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बड़े लोगों की छोटी पार्टी

Posted on 17 January 2011 by admin

भाजपा अध्यक्ष गडकरी यूपी चुनाव को लेकर खासा संजीदा हैं, वे चाहते हैं कि पार्टी यूपी में अपनी पूरी ताकत से लड़े और 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में कम से कम 100 सीटें अवश्य जीते, पार्टी इसके लिए ऊंची जाति, गैर यादव पिछड़ा वोट और दलित वोटों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहती है। राजनाथ सिंह की अगुवाई में ‘मिशन यूपी’ के लिए कलराज मिश्र व सौदान सिंह के साथ एक टीम भी गठित की गई है। पूरे यूपी को छह हिस्सों में बांटा गया है और 10 टीम बनाने की तैयारी चल रही है। गडकरी ने संकेत दिए हैं कि यूपी चुनाव में पैसों की कमी नहीं आने दी जाएगी, 100 करोड़ रुपए तक पार्टी खर्च कर सकती है, हालिया कानपुर रैली के लिए ही गडकरी ने 50 लाख का इंतजाम करवाया था, पर सिर्फ रुपयों और बहुरूपियों से सियासत नहीं चल सकती, भाजपा को यूपी में वरुण गांधी सरीखा युवा और करिश्माई नेता चाहिए, पार्टी उन्हें नेपथ्य में रखकर मुख्यधारा में कैसे वापिस आ सकती है, सवाल यही तो बड़ा है, एक ऐसे दल के लिए जो बड़े लोगों की छोटी पार्टी बनती जा रही है।

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अपनों के शिकार हो सकते हैं कश्मीरी नेता

Posted on 17 January 2011 by admin

जम्मू-कश्मीर के तीन प्रमुख नेता सैय्यद अली गिलानी, महबूबा मुफ्ती सईद और यासीन मलिक पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के नए हथकंडों के शिकार हो सकते हैं, भारतीय खुफिया एजेंसियों ‘रॉ’ और ‘आईबी’ के बेहद संवेदनशील गुप्त दस्तावेजों में इस बात का खुलासा हुआ है कि जम्मू-कश्मीर में दंगे भड़काने के लिए आईएसआई इन नेताओं की हत्याएं करवा सकती है। और वह चाहेगी कि इसका दोष किसी भांति भारतीय सेना के सिर मढ़ दिया जाए, जिससे घाटी के लोग उद्वेलित होकर सड़कों पर निकल आए। अब्दुल गनी लोन की हत्या का राज भी परत दर परत तब बेपरदा हुआ जब अपने पिता अब्दुल गनी लोन की ग्यारह वर्ष पूर्व हुई निर्मम हत्या पर चुप्पी तोड़ते हुए उनके दोनों बेटों सााद लोन व बिलाल लोन (जो कि हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता भी हैं) ने कहा कि उनके पिता को ‘अपनों’ ने ही मारा है। फिलवक्त तो तीनों नेताओं की सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है, पर इससे पूर्व आईएसआई के नापाक मंसूबों को ध्वस्त करना भी उतना ही जरूरी है।

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हर वेश में इंद्रेश

Posted on 17 January 2011 by admin

भाजपा और संघ को एक जोर का झटका और जोर से लगने जा रहा है, संघ के एक प्रमुख नेता इंद्रेश कुमार की गिरफ्तारी इसी सप्ताह संभव है। बहुत मुमकिन है कि इस सोमवार को असीमानंद जांच एजेंसियों के समक्ष एक और कुबूलनामा करें, जो समझौता एक्सप्रेस बलास्ट को लेकर है, समझा जाता कि असीमानंद सीधे तौर पर इस धमाके में इंद्रेश का हाथ बता सकते हैं। कांग्रेस सरकार भी इंद्रेश का पूरा अतीत खंगलवा रही है और जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल में जुटी हैं कि पंजाब विश्वविद्यालय के एक मैकेनिकल इंजीनियर की ऐसी क्या मजबूरी थी जो वह पूर्णकालिक तौर पर अविवाहित रहकर संघ से जुड़ गया। जांच ही जांच में जांच एजेंसियों ने यह भी पता लगा लिया है कि इंद्रेश के परिवार की हरियाणा के कैथल में एक ज्वैलरी की दुकान है, और वर्ष 1980 में इस परिवार पर सोने के बिस्कुट के तस्करी के आरोप लगे थे। जांच एजेंसियों ने सवालों की एक ऐसी ही नई फेहरिस्त तैयार की है जिसका जवाब देना इंद्रेश के लिए लोहे के चने चबाने के मानिंद होगा, सो भगवा राजनीति में आने वाले दिनों में एक बड़ा तूफान आने वाला है।

