Posted on 26 April 2010 by admin
अब विडंबना देखिए कोच्चि टीम में सबसे ज्यादा पैसा गुजरातियों का लगा है, सो उन्होंने वर्तमान फ्रेंचाइजी पर दबाव बना दिया है कि इस टीम को अहमदाबाद ले चला जाए। इस पर भागे-भागे थरूर प्रणबदा के पास पहुंचे, प्रणबदा ने एक लाइन में थरूर को समझा दिया कि अगर वे उनकी जगह होते तो फौरन अपना इस्तीफा सौंप देते। इस बात पर थरूर नाराज हो गए और बगैर समय लिए सीधे सोनिया गांधी के पास जा पहुंचे, चूंकि इस मामले में कहीं न कहीं राहुल का नाम जुड़ा था सो सोनिया चाहती थीं कि मामले का कोई फौरी हल निकल जाए। सोनिया ने थरूर को सिर्फ पांच मिनट का मिलने का वक्त दिया और सहमति बनी कि थरूर संसद में अपना लिखित बयान पढ़ेंगे, पर शुक्रवार को भाजपा ने न संसद चलने दी और न थरूर को उनका बयान ही देने दिया।
Posted on 26 April 2010 by admin
सारा फच्चर कोच्चि फ्रेंचाइजी को लेकर है। शरद पवार की पूरी कोशिश है कि वर्तमान फ्रेंचाइजी से यह टीम छीनकर वीडियोकॉन को दिलवा दी जाए, जबकि नरेंद्र मोदी गौतम अदानी के लिए कोशिश कर रहे हैं। कोच्चि ‘बिड’ के समय जो लोग उपस्थित थे उनमें से कोई सुनंदा पुष्कर को नहीं जानता था, पर जब शशि थरूर के ओएसडी जेकब की मौजूदगी का वहां पता चला तो सबने आनन-फानन में इसका थरूर कनेक्शन ढूंढ ही लिया। सुना जाता है कि जब थरूर को इस मामले में अपने लोगों का पक्ष तनिक कमजोर लगा तो वे सीधे राहुल गांधी के पास गए और राहुल से उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी यह ‘बिड’ अदानी को दिलवाना चाहते हैं जिससे यह टीम अहमदाबाद चली जाएगी। मोदी मानिया से आक्रांत राहुल ने तब थरूर के लिए आईपीएल के एक सिरमौर को फोन कर उनसे थरूर की मदद करने को कहा। राहुल के प्रयास रंग लाए और यह डील ‘रौंदेवू’ को मिल गई। पर इसमें पेंच यह है कि कोच्चि में कोई क्रिकेट ग्राउंड ही नहीं है, सो थरूर नई दिल्ली में अरुण जेतली से मिले और कहा कि उनके फ्रेंचाइजी तीन साल के अंदर कोच्चि में स्टेडियम बनवा लेंगे, सो इसे वे आबूधाबी ले जाने में मदद करे। जेतली ने कहा कि यह इंडियन प्रीमियर लीग है, इसे बाहर देश से नहीं ले जाया जा सकता, वैसे भी आबूधाबी में सट्टेबाजी बहुत है। सो यह मामला यहीं अटक गया।
Posted on 26 April 2010 by admin
सियासत के बड़े खेल खेलने वाले महारथी सियासतदां जब क्रिकेट के आंगन में इकट्ठे होकर क्रिकेट से भी बड़ा कुछ खेलने लग जाएं तो इस खेल को आप क्या नाम देंगे? वह खेल जो शरद पवार खेल रहे हैं, ललित मोदी, शशि थरूर, राजीव शुक्ला खेल रहे हैं। यकीनन यह क्रिकेट से आगे का खेल है, नहीं तो फिर क्यों शरद पवार, लालू यादव, शरद यादव व फारुख अब्दुल्ला के निरंतर संपर्क में हैं और पवार के चंपूगण खम्म ठोंककर कह रहे हैं-‘देखते है बजट कैसे पास करवाती है सरकार?’ पवार कट मोशन को बतौर हथियार बनाकर यूपीए सरकार गिराने की धमकी दे रहे हैं, पर अंदर से वे कहीं डरे हुए भी हैं। पवार कहते हैं- ‘आज मोदी के बहाने बीसीसीआई को घेरने की तैयारी है।’ कांग्रेस-राकांपा गठबंधन के महाराष्ट्र सरकार पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं, कांग्रेस भी झुकने को तैयार नहीं दिखती चुनांचे अभी आगे भी जुबानी चौके-छक्कों की बरसात जारी रहने वाली है।
