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रास नहीं आ रही कांग्रेस

Posted on 28 June 2010 by admin

‘फिाा में इतनी घुटन है कि आज घबराकर, चिराग पूछ रहे हैं कि हवा कब आएगी’ त्राहिमाम करती जनता और शोले बरसाती महंगाई, पेट्रो पदार्थों के दाम फिर से बढ़ गए हैं, पर प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा को अपने घर के झगड़ों से ही फुर्सत नहीं, जैसे लोगों के टीस पर सियासी रोटी सेंक रही है कांग्रेस। अभी ताजा-ताजा अपने युवराज का 40वां जन्मदिवस मनाकर ठीक से फारिग नहीं हो पाई है देश की सत्तारूढ़ पार्टी। और वैसे भी युवराज को स्वदेश में अपना जन्मदिन मनाना कभी रास नहीं आया है, अपने दो नजदीकी मित्रों के साथ जब राहुल ने लंदन जाने के लिए 17 जून को वर्जिन की वीए 301 लाइट पकड़ी तो सब तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक ही था। लंदन में उनकी जन्मदिन की पार्टी में मां सोनिया भी शरीक हुईं और बहन प्रियंका भी अपने बच्चों के साथ। सोनिया राहुल के जन्मदिन के एक दिन पहले लंदन पहुंची और उनका जन्मदिवस मना अगले दिन की फ्लाइट से दिल्ली लौट आईं, प्रियंका एक सप्ताह रूक कर लौटीं और राहुल को अभी लौटना है अपने दिवास्वप्नों से भारत की जमीनी हकीकत पर, वे कांग्रेस के देदीप्यमान नक्षत्र हैं, कांग्रेस-पोषित देश को उनसे उमीदें भी बहुत है, यकीनन ये कागज की कश्तियां भी बहुत काम आएगी, जिस दिन तुम्हारे शहर में सैलाब आएगा, सैलाब गरीब-गुरबों के आंसुओं का।

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ममता की डि-रेल होती रेल

Posted on 22 June 2010 by admin

ममता बनर्जी इन दिनों अपनी रेल को लेकर सियासी हलकों में खासी डि-रेल चल रही हैं, आने वाले वर्ष के फरवरी माह में पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव संभावी हैं, और ममता के लिए रेल से ज्यादा बंगाल का सियासी खेल महत्वपूर्ण हैं, सो वह चाहती थीं कि तृणमूल कोटे से एक रेल राज्यमंत्री बना दिया जाए जो ममता की अनुपस्थिति में उनका मंत्रालय बतौर ए जूनियर मंत्री ठीक तरह से हेंडिल कर ले, ममता इसके लिए स्वास्थ्य राज्य मंत्री दिनेश त्रिवेदी का नाम लेकर आई थीं, पर इस प्रस्ताव को कांग्रेसी हुक्मरानों ने एक सिरे खारिज कर दिया, इनका कहना है कि घटक दलों के लिए कभी भी ऐसी परिपाटी नहीं बनी कि राज्य व कैबिनेट दोनों ही मंत्रालय उनके सुपुर्द कर दिया जाए।

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मंत्रिमंडल में फेरबदल का खेल

Posted on 22 June 2010 by admin

केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट एक पुता राग पकड़ रही है, संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में फेरबदल मुमकिन है। अजय माकन और जी.के.वासन की कांग्रेस संगठन में वापसी के संकेत मिल रहे हैं। अजय को दिल्ली का प्रभार मिल सकता है और वासन तमिलनाडु कांग्रेस के नए मुखिया घोषित हो सकते हैं। कुछ मंत्री ड्रॉप हो सकते हैं, कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है। बी.के.हांडिक का मंत्रालय बदल सकता है, राजा का मंत्रालय बदल कर उन्हें रंक बनाने की तैयारी है। फारूख अब्दुल्ला अपने वर्तमान पोर्टफोलियो से नाखुश हैं, वो अपना मंत्रालय बदले जाने पर अडिग हैं, वे कश्मीर अफेयर या फिर पर्यटन मांग कर रहे हैं, शायद पर्यटन पर बात बन जाए। क्योंकि यूपीए सरकार ने उन्हें दो टूक बता दिया है कि उन्हें किसी भी सूरते हाल कश्मीर अफेयर नहीं सौंपा जा सकता। चुनांचे फारूक को पर्यटन से ही संतोष करना पड़ सकता है। अभी विदेश मंत्रालय में एस.एम कृष्णा के अधीनस्थ राज्य मंत्री की कुर्सी खाली है, जिस पर कभी शशि थरूर का कब्जा हुआ करता था, इस कुर्सी के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया व सचिन पायलट में घमासान है, कोई भी योध्दा बाजी मार सकता है।

