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मेड इन गांधी

Posted on 21 July 2010 by admin

राहुल गांधी का मेन फोकस अब यूपी हो गया है। उनके सलाहकारों की पूरी एक पेड मंडली यूपी को लेकर खासी सक्रिय है। इस पेड थिंक टैंक के लोगों को भारी-भरकम तनख्वाह मिलती है, क्योंकि इसमें से कोई आइआइटी का पूर्व छात्र है तो कोई बड़े मैनेजमेंट संस्थान से डिग्री हासिल करके आया है, इनमें से ज्यादातर लोगों की तनख्वाह एक लाख से तीन लाख रुपए मासिक है, इनकी तनख्वाह का भुगतान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से होता है। यह टीम राहुल की दिव्य दृष्टि को अपने कंप्युटरीकृत विजन में उतारती है, और युवराज के नव महत्वाकांक्षाओं को आगाज देने के लिए वक्त वक्त पर सर्वेक्षण आदि का कार्य भी करती है, बाद में अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाती है और इस रिपोर्ट पर अपनी अंतिम सहमति की मुहर इन दिनों राहुल के खासमखास सुमन दुबे लगाते हैं, और कहीं कुछ त्रुटि रह गई तो फिर युवराज सबकी क्लास लगाते हैं।

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उतरेगा संघ का रंग

Posted on 21 July 2010 by admin

कुछ अर्से पहले इसी कॉलम में जब सर्व प्रथम यह सत्य उद्धाटित हुआ कि केंद्र में सत्तारूढ़ एक प्रमुख दल के इशारे पर संघ के कुछ प्रमुख नेताओं पर न सिर्फ नजर रखी जा रही है, अपितु थोकभाव में संघ-नेताओं के फोन टेप किए जा रहे हैं तो सियासत के चंद रंगे सियारों ने और प्रायोजित मीडिया के चंद लंबरदारों ने आसमान सिर पर उठा लिया था, पर अब इस खबर की सच्चाई से परदा उठने का वक्त आ पहुंचा है। सीबीआई के करीबी सूत्रों से मिली जानकारियों के मुताबिक कथित हिंदू आतंकवाद के नवजात लहजे पर शिकंजा कसने के लिए तमाम सरकारी एजेंसियों ने कमर कस ली है, सबसे पहले संघ व उसके अनुषांगिक संगठनों से जुड़े दर्जनों नेताओं पर नजर रखी गई, उनके फोन टेप किए गए और उससे मिली जानकारियों के आधार पर कोई 4 दर्जन हिंदूवादी नेताओं से पूछताछ हुई, दरअसल सीबीआई संघ नेताओं के उस बयान के बाद ही सक्रिय हो गई थी जब इस्लामी आतंकवाद को आड़े हाथों लेते हुए इन्होंने कहा था-‘हम चुप नहीं बैठेंगे, हर बात की प्रतिक्रिया होती है।’ सुनील जोशी, जिनकी हाल में ही हत्या हो गई उस पर नजर रख सीबीआई ने कई अहम सुराग इकट्ठे किए, उसके बाद ही सीबीआई संघ के एक प्रमुख नेता इंद्रेश कुमार तक जा पहुंची। संघ के एक अन्य प्रमुख शीर्ष नेता सीबीआई के निशाने पर हैं। देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्वयं इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर रख रहे हैं, यानी आने वाले दिनों में इकट्ठे 35-40 हिंदूवादी नेताओं को गिरफ्तार किया जा सकता है, सीबीआई उन पर देश के अलग-अलग अदालतों में मुकदमे डालेगी ताकि समवेत विरोध के स्वर को दबोचा जा सके।