Posted on 22 April 2010 by admin
मौजूदा आईपीएल सीजन के बाद कई बड़े स्टार खिलाड़ी अपनी टीम बदल सकते हैं, मसलन पंजाब की किंग्स इलेवन की कप्तानी से हटाए जाने से नाराज चल रहे युवराज सिंह सहारा की पुणे टीम ज्वॉयन कर सकते हैं, मुमकिन है कि उन्हें टीम का कैप्टन भी बना दिया जाए, पहले यूवी मुंबई के लिए कोशिश कर रहे थे पर वहां तमाम दोस्ताना के बावजूद सचिन तेंदुलकर ने उन्हें घास नहीं डाली, सो यूवी ने पुणे का रूख कर लिया। इसी प्रकार सौरभ गांगुली भी शाहरूख की केकेआर को अलविदा कह सहारा श्री का दामन थाम सकते हैं यानी वे भी सहारा की पुणे टीम का हिस्सा हो सकते हैं।
Posted on 22 April 2010 by admin
अडवानी जी अपनी ही पार्टी से बेहद नाराज हैं और नाराजगी का आलम यह कि पिछले दिनों न तो वे भाजपा के स्थापना दिवस समारोह में ही आए और यहां तक कि पार्टी पदाधिकारियों की एक बैठक को संबोधित करने से भी मना कर दिया। घड़ी-घड़ी बदल जाने वाले गडकरी से अडवानी की नाराजगी इस बात को लेकर है कि अडवानी ने गडकरी से राय-विचार करके ही उमा भारती और गोविंदाचार्य को भाजपा में वापिस आने का निमंत्रण दिया था, पर पल में तोला पल में माशा गडकरी अब इस मामले से हाथ झाड़ रहे हैं, यहां तक कि शिवराज चौहान भी दिल्ली आकर अडवानी को तेवर दिखा गए और खम्म ठोंक कर कह गए कि अगर उमा को पार्टी में लेना है तो पहले मेरा इस्तीफा ले लो। पार्टी वालों के इस नए रंग-ढंग से हैरानी में हैं अडवानी।
Posted on 22 April 2010 by admin
शाहरूख खान ने जब से कोलकाता नाइट राइडर्स टीम खरीदी है तब से वे बंगालियों के हर दिल अजीज हो गए हैं, लिहाजा उनकी केकेआर टीम चाहे आईपीएल का हर अहम मुकाबला हार जाए पर शाहरूख ने तो अपनी खास अदा से बंगाल वालों का दिल जीत ही लिया है। …जैसे चिड़ियों को डालते हैं दाने और फिर लगाते हैं निशाने…सो आसन्न बंगाल चुनाव में शाहरूख खान कांग्रेस के स्टार प्रचारक हो सकते हैं, कांग्रेसी युवराज राहुल के एजेंडे में भी बिहार, यूपी, और बंगाल मजबूती से जमे बैठे हैं, सो शाहरूख को कांग्रेस के पक्ष में मनाने व तैयार करने की जिम्मेदारी राजीव शुक्ला को सौंपी गई है। सबको मालूम है शुक्ला जी अपने मित्र खान के लिए कोई भी कुर्बानी देने की हद तक जा सकते हैं, जाहिर है शाहरूख को भी दोस्ती का कर्ज अदा करने में महारथ हासिल है, सो बात बन ही जाएगी।
Posted on 16 April 2010 by admin
नक्सलियों के खिलाफ सख्त मुद्रा अख्तियार करने के पक्षधर हैं केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम। गाहे-बगाहे पीसी ने इसका संकेत दिया भी है। नक्सलियों के सीज फायर प्रस्ताव को उन्होंने एक सिरे से ठुकरा दिया है। क्योंकि वे जानते हैं कि नक्सली सिर्फ बरसात तक युध्दविराम चाहते हैं, गोया एक बार बरसात शुरू हो गई तो बीहड़-भीषण जंगलों में नक्सलियों को ढूंढना, पकड़ना व मारना सैन्य बलों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। सो, गृह मंत्री मजबूती से इन तैयारियों में जुटे हैं कि कैसे जून से पहले-पहले एक बड़ा अभियान चलाकर नक्सलियों को नेस्तनाबूद किया जा सके।