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मनमोहन मंत्रिमंडल का फेरबदल

Posted on 10 January 2011 by admin

बहुत मुमकिन है 15 जनवरी को मनमोहन मंत्रिमंडल का चिर प्रतीक्षित विस्तार या फेरबदल होगा, उम्मीद जताई जा रही है कि कई कांग्रेसी काबीना मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है और संगठन में कई ऐसे पुराने हैवीवेट हैं जो गाहे-बगाहे यह तुर्रा उछाल ही देते हैं कि ऐसे लोगों को भी सरकार चलाने का मौका मिलना चाहिए जिन्होंने नि:स्वार्थ(?)भाव से अब तक पार्टी की सेवा की है। दस जनपथ आनंद शर्मा को विदेश मंत्री के पद पर बिठाना चाहता है, वहीं मनमोहन सिंह कपिल सिब्बल को इस पद के लिए ज्यादा उपयुक्त मानते हैं। कांग्रेस ने डीएमके से स्पष्ट कर दिया है कि नए फेरबदल में संचार मंत्रालय कांग्रेस अपने पास रखना चाहती है क्योंकि 2जी स्पेक्ट्रम को लेकर पहले से ही इतना बखेड़ा चल रहा है वहीं काले चश्मेवाले ताऊ करुणानिधि यह मंत्रालय अपनी सांसद पुत्री कनीमोझी के लिए मांग रहे हैं।

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सोनिया का पनामा कनेक्शन

Posted on 10 January 2011 by admin

भाजपा की कोर ग्रुप की दिल्ली में बैठक हुई और बैठक में यह तय हुआ कि 5 राज्यों के आसन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा व एनडीए 2जी, सीडब्ल्यूजी, बोफोर्स यानी भष्ट्राचार के मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाएगी और इसे जोर-शोर से पब्लिक में उठाएगी, पर पूरे मामले में पार्टी ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए यह भी साफ कर दिया कि पार्टी व एनडीए गांधी परिवार यानी सोनिया व राहुल पर सीधा हल्ला बोलने से परहेज करेगी, पार्टी रणनीतिकारों का मत है कि पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें ऐसा करना महंगा पड़ा था यानी पब्लिक में इसका ‘बैक फायर’ हो गया था। पर विश्वस्त सूत्रों की माने तो एक बड़ी खबर लीक होने की कगार पर है और वह खबर यह है कि सोनिया गांधी का पनामा में बैंक अकाऊंट है और यह खबर भी एक पुराने सोनिया वफादार के हवाले से लीक होने वाली है, अब समझ नहीं आता कि क्या इस पर भी भाजपा चुप रहेगी या अपने बड़े चिंतकों की चिंता को मद्देनजर रखते सोनिया पर डायरेक्ट हमले से बचती रहेगी?

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कौन है सबसे बड़ा खिलाड़ी?

Posted on 10 January 2011 by admin

बोफोर्स मामले में क्वात्रोच्चि को लेकर टि्ब्यूनल ऑर्डर पर कोहराम मचा है और पार्टी हाईकमान की निगाहें अपने दो प्रमुख सिपहसालारों पर तनिक टेढ़ी हैं, यानी प्रणव मुखर्जी और पी.चिदंबरम को लेकर दस जनपथ का मिजाज कुछ रूखा-रूखा सा है, पर दस जनपथ अब भी इस बात से पूरी तरह अनजान है कि इस खेल का असली खिलाड़ी कौन है? वैसे भी यह मामला वित्त मंत्रालय से जुड़ा नहीं है, चुनांचे वर्तमान और पूर्व वित्त मंत्री पर शक भी फिजूल है। दरअसल, यह टि्ब्यूनल कानून मंत्रालय के अधीन आता है और जब यह मामला परवान पर था तो इसकी क्लोजर रिपोर्ट कब बनकर तैयार होगी इसकी जानकारी तब सिर्फ हंसराज भारद्वाज को थी, हंसराज भारद्वाज उस समय देश के कानून मंत्री थे, जिनको दस जनपथ की नाराजगी के बाद कर्नाटक का राज्यपाल बनाकर राजनैतिक वनवास पर भेज दिया गया। अगर विश्वस्त सूत्रों के दांवों पर यकीन किया जाए तो यह सूचना भारद्वाज के हवाले से ही लीक हुई है क्योंकि उन्हें ही क्लोजर रिपोर्ट की पूरी जानकारी थी, पर कभी दस जनपथ के बेहद निष्ठावान समझे जाने वाले भारद्वाज ने ऐसा किया क्यों होगा? बात तो यही समझने की है, भारद्वाज का फिलवक्त केंद्रीय कानून मंत्री मोइली से पंगा है और कहीं न कहीं अब भी उनकी निगाहें कानून मंत्रालय पर टिकी हैं, चुनांचे उनके यह चाहने में बेहतर सियासी निहितार्थ हैं कि अगर इस मामले में खबर लीक करने की गाज मोइली पर गिरती है तो भारद्वाज साहब का एक बार फिर से राजनैतिक प्रादुर्भाव हो सकता है। पर इस मामले में रिस्क कहीं अधिक बड़ा है।

