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जूनियर क्वात्रोच्चि भारत में

Posted on 15 March 2011 by admin

बोफोर्स केस भले ही बंद हो चुका हो, पर भारतीय सेना में न तो बोफोर्स तोपों का ही मुंह बंद हुआ है और न ही क्वात्रोच्चि खानदान का भारत आना-जाना। क्वात्रोच्चि के बेटे को अक्सर भारत में देखा जा सकता है, उनका कार्यक्षेत्र बंगलुरु है, चुनांचे उसका सबसे ज्यादा ट्रिप तो वहीं का लगता है। गांधी परिवार से भी रिश्तेदारी बदस्तूर जारी है, अपने पिता के ही नक्शेकदम पर चलकर वह अक्सर गांधी परिवार से मिलते-जुलते हैं, मजाल क्या जो उनका कोई बाल बांका कर सके।

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अहमदमय है कांग्रेस की नई लिस्ट

Posted on 15 March 2011 by admin

प्रवासी व परदेसी पंक्षी कांग्रेसी आंगन क्या खूब सियासी दाने चुग रहे हैं। इस बार के संगठनात्मक फेरबदल में कांग्रेस की पूरी नई सूची अहमदमय है, यानी अस्सी फीसदी लोग अहमद पटेल कोटे से हैं। पटेल ने अपने दो चिरंतन विरोधियों दिग्विजय सिंह व ऑस्कर फर्नांडिस से भी हिसाब बराबर कर लिया है। सबसे चतुर तो जनार्दन द्विवेदी निकले जो ऐन वक्त अहमद कैंप में आ गए, तो उनके लोग भी इस नई सूची में उपकृत हो गए। नहीं तो अब से पहले मधुसूदन मिस्त्री का नाम किसने सुना था? वे पहले गुजरात में शंकर सिंह वाघेला की पार्टी में हुआ करते थे, पटेल न सिर्फ उन्हें सीडब्ल्यूसी में लेकर आए अपितु उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव भी बनवा दिया। सलमान खुर्शीद, सत्यव्रत चतुर्वेदी, राजीव शुक्ला का पत्ता साफ होना भी किंचित आश्चर्य पैदा करने वाला है। प्रवेनन राष्ट्रपाल भी अहमद कोटे से आए हैं। जनार्दन के अहमद कैंप में आने की वजह से सत्यव्रत डंप किए गए। इसके अलावा मोहन प्रकाश, गुरचैन सिंह चरक (जम्मू वाले),शकील अहमद, जगदीश टाइटलर, चौधरी वीरेंद्र सिंह, धनी राम शांडिल्य, अनीस अहमद, मिर्जा बेग, मनीष चरकथ, सागर रायका, दीपक बाबरिया, पंकज शर्मा, परवेज हाशमी, ये सभी अहमद पटेल की पैरवी से आए हैं। संजय निरूपम की पैरवी जनार्दन द्विवेदी ने की है। पंकज शर्मा पहले जनार्दन के साथ हुआ करते थे, वहां से निकाला मिला तो अहमद कैंप में घुस आए। यानी जिधर देखो हर तरफ अहमद का जलवा है।

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सिंह साहब का प्रमोशन

Posted on 08 March 2011 by admin

सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर वाई.पी.सिंह जो 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के प्रभारी थे, उन्होंने आनन-फानन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब वे रवि समाणी की जगह आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद, शरद पवार जिसके मुखिया हैं) के भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के मुखिया बन गए हैं। इस नई नौकरी में मजे ही मजे हैं, आईसीसी के खर्चे पर दुनिया घूमिए, चाहे तो सीधे खिलाड़ियों के कमरे-उनके ड्रेसिंग रूम तक घुस जाइए, डॉलर में मोटी तनख्वाह, भत्ते और न जाने क्या-क्या। दुबई में रिहाईश, दुबई में दफ्तर। क्या अवार्ड मिला है, जरूरी नहीं कि अब हर बात के पीछे बलवा-कनेक्शन ही ढूंढा जाए और 2जी केस में एक आईओ को थाणे जिला में एसपी की पोस्टिंग मिल गई है, तो ऐसे में सिंह साहब का भी तो कुछ बनता है न!

