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सोनिया के लिए ‘सोंणे’ नहीं रहे मनमोहन

Posted on 23 February 2011 by admin

कांग्रेस के सियासी अंत:पुर से दबे पांव चुपचाप यह खबर लरजते लफ्जों से आगे बढ़ी तो सियासत के जानकारों को बमुश्किल इस पर भरोसा हुआ, चुनांचे सवाल बड़ा था कि अपनी भाव-भंगिमाओं से वफादारी का सदैव इतना वजनी लबादा ओढ़ने वाले सरदार मनमोहन सिंह भी किंचित ऐसा कर सकते हैं क्या? क्या वाकई उनकी अपनी ‘मेंटर’ सोनिया गांधी से इस कदर ठन सकती है? पर दस जनपथ से जुड़े भरोसेमंद सूत्र इस बात की पुष्टि करते हैं कि 7 रेसकोर्स और 10 जनपथ के बीच भले ही जाहिरा तौर पर तलवारें नहीं खिंची हों, मगर इनके बीच भरोसे की मजबूत नींव अब डगमगाने लगी है। सो, यह अनायास नहीं है कि यूपीए-2 के राजकाज में मैडम गांधी की दिलचस्पी इतनी कम होती जा रही है।

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अपनी धुन में हैं वरुण

Posted on 08 February 2011 by admin

अब जिक्र राजमाता और युवराज का हो रहा है तो देश के पहले राजनीतिक परिवार के एक निर्वासित राजकुमार का जिक्र भी लाजिमी हो जाता है। फिरोज वरुण गांधी फिलवक्त भगवा पार्टी के देदीप्यमान सितारे हैं, इसी छह मार्च को उन्हें वाराणसी के शंकराचार्य के आश्रम में अपने पुराने दिनों की प्रेमिका यामिनी के साथ विवाह बंधन में भी बंधना है। वरुण नई दिल्ली के होटल अशोक के लॉन में 8 तारीख को अपनी शादी का एक जोरदार ‘रिसेप्शन’ भी दे रहे हैं, जिसमें सोनिया, राहुल व प्रियंका के आने की उम्मीद जताई जा रही है। पर उससे पहले यूपी में सियासी महाभारत के लिए अपने को तैयार कर रहे हैं, अपने स्व. पिता संजय गांधी के नक्शेकदम पर चलते यूपी के राजाओं को अपने पक्ष में कर रहे हैं वे, कभी कांग्रेस में रहे राजा सहसपुर बिदारी चंद्र विजय सिंह, सपा से ताल्लुकात रखने वाले राजा साहब बांसी, राजा साहब भिनगा, बहराइच, राजा साहब भदावर और बसपा सांसद रह चुके राजा साहब मनकापुर वरुण के शुभचिंतकों की टोली में शामिल हो चुके हैं। अभी इस तीन फरवरी को बिजनौर के नुमाईश ग्राउंड में राजा बिजनौर कुंवर भारतेंदु सिंह ने वरुण के लिए एक ऐतिहासिक रैली आयोजित की जिसमें 30-40 हजार लोगों की भीड़ जुटी। 17 फरवरी को पढरौना के कुशीनगर में वरुण की एक और रैली है। वहां के राज परिवार से वरुण की रिश्तेदारी होने जा रही है, पढरौना के कांग्रेसी सांसद आर.पी.एन.सिंह की मां और वरुण की होने वाली पत्नी यामिनी की मां ‘फर्स्ट कजिन’ हैं।

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राहुल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष

Posted on 08 February 2011 by admin

कांग्रेसी राजमाता सोनिया गांधी ने 65 वर्ष की आयु के बाद पदमुक्त होने की घोषणा की है, कांग्रेस में इसे एक बड़े बदलाव का आगाज माना जा रहा है। शायद यह बदलाव की बयार कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी के चरणरजों से भविष्य की कांग्रेस का इस्तक्बाल करे। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि अब मां चाहती हैं कि वक्त आ गया है कि उनके पुत्र का बतौर कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष राजतिलक किया जाए। राजमाता की हर इच्छा का सम्मान ही कांग्रेस की पुरानी परंपरा रही है।