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राहुल का फुटबॉल प्रेम

Posted on 11 July 2010 by admin

जब पूरी दुनिया फुटबॉल यानी फीफा के बुखार में डूबी हो तो हमारे कांग्रेसी युवराज भला कैसे इससे अछूता रह पाते। अपने कुछ खास मित्रों, अपने जीजा रॉबर्ट वढेरा और भांजे दस वर्षीय रेहान के साथ राहुल गांधी जर्मनी-स्पेन के बीच हुए सेमीफाइनल मुकाबले से एक रोज पहले साउथ अफ्रीका जा पहुंचे। उन्होंने जर्मनी-स्पेन सेमीफाइनल का जमकर लुत्फ उठाया और वे शनिवार को जर्मनी-उरुग्वे तथा रविवार को स्पेन-नीदरलैंड फाइनल के बाद ही स्वदेश लौटेंगे। और भारत वापसी के तुरंत बाद अपने यूपी के प्रस्तावित दौरों पर निकल जाएंगे। क्योंकि उन्हें दे-दनादन कई सियासी गोल जो दागने हैं।

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वह रूसी नेता कौन?

Posted on 11 July 2010 by admin

जब लात्विया के क्रू-मेंबर व पीटर ब्लीच पश्चिम बंगाल की जेल में बंद थे और जब इन छहों पर ट्रॉयल चल रहा होता है तो रूस के एक हाई-प्रोफाइल राजनेता का अडवानी (जो उस वक्त गृह मंत्री थे)को मैसेज आता है कि चूंकि इन लात्विया के पांचों नागरिकों ने रूस की नागरिकता हासिल कर ली है, चुनांचे उन्हें रूस को वापिस कर दिया जाए। अडवानी ने इनको छोड़ने की एवज में क्या शर्त रखी? नहीं मालूम, पर जुलाई 2000 में इन पांचों को छोड़ दिया गया। फिर ब्रिटिश सरकार का दबाव आता है कि पीटर ब्लीच एक ब्रिटिश इंटेलीजेंस का अधिकारी है, सो उन्हें छोड़ा जाए, फिर राष्ट्रपति से इसके माफीनामे पर हस्ताक्षर कर उसे भी फरवरी 2004 को छोड़ दिया जाता है। वाह रे देश के कर्णधार, इतने बड़े-बड़े फैसले आनन-फानन में ले लिए जाते हैं पर देश इन बातों से अनजान रहता है।

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लाल से चंद जरूरी सवाल

Posted on 11 July 2010 by admin

बेशक महाशय गडकरी किंचित हड़बड़ी में अफजल गुरु को कांग्रेस का दामाद बता गए हों, पर भाजपा की बारात में जब दूल्हे राजा अडवानी देश के गृह मंत्री थे तो उनसे एक के बाद एक कई भयंकर भूलें हुई थीं, देश को आज तक उन सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं। लोग भूले नहीं होंगे जब 17 दिसंबर 1995 को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एएन-26 रूसी विमान से 4.5 टन हथियार जिसमें कितनी एके 47 राइफल, राकेट लांचर व कारतूस गिराए गए और ये किसके लिए थे? देश को इस बात का जवाब आज भी नहीं मिल पाया है। जब हमारे वायुसेना के मिग-21 विमान ने रूसी जहाज को घेर कर मुंबई में उतरने को बाध्य कर दिया तो इस विमान में बतौर क्रू-मेंबर 5 लात्विया के नागरिक थे, एक ब्रिटिश पीटर ब्लीच था और इस पूरे अभियान का मास्टर माइंड किम डेवी ऊर्फ नेल्स क्रिश्टियन नेल्सन था। जब मुंबई में इन लोगों से हमारी खुफिया एजेंसियां पूछताछ कर ही रही थीं तो किम डेवी अपना नकली पासपोर्ट और कुछ डॉलर लेकर वहां से काठमांडू भागने में कामयाब हो गया और काठमांडू से वह डेनमार्क भाग गया। भारत को भी किम डेवी के बारे में तब पता चला जब अप्रैल 2010 में उसे कोपेनहेगन में गिरफ्तार किया गया, तब हमारे गृह सचिव का बयान आया कि प्रत्यर्पण संधि के तहत डेवी को डेनमार्क से भारत लाया जाएगा, पर बाद में यूपीए सरकार ने भी इस बात पर चुप्पी साध ली। जबकि पहले ही यह अहम राज बेपर्दा हो चुका था कि डेवी के कुछ भारतीय राजनेताओं और अंडरवर्ल्ड के साथ गहरे रिश्ते थे। सवाल अहम है कि डेवी को बचाना कौन चाहता है?

