Posted on 04 April 2010 by admin
अपने बड़े भाई से दीगर भगवा पांत के छोटे भाई वरुण भी कुछ न कुछ नया कर दिखाने में जुटे हैं, गडकरी की नई टीम में इस युवा गांधी को भले ही अदना सा पद मिला हो पर उनके सियासी इरादे और हौंसले कहीं ज्यादा भीमकाय हैं। सोमवार यानी 29 मार्च को ही पश्चिमी यूपी के सहारनपुर के गांधी ग्राउंड में वरुण एक बड़ी रैली कर रहे हैं, जिसमें भाजपा का कोई भी बड़ा नेता मौजूद नहीं होगा, जाहिर है युवा गांधी पार्टी को अपने सियासी शक्ति का दीदार करवाना चाहते हैं। वरुण के करीबी और इस रैली के संयोजक की माने तो इस रैली में 40 से 50 हजार तक की भीड़ जुट सकती है, बड़ी बात है उस राज्य के लिए जहां भाजपा सुप्त प्राय: है और जहां उसके कैडर में भी कोई उत्साह नहीं है। वरुण पूरे यूपी में कुल 16 रैलियां कर रहे हैं, उनकी अगली रैली पूर्वी यूपी के जौनपुर में 28 अप्रैल को है। यानी शनै:शनै: अपने बड़े भाई के संसदीय क्षेत्र की तरफ कूच कर रहे हैं वरुण। सहारनपुर रैली से निपट कर वरुण अमरीका का रुख करने वाले हैं, न्यूजर्सी स्थित एक अप्रवासी भारतीय संगठन ने उन्हें प्रमुख वक्ता के तौर पर आमंत्रित किया है वहां, जहां वरुण-‘आइडिया ऑफ न्यू इंडिया’ के बारे में बोलेंगे। सो बड़े भाई की भाव-भंगिमाओं से बहुत कुछ सीख रहा है छोटा गांधी।
Posted on 04 April 2010 by admin
चापलूसी और चापलूसों की संस्कृति से तौबा करने वाले कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी भी किंचित आत्म प्रवंचना और आत्मश्लाघा के कुकरमुत्तों में उलझ ही गए आखिर, वरना क्या जरूरत थी उन्हें चिंतक, अर्थशास्त्री व रिस्क इंजीनियर तथा ‘द ब्लैक स्वॉन’ के लेखक नसीम निकोलस तालिब को इतना भाव देने की। नई दिल्ली के एक कांक्लेव में राहुल यूं अचानक जब पधारे तो आशा के विपरीत सीधे तालिब के ही बगलगीर हुए, कार्यक्रम के अधबीच वे अपने साथ तालिब को लेकर पास के ही एंबेसडर होटल के एक मशहूर रेस्तरां में पहुंचे, जहां तालिब ने भरपेट खाना खाया, पर राहुल ने इस अमरीकन आर्थोडॉक्स अर्थशास्त्री से बस ज्ञान की घुट्टी ही लगाई, इतना ही नहीं लंच के बाद राहुल तालिब को लेकर फिर वापिस उसी कांक्लेव में पहुंचे और लगातार तीन घंटों तक ‘फेवीकोल’ के मजबूत जोड़ की भांति तालिब से ही चिपके रहे। आखिर ऐसा क्या जादू कर दिया था तालिब ने? उसी कांक्लेव में पूर्व में बोलते हुए तालिब ने राहुल गांधी को बराक ओबामा से बेहतर नेता बताया था। तालिब ने राहुल के बारे में कहा कि ‘उन्हें (राहुल को) समस्याओं का बखूबी इल्म है और उन्हें यह भी मालूम है कि इन समस्याओं की जड़ें कहां है? जबकि बराक ओबामा ऐसे लोगों से घिरे हैं जिन्हें किंचित मालूम भी नहीं है कि आखिर समस्या है कहां?’ अगर कोई ऐसी बात कहे तो राहुल भला क्यों न फिसले-दिल तो बच्चा है जी!
