Archive | मुख्य

पीसी के दिन गिनती के

Posted on 05 September 2010 by admin

‘…मर जाता है रोज कोई मेरा जीना दूभर है और वक्त चुरा कर ले जाएगा ये जो तबस्सुम लब पर है।’ देश के मौजूदा हालात का लगता है यही हकीकत बयानी है, नक्सलियों व माओवादियों का तांडव चरम पर है, कश्मीर में बात बिगड़ती जा रही है, देश में कानून व्यवस्था की स्थिति लचर हुई जाती है, तो ऐसे में अपने प्रो-एक्टिव गृह मंत्री का जाना बनता है भाई, यूं बिलावजह उलझे हैं ‘भगवा आतंक’ की परिभाषाओं में और दस जनपथ व राहुल के वफादार उन्हें डपट रहे हैं, वह भी बड़े कायदे से। पी.चिदंबरम से राहुल गांधी बेतरह नाराज हैं, एक तो चिदंबरम के प्रति राहुल वफादार दिग्विजय सिंह की भाव-भंगिमाएं देख लीजिए, दूसरा अभी हालिया दिनों में राहुल ने गृह मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति से अपना नाम हटवा लिया है और वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की स्टेंडिंग कमेटी के मेंबर हो गए हैं। यानी आने वाले दिन पी.सी. के लिए मुश्किलों भरे हो सकते हैं, पार्टी व पार्टी के बाहर।

Comments Off on पीसी के दिन गिनती के

सुषमा-सोनिया की गुफ्तगू

Posted on 05 September 2010 by admin

संसद के मानसून सत्र का वह आखिरी दिन था, चुनांचे जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने यूपीए चैयरपर्सन सोनिया गांधी से मिलने के वास्ते चिट भेजी तो यूं आनन-फानन में बुलावा आ गया। लगता है रिश्तों की उन पुरानी कड़वाहट को इन दोनों नेत्रियों ने भुलाने की ठान ली है, वरना आधे घंटे से भी ज्यादा ये दोनों नेत्रियां आपस में क्या बतियाती रहीं? राजनीति? बिलकुल नहीं! अनौपचारिक-सी बातें थी, घर-परिवार के हाल-चाल। सोनिया ने बताया कि उनकी 86 वर्षीया मां अब ठीक हैं, स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं, और उनकी (सोनिया की) दोनों बहनें मां के पास ही रह कर उनकी सेवा-सुश्रुषा में लगी हैं। सोनिया ने यह भी बताया कि अपनी तीन बहनों में वह मझौली हैं, यानी एक बहन उनसे बड़ी हैं और एक उनसे छोटी। सोनिया सुषमा रिश्तों की नई अकुलाहट है यह।

Comments Off on सुषमा-सोनिया की गुफ्तगू

भाजपा का नया एजेंडा

Posted on 29 August 2010 by admin

भाजपा और नवीन पटनायक की आपसी खींचतान व उठा-पटक की शिकार हो गई वेदांता। जिस तरह नवीन ने भाजपा को विगत दिनों में कई बार अंगूठा दिखाया है, मसलन ओड़ीसा विधानसभा चुनाव में भाजपा को छिटक देना, संसद में भगवा पार्टी को सपोर्ट नहीं करना, सो ऐसे में भाजपा ने भी तय कर लिया था कि किसी भी सूरते हाल नवीन को सपोर्ट नहीं करना है। भाजपा ने नीतिगत रूप से यह भी फैसला लिया है कि जो एनडीए में शामिल दल हैं, जैसे जद(यू), शिवसेना या अकाली दल भाजपा संसद में उन्हें उनके जरूरी राजनैतिक मुद्दों पर सपोर्ट करेगी, पर जो दल अपने निजी स्वार्थ में भाजपा का दामन झटक कर चले गए थे (मसलन तेदेपा, बीजद, अन्नाद्रमुक) ऐसे दलों को भगवा पार्टी संसद में अकेला छोड़ देगी।

