Posted on 14 November 2010 by admin
शुक्रवार की रात्रि को पवन बंसल ने पत्रकारों को एक एक डिनर दिया। इस डिनर में बंसल के अलावा महज प्रणब मुखर्जी और राजीव शुक्ला मौजूद थे। पत्रकारों ने दादा को 2जी स्पैक्ट्रम पर घेरा हुआ था, पर दादा शांत थे, कुछ भी बोलने को अनिच्छुक। वैसे भी पत्रकारगण दादा के गुस्से से बेहद खौफ खाते हैं, अगर दादा किसी सवाल पर नाराज हो गए तो किसी भी पत्रकार को ‘शटअप’ कहने में एक पल की देर नहीं लगाते। पर बंसल ने जिस प्रकार राजीव शुक्ला को न्यौता भेजा उससे फिर से यह कयास लगने लगे हैं कि राजीव शुक्ला देश के अगले संसदीय राज्यमंत्री हो सकते हैं।
Posted on 07 November 2010 by admin
अजहरूद्दीन को सांसद कोटे का आवास सी-114 लोधी रोड आबंटित हुआ तो उन्होंने खूब पैसे खर्च कर उसका कायाकल्प करवाया, नए रंग-रोगन, नए टाइल्स, नए फर्नीचर, यानी सी-114 का पूरा चेहरा-मोहरा ही बदल चुका था। ऐसे में हैदराबाद के किसी ज्योतिषी ने उनसे कह दिया कि यह घर उनके लिए अमंगलकारी है, यह वही वक्त था जब ज्वाला गट्टा का मामला खूब परवान चढ़ा था और गुस्से में संगीता बिजलानी अजहरूद्दीन को अलविदा कह मुंबई चली गई थी, सो, अजहरूद्दीन को ज्योतिष की बातों में दम लगा और उन्होंने जोर लगाकर अपने लिए लोधी रोड में ही सी-112 का आवास आबंटित करा लिया। और अजहरूद्दीन का यह शानदार 14 नंबर घर राहुल गांधी के करीबी सांसद भंवर जितेंद्र सिंह को आबंटित हो गया, अब तक तो जितेंद्र सिंह का सब ठीक-ठाक चल रहा है, क्या आने वाले दिनों में वे भी किसी सियासी भंवर में फंस सकते हैं।
Posted on 07 November 2010 by admin
इन दिनों ऐसा जान पड़ता है मानो माकपा जैसी धुर वामपंथी पार्टी ने भी जैसे भाजपा की राह पकड़ ली हो, कभी भाजपा का कांग्रेसीकरण हुआ था, अब माकपा के कांग्रेसीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सीपीएम को केरल में कांग्रेस की जीत से जोरदार झटका लगा है, इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के प्रदेश महासचिव विजयन को दोषी ठहरा रहे हैं। सबसे मुश्किल स्थिति तो माकपा महासचिव प्रकाश करात की है, चूंकि केरल उनका गृह राज्य है, सो वे भला प्रदेश में पार्टी की ऐसी दुर्गति के लिए किसको दोषी ठहराएंगे? पहले कमजोर पड़ती सीपीएम के लिए जिम्मेदारियों का सारा ठीकरा वे बंगाल के सीएम बुध्ददेब पर फोड़ दिया करते थे, बुध्ददेब की भी अपनी दलील साफ है, उनका मानना है जबसे पार्टी ने न्यूक्लीयर डील पर कांग्रेस को समर्थन किया है तब से कैडर का बाजा बज गया है, यानी दादा के निशाने पर भी सीधे करात ही हैं। अब पश्चिम बंगाल के कॉमरेड मन ही मन इस बात पर मजा ले रहे हैं कि अपने गृह प्रदेश में पस्त होती माकपा और मस्त होती कांग्रेस के लिए करात किसको दोषी ठहराएंगे?