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एंडरसन की रिहाई का सौदा हुआ था

Posted on 22 June 2010 by admin

भोपाल गैस त्रासदी की यादें जैसे चुभन बनकर हर वक्त कांटों का अहसास कराती रहेगी, पर देश के बड़े हुक्मरानों के लिए यह बेहद मामूली सी घटना है। तभी तो हमारे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी (अब दिवंगत) 11 जून 1985 को जब वे अपनी अमरीका यात्रा पर थे तो उन्होंने एक ‘गुडविल जेस्चर’ के तहत अपने बचपन के दोस्त अदिल शहरयार को अमरीका की जेल से छुड़वा लिया था। जिन पर अमरीका में 35 साल की सजा मुकर्रर थी, हैरत की बात देखिए कि यह सब भोपाल गैस कांड के सबसे बड़े मुजरिम वॉरेन एंडरसन की रिहाई के मात्र छह महीने 4 दिन बाद हुआ था। (इस एंडरसन को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मात्र 25 हजार रुपयों के मुचलके पर छोड़ दिया था।) तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने भी तब एक तरह से राजीव गांधी को भाव-भंगिमाओं में समझा दिया था कि बस ऐसी चलती रहनी चाहिए सियासत कि मैं तुहारी पीठ खुजलाऊं और तुम मेरी…यानी एंडरसन के बदले ही शहरयार को छोड़ा गया था, यह भी कोई कहने सुनने की बात थी। और बाद में उसी अदिल शहरयार को राजीव अपने विशेष सरकारी विमान से स्वदेश वापिस लेकर आए। शहरयार के पिता मोहम्मद युनुस गांधी-नेहरू परिवार के सबसे खास लोगों में शुमार होते थे। श्रीमती गांधी ने ही युनुस को अपनी सरकार का घुमंतु एंबेसडर और बाद में ट्रेड फेयर ऑथरिटी का चैयरमैन भी बनाया था। युनुस के बेटे शहरयार ने धोखाधड़ी से फायर एश्योरेंस के पैसे हासिल करने चाहे थे, यानी आग लगे बिना आग का मुआवजा चाहिए था उन्हें, और भोपाल में इतनी भयंकर आग लगी मानवता में कि हजारों घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए, पर कौन देगा मुआवजा…? चुगने वाले तो ऊपर ही ऊपर सारी गर्मी चुग बैठे, हमने जलाई थी आग पर मुट्ठी आई राख!

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तेरा क्या होगा कालिया?