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चीन से चंद सवाल

Posted on 03 January 2011 by admin

चीनी प्रधानमंत्री वन चियापाओ अपने भारी लाव लश्कर के साथ भारत आकर चले गए पर अपने पीछे कई अनुत्तरित सवाल भी छोड़ गए हैं। भारतीय राजनेताओं ने चीनी प्रधानमंत्री से स्पष्ट कर दिया कि भारत और चीन देश की आंतरिक नीतियों पर भले ही एक-दूसरे के विरोधी हैं, विदेश नीति पर दोनों साथ-साथ हैं। भारत ने चीन से यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत में चीन के दोस्त बहुत कम हैं, साथ ही चीन जिस क्वालिटी का सामान हमें भेजता है उसकी क्वालिटी ठीक नहीं है। चीनी प्रधानमंत्री से भारत यह भी आश्वासन चाहता था कि वे स्पष्ट करे कि चीन भारत का शत्रु नहीं है और आम भारतीय के मन में चीन के प्रति ‘गुडविल’ भी नहीं है। जब नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज चीनी प्रधानमंत्री से मिलीं तो उन्होंने उनसे दो टूक जानना चाहा कि ‘आतंकवाद पर चीन का रुख क्या है?’ तो जवाब मिला कि ‘चीन आतंकवाद के खिलाफ है।’ सुषमा ने फिर जानना चाहा कि उनकी पाकिस्तान और भारत के प्रति क्या राय है? तो चीनी प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘इस पर चीन न्यूट्रल है।’ इस पर सुषमा ने उन्हें घेरा और अपने खास आक्रामक अंदाज में भाजपा नेत्री ने चीनी प्रधानमंत्री से दो टूक कहा कि ‘आतंक फैलाने वाले और आतंक का शिकार होने वाले के बीच आप न्यूट्रल कैसे हो सकते हैं? इसका यह अर्थ निकाला जाए कि आप आतंकवाद के साथ हो?’ इस पर सचमुच बगले झांकते दिखे चीनी प्रधानमंत्री।

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नरेंद्र मोदी नंबर वन पर

Posted on 03 January 2011 by admin

भाजपा ने अपने मुख्यमंत्रियों के काम-काज का विश्लेषण और उनकी रेटिंग करवाई है और यह काम एक स्वतंत्र एजेंसी ने किया है। गवनर्ेंस व सफल प्रशासक के तौर पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से बाजी मार ली है (ऐसे सर्वेक्षण भाजपा समय-समय पर करवाती रहती है) वे नंबर वन भगवा मुख्यमंत्री साबित हुए हैं, सबसे अच्छी बात तो यह है कि मोदी के राज-काज में भ्रष्टाचार न के बराबर है। दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमण सिंह आए हैं। छत्तीसगढ़ में नौकरशाहों के स्तर पर भ्रष्टाचार हर जगह मौजूद है, पर गवर्नेस के स्तर पर रमण सिंह ने अपनी सरपरस्ती काबिज रखी हुई है, उनकी इमेज भी साफ-सुथरी है और उनके राज में जन कल्याणकारी योजनाएं बदस्तूर परवान चढ़ रही है। जन वितरण प्रणाली के मामले में तो छत्तीसगढ़ अब भी अव्वल बना हुआ है, हर व्यक्ति को निर्धारित सरकारी चावल का कोटा उन्हें ससमय मिल जाता है, रमण सिंह के कंप्युटर में हर शहर-हर गांव के एक-एक व्यक्ति का ब्यौरा दर्ज होता है कि किस तारीख को कितने बजे किस अधिकारी के मार्फत उस व्यक्ति को राशन मिला है, यानी राशन के घपले व काला बाजारी की गुंजाइश नहीं के बराबर है। शिवराज सिंह चौहान सरकार का प्रदर्शन भी जस का तस बना हुआ है, वहीं कहीं झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा अपनी नई पारी बहुत संभल-संभल कर खेल रहे हैं, अपने पूर्ववर्ती मधु कौड़ा का हश्र वे देख चुके हैं, चुनांचे वे अपना हर कदम बड़ा-फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। भ्रष्टाचार के मामले में जहां कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा नंबर वन पर हैं, तो उत्तराखंड की निशंक सरकार भी भ्रष्टाचार के मामले में किसी से पीछे नहीं है, निशंक की सरकार के बारे में इन दिनों यह कहावत खासा मशहूर है कि अगर मुख्यमंत्री भी अपने पीए का ट्रांसर्फर कहीं और करवाना चाहे तो इसके लिए भी उन्हें रिश्वत देनी पड़ेगी।