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डायरेक्ट टू अमरीका

Posted on 05 July 2010 by admin

याद कीजिए जब एम.के.नारायणन देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हुआ करते थे तो क्या जलवा था उनका, प्रधानमंत्री से लेकर सोनिया गांधी तक को सीधे रिपोर्ट करते थे, ‘आईबी’ और ‘रॉ’ चीफ को भी तलब कर लेते थे, तीनों सेनाध्यक्षों से मिल कर भी उनकी रिपोर्ट ले लिया करते थे। पर जब से नए एनएसए ने पद भार संभाला है वे ‘न्यूक्लियर साइंटिफिक एडवाइजर’ बन कर रह गए हैं, हां वे ‘न्यूक्लियर एक्सपर्ट’ में जरूर शुमार होने लगे हैं और ये जब चाहे अमरीका के एनएसए से सीधे मिल लिया करते हैं, बतिया लिया करते हैं, यही मात्र उपलब्धि रह गई है इनकी।

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जिला का सियासी किला

Posted on 05 July 2010 by admin

अमेठी को जिला बनाने का मूल प्रस्ताव कांग्रेस का ही था, पर बहिनजी ने वक्त रहते सियासी धमाल मचा दिया, कांग्रेस इस नवगठित जिला का नाम ‘राजीव नगर’ रखना चाहती थी, पर बहिनजी ने आगे आकर कहा कि राजीव गांधी के नाम पर पहले से ही इतना कुछ है, सो उन्होंने अपना दलित दांव चलते हुए इस नए जिला का नाम छत्रपति शाहूजी महाराज नगर रख दिया। यानी बहिनजी ने कांग्रेस को बताना चाहा है कि इस सियासी शह-मात के खेल में कांग्रेस उन्हें कमजोर न समझें।

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अंबानी की प्रेम कहानी

Posted on 05 July 2010 by admin

मुकेश अंबानी और नीता अंबानी जब अपने प्राइवेट बोईंग बिजनेस जेट-2 में उड़ान भर रहे थे, तो यूं अचानक मौसम का मिजाज बिगड़ गया, एक ‘एयर पॉकेट’ में फंसकर इनका विमान तेज हिचकोले खा गया, यह अंबानी दंपत्ति के डिनर का वक्त था, ‘टर्बुलेंस’ इस कदर अचानक आया था कि खाने से भरी प्लेट नीता के हाथों से छूटकर उनके महंगे कपड़ों पर जा गिरी, अपने कपड़ों और अपने महंगी प्लेट का यह हश्र देखकर नीता की आंखें भर आईं, अपनी पत्नी की आंखों में यूं बेवजह के आंसू भला कैसे देख सकता था विश्व का पाचवें नंबर का सबसे अमीर आदमी, सो अपना पहला गुस्सा तो मुकेश भाई ने पायलट पर उतारा और उन्हें झिड़कने के बाद, उन्होंने डिजाइनर क्राकरी बनाने वाली विदेशी कंपनी ‘रोसन थाल’ को फोन लगा दिया और उन्होंने कंपनी से जानना चाहा कि क्या वे ऐसा बर्तन डिजाइन नहीं कर सकते जो खराब से खराब परिस्थितियों में भी पलटे नहीं, बहरहाल ‘प्रॉन्टो रोसन थाल’ की एक पूरी टीम ऐसी क्राकरी के इजाद में जुटी है जो लाख विषम परिस्थतियों में भी पलटे नहीं, अब भला विश्व के 5वें सबसे अमीर आदमी को नाराज करने का जोखिम कौन उठा सकता है और खासकर ऐसे में जब यह मसला उनकी प्रियतमा से जुड़ा हो।

