा जानकारियों के मुताबिक इस विवाह समारोह में हिस्सा लेकर पी.सी. बुरी तरह फंस गए हैं। €योंकि उद्योगपति आर.पी.गोयनका के पुत्र संजीव गोयनका का भाजपा कने€शन अब कोई छुपी बात नहीं रह गई है, और यह भी सर्वज्ञात है कि कैसे संजीव गोयनका के साथ भाजपा के चंद बड़े नेताओं की दांत कटी-रोटी के रिश्ते हैं, वाजपेयी के दžाक दामाद रंजन भट्टाचार्य तो संजीव के सबसे करीबी मित्रों में शुमार होते हैं, संजीव ने सोनिया, प्रधानमंत्री व प्रणबदा को अपनी पुत्री के Žयाह में शामिल होने का खुद न्यौता दिया था, पर कांग्रेस की ओर से ले-देकर आए बस पी.सी, सुशील कुमार शिंदे, श्रीप्रकाश जायसवाल और वासन, वहीं भाजपा की ओर से मुरली मनोहर जोशी और रविशंकर प्रसाद मौजूद थे। गोयनका परिवार के लाख चाहने के बावजूद मनमोहन सिंह या प्रणबदा में से कोई भी कोलकाता नहीं पहुंचा, €योंकि इन्हें मालूम था कि गोयनका परिवार की भगवा नजदीकी को सोनिया गांधी कभी पसंद नहीं करती, पर लगता है कि सžाा के चतुर सुजान पी.सी.ने यह समझने-बुझने में देर कर दी है, देर-सबेर उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
Posted on 10 February 2010 by admin
बाटला गोली कांड की घटना को फिर से गर्मा दिया है दिग्विजय सिंह ने, नजरें टिकी हैं बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों पर, मुस्लिम वोटरों को लुभाने की सियासी कसरत है ये, पर दिग्विजय के बयानों से कांग्रेस ने खुद को किनारा कर लिया है। कांग्रेस धर्म संकट में है, अगर वह बाटला एनकाऊंटर को फर्जी ठहराती है दिग्विजय की तर्ज पर तो फिर शहजाद का पकड़ा जाना भी गलत हो जाएगा और अगर इसे कांग्रेस सही ठहराती है तो वामखाह €यों मुसलमानों की नाराजगी मोल ले। अब दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस के जिस पूर्व विधायक को धर दबोचा है और उससे पूछताछ कर रही है, उन महाशय ने दिल्ली पुलिस को ही लताड़ दिया है कि अगर पुलिस अधिकारियों ने उससे ज्यादा पूछताछ की तो वह अदालत की शरण ले लेगा, यानी उल्टा चोर कोतवाल को डांटे।
Posted on 10 February 2010 by admin
प्रणब मुखर्जी 75 वर्ष के हो गए हैं, सो इस मौके को गौरवांवित पलों में तŽदील करने की गरज से कोलकाता के एक नामी प्रकाशक ने प्रणबदा के ऊपर एक संस्मरण छापा, जिसमें नामी-गिरामी राजनैतिक दिग्गजों ने प्रणबदा की बाबत अंतरंगता प्रकट की है, इन हस्तियों में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से लेकर ममता बनर्जी तक शामिल हैं। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे पुस्तक मेले में पिछले दिनों देश के उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के करकमलों से इस पुस्तक का विमोचन हुआ। इस पुस्तक में सबसे दिलचस्प तो ममता बनर्जी का आलेख है जिसमें जाने-अनजाने उन्होंने उन दिनों को याद किया है जब राजीव गांधी के जमाने में प्रणबदा ने कांग्रेस छोड़कर अपनी एक नई राजनैतिक पार्टी बना ली थी, बिचारे प्रकाशक चाहकर भी इस अंश को पुस्तक से नहीं निकलवा पाए, €योंकि उन्होंने ममता दी की बड़ी खुशामद कर उनसे यह लेख लिखवाया था। और दीदी ने जो कुछ लिखा है उस पर दादा सचमुच हैरान हैं कहीं मल्लिका-ए-सोनिया की नजर न पड़ जाए इस अंश पर।