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थॉमस को पुनर्वास पैकेज

Posted on 08 February 2011 by admin

विपक्ष से और पंगा लेने के मूड में नहीं है यूपीए सरकार, खास कर सीवीसी थॉमस को लेकर नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के उग्र तेवरों को देखते हुए कांग्रेस ने लगभग हथियार डाल दिए हैं। थॉमस के नाम पर और किरकिरी नहीं, चुनांचे उनकी रुखसती की तैयारियां शुरू हो चुकी है। पर सरकार थॉमस को नाराज भी नहीं करना चाहती, क्योंकि एक तो वे सीरियन कैथोलिक क्रिश्चियन हैं, और उनकी 10 जनपथ से नजदीकियां भी जगजाहिर है, लिहाजा उन्हें एक ‘पुनर्वास पैकेज’ ऑफर किया गया है, इस पैकेज के मुताबिक थॉमस चाहे तो यहां से पदमुक्त होने के बाद या तो वे योजना आयोग के सदस्य बन सकते हैं, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हो सकते हैं या फिर पोर्ट ट्रस्ट के चैयरमैन हो सकते हैं, पर थॉमस ने फिलवक्त इन तीनों पेशकश को नामंजूर कर दिया है, वे ‘गवर्नर’ पोस्ट से कम पर राजी नहीं, हालात-ए-मजबूरी में यह भी मुमकिन है।

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अलग होता अगप

Posted on 02 February 2011 by admin

असम में भाजपा की मुसीबतें बढ़ती जा रही है, लगता है तरुण गोगोई के हाथ वाकई लंबे हैं, उन्होंने असम गण परिषद पर डोरे डाल दिए हैं, लगता नहीं कि आसन्न विधानसभा चुनावों में वहां भाजपा व अगप का चुनावी गठबंधन हो पाएगा। अगप तर्क दे रही है कि अगर वे भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो कांग्रेस को एकमुश्त मुस्लिम वोट मिल जाएंगे और अगर अगप अकेले चुनाव में जाती है तो मुस्लिम वोटरों का एक अच्छा प्रतिशत उसकी ओर भी मुखातिब हो सकता है…दिल बहलाने को ख्याल अच्छा है।

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संकट में येदुरप्पा

Posted on 02 February 2011 by admin

कर्नाटक के राज्यपाल ने वहां के मुख्यमंत्री येदुरप्पा पर मुकदमा चलाने की अनुशंसा दे दी है। कानून कहता है कि यदि एक बार अनुशंसा हो जाए तो फिर इसे वापिस नहीं लिया जा सकता है। यानी जैसे ही एकबारगी येदुरप्पा पर मुकदमेबाजी शुरू हुई भाजपा उनकी जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाने का प्रयास करेगी, जिसके लिए येदुरप्पा शायद ही राजी हों, चुनांचे वैसी सूरत में वे बागी तेवर अपना सकते हैं, और अपने खास विधायकों के समर्थन से भगवा पार्टी में टूट करा सकते हैं, यानी कांग्रेस का ‘गेमप्लॉन’ बिल्कुल लाइन पर है, यानी एक बार कर्नाटक में यह सब नाटक शुरू हुआ तो भाजपा सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी और गिनती के खेल में कांग्रेस का तो कोई सानी नहीं।

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नेता प्रतिपक्ष का पक्ष

Posted on 02 February 2011 by admin

सीवीसी थॉमस की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज का हलफनामा यूपीए सरकार की ‘पोल खोल’ कड़ी का एक अहम अध्याय है। सरकार की ओर से देश के अटार्नी जनरल कोर्ट को बताते हैं कि कमेटी के सदस्यों को थॉमस के खिलाफ केस की जानकारी नहीं थी। जबकि 3 सितंबर 10 को जब नए सीवीसी की नियुक्ति के लिए गठित कमेटी (इस कमेटी में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री व नेता प्रतिपक्ष शामिल रहते हैं) की बैठक बुलाई गई तो पैनल में तीनअधिकारियों के नाम शामिल थे – थामस, पेट्रोकेमिकल सेक्रेटरी चटर्जी, सेक्रेटरी फर्टिलाइजर कृष्णन। बैठक शुरू होते ही सुषमा ने अपनी राय से पीएम व चिदंबरम को अवगत करा दिया कि थॉमस के नाम पर उन्हें आपत्ति है, क्योंकि पॉमोलिन ऑयल कांड में थामस के खिलाफ केस है। इस पर चिदंबरम ने कहा कि थॉमस उस केस से बरी हो चुके हैं, सुषमा ने अपने अंदाज में चुनौती उछाली कि ये मीटिंग 24 घंटे के लिए स्थगित कर मामले की जांच करा ली जाए। इस पर पीएम ने कहा कि यह निर्णय आज ही होना है। ठीक इसके पंद्रह मिनट बाद पृथ्वीराज चव्हाण एक पत्र बनवा लाए जिसमें लिखा था कि ‘बहुमत से सीवीसी के लिए थॉमस का चयन किया जा रहा है पर इससे नेता प्रतिपक्ष सहमत नहीं हैं।’ इस पत्र पर तीनों यानी पीएम, चिदंबरम व सुषमा के हस्ताक्षर होने थे, सुषमा ने उस पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए अपने हाथों से लिखा-‘आइ डिसएग्री'(मैं असहमत हूं), पर आजाद भारत में लोकतंत्र की एक नई परिपाटी कायम करने को उतारू सत्तारुढ़ दल के पास ऐसी असहमतियों पर कान धरने के लिए कितना वक्त है, थॉमस प्रकरण इसकी सबसे मौजूं मिसाल है।