Comments Off on भाजपा का नया एजेंडा

मोदी पर नई मुसीबत

Posted on 29 August 2010 by admin

आईपीएल के बर्खास्त कमिश्नर ललित मोदी पर शिकंजा कसने के लिए बीसीसीआई नई जुगत भिड़ा रही है। बीसीसीआई का मानना है कि ललित मोदी की सांठ-गांठ कुछ बड़े सटोरियों से थी, बीसीसीआई मोदी व सट्टेबाजों के इसी कनेक्शन का पता लगाने में जुटी है और साथ ही इस पहलू का भी अध्ययन कर रही है कि आखिर मोदी क्यों बार-बार कह रहे हैं कि उन्हें अंडरवर्ल्ड से अपनी जान का खतरा है, क्या इस मामले का भी कोई ‘सट्टेबाजी एंगल’ है? बीसीसीआई को यह सवाल भी बारंबार साल रहा है कि आखिर मोदी ने क्यों आईपीएल के प्रारंभिक 2 वर्षों में आईसीसी की एंटी-करप्शन यूनिट की सेवाएं नहीं ली? क्यों उन्होंने कुछ स्थानीय एजेंसियों की सेवाएं ले ली, जिन्हें इस कार्य का कोई पूर्व अनुभव नहीं था? जांच से भयभीत मोदी लंदन, अन्य यूरोपीय देशों तथा साउथ अफ्रीका का चक्कर तो लगा रहे हैं पर भारत आने से बच रहे हैं। जो लोग भारत में ललित मोदी के लिए जोरदार लॉबिंग में जुटे हैं उनमें अंकुर चावला और आरिफ मोहम्मद खां के साले एजाज का नाम लिया जा रहा है। एजाज सलमान खुर्शीद के करीबियों में भी शुमार होते हैं।

Comments Off on मोदी पर नई मुसीबत

नेता पुत्र-पुत्रियों का बोलबाला है यूथ कांग्रेस में

Posted on 29 August 2010 by admin

कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी पार्टी की सूरत और सीरत बदलने हेतु काफी लंबे समय से प्रयत्नशील हैं, राहुल चाहते हैं कि कांग्रेस आमजनों की पार्टी में शुमार हो, पर राहुल भी क्या करें जिस थोक भाव में नेता पुत्र-पुत्रियों की एक बड़ी फौज ने पार्टी के महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर दृष्टि लगा रखी है और हौले-हौले कब्जा जमाना शुरू किया है, राहुल की नजर में यह ‘अलार्मिंग’ है। यहां तक कि कांग्रेस की युवा जमात ‘यूथ कांग्रेस’ पर भी ऐसे ही राजनैतिक परिवारों का वर्चस्व छाता जा रहा है। दिग्विजय सिंह के पुत्र अभी हालिया दिनों में यूथ कांग्रेस के मार्फत ही सियासत के मैदान में उतर आए हैं, इसके अलावा महाराष्ट्र के हैवीवेट नेताओं के पुत्र-पुत्रियों रिश्तेदारों ने तो यूथ कांग्रेस पर जैसे कब्जा ही जमा रखा है। विलास राव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे, पतंग राव कदम, नारायण राणे के पुत्र-पुत्रियां यूथ कांग्रेस के विभिन्न पदों पर काबिज हैं। अन्य प्रदेशों में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है सो ऐसे में दरी बिछाने वाले कार्यकर्ताओं की सुध कौन लेगा? यही तो राहुल की चिंता है।

Comments (2)