Posted on 29 March 2010 by admin
भारतीय सियासत के लिए राम जेठमलानी अब भी उतने ही मौजूं हैं, तभी तो भाजपा व बसपा की देहरी से निराश लौटने वाले प्रख्यात वकील जेठमलानी के पक्ष में अनिल अंबानी खुल कर उतर आए हैं, और गाहे-बगाहे छोटे अंबानी ने सियासी हलकों में यह भी संदेश देने चाहे हैं कि तमाम अमर प्रकरण के बाद भी उन्होंने नेताजी का साथ नहीं छोड़ा है। सो जेठमलानी को ऊपरी सदन में लाने के लिए मुलायम ने भी सपा के 20 वोटों का जुगाड क़र दिया है और भाजपा में अपने ‘मिस्टर मिस्चीफ’ कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए छोटे अंबानी ने 10 भगवा विधायकों को भी जेठमलानी के पक्ष में वोट देने के लिए मना लिया है।
Posted on 29 March 2010 by admin
जब से सुषमा स्वराज ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का जिम्मा संभाला है तब से भाजपा की सदन में एक ‘प्रो.एक्टिव’ इमेज मुखर हुई है, भाजपा के सीनियर नेता ज्यादा से ज्यादा सदन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराना चाहते हैं, भाजपा के लोकसभा सांसदों की एक ऐसी ही बैठक में जब यह सवाल उठा कि पर्यावरण विधेयक पर कौन बोलेगा तो यूपी के आंवला से सांसद मेनका गांधी ने हाथ उठाया कि चूंकि वे पहले से पर्यावरण जैसे मुद्दों को संसद व संसद से बाहर उठाती रही हैं चुनांचे वो इस मुद्दे पर बोलना चाहेंगी। इस पर सुषमा ने कहा कि वह चाहती है कि कर्नाटक के सांसद अनंत हेगड़े इस पर बोले चूंकि वे सीनियर हैं और चार टर्म के एमपी हैं, मेनका ने सवाल उठाया कि वे तो सात टर्म की एमपी हैं, तो ज्यादा सीनियर कौन हुआ? जब मंगलवार को अडवानी के घर पर भाजपा सांसदों की बैठक हुई तो उस बैठक में मेनका ने प्रमुखता से सुझाव दिया कि सांसदों की पृष्ठभूमि और उनकी योग्यता के आधार पर ही उन्हें संसद में बोलने का मौका मिले यानी अगर कोई डॉक्टर है तो वह मेडिकल संबंधी मसलों पर बोले। कोई खेती की पृष्ठभूमि से आता है तो वह कृषि संबंधी मसलों पर बोले। मजे की बात तो यह है कि ‘मेनका फार्मूले’ पर मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा सरीखे सीनियर नेताओं ने भी तत्क्षण अपनी सहमति की मुहर लगा दी, अडवानी भी जाहिरा तौर पर इस फार्मूले के पक्ष में दिखे, पर किंचित यह सुषमा को काफी नागवार गुजरा और वो नाराज होकर बैठक से बाहर चली गईं। महिला आरक्षण से पूर्व की टंकार है यह।
Posted on 16 March 2010 by admin
भाजपा के कई नेताओं के पुकार नाम खासे मशहूर हैं, मसलन पार्टी के नए नवेले अध्यक्ष नितिन गडकरी को संघ का क्लोज सर्किट टीवी यानी सीसीटीवी पुकारा जाता है, तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज को बड़ी बिंदी वाली, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह को घुटना राइफल, वेंकैया नायडू को बिग ब्रदर, अरुण जेतली को मिस्टर मिस्चीफ, रविशंकर प्रसाद को नवाब मलेर कोटला, गुरूमूर्ति को मैलापुर का शंकराचार्य, बलबीर पुंज को इनकमपीटेंट जर्नलिस्ट (असक्षम पत्रकार), भाजपा किसान सेल के विनोद पांडे को भाजपा के स्वामीनाथन, स्वयंसेवक संघ को मिलिट्री रूल, सुधांशु मित्तल को टेंटवाला, निशिकांत दूबे को कॉरपोरेट फेसिलेटर, वरुण गांधी को बिगड़ैल नवाब, नरेंद्र मोदी को अकड़ू, लिस्ट काफी लंबी है, चुनांचे और नामों के लिए तनिक प्रतीक्षा करें।
Posted on 16 March 2010 by admin
आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी? सो शशि थरूर पर अब गाज गिरने ही वाली है, इस बार जब उनसे दस जनपथ इस कदर नाराज है तो बिचारे प्रधानमंत्री उनकी रक्षा करें भी तो कैसे? सो समझा जाता है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्तावित फेरबदल में या तो थरूर का मंत्रालय बदल कर उन्हें अपेक्षाकृत कोई हल्का मंत्रालय थमाया जा सकता है या फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल से उनकी छुट्टी हो सकती है। कई ऐसे काबीना मंत्री हैं जो वर्तमान में अपने मंत्रालय से खुश नहीं है, मसलन खाद्य प्रसंस्करण मंत्री सुबोध कांत सहाय को ही ले लीजिए जो प्रधानमंत्री व सोनिया गांधी से मिलकर कई बार यह मांग कर चुके हैं कि उनका मंत्रालय बदला जाए, सो लगता है इस दफे कांग्रेस अपने ऐसे मंत्रियों की भी सुध ले सकती है।
Posted on 16 March 2010 by admin
प्रणबदा भले ही प्रस्तावित महिला आरक्षण बिल से इत्तफाक न रखते हों पर उनके मन, मंत्रालय और शासन में महिलाओं के लिए एक खास जगह आरक्षित है। अब अमिता पॉल को ही ले लीजिए वर्तमान में यह वित्त मंत्रालय में सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं और इन्हें प्रणबदा की ‘गाइडिंग फोर्स’ माना जाता है, सो वित्त मंत्रालय के सचिव स्तर की बैठकों में इन मैडम की उपस्थिति और महत्ता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है, ऐसी बैठकों में आम तौर पर प्रणबदा चुप रहते हैं और अमिता पॉल उतनी ही मुखर रहती हैं। इस दफे के लोकसभा चुनाव के दौरान जब सबको ऐसा लग रहा था कि केंद्र में कांग्रेस की वापसी तनिक मुश्किल है तो यूपीए के प्रथम शासनकाल के दौरान ही अमिता पॉल के लिए इंफार्मेशन कमिश्नर का एक नया पद सृजित कर दिया गया था, इत्तफाक देखिए कि जब फाइल स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री के पास पहुंची तो आज तक प्रधानमंत्री के उस फाइल पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं। चुनांचे इस दफे जैसे ही यूपीए शासन द्वितीय में कांग्रेस की वापसी हुई तो अमिता पॉल सूचना कमिश्नर के अपने संवैधानिक पद को छोड़कर सीधे प्रणबदा के साथ बतौर ओएसडी अटैच हो गईं। बाद में उन्हें वित्त मंत्रालय में सलाहकार के पद पर नियुक्त कर दिया गया। और आज की तारीख में वित्त मंत्रालय में अमिता पॉल की तूती बोलती है, सभी प्रमुख फाइल और प्रमुख व्यक्ति उनके पास से गुजर कर ही प्रणबदा के पास पहुंच पाते हैं, सो मैडम के ऑफिस में ट्रांसफर-पोस्टिंग के अभ्यर्थियों को परिक्रमा लगाते देखा जा सकता है, कई नामचीन उद्योगपति (यहां तक कि अनिल अंबानी भी)मैडम से मिलने के इंतजार में बाहर वेटिंग रूम में बैठे पाए जा सकते हैं। ऐसे में कई कांग्रेसी ऐसे हैं जो चाहते हैं कि मैडम के लिए वित्त मंत्रालय में एक नया विभाग सृजित कर उन्हें उसमें सचिव बना दिया जाए, पर मैडम और प्रणबदा के पास ऐसी सलाहों पर कान धरने के लिए अभी समय नहीं है।
Posted on 07 March 2010 by admin
संसद में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के धारदार और धारा प्रवाह भाषण ने कांग्रेसी उम्मीदों की चिंदियां बिखेर दीं, कांग्रेस ने भी हल्केपन में सुषमा को जवाब देने के लिए एक पुराने शिवसैनिक संजय निरूपम को मैदान में उतार दिया। राज्यसभा में केशव राव और राजीव शुक्ला ने मोर्चा संभाला, अब कांग्रेस को अपनी भूल का अहसास हो रहा है नाराज सोनिया को गम-गम कर ए-लाइन कांग्रेसी समझा रहे हैं कि लोकसभा में चिदंबरम और राज्यसभा में प्रणबदा को मैदान में उतारना चाहिए था, पर अब पछताए होत क्या…?