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राहुल का फिटनेस मानिया

Posted on 08 March 2011 by admin

अपने जीजा रॉबर्ट वढेरा की तरह राहुल गांधी भी फिटनेस-मानिया से ग्रस्त हैं। एक समय तो राहुल व रॉबर्ट में शर्त लगी थी कि कौन कितनी जल्दी अपना वजन कम करता है, राहुल राजनैतिक दौरों में ज्यादा मसरूफ रहे, रॉबर्ट दिल्ली में रहकर नियमित तौर पर जिम जाते रहे सो उन्होंने बाजी मार ली। पर राहुल ने फिटनेस की जिद नहीं छोड़ी, हरदोई के पुलिस लाइन में वे रात के पौने एक बजे जॉगिंग करते देखे गए, जब वे अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी के दौरे पर होते हैं तो अपने सारे कार्यों से फारिग होकर रात के बारह-एक बजे भी मुंशीगंज में जॉगिंग पर निकल जाते हैं। केरल में भी यही हुआ, राहुल वहां के दौरे पर थे और रात में फारिग होकर जॉगिंग पर निकल गए, वह कोई समतल जॉगिंग ट्रैक तो था नहीं, उबड़-खाबड़ जमीन थी, उनका दाएं पैर एक गड्डे में गया और उनका पैर मुड़ गया। तब राहुल का लगा कि यह मामूली मोच है, सो अगले दिन वे दिल्ली आए तो रेल बजट के दौरान संसद भी चले गए, पर जब पैर की सूजन बढ़ती ही चली गई तो डॉक्टर की सलाह पर एक्सरे कराया तो पैर में मामूली सा ‘हेयरलाइन फैक्चर’ निकल आया। सो अब वे अपना सब काम-धाम छोड़कर घर पर आराम फरमा रहे हैं।

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गांधी परिवार में दोस्ती का नया आगाज

Posted on 08 March 2011 by admin

गांधी परिवार में रिश्तों की बानगी पर संभावनाओं के नए अंकुर फूट रहे हैं, पुराने दिनों की कड़ुवाहट भुलाकर गांधी-नेहरू परिवार की नई पीढ़ी अपने संबंधों के नए आयाम तलाशने में जुटी है। शुरूआत वरुण गांधी की तरफ से हुई जब वे अपनी शादी का कार्ड देने ताई सोनिया के पास पहुंचे, शुरूआती पलों के तनाव क्या पिघले, सोनिया वरुण से घंटों बतियाती रही। चिलगोजे, उनकी पसंद की कॉफी यानी सोनिया ने हर तरह से वरुण का ध्यान रखना चाहा। सोनिया ने फिर 7 मार्च को ही वरुण को सपत्नीक अपने यहां डिनर पर आमंत्रित किया, इस बीच वरुण की नानी गुजर गईं, तो शोक व्यक्त करने के लिए राहुल का फोन आ गया, फिर जो बातों का सिलसिला शुरू हुआ, वह लंदन के दिनों के प्रवास की यादें ताजा कर गई, जब पढ़ाई के दिनों में राहुल व वरुण लंदन में साथ रहते थे। केरल में जॉगिंग के दौरान राहुल अपना पैर तुड़वा बैठे हैं (दाएं पैर में हेयरलाइन फैक्चर है) सो, वो चाहकर भी आज बनारस नहीं आ पा रहे हैं। प्रियंका भी अपने पति और बच्चों के साथ बनारस जाने को तैयार थीं कि ऐन वक्त उन्हें वायरल फीवर ने आ घेरा। खैर, वे अपने फॉर्म हाउस पर इस नव-दंपत्ति के लिए एक डिनर रख रही हैं। वरुण की शादी का रिसेप्शन 8 तारीख को नई दिल्ली के अशोक होटल में होना था जो उनकी नानी के निधन की वजह से कैंसिल हो गया, अन्यथा उसमें सोनिया के आने की संभावना जताई जा रही थी। गांधी परिवार के लिए दिल व परिवार के मिलन की बेला है यह, क्या सियासत की विपरीत धाराओं का भी संगम होगा?

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मैं अपनी ‘बेस्ट फ्रेंड’ से कर रहा ह् शादी-फिरोज वरुण गांधी

