Posted on 30 December 2010 by admin
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वर्तमान में बंगाल के गवर्नर एम.के.नारायणन और केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम में दार्जिलिंग को लेकर एक बार फिर से जोरों की ठन गई है, गृह मंत्री जहां दार्जिलिंग को और स्वायता दिए जाने के पक्षधर बताए जाते हैं, चिदंबरम गोरखालैंड नेता विमल गुरूंग को भी खासा भाव दे रहे हैं, अभी पिछले दिनों जब भाजपा नेता जसवंत सिंह की अगुवाई में गोरखा नेताओं का एक दल चिदंबरम से मिला था तो चिदंबरम एकबारगी वहां सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी की एक बैठक में चिदंबरम ने तुर्रा उछाला कि एक ‘अंतरिम रिजनल ऑथिरिटी फॉर गोरखाज इन दार्जिलिंग’ का गठन हो जो बंगाल चुनाव मई 2011 तक प्रभावी तौर पर कार्य करे। वहीं स्वयं नारायणन, पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार, यहां तक कि ममता बनर्जी भी चिदंबरम की राय से इत्तफाक नहीं रखते, अभी पिछले दिनों नारायणन पहली बार दार्जिलिंग की यात्रा पर गए थे तो गोरखा नेताओं को लेकर उनकी भंगिमाएं सख्त थीं।
Posted on 30 December 2010 by admin
अपने एक कैबिनेट साथी आनंद शर्मा के प्रति प्रधानमंत्री की नापसंदगी छुपाए नहीं छुपती है, पर कुछ तो बात है ऐसी की शर्मा जी के आनंद में स्वयं मनमोहन भी खलल नहीं डाल पा रहे। समझा जाता है कि शर्मा जी इन दिनों दस जनपथ के खासमखास हो गए हैं, सूत्रों की माने तो वे हर हफ्ते अंतरराष्ट्रीय मसलों पर एक रिपोर्ट तैयार करते हैं और उन्हें कांग्रेस अध्यक्षा के हवाले कर देते हैं। सोनिया शर्मा जी के इस अंतरराष्ट्रीय ज्ञान पर कुछ इस तरह फिदा हैं कि वो चाहती हैं कि आनंद शर्मा को विदेश मंत्रालय में लाया जाए, वहीं स्वयं प्रधानमंत्री इस मंत्रालय में कपिल सिब्बल को लाना चाहते हैं, यानी दोनों ही तरफ से एस.एम.कृष्णा के सिर दुधारी तलवार लटक ही रही है। अगर प्रधानमंत्री सिब्बल को विदेश मंत्रालय में लाने में कामयाब हो जाते हैं तो फिर वे सिब्बल के रिक्त हुए मंत्रालय में सलमान खुर्शीद को ला सकते हैं, और खुर्शीद के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के लिए अंतुले सरीखा कोई कट्टरपंथी चेहरा तलाश सकते हैं, क्योंकि खुर्शीद की छवि एक धर्मनिरपेक्ष उदार मुस्लिम की है जो कांग्रेस के ‘वोट बैंक पॉलिटिक्स’ के मुफीद नहीं बैठती है।
Posted on 21 December 2010 by admin
कांग्रेसी मैनेजर भी खूब हैं, वे पार्टी के तारणहार की भूमिका में अवतरित हुए हैं, जब देशभर में कॉमनवेल्थ घोटालों की धूम मची थी और इसके छीटें कई बड़े कांग्रेसी नेताओं मसलन सुरेश कलमाड़ी, शीला दीक्षित, जयपाल रेड्डी आदि पर पड़ रहे थे कि यूं अचानक 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले का टेप लीक हो गया या प्रायोजित तौर पर इसे मीडिया के सुपुर्द कर दिया गया। ताकी देश का ध्यान सीडब्ल्यूजी से 2जी पर चला जाए। और 2जी में भी आंच यूपीए के एक घटक दल द्रमुक पर आ रही थी, कालांतर में भी सरकार में जिन ज्यादातर घोटालों का पर्दाफाश हुआ उसमें कहीं न कहीं कांग्रेस के सहयोगी दलों के नेता ही फंस रहे थे, मसलन चर्चित फूड घोटाले में आंच शरद पवार पर आई, यानी कांग्रेसी मैनेजर चतुराई से पांसा चल रहे हैं।
Posted on 21 December 2010 by admin
विकीलिक्स के ताजा खुलासे से संघ भन्नाया हुआ है, संघ नेतृत्व इस बात को लेकर खासा उद्वेलित है कि कांग्रेसी युवराज राहुल हिंदुवादी संगठनों को लश्करे तोएबा और अलकायदा से भी खतरनाक मानते हैं, जैसा कि उन्होंने कथित तौर पर अमरीकी राजदूत रोमर से अपनी बातचीत में स्वीकारा है। सो, आने वाले दिनों में राहुल गांधी को लेकर भाजपा की सोच में यू-टर्न आ सकता है क्योंकि संघ नेतृत्व ने वैसे भाजपा नेताओं नेत्रियों को साफ ताकीद कर दी है कि वे राहुल पर जवाबी हमले के लिए कमर कस ले, जो भगवा नेतागण अब से पहले राहुल के प्रति ‘गुडविल जेस्चर’ की भंगिमाएं ओढ़े रहते थे, युवराज के दो बोल को तरसते थे, और गाहे-बगाहे उनकी तारीफ भी कर जाते थे।
