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पटेल का खेल

Posted on 28 August 2011 by admin

क्या एक और केंद्रीय मंत्री की बलि चढ़ सकती है? एयर इंडिया के खस्तेहाली को लेकर सीएजी ने अपने ताजा रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का जिक्र किया है, यानी जांच की आंच तब के नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल तक पहु

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बहिनजी कहिन

Posted on 28 August 2011 by admin

यूपी में बहिनजी के सियासी इरादों को पलीता लग सकता है, बहिनजी चाहती हैं कि वहां मई-जून में विधानसभा चुनाव हों, बहिन जी को लगता है कि उस वक्त की झुलसा देने वाली गर्मी में सवर्ण मतदाताओं का वोट देने के लिए बाहर निकल पाना इतना आसान नहीं होगा। महिला वोटरों के लिए भी लू की लक्ष्मण रेखा पार करनी आसान नहीं होगी, जबकि बसपा के कैडर वोट थोकभाव में डले-डाले जाएंगे। वहीं मुलायम सिंह व भाजपा (अन्ना प्रकरण से पहले कांग्रेस की भी यही राय थी) यहां तक कि चुनाव आयोग की भी यही राय थी कि यूपी में चुनाव का पहला चरण फरवरी से प्रारंभ हो जाए।

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राहुल की एक भूल

Posted on 28 August 2011 by admin

‘देश के युवा यहां हैं, राहुल गांधी कहां हैं?’ रामलीला मैदान पर अन्ना के अनशन को समर्थन देने के लिए जुटे युवाओं ने जब यह उद्धोष प्रारंभ किए तो सत्ता के नेपथ्य से संसदीय रंगमंच पर यूं अवतरित हुए कांग्रेसी युवराज जैसे प्रधानमंत्री की लाइन से इतर वे लोकपाल पर एक नया एजेंडा लेकर आए हों। पर शनिवार को अपने उद्बोधन में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने इसे राहुल गांधी का राष्ट्र के नाम संदेश करार दिया। सुषमा ने न केवल राहुल की 5 पन्नों की 15 मिनट की ‘स्पीच रीडिंग’ पर सवाल उठाए अपितु संसदीय प्रक्रियाओं को भी कटघरे में खड़ा किया। नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि माननीय स्पीकर जीरो ऑवर में अव्वल तो ऐसे इंटरवेंशन की अनुमति नहीं देती और अगर ऐसी अनुमति दी भी जाती है तो महज 3 मिनट के लिए, जिसे वक्ता खींच-खाचकर 5 मिनट तक ले जा सकता है। सो विपक्ष को लग रहा है कि राहुल संसद में कांग्रेस की पार्टी लाइन बताने आए थे। विपक्ष खासकर भाजपा को यह भी लगता है कि राहुल प्रधानमंत्री के ‘स्टेट्समैनशिप’ पर पानी फेर गए। अन्ना का अनशन तुड़वाने में कांग्रेस से कहीं ज्यादा विपक्ष की एक महती भूमिका रही। यही एक बात है जो प्रधानमंत्री खेमे को खाई जा रही है।

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वकील तिकड़ी की हेकड़ी

Posted on 21 August 2011 by admin

अब यह वकील तिकड़ी (सिब्बल, चिदंबरम, खुर्शीद) सारा दोष दिल्ली के पुलिस कमिश्नर पर मढ़ रही हैं, इनका मानना है कि कमिश्नर वी.के.गुप्ता अपने भोलेपन में अरविंद केजरीवाल की बातों में आ गए। सनद रहे कि केजरीवाल के कहने पर ही कमिश्नर जेपी पार्क के लिए तैयार हो गए थे, पर 15 अगस्त से ही जिस प्रकार की भीड़ जुटनी शुरू हुई दिल्ली पुलिस ने इसकी कल्पना नहीं की थी।