Posted on 05 March 2011 by admin

वरुण गांधी से त्रिदीब रमण की खास बातचीत-
नई दिल्ली, 05 माच

किसी भी मीडियाकर्मी से अपनी शादी, अपना प्यार और अपने परिवार के बारे में वरुण गांधी ने पहली बार एक लंबी अनौपचारिक बातचीत की
नई दिल्ली का 14 अशोक रोड, शाम के साढ़े छह बजे हैं, आम तौर पर मुलाकातियों की धकमपेल से तरबतर रहने वाले बाहरी कमरे की लाइट तक नहीं जल रही। कमरे के साथ वाले दफ्तर में वरुण के निजी सचिव आनंद चौधरी हमेशा की तरह आज भी फोन पर लगे हैं। शादी की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं, शनिवार को तीन छोटे चार्टर्ड विमान से गांधी-परिवार के कुछ खास अतिथि बनारस के लिए उड़ान भरेंगे। हम और आगे बढ़ते हैं वरुण के कमरे की ओर, हर तरफ पसरा है एक असहज सा नीरव सन्नाटा, वरुण सामने हैं, अभी-अभी नहा कर आए हैं, पर पहले-सी गर्मजोशी नहीं है, मन व्यथित है, आंखें उदास, रविवार को ही दूल्हे का सेहरा सजना है, पर नानी के ना होने का गम उन्हें कहीं अंदर तक साल रहा है, तब तक खाना आ जाता है, शाम में वे इतनी ही जल्दी खा लेते हैं, मूंग की दाल, ब्रोकली-बेबीकॉर्न की उबली हुई सब्जियां,…वे आग्रहपूर्वक कहते हैं आप भी खाइए न! और उसी दरम्यान बातचीत का क्रम भी शुरू हो जाता है।

जब यामिनी से मिला
जब एक कॉमन फ्रेंड के मार्फत मैं पहली बार यामिनी से मिला तो वह कॉलेज में पढ़ रही थी, दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में। बहुत साधारण-सी एक लड़की, इतने असाधारण रूप से किसी को लुभा सकती है मैंने कभी सोचा नहीं था। एक नेक, सीधी, सच्ची लड़की, जो दिखावे में भरोसा नहीं करती है, दुनिया की भौतिकता के पीछे भागने में उसका विश्वास नहीं है, शुध्द शाकाहारी। ठीक मेरी तरह।

…और मुझे प्यार हो गया
यह बात कोई सन् 2004 की है, यामिनी से मिलना-जुलना लगा हुआ था, फोन पर भी बातें हो जाती थी, धीरे-धीरे मुझे लगने लगा मेरे दिल में उसके लिए कुछ खास है। एक दिन वह भी आया जब मुझे लगा कि मैं किसी के प्यार में हूं। सबसे पहले मैंने अपनी नानी को अपने दिल की बात बताई तो उन्होंने कहा कि दिल की बात दिल में रखने से अच्छा है कि वह सामने वाले से कह दिया जाए।

प्यार का इजहार
मैंने अपने दिल को मजबूत किया, खुद को तैयार किया और फूलों का एक सुंदर-सा गुलदस्ता लेकर यामिनी से मिलने निकल पड़ा। उसने मेरे हाथों से फूलों का वह गुलदस्ता ले तो लिया, पर कहा कि ‘एक बार जो फूल डालियों से टूट गए फिर उनमें जीवन कहां रह जाता है, तो हम एक नए रिश्ते की शुरूआत मृत फूलों से क्यों करें।’ मैं सोचता ही रह गया, मुझे लगा कि इस लड़की में कुछ बात है, जीवन को देखने का एक अलग नजरिया है। लिहाजा अगले ही दिन मैं आम का एक छोटा-सा पौधा लेकर उसके घर पहुंच गया। फिर हम दोनों ने मिलकर उस पौधे को उसके घर के बगीचे में लगाया। आज वह नन्हा-सा पौधा एक भरा-पूरा पेड़ बन चुका है, इस मौसम में वह मंजरों से सजा हुआ है, ठीक हमारे रिश्तों की तरह, इसमें प्यार के फूल निकल आए हैं।

जब मैंने उसे प्रपोज किया
हमारे रिश्ते को सात साल पूरे होने को आए थे, वह अक्सर मेरे घर पर भी आती-जाती थी, मेरी मां, नानी और मासी को खूब भाने लगी थी वह। जैसे हमारे घर की ही एक सदस्य बन गई थी। मुझे उसमें सबसे अच्छा लगता था कि उसकी कोई डिमांड नहीं होती थी, जब भी वह मेरे आसपास होती थी मुझे बड़ा ही आत्मबल मिलता था। मेरे अच्छे और बुरे दिनों में वह सदा एक सी रही, न मैं उसके लिए बदला और न ही मेरे प्रति उसका प्यार बदला। मैंने अंतत: अपनी मां से जानना चाहा कि ‘यामिनी उन्हें कैसी लगती है?’ बेहद ‘संस्कारवान’। मैंने अपनी मां की आंखों में एक अनोखी चमक देखी। मैंने पूछा-‘क्या अपनी बहु के रूप में आप उसे स्वीकार करेंगी?’ भाव-विह्वल हो गई मेरी मां, मैंने उनकी आंखों में खुशी के आंसू देखे। मैंने उसी पल तय कर लिया कि बस अभी जाकर यामिनी को प्रपोज करना है और मैंने वही किया। आज मैं इस बात को लेकर सबसे ज्यादा खुश हूं कि मैं अपनी बेस्ट फ्रेंड से शादी कर रहा हूं। हम दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति बहुत सम्मान का भाव है।