Posted on 10 February 2010 by admin
अडवानी जी की आंखों का ऑपरेशन हुआ है, ‘कैटरक’ का, जब उम्र 84 की हो तो शरीर में ऐसी छोटी-मोटी चूक तो लक्षित हो ही जाते हैं, पर अडवानी अपने स्वास्थ्य को लेकर सदैव कुछ ज्यादा ही सजग रहते हैं, और वैसे भी इस बात को जैसे अडवानी परिवार ने जज्ब ही कर लिया था कि अडवानी को ऐसी किसी मेडिकल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा है, पर मुंबई की डिजाइनर और अडवानी की मुंहलगी शाइना.एन.सी ने ठीक उसी रोज अडवानी को फोन कर इस बात का न्यौता भेज दिया कि उन्हें ‘माई नेम इज खान’ के एक स्पेशल शो में आना है। अब अडवानी कैसे बताएं कि आज ही उनकी आंखों का ऑपरेशन हुआ है, सो उन्होंने झट से शाइना से बहाना बनाया-‘चूंकि फिल्म पर काफी विवाद चल रहा है सो उनका ‘शो’ पर आना ठीक नहीं रहेगा।’ सो ‘शो’ पर अडवानी नहीं पहुंचे, बस पहुंचा उनका संदेशा।
Posted on 07 February 2010 by admin
फिरोजाबाद उपचुनाव में तब प्रचार के लिए आए थे अमर सिंह। जब चुनाव प्रचार खत्म कर वापिस दिल्ली आने के लिए उनके हेलिकॉप्टर ने उड़ान भरी तो कहा जाता है कि वहां मौजूद सपा के तत्कालीन प्रांतीय महासचिव राम आसरे कुशवाहा ने एक बेहद अशोभनीय टिप्पणी जड़ दी कि ‘काश जो यह हेलिकॉप्टर नीचे गिर जाए तो सपा गर्त में गिरने से बच जाएगी।’ किसी ने कुशवाहा के इन मनोभावों से बाद में अमर सिंह को अवगत करा दिया, फिर क्या था अमर ने आसमान सिर पर उठा लिया। मुलायम दरबार में आनन-फानन में पंचायत बैठी और नेताजी (मुलायम) ने कुशवाहा का पार्टी महासचिव पद से इस्तीफा ले लिया, पर बाद में राम गोपाल यादव किसी तरह से नेताजी से मानमुनौव्वल कर कुशवाहा को न सिर्फ पार्टी से बाहर का दरवाजा दिखाए जाने से बचा लिया, अपितु फिर से प्रांतीय महासचिव पद पर काबिज भी करवा दिया। अब जबकि अमर का खूंटा सपा से उखड़ गया है तो मुलायम ने कुशवाहा को पदोन्नत कर संजय दत्त की जगह पार्टी का नया राष्ट्रीय महासचिव बना दिया है। यानी कुशवाहा के बहाने अमर को कुछ नया संदेश देना चाहते हैं नेताजी।
Posted on 07 February 2010 by admin
जिंदा लोग और जिंदा कौमें कभी भी बहिन जी की प्राथमिकताओं में शुमार नहीं रहे हैं, चुनांचे बुत-प्रेम को लेकर उनकी दीवानगी किसी से छुपी नहीं, और दीवानगी का आलम यह है कि उन्होंने यूपी में बुतों की सुरक्षा के लिए एक दीगर सुरक्षा बल का ही गठन कर दिया है, सो बहिन जी की देखा-देखी अन्य बसपा नेताओं का भी बुत प्रेम भी जाग उठा है, पिछले दिनों बहिन जी की कैबिनेट के एक मंत्री को उनके निर्वाचन क्षेत्र के एक गांव