Posted on 21 December 2010 by admin
टेलिकॉम सेक्टर में पहले ‘फिक्सड लाइसेंस फी’ थी, इसमें लाइसेंस फी के नाम पर प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों को सरकार को करोड़ों का भुगतान करना पड़ता था, तो कंपनियों ने सबसे पहले तत्कालीन संचार मंत्री बूटा सिंह पर दबाव बनाया कि सरकार एक माइग्रेशन पैकेज बना दे और फिक्सड लाइसेंस फी की जगह सरकार ‘रेवेन्यू शेयरिंग बेसिस’ का मॉडल बना दे इसके लिए कंपनियों की ओर से खासा प्रलोभन था, सो बूटा इसके लिए तैयार हो गए, पर उनके खिलाफ केस रजिस्टर हुआ तो उनका इस्तीफा हो गया, फिर आया एनडीए का शासनकाल सबसे पहले सुषमा स्वराज 22 अगस्त 1998 से 12 अक्तूबर 1998 तक 1 महीना 20 दिन के लिए टेलिकॉम मंत्री बनी, पर उन्होंने प्राइवेट कंपनियों के इस प्रपोजल को मानने से मना कर दिया, तो सुषमा को मंत्री पद से हटा कर दिल्ली का सीएम बना दिया गया, फिर जगमोहन आए, उन्हें भी 400 करोड़ का प्रलोभन मिला पर वे नहीं माने, तो उन्हें लॉबिस्टों ने हटवा कर उनकी जगह प्रमोद महाजन को इस विभाग का मंत्री बनवा दिया। महाजन मान गए और टेलिकॉम कंपनियों की चांदी हो गई,अंबानी के हिसाब से दूरसंचार की नीतियां बनने लगी, जब महाजन की काफी शिकायतें आने लगी तो अटल-अडवानी ने उन्हें हटा दिया, 2003 में सुषमा को फिर इस विभाग का ऑफर मिला तो उन्होंने मना कर दिया और हेल्थ में चली गईं, फिर दामादजी के सौजन्य से इस मंत्रालय में अरुण शौरी आए और उन्होंने अपने पूर्ववर्ती महाजन की नीतियों को ही आगे बढ़ाने का काम किया। फिर मारन व राजा का नंबर आया। टाटा राजा को चाहते थे, बाकी के खिलाड़ी मारन को। यानी जितने भी टेप आए हैं उसमें मारन को रोकने की दास्तां कैद है। और जैसा कि कांग्रेस कह रही है कि जांच एनडीए शासनकाल से कराई जाएगी तो फिर महाजन और शौरी पर आंच आ सकती है। और राजा का राज अब कोई राज तो रह नहीं गया है।
Posted on 21 December 2010 by admin
जगन रेड्डी कांग्रेस के गले की हड्डी बन गए हैं, सबसे खास बात यह कि जगन को न सिर्फ अपने गृह राज्य में अपार जन समर्थन मिल रहा है, अपितु उन्हें चर्च का समर्थन हासिल है। जगन जानते हैं कि वे केंद्र सरकार के निशाने पर हैं सो उन्होंने इस वित्तीय वर्ष में एडवांस टैक्स की एक मोटी रकम जमा करवाई है, उन्होंने अपनी सीमेंट कंपनी एक फ्रेंच कंपनी ‘लॉर्फज’ को बेच दी और उससे मिले पैसों को अपने चैनल व अखबार में लगाया है। जगन कांग्रेस के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए कमर कस चुके हैं, उन्हें भाजपा के चर्चित रेड्डी बंधुओं का भी समर्थन प्राप्त है, दरअसल रेड्डी बंधु व जगन एक ही गांव कडप्पा से हैं, रेड्डी बंधुओं को जगन के पिता राजशेखर रेड्डी ने ही खड़ा किया था, चूंकि जगन अब एक क्षेत्रीय पार्टी के गठन की तैयारी में है सो आने वाले चुनाव में जगन का गठबंधन भाजपा के साथ हो सकता है, भाजपा का अपना आकलन है कि जगन कम से कम 35 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के लिए खतरा बन सकते हैं।
Posted on 17 December 2010 by admin