Posted on 08 June 2010 by admin

कभी यह साहब जोशी जी की मुरली मनोहर भाव से बजाया करते थे, जब से भाजपा में गडकरी राज आया है इन्होंने जोड़-तोड़ से गडकरी से भी अपना टांका भिड़ा लिया है, सो भाजपा शासित राज्यों में पहले भी इनका हर काम डंके की चोट पर होता है और अब भी होता है, क्या मजाल जो भाजपा शासित राज्य का कोई भी मुख्यमंत्री चूं-चपड़ कर जाए, इनके पिता फौज में थे कर्नल, अब अमरीका में कहीं रहते हैं, जनाब स्वयं मुंबई में रहते हैं, जहां इन दिनों बीबी से कुछ इस कदर इनकी खटपट चल रही है कि तलाक की नौबत आ पहुंची है, जनाब टेंशन में है, कभी-कभी सुरूर बहक जाते हैं तो भाजपा की जड़ में मट्ठा डालने का आह्वान तक कर डालते हैं और चिल्ला कर कहते हैं कि अब वक्त आ गया है कि भाजपा को विसर्जित कर हिंदू महासभा को पुनर्जीवित किया जाए, इनका यह उद्धोष पार्टी जनों तक पहुंच चुका है और अब सब एक स्वर में बस यही पूछ रहे हैं-‘तेरा क्या होगा कालिया?…सरदार मैंने आपका नमक खाया है…और भी तो कुछ खाया है, वह तो बता!’

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‘वेल्थ’ की लूट है कॉमनवेल्थ

Posted on 08 June 2010 by admin

कॉमनवेल्थ के खेल में ‘वेल्थ’ के लफड़े में कुछ भी कॉमन नहीं है, चंद खास लोगों के इशारे पर चल रहा है तैयारियों का खेल, जाहिर है इस खेल में सियासत के चंद बड़े खिलाड़ी शामिल हैं। ‘लास्ट मिनट कांट्रेक्टर अवार्ड’ यानी टेंपररी नेचर का जो भी काम किसी कंपनी को अवार्ड होता है, उस कमेटी पर सुरेश कलमाड़ी, भनोत और इनके सचिव कोडा का सिक्का चलता है। अभी एक मामूली से काम के लिए जो टेंडर मंगाए गए हैं उसकी एक खास शर्त थी कि वही कंपनी इस टेंडर में भाग ले सकती है जिसे ओलंपिक खेलों में समान सप्लाई करने का तजुर्बा हो, जाहिर सी बात है कि यह एक ऐसी शर्त थी जिसकी आड़ में तमाम भारतीय कंपनियों की छुट्टी कर दी गई, क्योंकि उनके पास कहां से ओलंपिक का अनुभव आता? जिन चार कंपनियों ने इसमें क्वालिफाई किया है उसमें से एक कंपनी स्पेन की है और दूसरी हांगकांग की, दिलचस्प तो यह कि इस हांगकांग की कंपनी का भारतीय प्रतिनिधि भाजपा के एक शीर्ष नेता है जिनकी कांग्रेस में भी उतनी ही पहुंच है, भाजपा में चाहे उनकी छवि लाख विवादास्पद हो पर कांग्रेस में उन्हें क्लीनचिट  मिली हुई है। सूत्र बताते हैं कि कायदे से यह सारा काम 150 करोड़ रुपयों से ज्यादा का नहीं, पर शह-मात के उस्ताद बाजीगरों ने अपनी बिसात कुछ ऐसी बिछाई है कि यह बोली 600 करोड़ रुपयों तक पहुंच सकती है। ऑफिस के लिए महज दो महीनों के लिए जो व्यावसायिक जगह किराए पर ली जा रही हैं उसकी कीमत बाजार भाव से लगभग पांच गुनी है, जिस किराए पर कुर्सी-टेबुल लिए जा रहे हैं अगर उसकी खरीद भी हो तो कमेटी को इससे आधे से कम पैसे खर्च करने होंगे। मसला बड़ा है, पैसा भी और इससे जुड़े सियासतदां भी, तो आम जनता अपनी मामूली सी अंगुली उठाए भी तो किस पर… हम्माम में सब नंगे हैं।

