Posted on 10 December 2010 by admin
देश के मुख्य सर्तकत्ता आयुक्त थॉमस को बचाने की कवायद में पूरी मलयाली लॉबी जुटी है और इस लॉबी की अगुवाई पीएमओ के कुट्टी नायर कर रहे हैं, थॉमस को इस्तीफा देने के लिए मना लिया गया है, उन्हें यह आश्वासन दिया गया है कि पद मुक्ति के बाद उन्हें इससे भी किसी बड़े और महत्वपूर्ण पद पर बिठाया जाएगा, वाह री यूपीए सरकार, दागियों को पारितोषिक देने की क्या नई परंपरा की शुरूआत कर रही है।
Posted on 10 December 2010 by admin
दिल्ली में जहां दिसंबर की गुलाबी ठंड लाल हुई जाती है, वहीं राजधानी का सियासी पारा बढ़ता ही जा रहा है, 16 दिन हो गए, संसद नहीं चली, आखिरकार सरकार विपक्ष की मामूली सी जेपीसी की मांग क्यों नहीं मान लेती? सारा पेंच यही है, विश्वस्त सूत्र बताते हैं प्रधानमंत्री ने विपक्षी मांग को अपनी नाक का सवाल बना लिया है, वे अड़े हुए हैं कि जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति का गठन नहीं होने दिया जाएगा, वहीं सोनिया गांधी, प्रणब मुखर्जी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का समूह जेपीसी गठन के पक्ष में है। दरअसल, वामपंथी नेता गुरुदास गुप्ता ने एक मीटिंग में कहीं बोल दिया था कि ‘एक बार जेपीसी बने तो फिर हम उसमें पीएम को भी खींच लेंगे’, यही बात पीएम को अंदर तक कहीं चुभ गई है।
Posted on 01 December 2010 by admin
बिहार के चुनावी नतीजों से बम-बम है भाजपा, 102 सीटों पर लड़ी और 91 पर जीत दर्ज हुई, सचमुच एक नया रिकार्ड है। पर अगर पार्टी में भीतरघात नहीं होता तो यह जीत का आंकड़ा और बढ़ सकता था। मसलन, अररिया विधानसभा क्षेत्र के भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी नारायण झा ने मीडिया में खुलकर बयान दिया कि अररिया के सांसद प्रदीप गंगई नहीं चाहते थे कि यहां भाजपा का उम्मीदवार जीते, वे लोजपा उम्मीदवार को जिताने की कोशिश में जुटे थे। सनद रहे कि अररिया से यहां के सांसद अपने एक ठेकेदार मित्र अजय झा को टिकट दिलवाना चाहते थे, जो पिछले उप चुनाव में भी पार्टी के टिकट पर पहले ही अपनी मिट्टी-पलीद करा चुके थे। सो, जब गंगई के ठेकेदार मित्र और उनके प्रमुख धनदाता झा का टिकट कट गया तो उन्होंने भीरतघात की बिसात बिछा दी। क्या पार्टी ऐसे भीतरघातियों को सबक सिखाएगी?