Posted on 16 April 2010 by admin
देखते-देखते विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा की उनकी राज्यसभा की मियाद खत्म हो ही गई प्रधानमंत्री ने शर्मा जी की फाइल कानून मंत्रालय को भेज दी है कि बगैर किसी सदन के सदस्य हुए क्या केंद्र में मंत्री बने रहने का हक उन्हें प्राप्त है? ऐसा नहीं है कि आनंद शर्मा ने राज्यसभा के लिए हाथ पांव नहीं मारे हों। कई-कई बार दस जनपथ की चौखट पर भी मत्था टेक आए, पर न तो हिमाचल से और न ही हरियाणा से उनका कोई जुगाड़ लगा, तो थकहार कर उन्होंने आंध्र प्रदेश की ओर मुंह कर लिया, पर अपने अकड़ू रवैए के चलते वे आंध्र प्रदेश वालों का दिल जीतने में भी नाकाम रहे। अगर आनंद शर्मा केंद्र में मंत्री नहीं होंगे तो फिर क्या करेंगे? शायद हिमाचल कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बन जाएं और फिर खुद को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित करवा लें। पर प्रधानमंत्री के संग-संग अमरीकन लॉबी चाहती है कि शर्मा जी फिलवक्त केंद्र में मंत्री पद की शोभा बढ़ाते रहें।
Posted on 16 April 2010 by admin
‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ भाजपा को अंधेरे से उजाले की ओर लाने में पार्टी के नवेले अध्यक्ष नितिन गडकरी खासी मशक्कत कर रहे हैं। भगवा संसार के बेदर्द फलक पर अपने अनगढ़ हाथों से खींच दी है उन्होंने आड़ी-तिरछी कई आकृतियां, जिसमें न रंग का पता है न संयोजन का, सो रोज-ब-रोज की कश्मकश से चुगकर कार्यों की एक फेहरिस्त तैयार की जाती है और सुबह पांच बजे तक काम करती है उनकी किचेन कैबिनेट यानी अनंत कुमार, पीयूष गोयल, किरीट सोमैय्या किसी के पास न सोने की फुर्सत है, न कुछ खोने की, दरअसल गडकरी की यह किचेन कैबिनेट पार्टी से जुड़े अहम फैसले लेने के लिए जुटती ही है रात के 12 बजे, और मध्य रात्रि 2 से 4 के बीच सबसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं। चुनांचे अगर अध्यक्ष जी सुबह के 5 बजे सोने जाएंगे तो उठेंगे कब? आम तौर पर तो दोपहर के 12 बज ही जाते हैं और आप अध्यक्ष जी के घर उन मुलाकातियों के चेहरों पर 12 बजता देख पाएंगे, जिन्हें अध्यक्ष जी सुबह मिलने का वक्त देते हैं…चलो, सुबह का भूला अगर…
Posted on 04 April 2010 by admin
एआईसीसी का सत्र कोई लंबे वक्त से नहीं हुआ है, सो खींचतान कर कांग्रेसी कोटरी ‘मिनी सत्र’ का शिगूफा उछाल रही है, कांग्रेस सेवा दल सोमवार से नई दिल्ली स्थित कांस्टीटयूशन क्लब में एक कांफ्रेंस करने जा रहा है जिसमें कांग्रेस की राजमाता सोनिया गांधी, युवराज राहुल के साथ-साथ पूरी मनमोहन कैबिनेट मौजूद रहेगी, जब पूरी की पूरी मंडली हाजिर है जनाब तो फिर इसे मिनी सेशन का नाम क्यों देते हो, कुछ तो जंबो सोचो।