एक अदद नीरा राडिया का खुलासा काफी नहीं है, भाजपा व कांग्रेस में भी कई राडिया और हैं जिनसे पर्दा हटना अभी बाकी है। ताजा मामला भाजपा का है, भाजपा के एक शीर्ष बुजुर्गवार नेता की अंतरंग मित्र जो उन्हें ‘बाबू जी’ का संबोधन देती है, वह दिल्ली के एक औद्योगिक घराने का पीआर का काम देखती है, इन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इस घराने को देहरादून में होटल बनाने के लिए एक मुफीद जगह आबंटित करवा दी, अब होटल को जोड़ने के लिए इस बिजनेस हाउस ने सरकारी जमीन पर ही सड़क बनानी शुरू कर दी तो देहरादून के डीएम भड़क उठे और उन्होंने यह निर्माण कार्य रूकवा दिया, इस पर यह प्रभावशाली बहिन जी भड़क गईं और उन्होंने डीएम को खूब खरी-खोटी सुनाई, डीएम ने इसकी शिकायत आईएएस एसोसिएशन में कर दी। बात मुख्यमंत्री और गवर्नर तक पहुंच गई। तो भाजपा के इस केंद्रीय नेता ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को सीधी धमकी उछाल दी कि ‘अगर यह सड़क नहीं बनी तो दस दिन के अंदर तुम्हें बदल दूंगा’ और इसके साथ ही वे कोश्यारी व खंडूरी से मिलने भी लगे हैं, यानी उत्तराखंड में भाजपा के लिए एक नई मुसीबत शुरू होने वाली है और असंतुष्ट गतिविधियां फिर से वहां सिर उठा सकती है।
Posted on 17 December 2010 by admin
संसद का वर्तमान शीतकालीन सत्र शायद 13 दिसंबर से अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो जाए, पर यदि ऐसा हो भी जाता है तो एक तरह से यह कांग्रेसी मैनेजरों की हार ही है, क्योंकि संसद के मौजूदा सत्र में 2जी स्पेक्ट्रम पर जेपीसी की मांग पर वे विपक्षी एकता को तोड़ पाने में नाकाम साबित हुए। क्या यही कारण है कि आज कल प्रणबदा को गुस्सा बहुत आ रहा है। सो विपक्षी नेताओं के साथ हुई बैठक में जब कोई नतीजा नहीं निकल पाया और विपक्षी दल जेपीसी की मांग पर ही अड़े रहे तो एकबारगी गुस्से से भभक उठे प्रणबदा, तिलमिला कर बोले-‘मैं भी देखता हूं कि कब तक अड़े रहोगे आप!’ जब मीटिंग से दादा बाहर निकल रहे थे तो एक प्रमुख विपक्षी नेता ने दादा को सलाह दी कि ‘अगर आप को सचमुच विपक्षी एकता तुड़वानी थी तो जेपीसी की मांग होते ही संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर देना चाहिए था, जिससे न आपस में विपक्षी दलों के नेता मिल पाते और न ही विरोध के इतने समवेत स्वर गा पाते।’
Posted on 17 December 2010 by admin
क्या देश फिर से मध्यावधि चुनावों की ओर जा रहा है? राहुल गांधी के करीबी नेताओं के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो इसका उत्तर ‘हां’ में है। बिहार चुनाव में कांग्रेस की इतनी अप्रत्याशित हार से राहुल हतप्रभ जरूर हैं, पर सदमे में नहीं, शायद यही कारण है कि बिहार के चुनावी नतीजे आने के बाद से राहुल सियासी तौर पर ज्यादा सक्रिय हो गए हैं, अपनी युवा ब्रिगेड से नियमित तौर पर मिल रहे हैं, तो अन्नाद्रमुक जैसे नए सहयोगी दलों की तलाश में भी जुट गए हैं और उनके प्रमुख नेताओं से मीटिंग कर रहे हैं। विपक्षी दलों का भी मत है कि अगर संसद में विपक्षी एका यूं ही बनी रही तो मजबूर होकर कांग्रेस को कोई बड़ा कदम उठाना पड़ेगा, सितंबर-अक्तूबर में चुनाव के लिए सियासी माहौल टटोला जा रहा है, वहीं खुद राहुल गांधी इस पक्ष के बताए जाते हैं कि वर्ष 2012 में यूपी चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनाव करवा दिए जाएं। कांग्रेसी मैनेजरों का आकलन है कि यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, कर्नाटक व असम में भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी, वहीं भाजपा का अपना आकलन है कि कांग्रेस आंध्र, हरियाणा, राजस्थान व महाराष्ट्र में बुरी तरह से हारेगी।
Posted on 10 December 2010 by admin
बिहार में विस्मित कर देने वाली अपनी जीत से बम-बम हैं नीतीश कुमार, चुनांचे अब वो अपना सियासी कद बढ़ाने की कवायद में जुट गए हैं, सूत्र बताते हैं कि वे लोकनायक जय प्रकाश नारायण की पदयात्रा की तर्ज पर देशव्यापी यात्रा करेंगे, इस यात्रा का उद्देश्य होगा भारत से भ्रष्टाचार मिटाना व विकास की अलख जगाना। समझा जाता है नीतीश को इस यात्रा का नायाब आइडिया अरुण जेतली ने दिया है, जेतली व नीतीश की आपस में गहरी छनती है, सो जेतली का यह ‘गहरे पानी पैठ’ नीतीश को कहां ले जाता है यह देखना दिलचस्प रहेगा कि धारा के विरुध्द कितना तैर पाते हैं नीतीश।