Posted on 01 December 2010 by admin
इस बार आंध्र में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए जयपाल रेड्डी का भी नाम खूब चला था पर समझा जाता है कि जयपाल के नाम को दस जनपथ से हरी झंडी नहीं मिल पाई, क्योंकि कॉमनवेल्थ घोटाले में कीचड़ उनके दामन पर भी उछला है, सबसे खास बात तो यह कि गेम्स के निर्माण कार्य से जुड़े नब्बे फीसदी ठेकेदार आंध्र प्रदेश से ताल्लुकात रखते थे यानी उन्हें किसी न किसी रूप में जयपाल रेड्डी का आशीर्वाद प्राप्त था, जाहिर है दस जनपथ ने इस मामले का संज्ञान गंभीरता से लिया।
Posted on 01 December 2010 by admin
दिग्विजय सिंह पिछले दिनों सेंट्रल हॉल में पधारे तो उनके मुंहलगे पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया, सबों का शिकायती लहजा लगभग एक सा था-‘अब तो आप खबर ही नहीं देते?’ इस पर दिग्गी राजा ने फौरन अपनी ओर से सफाई पेश की-‘देखिए, हमारी पार्टी में तीन ग्रुप हैं-‘कोर ग्रुप’, ‘बफर ग्रुप’ और ‘डफर ग्रुप’। मेरा नाता ‘डफर ग्रुप’ से है सो बेहतर होगा कि आप ‘कोर ग्रुप’ वालों से खबर निकालने की कवायद करें।’ इस अकस्मात रहोस्यद्धाटन के बाद दिग्गी को घेर रखे पत्रकारगण एक दूसरे का मुंह ताक रहे थे।
Posted on 21 November 2010 by admin
पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा इन दिनों प्रणबदा से थोड़े नाराज चल रहे हैं,दरअसल देवड़ा अपने नवरत्न कंपनियों के लिए ज्यादा से ज्यादा पैसे जुटाने के उपक्रम साधने में जुटे हैं और वह इंडियन ऑयल का एक बड़ा पब्लिक इश्यु लेकर आना चाहते हैं, देवड़ा ने इसके लिए अक्तूबर का लक्ष्य रखा था, पर प्रणबदा ने उनका सारा प्लॉन चौपट कर दिया। प्रणबदा ने देवड़ा से दो टूक कह दिया कि आईपीओ का टै्रफिक कैलेंडर अभी जाम की चपेट में है। दरअसल सरकार के पास पब्लिक इश्यू के लिए पहले से इतने आवेदन स्वीकृति के इंतजार में लंबित पड़े हैं कि देवड़ा का नंबर जनवरी से पहले नहीं लग सकता। प्रणबदा की दूसरी दलील थी कि चूंकि इस इश्यू का साइज इतना बड़ा है, और देश में अभी निवेश के लिए माहौल उतना सकारात्मक नहीं है इसीलिए देवड़ा को कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, सो देवड़ा को शायद जनवरी पर ही संतोष करना पड़ा।
Posted on 21 November 2010 by admin
राजा मुद्दे पर जेपीसी की मांग को लेकर भाजपा ने संसद में क्या हंगामा मचाया पर इस पूरे हंगामे में पार्टी के युवा गांधी वरुण नजर नहीं आए, अपने चचेरे भाई राहुल के मुकाबले संसद में ज्यादा सक्रियता दिखाने वाले वरुण आखिर थे कहां? न्यूजीलैंड में। और अभी गुरूवार की रात ही वहां से दिल्ली लौटे हैं। पर स्वदेश लौटते ही वे ‘मिशन यूपी’ की तैयारियों में जुट गए हैं। आज रविवार को ही बनारस से लगे मिर्जापुर में उनकी एक बड़ी रैली है। रविवार की सुबह वे वायुमार्ग से बनारस पहुंचेंगे और वहां से अपने जनसंपर्क अभियान को परवान चढ़ाते मिर्जापुर के लिए निकल जाएंगे, कई गांवों में रूक कर वे ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे और फिर भदोही विकास खंड में एक कारगिल शहीद के परिवार के साथ समय बिताएंगे तथा विन्ध्य, केवट और मल्लाह बाढ़ पीड़ित परिवारों से मिलेंगे। और सोमवार को मां विन्धयावासिनी देवी के दर्शन के बाद सिटी क्लब में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। यानी राहुल गांधी जहां एक ओर ‘रोड शो’ पर ध्यान लगा रहे हैं, वरुण इसके उलट अपना फोकस ग्रामीण मतदाताओं पर ज्यादा रख रहे हैं, यानी भारत बनाम ‘इंडिया’ के जंग की शुरूआत है दोनों गांधियों के बीच।