कलराज के राज

Posted on 22 August 2010 by admin

भाजपा का ग्रामीण चेहरा भले ही इन दिनों पार्टी में अपनी कथित उपेक्षा से नाराज हों, पर राजनाथ ने यूपी के मामलों में अपनी सक्रियता बरकरार रखी है, और यूपी में हालिया गठित हुए पार्टी पदाधिकारियों की टीम में अपने पुत्र पंकज सिंह को भी रखवाने में कामयाब रहे हैं। लगे हाथ राजनाथ पार्टी में अपने चिरंतन विरोधियों की ओर भी दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं। अब राजनाथ चाहते हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र को पार्टी के ‘सीएम पोस्ट’ का उम्मीदवार प्रोजेक्ट किया जाए। इसके लिए बकायदा राजनाथ ने अपने संसदीय क्षेत्र गाजियाबाद में कलराज मिश्र के लिए एक अभिनंदन समारोह भी रखवाया और उस अभिनंदन समारोह में उन्होंने मिश्र की तारीफों के पुल बांध दिए, और बोलते-बोलते सचमुच भावुक भी हो गए ठाकुर नेता ने खम्म ठोंककर कहा-‘जब मैं अपनी आत्मकथा लिखूंगा, तो उसमें सबसे ज्यादा जिक्र कलराज जी का ही होगा कि कैसे उन्होंने मुझे राजनीति में सदैव आगे बढ़ाया है…।’ जब कलराज मिश्र की बोलने की बारी आई तो उन्होंने अपने खास पलटवार अंदाज में इस बात की पुष्टि की और कहा-‘जब ये (राजनाथ) मोहना का चुनाव हार गए थे, तो तब मैं इनके घर गया था और वहां बड़ा दुख का माहौल था, तब मैंने कल्याण सिंह से बात की और उनसे कहा कि राजनाथ जी को राज्यसभा में भेज दो, पर कल्याण ने अपने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि हारे हुए को नहीं भेजा जा सकता। तब मैंने सीधे अडवानी जी से बात की और उन्हें बताया कि राजनाथ जी को राज्यसभा देना क्यों जरूरी है? अडवानी जी मान गए और इन्हें (राजनाथ को) पहली बार राज्यसभा मिली। अब इसका निर्णय तो बेहतर आप कर सकते हैं कि कलराज की बातों में दोस्ती का दंभ था या प्रतिद्वंद्विता का दंश!

Comments Off on कलराज के राज

भाजपा में जासूस

Posted on 22 August 2010 by admin

क्या भाजपा में सब ठीक-ठाक चल रहा है? नहीं तो क्या कारण है कि पार्टी मुखिया ने खुफिया विभाग के एक रिटायर्ड अधिकारी को छह लाख रुपए की मासिक तनख्वाह में नौकरी पर रख लिया है। पर इसके नतीजे भी आनन-फानन में दिखने लगे हैं, पार्टी के कई ‘ऑफ द् ब्रीफिंग’ सरताज पत्रकारों से अब कतराने लगे हैं, पार्टी की किसी अहम मीटिंग के बाद भी बड़े भगवा नेता पत्रकारों से, यहां तक कि नियमित ‘बीट’ कवर करने वाले रिपोर्टर से भी छिटकने लगे हैं, बीजेपी बीट देखने वाले पत्रकारों की मुसीबत हो गई है कि न सिर्फ भगवा नेता उनसे मिलने कतराते हैं, अपितु फोन पर बतियाने से भी घबराते हैं, क्योंकि यह मोटी तनख्वाह प्राप्त जासूस नेताओं व पत्रकारों के फोन डिटेल्स आसानी से फोन कंपनियों से निकाल ले रहे हैं और इसके आधार पर पार्टी प्रमुख को यह रिपोर्ट पेश कर रहे हैं कि किस बड़े नेता की किस पत्रकार से कितनी देर बात हुई। क्या फलां मीटिंग खत्म होते ही किसी नेता ने किसी पत्रकार से फोन पर बतियाया था। यानी भगवा पार्टी में सर्वत्र हड़कंप का आलम है और बोलने-बतियाने की आजादी पर सचमुच का ग्रहण लगा हुआ है।

Comments (1)

जाके राखो चाको ! बोल सके न कोए !