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राजा को रंक बनाएगी कांग्रेस

Posted on 08 June 2010 by admin

यूपीए सरकार के एक अपने ही कैबिनेट मंत्री को राजा से रंक बनाने की तैयारियों में जुटी है कांग्रेस और इस पूरी कांग्रेसी मुहिम को हवा दे रहे हैं देश के एक बड़े उद्योगपति, जिनका टेलीकॉम ब्रांड हवाओं से बतकही करता है। यह औद्योगिक घराना चाहता है कि या तो ए.राजा को मनमोहन मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाए अथवा इनका विभाग बदला जाए, राजनैतिक हलकों और मीडिया में भी बेहद आहिस्ते से यही खबर प्लांट की जा रही है कि अगर राजा नहीं गए तो कम से कम उनका विभाग तो जरूर ही बदला जाएगा, प्रधानमंत्री ने यह कहकर इन संभावनाओं को और पर लगा दिए हैं कि इस मामले की तफ्तीश सीबीआई के हवाले कर दी गई है। विश्वस्त सूत्रों की माने तो सीबीआई राजा केस में जल्द ही यह कहने वाली है कि इस पूरे मामले में पहली नजर में ही ‘प्राइमा फेसी केस’ बनता है यानी आने वाले दिन यूपीए के घटक दल द्रमुक व उसके कोटे के मंत्री ए.राजा के लिए मुश्किलों भरे हो सकते हैं, क्या काले चश्मे वाले बाबा यह सब सुन रहे हैं?

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विजेंद्र का ऐसे लगा नंबर

Posted on 28 May 2010 by admin

दिल्ली में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में निगम ब्रांड नेता विजेंद्र गुप्ता ने ऐन वक्त बाजी मार ली वरना एक वक्त तो ऐसा लग रहा था कि वे किशन सिंघल से पिछड़ कर अध्यक्षीय दौड़ से बाहर हो चुके हैं। कहा जा रहा है पार्टी के सीनियर नेताओं की बैठक में सिंघल का नाम आम राय से तय हो चुका था और इसके बाद इस अभियान की प्रणेता सुषमा स्वराज दिल्ली से बाहर चली गईं। इसके बाद गुप्ता भागे-भागे जेतली की शरण में पहुंचे और जेतली गुप्ता को लेकर गडकरी के पास पहुंचे और जहां अनंत कुमार की मौजूदगी में सिंघल का पत्ता काट कर गुप्ता जी का नाम आगे कर दिया गया। चूंकि जेतली पहले ही गुप्ता के नाम पर अडवानी की सहमति ले आए थे, सो दिल्ली के अधिकांश भाजपा विधायकों का विरोध बेकार गया जो किसी भी शर्त पर गुप्ता के नाम पर नहीं मान रहे थे। यूं भी 1500 करोड़ के मामले को लेकर जेतली का अध्यक्ष जी पर बहुत अहसान है सो उनकी बात को अनसुनी करने का साहस वे नहीं दिखा पाए।

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चलो छुट्टियां मनाएं

Posted on 28 May 2010 by admin

दिल्ली में पारा लगातार चढ़ रहा है चुनांचे पक्ष-विपक्ष के बड़े नेताओं का राजधानी से बाहर जाने का सिलसिला लगातार बना हुआ है, यूपीए की सिरमौर सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और रॉबर्ट बढेरा (इनके बच्चे भी) गर्मियों की छुट्टियों में शिमला जा रहे हैं, राहुल विदेश जा रहे हैं तो राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष अरुण जेतली स्पेन के मेंड्रिड जा रहे हैं और बिचारी जनता दिल्ली की सड़कों पर पसीना बहा रही है।

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बाहर हैं पवार

Posted on 28 May 2010 by admin

यूपीए-2 की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री जी का बड़ा डिनर है, उस डिनर में राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की गैर मौजूदगी सबको खलने वाली है, ऐसा कोई पवार की नाराजगी की वजह से नहीं है कि वे डिनर में शामिल नहीं हो रहे हैं, दरअसल पवार इन दिनों गर्मियों की छुट्टियों में अपने हर दिल अजीज विजय माल्या के साथ साऊथ फ्रांस में छुट्टियां मना रहे हैं। प्रधानमंत्री के डिनर में पवार की नुमांइदगी प्रफुल्ल पटेल कर रहे हैं जो कांग्रेस व दस जनपथ का साथ पाकर यूं ही प्रफुल्लित हो जाया करते हैं।

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