Posted on 21 November 2010 by admin
3 दिसंबर को नितिन गडकरी के बेटे की शादी है नागपुर में, इस शादी में भाजपा के तमाम बड़े नेता तो शिरकत कर ही रहे हैं, एनडीए के घटक दलों के प्रमुख नेताओं को भी इस शादी का न्यौता गया है। पिछले दिनों जब गडकरी पटना गए थे, तो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से नीतीश कुमार को अपने बेटे की शादी में आने का निमंत्रण दिया और इसके लिए नीतीश सहर्ष तैयार भी हो गए, जैसे की उम्मीद है तब तक एकबारगी पुन: बतौर मुख्यमंत्री नीतीश की ताजपोशी हो चुकी होगी और जब वे नागपुर पहुंचेंगे तो वहां उनकी मुलाकात नरेंद्र मोदी और वरुण गांधी सरीखे भगवा नेताओं से भी होगी, जिनके प्रति नीतीश का व्यक्तिगत द्वेष जगजाहिर है, ऐसे में देखना दिलचस्प रहेगा कि नीतीश मोदी व गांधी को कैसे फेस करते हैं? एक बात और इसी शादी में सम्मलित होने के लिए सुषमा स्वराज भी जा रही हैं और हालिया दिनों में मोदी से उनकी रार भी सार्वजनिक हो चुकी है, सो उसी शादी में जब मोदी और स्वराज आमने-सामने होंगे तो देखना दिलचस्प रहेगा कि अपने व्यक्तिगत भावों को कैसे वे सियासी रंगों में छुपा जाते हैं।
Posted on 14 November 2010 by admin
महाराष्ट्र संकट पर कांग्रेस के दोनों युवा नेता(?) प्रणब मुखर्जी और ए.के. एंटनी रात भर नहीं सोए। विधायकों का मन टटोलने के बाद इन दोनों नेताओं ने रात्रि 1.10 बजे मुंबई से दिल्ली की फ्लाइट ली, फ्लाइट कोई 3.10 पर लैंड हुई, एयरपोर्ट से ही ये दोनों नेता सीधे दस जनपथ पहुंचे, जहां सोनिया गांधी और अहमद पटेल की चहलकदमी अब भी जारी थी और ये दोनों प्रणब व एंटनी के वापिस लौटने का इंतजार कर रहे थे। उसी वक्त पृथ्वीराज चव्हाण को तलब किया गया और उनसे कहा गया कि वे कैसे भी शरद पवार को मनाएं ताकि शाम तक चव्हाण के नाम की औपचारिक घोषणा हो सके और चव्हाण ने वैसा ही किया।
Posted on 14 November 2010 by admin
पूर्व संघ प्रमुख सुदर्शन के वाकचक्र से क्या सियासी हंगामा बरपा है। कांग्रेसी राजमाता के भक्तगण उद्वेलित हैं और देशव्यापी धरने-प्रदर्शन चल रहे हैं। सुदर्शन ने ऐसा कोई इंटरव्यू मध्यप्रदेश के किसी अखबार को दिया था, इससे बडे क़ांग्रेसी नेता अनजाने थे तब तक कि भाजपा की अडवानी ब्रिगेड ने इस पूरे मामले को हवा न दे दी हो। सुदर्शन और अडवानी में छतीस का आंकड़ा तो जगजाहिर है। हाऊस शुरू होने से पहले भगवा ब्रिगेड के एस.एस. आहलूवालिया और माया सिंह को बेहद सक्रिय देखा गया और सूत्रों की मानें तो इन दोनो ने ही सदन में घूम-घूम कर कांग्रेसी सांसदों और नेताओं को यह जानकारी दी कि फलां अखबार में मैडम सोनिया के बारे में सुदर्शन जी का ऐसा बयान छपा है। कंग्रेसियों ने आनन-फानन में संसद की लाइब्रेरी से वह अखबार मंगवाया और फिर सीधे वेल में चले गए और इसके बाद ही सारा हंगामा शुरू हुआ, तो माननीय लौह पुरूष जी- ‘तेरे रहते ही लुटा है चमन बागवां, कैसे मान लूं कि तेरा इशारा न था।’