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कांग्रेस में दरार

Posted on 21 August 2011 by admin

अण्णा मामले पर कांग्रेस के अंदर दरार पड़ चुकी है, चंद वकील कांग्रेसियों की बात जाने दीजिए, नहीं तो ज्यादातर कांग्रेसी इस राय के हैं ‘अण्णा मामले’ में सरकारी तंत्र से नादानी हुई है। सीसीपीए (5 सदस्यीय इस कमेटी में प्रधानमंत्री, प्रणब मुखर्जी, चिदंबरम, कपिल सिब्बल व सलमान खुर्शीद शामिल हैं) कांग्रेसियों की इस आम राय पर हावी हो गया और अण्णा को तिहाड़ में डाल दिया गया, जिसके बाद से लगातार जनभावनाएं सुलगती रहीं। नहीं तो अन्य कांग्रेसियों की राय थी कि अण्णा को या तो किसी गेस्ट हाउस में रखा जाए या फिर हवाई मार्ग से उन्हें उनके गांव रालेगण छोड़ दिया जाए, पर सिब्बल, चिदंबरम व सलमान कड़ी कार्यवाही के पक्ष में थे, प्रधानमंत्री व प्रणब की चुप्पी से उन्हें अपना मनचाहा करने का मौका मिल गया, यानी पार्टी में वकील तंत्र विजयी हुआ और कांग्रेस हार गई।

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मैं भी अण्णा, तू भी अण्णा

Posted on 21 August 2011 by admin

मुख्तसर 74 साल के एक बूढ़े आदमी के अनोखे संकल्प व बला की नैतिक ताकत ने बापू की याद दिला दी है, सोते हिंदुस्तानियों को जगाने के लिए हमारे सिरहाने में दशकों से पसरी उस स्याह रात के चेहरे पर आसमान के कंगूरे से उतार कर दहकते सूरज को रख दिया है, जिससे कि नई फिजां में नया उजाला तमाम बस्ती सजा रहा है…कि फरिश्ता निकला है रोशनी का हरेक रास्ता चमक रहा है, ये वक्त वो है जमीं का हर जर्रां मां के दिल सा धड़क रहा है…अण्णामय होते इस नए भारत के जज्बे को सलाम! सत्ता पक्ष की घिग्गी बंध गई है, मूक हिंदुस्तान को अभिव्यक्ति का नया हथियार मिल गया है! ऐसे में जब दिल्ली के एक बड़े अखबार समूह का संपादक जब यह बताता है कि ‘वह अन्ना क्यों नहीं है,’ इस संपादक का मानना है कि ‘यह विरोध आंदोलन है, कोई क्रांति नहीं, इसकी भावनाओं में मध्य वर्ग का पाखंड है’ तो मालिकों की ठकुरसुहाती भावनाएं ही प्रत्यंचा चढ़ती नजर आती है, मालिकों पर सरकार व कांग्रेस की कई अनुकंपाएं रही है, मालिकों का राज्यसभा में आना-जाना लगा रहा है। अखबार मालिकों के इतर कई और बिजनेस हैं, मसलन रसायन की एक बड़ी फैक्ट्री है, जहां एक खास तरह का रसायन तैयार होता है जो अफीम साफ करने के काम आता है। इस रसायन पर सरकार का नियंत्रण है। सो, फैक्ट्री से निकलते ही रसायन लदे ट्रकों का फाइलों में यदा-कदा एक्सीडेंट होता ही रहता है, रसायन खुले बाजार में बिक सकते हैं, पर जनभावनाएं नहीं। किसी के बहकावे में मत आइए, हर हिंदुस्तानी के अंदर एक अण्णा पहले से मौजूद है, उसे सांस लेने दीजिए, अगर आप चाहते हैं कि हमारा लोकतंत्र जिंदा रहे।

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बसपा-कांग्रेस की खिचड़ी

Posted on 16 August 2011 by admin

कांग्रेस इसे सियासत मानती है और सपा इसे डबल गेम। यूपी विधानसभा चुनाव में एक ओर जहां कुछ कांग्रेसी नेता सपा के साथ अलग खिचड़ी पका रहे हैं वहीं यूपी से जुड़े कुछ कांग्रेसी नेता ऐसे भी हैं जो बसपा के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहे हैं,सो जैसे ही राजीव शुक्ला केंद्र में मंत्री बनते हैं, माया करीबी सतीश मिश्रा शुक्ला को बधाई देने उनके लोदी रोड स्थित निवास पर पहुंच जाते हैं, आय से अधिक संपत्ति मामले में जब मायावती की परेशानियां बढ़ती जाती हैं तो 2 अगस्त, मंगलवार की रात पौने दस बजे सतीश मिश्रा के कदम नए कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के घर की ओर बढ़ जाते हैं, मिलकर जब वे बाहर आते हैं तो उनके चेहरे पर राहत की सांसें होती हैं और आने वाला वक्त इस राहत की पुष्टि भी कर देता है।