Posted on 22 August 2010 by admin

भारतीय संसद के इतिहास में शायद यह पहला मौका होगा जब प्रमुख विपक्षी दल सदन के किसी पीठासीन अधिकारी का बहिष्कार कर दे। लोकसभा के ‘पैनल ऑफ चैयरपर्सन’ में वरिष्ठ नेता पी.सी.चाको भी शुमार हैं, पर पिछले रोज भाजपा चाको के रवैए से इस कदर व्यथित हुई है कि उसने तय कर लिया है कि जब भी सदन की कमान चाको के पास आएगी भाजपा सांसद सदन का बॉयकाट करेंगे। मामला कुछ यूं है कि जब दो रोज पूर्व सदन में अवैध खनन पर बहस चल रही थी, तो कांग्रेस के लिए निर्धारित कोटे का समय समाप्त हो चुका था, बावजूद इसके चाको ने (जो तब सदन की अध्यक्षता कर रहे थे)कांग्रेस के लाल सिंह को बोलने का मौका दे दिया। इससे पहले सदन में अप्रत्याशित तौर पर तीन सांसदों वाली पार्टी जेडी(एस)के देवेगौड़ा को भी एक घंटे बोलने का वक्त मिल गया। इसी मुद्दे पर जब भाजपा के अनंत कुमार बोल रहे थे तो तत्कालीन चैयरपर्सन थम्बीदुराई ने उनसे साफ कर दिया था कि वे अपनी बहस में किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं ले सकते और न ही उस पर आरोप मढ़ सकते हैं, तब अनंत मान गए थे। लेकिन जैसे ही लाल सिंह बोलने के लिए खड़े हुए उन्होंने कर्नाटक के येदुरप्पा सरकार में मंत्री रेड्डी बंधुओं पर सीधा हल्ला बोल दिया। लाल सिंह का कहना है कि जब सोनिया गांधी बेल्लारी से चुनाव लड़ रही थी तो उनकी मुखालफत के लिए रेड्डी बंधुओं को अकूत धन किसने दिया था? जब लाल सिंह सदन में गुस्से से यूं लाल-पीले हो रहे थे तो बेल्लारी से भाजपा सांसद शांता ने खड़े होकर विरोध दर्ज कराया और कहा कि माननीय सांसद को कोई अधिकार नहीं है कि वे बगैर सबूत किसी को ‘चोर’ कहें, इस पर लाल सिंह भड़क गए, बोले-‘तुम चुप रहो, तुम्हें भी माल चढ़ा हुआ है’ इस पर एकबारगी पूरा सदन भौच्चक रह गया, इसके बाद शांता सीधे स्पीकर के चैंबर में चली गई और उन्होंने मीरा कुमार की समक्ष अपनी बातें रखीं, भाजपा इस बात से व्यथित थी कि चाको ने लाल सिंह को ऐसे अपशब्द बोलने से रोका क्यों नहीं? जबकि वे चेयर पर थे, (इसमें से कई बातें तो संसद के रिकार्ड में भी दर्ज है) सो भाजपा ने चाको के बहिष्कार का निर्णय ले लिया।

Comments (1)

…और अंत में

Posted on 15 August 2010 by admin

ललित मोदी एक नई मुश्किल में फंसते नजर आ रहे हैं, उन्होंने आईपीएल-2 के दौरान साउथ अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड के तीन अधिकारियों को बोनस के नाम पर एक मोटी रकम अदा की थी, कोई तीन करोड़ रुपए, इन तीन लाभांवित लोगों की सूची में बोर्ड के सीईओ जेरॉल्ड मजोला भी शामिल है। अब यह पैसा वापिस किया जा रहा है, पर लगता है वापसी में देर हो गई है, क्योंकि इसमें फेरा का मामला बनता है। यानी नई मुसीबतों में फंसते नजर आ रहे हैं ललित मोदी।

Comments Off on …और अंत में

शुक्ला की डिनर-डिप्लोमेसी

Posted on 15 August 2010 by admin

संसद में रोज-बेरोज बढ़ते कोहराम पर पानी डालने के उद्देश्य से कांग्रेस ने डिनर डिप्लोमेसी को अपना नया हथियार बनाया है। चूंकि कांग्रेस राज्यसभा में अब भी अल्पमत में है, चुनांचे इस डिनर को होस्ट किया सियासत के एक नए खिलाड़ी बन कर उभरे राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने, शुक्ला जी ने यह भव्य डिनर लोदी रोड स्थित अपने सरकारी निवास के सामने के पार्क में दिया। उस रोज दिल्ली बारिश से बेतरह नहाई हुई थी। पर उस डिनर में उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री समेत मनमोहन कैबिनेट के अधिकांश मंत्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीशों के अलावा अहमद पटेल, मोतीलाल वोरा, मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी डिनर में मौजूद थे। प्रमुख विपक्षी नेताओं में मुलायम सिंह यादव, अरुण जेतली, रामविलास पासवान, अजीत सिंह, कानीमोझी, सुप्रिया सुले शुमार थे। इसके अलावा बसपा, सपा, जद (यू), भाजपा, डीएमके, अन्नाद्रमुक, तेदेपा आदि दलों के सांसद भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। यानी विपक्षी दलों के साथ संबंधों में जम गई बर्फ को इस डिनर डिप्लोमेसी के गर्मजोशी कितना पिघला पाई है इसका अंदाजा तो आने वाले दिनों संसद में होगा।

Comments Off on शुक्ला की डिनर-डिप्लोमेसी

Download
GossipGuru App
Now!!