बहुत अच्छी कुक है वह
क्या खूब खाना बनाती है, रसोई में रहना उसे बेहद पसंद है। उसके हाथों का खा-खाकर ही इन सात-सालों में मैं इतना मोटा हो गया। अब जाकर शादी के ऐन मौके पर अपना वजन कुछ कम कर पाया हूं। मुझे यामिनी के हाथों की अरहर की दाल, बैंगन कार् भुत्ता, खट्टे-मीठे आलू और बैंगन का रायता बेहद पसंद है। वैसे तो यामिनी को आऊटिंग का बहुत शौक नहीं पर ताज पैलेस होटल का इंडियन रेस्तरां, ‘वर्थ’, इम्पीरियल का ‘स्पाइस रूट’ और अशोका का ‘मशराबिया’ हम दोनों को बहुत पसंद है। पर हमें घर का बना खाना ज्यादा भाता है।

राहुल व प्रियंका नहीं जा पा रहे बनारस
अच्छा लगता अगर भाई राहुल और बड़ी बहन प्रियंका भी मेरी शादी में सम्मिलित हो पाते। राहुल जी से फोन पर बातें हुई, वे बनारस जाना चाहते थे पर इसीलिए नहीं जा पा रहे कि उनके दाहिने पैर में हेयरलाइन फैक्चर आ गया है, बनारस से वापिस लौटकर उनसे मिलने जाऊंगा। प्रियंका जी बनारस जाने के लिए खासी उत्साहित थीं, पर ऐन वक्त उन्हें वायरल फीवर हो गया है, सो वह भी नहीं जा पाएंगी। पर बाद में जब वह स्वस्थ हो जाएंगी तो हम नव दंपत्ति के लिए अपने फॉर्म हाउस पर एक डिनर देंगी। अपनी ताई सोनिया जी को आमंत्रित करने मैं खुद गया था, उन्होंने मुझे बहुत स्नेह दिया। मेरी नानी के दुखद निधन की वजह से हमें दिल्ली में 8 तारीख को आयोजित होने वाला अपने शादी का रिसेप्शन कैंसिल करना पड़ा वरना उसमें जरूर आतीं वह। मैं जानता हूं यह हमारा परिवार है और मैं अपने परिवार का उतना ही लाडला और स्पेशल हूं।

नहीं होगा हरि जी का बांसुरी वादन
मेरी शादी के मौके पर प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जी के बांसुरी वादन का प्रोग्राम था, पर नानी के निधन के चलते उसे कैंसिल करना पड़ा। यह प्रोग्राम हमारे बनारस के ताज गैंजेस होटल में ही होना था, दुख है कि हमारे परिवार के लोग पंडित जी के अनोखे संगीत के आस्वादन से वंचित रह गए। इसके अलावा हमारा शाम को गंगा आरती देखने का भी प्रोग्राम था, पर अब हम वहां भी नहीं जा रहे। हम रविवार को शादी की सुबह ही शादी की रस्म खत्म होते ही वापिस दिल्ली लौट आएंगे। पर हम बनारस में मां आनंदमयी आश्रम अवश्य जाएंगे, उन्होंने मेरी दादी को मेरे पिता और मां की शादी के लिए राजी किया था।

शंकराचार्य जी के आश्रम में होगी शादी
6 तारीख यानी रविवार की सुबह 7.12 मिनट पर शादी का मर्ुहुत्त निकला है। स्वयं शंकराचार्य जी हमारा विवाह करवाएंगे। यामिनी मेरी मां की दी हुई वही साड़ी पहनेंगी जो मेरी मां ने अपनी शादी के वक्त पहनी थी। यह साड़ी मेरी नानी ने तब एक लाख रुपयों में खरीदी थी। मैं रोहित बल का डिजाइन किया हुआ क्रीम-कलर का धोतीर्-कुत्ता पहनूंगा जिसका बार्डर गोल्डन कलर का है, उस पर एक अंगवस्त्रम् भी होगा (फिर वे उठकर यह कपड़े दिखाते हैं) मेरी मां पिंक कलर की साड़ी पहनेंगी। बर्मिस रुबी की वह ज्वैलरी भी पहनेंगी जो उन्होंने अपनी शादी में पहनी थी।