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लाल किले में राहुल

Posted on 16 August 2011 by admin

15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से फिर बोलेंगे मनमोहन सिंह। कयास लगाया जा रहा है कि बतौर प्रधानमंत्री शायद यह देश के नाम उनका आखिरी संबोधन होगा। 15 अगस्त के कार्यक्रम में गांधी परिवार की हमेशा से नुमांइदगी रही है। सो, अपनी बीमार मां को अमरीका के ह्यूस्टन के एक अस्पताल में आराम फरमाते छोड़ आए हैं राहुल गांधी। कहते हैं स्वतंत्रता दिवस समारोह और राजीव गांधी के जन्मदिवस के कई समारोहों में हिस्सा लेने के लिए वे स्वेदश लौट आए हैं, उन्हें मालूम है कि शायद अगले वर्ष उन्हें भी इसी प्राचीर के समक्ष खड़े होकर देशवासियों को संबोधित करना है।

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देश से बड़ी कांग्रेस

Posted on 16 August 2011 by admin

कहते हैं सत्ता ऊंचा सुनती है, पर मनमोहन सरकार के मंत्री हैं कि वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं, अजय माकन जैसा जूनियर मंत्री भी सदन में अपना हेड फोन फेंकते दिखे, हरीश रावत उन्हें रोकते दिखे, राजीव शुक्ला अपने ही चैनल पर सदन में सोते दिखे, सलमान साहब को दाढ़ी वाली मां (मनमोहन) मिल गई है सो उनका बॉडी-लैंग्वेज बदल गया है, सिब्बल साहब की जुबान और बॉडी दोनों कहीं बढ़-चढ़ कर बोलते हैं, सदन में कांग्रेस का रवैया जिस कदर निरंकुश व अराजक होता जा रहा है वह लोकतंत्र के चेहरे को शर्मसार करने के लिए काफी है, रही-सही कसर चिदंबरम के अकड़ से पूरी हो रही है। निरीह किसानों को बोली के बदले गोली, अन्ना को अनशन के लिए भी धमकी, प्रदर्शनकारियों पर तो लाठियां बरसाना चिदंबरम साहब के लिए आम बात है। सो, भाजपा ने भी ठान लिया है कि अब गांधी-परिवार पर सीधा हमला होगा, भाजपा के एक प्रमुख नेता ने दिल्ली के एक बड़े अंग्रेजी दैनिक के साथ मिलकर 8 महीनों की कड़ी मशक्कत के बाद राबर्ट वाड्रा का डॉसियर तैयार करवाया है, जाहिरा तौर पर गांधी परिवार के किसी भी सदस्य पर विपक्षी दल का यह सबसे बड़ा हमला होगा, जमीन के मामले, मॉल, होटल से लेकर कई अन्य मामलों की पूरी फाइल तैयार है। इस अखबार में यह रिपोर्ट बस किश्त वार छपने ही वाली थी कि कांग्रेसी राजमाता की तबियत नासाज हो गई, अब वह जैसे ही लौटकर स्वदेश आएंगी, कच्चे चिट्ठे खुलेंगे, कच्चे डोर से बंधे रिश्तों के खोखलेपन पर भी हमला होगा। तब मनीष की टीस व निरूपम के दम की असली परीक्षा भी होगी।

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आउटस्टैंडिंग त्रिवेदी

Posted on 07 August 2011 by admin

दिनेश त्रिवेदी को संसद में आउटस्टैंडिंग (जो बाहर खड़े होकर भी अपना काम निबटा सके) मंत्री का दर्जा हासिल हो गया है, एक वक्त था जब त्रिवेदी कांग्रेस के खासे दुलारे थे, पर उनके हालिया बगावती तेवरों को देखते हुए कांग्रेस ने भी अब उनसे दूरियां बना ली हैं। दरअसल संसद भवन में जिस कमरे को लेकर त्रिवेदी साहब ने अपने इतने उग्र तेवरों के दर्शन कराए दरअसल वह कमरा संसद भवन के भूतल पर अवस्थित है जो उनकी पार्टी नेत्री ममता बनर्जी को उनके रेल मंत्री काल में इसीलिए आबंटित किया गया था कि सिर्फ इसी कमरे में अटैच्ड बाथरूम है, सो एक महिला होने के नाते ममता को इस कमरे के सबसे योग्य समझा गया, और बाद में कांग्रेस ने इसी आधार पर यह कमरा सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी को आबंटित कर दिया। जिस पर दिनेश त्रिवेदी का पुरुष इतना बिलबिला गया।

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