Posted on 07 November 2010 by admin
सुधांशु मित्तल अपने छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं, एक वक्त था जब भाजपा में उनकी तूती बोलती थी, वे दिवंगत प्रमोद महाजन के सबसे करीबियों में शुमार होते थे, वे दोस्तों के दोस्त भी है, चुनांचे उनके दोस्तों की एक बड़ी लंबी फेहरिस्त है, जो अलग-अलग राजनैतिक पार्टियों में सक्रिय हैं। पर जब से गेम्स से जुड़े मुद्दे और उनकी एक कथित निर्माण कंपनी पर आयकर का छापा पड़ा है, तब से उनके हम निवाला-हमप्याला दोस्तों की सीरत बदल गई है, वे पूछते हैं-‘हू सुधांशु? व्हॉट सुधांशु?’ और जब से इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है, तो उनके दोस्तों के रंग-ढंग और भी बदल गए हैं। चंद्रबाबू व जयललिता सरीखे नेता-नेत्रियों ने भले ही फोन कर मित्तल का हाल-चाल पूछा हो, पर भाजपा का हर बड़ा-छोटा नेता उनसे कन्नी काटता नजर आता है। सब जानते हैं कि मित्तल राजनाथ सिंह के कितने करीबी रहे हैं, सो जब इस संकट की घड़ी में मित्तल ने राजनाथ से बात की तो राजनाथ ने साफ कहा-‘न्यूयॉर्क से लौटकर बीमार पड़ गया हूं, इसीलिए आपसे मिलने नहीं आ सकता, आप भी मुझसे मिलने मत आना इंफेक्शन का खतरा हो सकता है।’ सुधांशु ने नेता विपक्ष सुषमा स्वराज को दो बार फोन कर मदद मांगी और उनसे अनुरोध किया कि यह पूरा मामला संसद में उठना चाहिए क्योंकि ये छापे राजनीति से प्रेरित हैं, पर सुषमा की ओर से भी उन्हें कोई ठोस आश्वासन प्राप्त नहीं हुआ। यहां तक कि दिन-रात उनके इर्द-गिर्द मंडराने वाले कीर्ति आजाद और निशिकांत दूबे जैसे ताजातरीन सांसदगण तो अब मित्तल का फोन भी नहीं ले रहे।…अब क्या देखना रह गया बाकी…ऐ सियासत तुझसे दिल लगाकर देख लिया।
Posted on 28 October 2010 by admin
गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही, फिलवक्त शाह गुजरात के ही साबरमती जेल में कैद हैं, अब चूंकि राज्य में भगवा सरकार है सो जेल प्रशासन शाह के आतिथ्य सत्कार में कोई कमी नहीं रख रहा था, हालांकि शाह के पास जेल में अपना कोई सेल फोन नहीं है, फिर भी वो जिससे चाहते हैं बतिया ही लेते हैं, घर-परिवार से, अपने राजनैतिक सहयोगियों से यहां तक कि नरेंद्र भाई से भी। दरअसल, शाह उनसे मिलने आने वाले मुलाकातियों के फोन से (अगर वह कोई वीआईपी हुआ तो) अथवा पुलिस अधिकारियों के फोन से भी अक्सर कॉल कर लिया करते थे, उनकी अपने वकील से भी लंबी बातें होती थी, यही बात सीबीआई को खाए जा रही थी सो, सीबीआई अधिकारियों ने भी फौरन इस बात की तोड़ निकाली। हालिया दिनों में भारतीय खुफिया एजेंसी ने इजराइल से फोन टेपिंग का एक अनोखा यंत्र मंगवाया है, जो महज ब्रीफकेस के आकार का है जो किसी कार की बोनट में बैटरी से कनेक्ट हो जाता है और जब यह कार एक निश्चित दूरी पर खड़ी हो तो आस-पास के दर्जन भर फोन मोबाइल या लैंड लाइन को टेप करने में सक्षम है। सो, सीबीआई ने कथित तौर पर शाह के भी कई फोन टेप कर लिए हैं, और अगर शाह कोर्ट में अपनी जमानत अर्जी लगवाने जाते हैं तो सीबीआई शाह के फोन डिटेल्स को एक अतिरिक्त साक्ष्य के तौर पर कोर्ट में पेश कर सकती है, जाहिर है ऐसी सूरत में शाह को जमानत मिलने में काफी मुश्किलें आ सकती हैं।
Posted on 28 October 2010 by admin
इस कॉलम में पिछले हफ्ते खुलासा हुआ था कि कैसे उत्तर बिहार के कथित गरीब भगवा सांसद का नरेगा स्कीम के तहत स्टिंग ऑपरेशन हो गया है। और उक्त स्टिंग ऑपरेशन को नागपुर की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अंजाम दिया है, जिस कंपनी केर् कत्तार्-धत्ता भाजपा अध्यक्ष गडकरी के करीबी हैं। नई जानकारियों के मुताबिक यह भाजपा सांसद स्टिंग ऑपरेशन में फंसे अकेले सांसद नहीं है, उनके अलावा इसी नरेगा स्कीम में अपने कमीशन की रकम तय करते 11 सांसदों का स्टिंग हो गया है। इसमें से 5 सांसद तो भाजपा के हैं, 5 जद(यू)के तथा एक कांग्रेसी सांसद हैं। आने वाले दिनों में यह सीडी किसी न्यूज चैनल पर देखी जा सकेगी।