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फंडा जेपीसी का

Posted on 03 January 2011 by admin

संसद का बजट सत्र सिर पर है, चुनांचे संसद में चल रहे गतिरोध को लेकर अब सरकार गंभीर दिख रही है। लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार की सक्रियता भी सरकार की इसी सोच को दर्शाती है, लोकसभा स्पीकर के चैंबर में जब अडवानी व नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज प्रणव मुखर्जी से बतिया रहे थे तो अचानक प्रणव दा के मुंह से निकला-‘सुषमा जी, आखिर जेपीसी मिलने से आपका क्या फायदा हो जाएगा?’ तो सुषमा का त्वरित जवाब हाजिर था-‘कम से कम संसद चल जाएगी’ इस पर बगले झांकते दिखे प्रणव दा। सुषमा ने मामले को तनिक संभालते हुए प्रणव मुखर्जी से जानना चाहा कि आखिरकार जेपीसी (संयुक्त संसदीय कमेटी) में बुराई क्या है? एनडीए शासनकाल में जब कांग्रेसनीत विपक्ष ने पेप्सी-कोक के मुद्दे पर जेपीसी की मांग की थी तो भाजपा केवल दस मिनट में जेपीसी पर सहमत हो गई थी, तब भाजपा ने सोनिया गांधी से आग्रह भी किया था कि इस जेपीसी को चेयर वह करें, जबकि मान्य परंपराओं के मुताबिक जेपीसी को चेयर करने का हक सत्ताधारी दल के पास ही होता है। तब कांग्रेस ने फैसला करके अपनी ओर से शरद पवार का नाम आगे किया था, संसदीय इतिहास में तब पहली बार किसी विपक्षी नेता ने जेपीसी को चेयर किया था, लिहाजा सुषमा अपने चिरपरिचित प्रखर अंदाज में प्रणव समेत सत्ताधारी दल के नेताओं से बस यही जानना चाहती थी कि अगर तब जेपीसी गलत नहीं थी तो आज कांग्रेस को जेपीसी की मांग इतनी गलत क्यों लग रही है?

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तमिलनाडु में राहुल

Posted on 30 December 2010 by admin

तमिलनाडु में राहुल गांधी द्वारा दिए गए उस बयान में कई गूढ़ सियासी निहितार्थ समाहित हैं, जब उन्होंने कहा कि ‘वह दिन आएगा जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होगी’ जैसा कि मालूम था कि केंद्र सरकार चलाने में कांग्रेस की सहयोगी दल डीएमके इस बयान पर खासा हाय-तौबा मचाएगी, जिसके फौरन बाद राहुल के बयान का खंडन आ गया जबकि इससे पूर्व राहुल एक-एक करके तमिलनाडु के कांग्रेसी विधायकों से मिलकर इस बात की संभावना टटोल चुके थे कि अगर तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अकेले मैदान में उतरती है तो इसका अंजाम क्या होगा, राहुल इससे पूर्व अन्नाद्रमुक के एक प्रमुख नेता व सांसद मैत्रियन के साथ (जो जयललिता के बेहद करीबी हैं)भी एक लंबी गुपचुप मीटिंग कर चुके थे, यानि तमिलनाडु को लेकर राहुल के दिमाग में अलग सा कुछ पक रहा है।

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