जो लोग शादी में शामिल होंगे
यहां दिल्ली से कुल 15 लोग जा रहे हैं जिसमें मैं-यामिनी, मेरी मां, मेरी मासी, मासी के दो बच्चे, मेरे छुटपन के दो दोस्त, यामिनी की मां, मौसी और उनकी मौसरी बहन। पंडित नेहरू के कजिन अशोक और मालती नेहरू। इसके अलावा जो लोग बनारस पहुंचेंगे, वे हैं-राजा साहब बांसी विजय प्रताप सिंह, राजा साहब साहनपुर (बिजनौर), राजा साहब मुरादाबाद चंद्र विजय सिंह, काशी नरेश, बनारस के मेयर कौशलेंद्र जी, राजा साहब मनकापुर, आर.पी.एन.सिंह जी जो यामिनी की मां के कजिन भी हैं।

अपनी नानी के बारे में
वह मेरे लिए सब कुछ थीं, मां से भी कहीं बढ़कर। मेरी मां मेरे जन्म के बाद से ही राजनैतिक और सामाजिक कार्यों में व्यस्त हो गईं। मुझे मेरा बचपन, मां का मातृत्व सब नानी से ही मिला। मुझे खुशी है कि उनके जीवन के आखिरी दिनों में मैंने उनके साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताया, उन्हें फ्लोरेंस देखने का मन था मैं उनके साथ छुट्टियां बिताने इटली गया। 28 फरवरी को जब उन्होंने आखिरी सांसें ली एम्स में, तो उनका सिर मेरी गोद में था, उनके हाथों को मैंने अपने हाथों में कसकर पकड़ रखा था। मैं अपनी जिंदगी से उन्हें कभी जाने नहीं देना चाहता था, पर ईश्वर को यही मंजूर था, पर सशरीर न रहकर भी वह सदैव मेरे आसपास ही रहेंगी। मैं जानता हूं, मेरी शक्ति बनकर, मुझे भरोसा देती रहेंगी। मैंने हर पल उनसे बस यही कहा कि मैं उन्हें कितना चाहता हूं…अब भी उनसे यही कहना चाहता हूं कि मैं उन्हें कितना चाहता हूं… जब वह स्वर्ग में कहीं से मुझे देख रही होंगी।

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ऐसे मिले सोनिया-मनमोहन

Posted on 27 February 2011 by admin

दस जनपथ और सात रेसकोर्स के संबंधों में पिछले दिनों काफी असहजता देखी गई, पर एक मौका अभी ऐसा भी आया जब संबंधों पर जमी बर्फ तनिक पिघली, मौका था सोनिया वफादार सुमन दुबे के पुत्र की शादी के रिसेप्शन का। दुबे के पुत्र किसी बहुराष्ट्रीय बैंक में अच्छे पद पर कार्यरत हैं, उनका दिल एक पत्रकार मलयाली युवती पर आ गया, युवती के पिता गोपाल सुब्रह्मण्यम पीएमओ में अतिरिक्त सचिव हैं और प्रधानमंत्री के खासे लाडले भी हैं। शादी तो केरल में हुई, पर शादी का रिसेप्शन दिल्ली के धौलाकुंआ में अवस्थित एयरफोर्स ग्राउंड में हुआ। मजे की बात देखिए उस शादी में लड़के वाले की तरफ से सोनिया गांधी अपने पूरे दल-बल के साथ मौजूद थीं, वहीं अपने लाडले अधिकारी की पुत्री की ओर से मनमोहन सिंह और उनका पूरा पीएमओ मौजूद था। सोनिया और मनमोहन जब आमने-सामने थे तो जाहिर है कि उनमें बातें हुईं और जब बात निकली तो फिर दूर