Posted on 28 October 2010 by admin
कॉमनवेल्थ के झंझट से मुक्त होने के प्रणब दा ने सीधी साउथ कोरिया की उड़ान पकड़ ली है, अपने साथ वे कुछ महत्वपूर्ण पत्रकारों को भी सिओल ले गए हैं। सबसे अहम तो यह कि कोरिया में प्रणब दा भारतीय विदेश मंत्री की भूमिका में अवतरित हुए हैं (कृष्णा साहब के लिए यह चिंता की बात हो सकती है) वैसे भी जी-20 का ज्यादा राजनीतिकरण हो गया है। और इन दिनों अमरीका और चीन में एक अघोषित करेंसी वार छिड़ गई है, ऐसे में चतुर सुजान प्रणब ने भारत की ओर से मध्य मार्ग पकड़ना ही उचित समझा, जाहिर है उनके इस नए रोल व नई भंगिमाओं से मनमोहन और सोनिया दोनों ही प्रसन्नचित्त हैं।
Posted on 19 October 2010 by admin
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर घमासान मचा है। राहुल गांधी का मानना है कि नया अध्यक्ष या तो दलित हो या फिर ब्राह्मण। अभी लखनऊ सम्मेलन में तो प्रमोद तिवारी और रीता बहुगुणा जोशी की लड़ाई खुल कर सामने आ गई थी। लगता है राहुल को तिवारी की निष्ठा पर अब भी संदेह है, क्योंकि पिछले दिनों जब तिवारी समर्थक पीसीसी सदस्यों का एक डेलीगेशन कांग्रेसी युवराज से मिलने दिल्ली पहुंचा तो राहुल ने उनसे मिलने से भी मना कर दिया। राहुल के दिमाग में फिलवक्त तीन नाम चल रहे हैं रीता बहुगुणा जोशी, जितिन प्रसाद और पी.एल.पूनिया। रीता भले ही बड़बोली हों पर राहुल का मानना है कि वह आक्रामक और लड़ाकू हैं। दलित नेता पूनिया का मायावती से छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है, वे पैसे से भी मजबूत हैं। अपनी दाल नहीं गलती देख तिवारी अपने एक समर्थक फैजाबाद के निर्मल खत्री का नाम आगे बढ़ाने में लग गए हैं। पर इससे क्या होगा, होइहि सोई जो राहुल रचि राखा।
Posted on 19 October 2010 by admin
बिहार चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में अडवानी का नाम सबसे ऊपर है, फिर गडकरी का। पर अडवानी व अध्यक्ष जी की सभा लगाने के लिए कोई भी भगवा उम्मीदवार राजी नहीं, उनका तर्क है कि इनके नाम पर भीड़ नहीं जुटती। डिमांड तो राजनाथ सिंह की भी नहीं, वैसे भी उनकी तबियत इन दिनों नासाज है, न्यूयॉर्क से लौटते ही उन्हें डेंगू हो गया है, सो वे आराम फरमा रहे हैं। मौके की नजाकत भांपते हुए अडवानी ने फौरन बयान दे दिया कि वे पहले चरण के चुनाव में बिहार कम जा पाएंगे। सबसे ज्यादा डिमांड तो नरेंद्र मोदी और वरुण गांधी की थी, पर नीतीश की नाराजगी के मद्देनजर भाजपा ने इन दोनों नामों को अपने स्टार प्रचारकों की सूची में रखा ही नहीं है। फिलवक्त जो स्टार प्रचारक सूची में शुमार हैं उनमें सबसे ज्यादा डिमांड सुषमा स्वराज की है, क्योंकि वह अटल शैली की मॉडरेट व प्रखर वक्ता हैं।
Posted on 19 October 2010 by admin
अपनी सियासी नंगई को लेकर चर्चित-कुचर्चित भाजपा के एक सबसे गरीब (?) सांसद का ‘स्टिंग ऑपरेशन’ हो गया है, यह उत्तरी बिहार के एक पिछड़े इलाके से जीत कर पहली बार संसद पहुंचे हैं। नागपुर की एक निर्माण कंपनी को नरेगा स्कीम के अंतर्गत कार्य आबंटित करने की एवज में सांसद महोदय इस सीडी में अपना हिस्सा ग्रहण करते नजर आ रहे हैं। मजे की बात तो यह कि नागपुर की इस कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिकगण भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के बेहद करीबियों में शुमार होते हैं। जब अध्यक्ष जी पिछले दिनों नागपुर-प्रवास में थे, तो इस निर्माण कंपनी केर् कत्तार्-धत्ताओं ने अपने हाथों से यह ‘स्टिंग सीडी’ अध्यक्ष जी के चरणों में अर्पित्त कर दी है। इस सीडी में उनकी ही पार्टी के सांसद की काली करतूतें कथित तौर पर कैद हैं। अब भाजपा अध्यक्ष इस सीडी पर क्या संज्ञान लेते हैं, यही तो उनके सियासी ज्ञान की असली परीक्षा है।