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चलेगी संसद

Posted on 26 January 2011 by admin

लगता है संसद का आगामी बजट सत्र सुचारू रूप से चलेगा, क्योंकि स्वयं सरसंघचालक ने भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं से बातचीत कर यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए हैं कि ‘आपकी 2जी पर जेपीसी की मांग जायज है पर आप संसद चलने दें, क्योंकि संसद नहीं चलने देने से देश की जनता में गलत संदेश जा रहा है।’ अब भाजपा नेतृत्व सरसंघचालक की नसीहतों पर गंभीरता से अमल करने की सोच रहा है।

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वीरता दिखाओ वीरप्पा

Posted on 26 January 2011 by admin

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में एक अघोषित जंग छिड़ी हुई है, सॉलिसिटर जनरल और देश के कानून मंत्री में। हैरान परेशान मोइली बार-बार सॉलिसिटर जनरल गोपालास्वामी से पूछ रहे हैं कि 2जी के मामले में प्रधानमंत्री के शपथ पत्र की बात कर आपने सरकार को क्यों लाित किया? पर गोपालास्वामी ने एक लंबी चुप्पी का आवरण ओढ़ रखा है, वह कोई जवाब नहीं दे रहे है, पर कांग्रेसी राजमाता सोनिया गांधी से उनके रिश्ते अब भी उतने ही मधुर हैं और उनकी नियमित तौर पर मैडम गांधी से मुलाकातें-बातें भी होती है। गोपालास्वामी अटार्नी जनरल या जज बनना चाहते हैं, पर उनके खिलाफ मोइली और देश के अटार्नी जनरल वाहनवती ने मोर्चा खोल रखा है।

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निशंक को लागा डंक

Posted on 26 January 2011 by admin

देहरादून में बन रहे एक शानदार फाइव स्टार होटल ने मुख्यमंत्री निशंक की पेशानियों पर बल ला दिए हैं, भाजपा के दिग्गज मुरली वाले बाबा की एक अंतरंग डॉक्टर मित्र से भिड़ना मुख्यमंत्री के लिए भारी पड़ गया, सनद रहे कि यह महिला डॉक्टर दिल्ली के एक बड़े कॉरपोरेट हाउस के लिए लॉबिंग करती हैं। जब डॉक्टर मुहतरमा अड़ गईं कि देहरादून के इस पंचतारा होटल के लिए सरकारी जमीन पर ही रास्ता बनेगा और वहां के डीएम से भी उनकी तू-तू मैं-मैं हो गई, तब निशंक ने वहां के डीएम का पक्ष लेकर डॉक्टर मुहतरमा को डपट दिया था, पर जब बाद में मुरली वाले बाबा ने खंडूरी व कोश्यारी से मिलकर निशंक के खिलाफ नई सियासी व्यूह रचना रच दी तो निशंक को घुटनों पर आना पड़ा, उन्होंने दिल्ली आकर बकायदा बाबा के पैर छूकर उनसे माफी मांगी, बाबा ने कहा कि अगर माफी ही मांगनी है तो उनसे मांगो जिनको आपने अपने व्यवहार से आहत किया है, मजबूरन मुख्यमंत्री जी को डॉक्टर मोहतरमा के घर जाकर उनसे माफी मांगनी पड़ी, तब ही उन्हें फौरी अभयदान मिल सका।

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