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दीदी के बाद दादा की बारी

Posted on 27 February 2011 by admin

दीदी की ममता बंगाल पर किस कदर बरसी आप देख चुके हैं, अब कल बारी दादा की है, आम बजट पेश करने के मामले में आप दादा को तनिक अंधविश्वासी मान सकते हैं। अपने पूर्ववर्ती वित्त मंत्रियों के मानिंद न तो वे बजट पेश करने के दिन कोई नया सूट पहनते हैं और न ही बजट के कागजातों को रखने के लिए किसी नए ब्रीफकेस का इस्तेमाल करते हैं। इंदिरा गांधी के जमाने में दादा का एक पसंदीदा बैग हुआ करता था, उस वक्त अपने वित्त मंत्रित्वकाल में उन्होंने अपने सारे बजट उसी बैग के हवाले कर संसद लाए थे, बाद में जब उनकी राजीव गांधी से तनातनी हुई और उन्हें कांग्रेस छोड़नी पड़ी तो उस बीच उनका पसंदीदा बैग भी कहीं खो गया। यूपीए 2 में वित्त मंत्री की कुर्सी संभालने के बाद दादा ने एक नया बैग खरीदा और अब से पहले के दोनों बजट इसी बैग के सौजन्य से है, अब तीसरे बजट की बारी है। और तो और दादा अपने लिए कभी कपड़े भी खुद पसंद करने नहीं जाते, यह जिम्मेदारी उन्होंने अपने बेटे पर छोड़ी हुई है, जो इन दिनों अपने लिए बंगाल चुनाव में किसी माकूल सीट को पसंद करने में जुटे हैं।

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दीदी का लाइफ स्टाइल मैनेजमेंट कोर्स

Posted on 27 February 2011 by admin

शुक्रवार को संसद में ममता दीदी को जिसने भी रेल बजट पेश करते देखा (चाहे प्रत्यक्ष अथवा टीवी पर) वे सभी एकबारगी दीदी के दमकते चेहरे को देखकर चौंक गए। कहां गया वह झाईंयों वाला चेहरा? दीदी के इस सारे मेकओवर का श्रेय कोलकाता के एक लोकल डॉक्टर को जाता है, पिछले काफी समय से दीदी उनके सुझावों पर अमल कर रहीं हैं। ब्यूटी प्रोडक्टस पर दीदी का ज्यादा भरोसा नहीं, बस चेहरे पर ‘ऑयल ऑफ ओले’ की क्रीम लगा लेती हैं। पर अपने ‘लाइफ स्टाइल मैनेजमेंट’ के कोर्स पर सख्ती से अमल कर रही हैं, खाने-पीने का पूरा ध्यान रखती हैं, नियम से ट्रेड मिल व रस्सी-कूद करती हैं, पीने में नरियल पानी। अभी पिछले दिनों जब दीदी के गॉल-ब्लॉडर का ऑपरेशन हुआ था तो उनकी डॉक्टरी रिपोर्ट अच्छी नहीं आई थी, पोटेशियम भी काफी नीचे था। जिससे उन्हें नींद नहीं आती थी और कमजोरी रहती थी। अब दीदी शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत रखती हैं, व्रत के अनुसार उस दिन कोई खट्टा नहीं खातीं, रात में मूढी और मटर खाती हैं। बजट पेश करने के बाद शुक्रवार को जब दीदी स्पीकर के चैंबर में गईं तो स्पीकर ने आग्रहपूर्वक उनके लिए खाना मंगवा लिया, पर ममता ने कहा-‘आज तो हमारा संतोषी मां है, आज कुछ नहीं खाएगा।’ और अपने लाइफ स्टाइल मैनेजमेंट कोर्स की इतनी अनुशासित विद्यार्थी हैं कि सुबह संसद आने की जल्दी थी तो उनका ‘ट्रेड मिल’ छूट गया सो, उन्होंने रात वापिस लौटकर इसकी कसर ‘स्कीपिंग’ से पूरी की। यानी सीएम बनने की पूरी तैयारी है।

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आखिर क्यों नाराज हैं सोनिया?

Posted on 23 February 2011 by admin

डा. मनमोहन सिंह के राजतिलक के वक्त सोनिया के मन में उनके बारे में दो बातें प्रमुखता से चल रही थीं, एक तो डा. साहब ईमानदार हैं, दूसरे वह एक जाने-माने अर्थशास्त्री हैं। पर अब सोनिया और उनके सलाहकारों को ऐसा लगता है कि यूपीए-2 आते-आते मनमोहन इन दोनों ही मोर्चों पर विफल साबित हुए हैं। उनकी ईमानदार छवि का क्या करें जब उनकी सरकार ने घोटालों का इतिहास रच दिया हो। हालिया दिनों में ही 3 लाख करोड़ रुपयों से ज्यादा के घोटाले सामने आए हैं। और कैसे अर्थशास्त्री हैं ये वजीरेआजम कि उनके राज में महंगाई ने अपने सारे पूर्र्ववत्ती रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं।

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