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नीतीश की नीयत

Posted on 28 June 2010 by admin

नीतीश कुमार का दंभ है कि टूटता नहीं, और भाजपा की जाने क्या मजबूरी है कि लाख उलाहने सहने के बावजूद भी वह नीतीश के इशारों पर नाचने को हरवक्त तैयार रहती है। कहीं ऐसा भाजपा के चंद बड़े नेताओं का नीतीश के साथ लाभ-हानि वाला कोई निजी गठजोड़ तो नहीं? हालिया मोदी मुद्दे के बाद भी भगवा पार्टी साफ तौर पर दो खेमों में बंटी नजर आई, दिल्ली में बैठे मोदी-विरोधी तमाम नेताओं का आग्रह बस इसी बात को लेकर था कि चाहे जो हो नीतीश-भाजपा का गठजोड़ टूटना नहीं चाहिए, इस राय के अडवानी, सुषमा, जेतली सभी बड़े नेतागण थे। पर जैसा कि नया मुल्ला प्याज बहुत खाता है, सो खुद को सेक्युलर दिखाने की रौ में नीतीश कहीं आगे तक जा सकते हैं, अभी नीतीश ने अपने एक पसंदीदा अखबार समूह से बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एक जनमत सर्वेक्षण करवाया है, जिसके मुताबिक अगर नीतीश भाजपा के बगैर अकेले चुनाव में जाते हैं तो उनकी पार्टी को कहीं ज्यादा सीटें हासिल हो सकती है, जाहिर है यह सर्वे और मंतव्य दोनों ही प्रायोजित हो सकते हैं, मगर नीतीश की नीयत? उनसे जुड़े सूत्र बताते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव से डेढ़ माह पूर्व नीतीश भाजपा को अलविदा कह ‘एकला चलो’ के मार्ग पर चल सकते हैं, तब तक वे मोदी के बहाने भाजपा का अच्छा खासा जुलूस निकाल चुके होंगे, मोदी और नीतीश में चाहे जितना भी विरोधाभास हो एक समानता जरूर है, दोनों ने ही प्रधानमंत्री पद का मुगालता पाला हुआ है, जब महत्वाकांक्षाएं इतनी उद्दात और विषम होती हैं तो ऐसे में सियासी परिधियां अक्सरां छोटी पड़ जाया करती हैं।

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चिदंबरम पर गरम मैडम

Posted on 28 June 2010 by admin

केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम जब इस दफे अपनी पाकिस्तान यात्रा पर जा रहे थे, तो अखबार-चैनलों के संपादकों को अपनी आदत के विपरीत स्वयं फोन कर उनसे अनुरोध किया कि वे चाहें तो उनके साथ अपना कोई रिपोर्टर पाकिस्तान भेज सकते हैं। जब यह बात निरूपमा राव को पता चला तो वो भुनभुनाती हुई सीधे विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा के पास पहुंची और किंचित सत लहजे में अपना ऐतराज दर्ज कराया, कृष्णा ने मैडम राव से कहा कि वे चाहकर भी अपने कैबिनेट साथी (चिदंबरम)को इस बारे में कोई निर्देश नहीं दे सकते सो बेहतर होगा कि आप यह बात सीधे प्रधानमंत्री को बताएं। तब मैडम राव पीएम के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचीं तो प्रधानमंत्री ने बीच-बचाव का रास्ता निकालते हुए निरूपमा को सलाह दी कि क्यों नहीं वे संपादकों को फोन कर यह कह देती हैं कि गृह मंत्री का दौरा इतना भी महत्वपूर्ण नहीं कि आप उनके साथ अपना रिपोर्टर लगवाएं, पर मैडम राव की इन तमाम उहापोह के बावजूद उनके विरोध को नजर अंदाज करते पीसी अपने साथ पत्रकारों का एक बड़ा दल लेकर पाकिस्तान पहुंचे।

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