से आमंत्रण मिला कि मंत्री जी को ‘अपने ही एक बुत’ का अनावरण करना है, खुशी-खुशी मंत्री जी अपने गांव पहुंचे और आनन-फानन में अपने बुत का अनावरण कर दिया, जब मंत्री जी के बुत से परदा हटा तो वे यह देखकर भौंचक रह गए कि कुछ अजीब मुद्रा में बनी है उनकी यह बुत, बुत का एक पैर असहज रूप से ऊंचा उठा हुआ है। घबराए मंत्री जी को गांव वालों ने समझाया-चिंता की बात नहीं है, अभी आपके पैरों के नीचे घोड़ा आना बाकी है, हम उसके लिए फिर से चंदा जुटा रहे हैं, पैसा जुट पाएगा तो आपको घोड़े की सवारी भी करा देंगे।
Posted on 07 February 2010 by admin
शर्म, गुस्से व दर्प का रंग एक सा होता है सदैव-सुर्खलाल, यूं तो प्रणबदा और लाल रंगियों (वामपंथियों) की दोस्ती सियासी अंत:पुर को सदैव लुभाती रही है, पर निपट कांग्रेसी होकर भी प्रणबदा का यूं गुस्से में अचानक लाल-पीला हो जाना तो अब जैसे रोज की बात हो गई है, खरामां-खरामां जैसे यह उनकी आदतों में शुमार हो गया है, कैबिनेट की पिछली बैठक में दादा अपने दो काबिना मंत्रियों पर कुछ इस कदर भड़क गए कि एकबारगी प्रधानमंत्री भी भौंचक रह गए। स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद बस इतना चाहते थे कि एम्स के डॉक्टरों का पलायन रोकने के लिए उन्हें जरूरी आकर्षक पैकेज मुहैया कराया जाए, ताकि प्राइवेट अस्पतालों के आकर्षक प्रलोभनों की गिरफ्त में आने से उन्हें बचाया जा सके। इस पर प्रणबदा गुस्से में इस कदर लाल हो गए कि बस कुछ पूछिए मत, कैबिनेट की उसी बैठक में प्रपोजल तो केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने भी रखा था कि ग्रामीण इलाकों के विश्वविद्यालयों को अलग से ‘इंसेटिव’ दिया जाए, इस पर दादा फिर से भड़क गए और भड़के भी क्यों नहीं देश के खजाने की कुंजी है उनके पास, जहां कहीं पैसा जाएगा तो दर्द तो होगा ही।
Posted on 29 January 2010 by admin
वक्त की आहटों के माकूल सियासी रंग बदलने में माहिर एस.एस.आहलूवालिया समय और काल के संदर्भ में अपनी निष्ठा भी बदलते रहे हैं, कांग्रेस से विदाई हुई तो भगवा हो गए, सुषमा स्वराज के संग सियासी सीढ़ीयां चढ़ीं, वक्त बदला तो बदलकर जेतली के बगलगीर हो गए और शनै:शनै: फिर अडवानी के दरबारियों में शुमार हो गए। अडवानी की नेता प्रतिपक्ष की गद्दी गई तो बेचैन आहलूवालिया अहमद पटेल से मिले और उनके समक्ष यह प्रस्ताव रखा कि सोनिया गांधी जिस तरह यूपीए की चेयरपर्सन के पद पर रहते कैबिनेट दर्जा की हकदार हैं, ठीक यही दर्जा अडवानी को भी दिया जाए, क्योंकि वे भी भाजपा संसदीय दल के चैयरपर्सन हैं। अहमद मान गए और इस प्रस्ताव पर उन्होंने कांग्रेस आलाकमान की भी मुहर लगवा ली, पर वह तो ऐन वक्त संघ के इशारे की बखूबी तामील करते नितिन गडकरी नहीं माने, गडकरी और संघ का तर्क एक था, इससे ऐसा लगेगा कि अडवानी जी अभी भी पद के लालच में है, सो अडवानी को कैबिनेट का दर्जा मिलते-मिलते रह गया।