Posted on 07 March 2010 by admin
अनिल अंबानी बदल गए हैं या बदल गया है उनके सोचने का तरीका, आज ही रविवार को छोटे अंबानी मुंबई के ग्रांड हयात होटल में एक शानदार पार्टी दे रहे हैं, गिनाने को उपलक्ष्य तो उनके बैनर तले कुछ हिट फिल्मों के जश्न का मौका है, पर जानने वाले जानते हैं कि यह छोटे अंबानी की एक बड़ी पीआर एक्सरसाइज है जिसमें वे गिन-गिन कर अपने कथित पुराने शत्रुओं को आमंत्रित कर रहे हैं। चुनांचे कल तक जो नौकरशाह, उद्योगपति या राजनेता घोषित तौर पर मुकेश कैंप के लोगों में शुमार होते थे, छोटे अंबानी ने खास तौर पर इन लोगों को न्यौता भेजा है, स्वयं दो-तीन दफे फोन भी किया है, छोटे अंबानी के ऐसे आमंत्रितों के नाम पर जरा गौर फर्माए-मुरली देवड़ा, प्रफुल्ल पटेल, राजीव शुक्ला, शाहरूख खान आदि-आदि। जनाब को पिछले ढाई-तीन महीनों से सोनिया गांधी मिलने का समय नहीं दे रही है सो इन्होंने बदलते वक्त के नब्ज पर हाथ रखना ही बेहतर समझा है।
Posted on 07 March 2010 by admin
सब ओर होली है, बिचारी जनता देश की भोली है, ख्वामखाह महंगाई-महंगाई चिल्लाती है, जानती है बेशक जब भी कांग्रेस आती है तो साथ महंगाई जरूर लाती है। बडी बिंदी वाली दीदी संसद में चीख-चीख कर कहती रही, घोटाला बडा है चीनी का, राजमाता के समक्ष इतना घोर प्रलाप, पर कुछ तो बात है कि नींद से जागती नहीं सरकार है। और जागे भी क्यों शरद भाऊ तो घोषित चीनी सम्राट हैं। कॉपरेटिव का रोना छोड़िए अकेले उनकी महाराष्ट्र में 7 चीनी मिलें हैं, उनके भतीजे अजित पवार ने भी अभी प्राइवेट चीनी मिल लगा ली है, अपरा साहब के बेटे ने भी प्राइवेट चीनी मिल लगा ली है, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि महाराष्ट्र शुगर मिल्स ऑनर्स एसोसिएशन का अध्यक्ष कोई और नहीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार में एनसीपी कोटे से मंत्री मोहिते पाटिल हैं, स्वयं मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की भी कई चीनी मिलें हैं। सो चुगने वाले ने सारी गर्मी ऊपर ही ऊपर चुग ली, हमने जलाई थी आग पर मुट्ठी आई राख, क्यों नाहक शरद भाऊ को कोसते हो बिचारे कारोबारी पहले हैं कैबिनेट मंत्री बाद में।