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भूटान की तान

Posted on 16 October 2011 by admin

भूटान नरेश ने अपनी शादी में किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया है। भारत के प्रति उनका एक खास अनुराग है बावजूद इसके उन्होंने कांग्रेसी राजमाता सोनिया गांधी को आमंत्रित करना भी जरूरी नहीं समझा। अब राहुल गांधी या दुष्यंत सिंह (वसुंधरा पुत्र) को उन्होंने निजी तौर पर न्यौता भेजा है। भूटान चीन से सटा देश है, जाहिर सी बात है यहां अमरीका की भी खास दिलचस्पी है। चूंकि भूटान राज परिवार के ब्रिटेन, नार्वे व डेनमार्क के शाही घरानों से अच्छे रिश्ते रहे हैं, सो अमरीका लगातार इन कोशिशों में जुटा है कि अगर उसे भूटान में सीधी एंट्री नहीं मिल पाती है तो क्यों नहीं वह ब्रिटेन या नार्वे के मार्फत ही भूटान में घुस जाए। जाहिर है चीन पर नजर रखने की खातिर अमरीका भूटान से ऑपरेट करना चाहता है। पर कूटनीतिक कारणों से भारत नहीं चाहता कि पश्चिमी ताकतें भूटान में हावी हों, क्योंकि जितना ही अमरीका भूटान में आएगा प्रतिक्रिया स्वरूप चीन भारत के प्रति उतना ही आक्रामक होगा। वैसे भी अमरीका की यह पुरानी नीति रही है कि उसकी लड़ाई का अड्डा अपनी सरजमीं न होकर दूसरों का घर होता है, भारत नहीं चाहता कि एक बार फिर से यह सब भूटान में भी दुहराया जाए।

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इंडिया को लगी मिरची

Posted on 16 October 2011 by admin

दाऊद का दाहिना हाथ माने जाने वाले इकबाल मिरची की लंदन में गिरफ्तारी और उनसे हुई पूछताछ में कई चौंका देने वाले खुलासे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि मिरची ने पूछताछ के दौरान यह स्वीकार किया है कि एक बड़े भारतीय राजनेता से उनके और उनकी डी-कंपनी के गहरे ताल्लुकात हैं। मिरची ने यह भी स्पष्ट किया है कि उक्त नेता से लंदन के एक होटल में उनकी अक्सरां मुलाकात होती थी, और नेताजी अपने राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों को धमकाने में उसकी मदद भी लिया करते थे। सनद रहे कि ब्रिटिश सरकार ने मिरची का जो डॉसियर तैयार किया था उसमें भी इस नेताजी का नाम पहले से है।

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अन्ना किसके साथ?

Posted on 11 October 2011 by admin

रामलीला मैदान के चर्चित अनशन के बाद जब अन्ना हजारे गुड़गांव स्थित मेडिसिटी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ के लिएर् भत्ती हुए थे तब हरियाणा के मुख्यमंत्री हुड्डा ने तीन दफे उनसे मिलने का असफल प्रयास किया, पर कांग्रेसी मुख्यमंत्री से मिलने को अन्ना राजी नहीं हुए थे। वहीं कहीं इस अस्पताल के एकर् कत्तार्-धत्ता के मार्फत अन्ना से मिलने में अजय चौटाला कामयाब रहे थे, जबकि अन्ना समर्थकों ने जंतर-मंतर पर ओम प्रकाश चौटाला को हूट किया था और उन्हें वहां अन्ना के साथ अनशन पर बैठने से रोक दिया था। फिर भी इस दफे के हिसार उप चुनाव में अजय के बजाए अन्ना का आशीर्वाद कुलदीप को ज्यादा दिखता है, वैसे भी कुलदीप अरविंद केजरीवाल के मित्रों में से हैं, इस नाते अन्ना पर वे अपना हक चौटाला से ज्यादा समझते हैं।

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माया के निशाने पर अन्ना

Posted on 11 October 2011 by admin

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने अन्ना की जाति को लेकर एक नया तुर्रा उछाला है कि अन्ना कुर्मी हैं, मगर उन्होंने कुर्मी जाति के लिए अब तक क्या किया है? यह बिहार व यूपी के राजनेताओं की खास आदतों में शुमार है कि वे हर चीज को जाति के चश्मे से देखते हैं, चूंकि यूपी में चुनाव सिर पर हैं और वहां कुर्मी मतदाताओं का कुछ सीटों पर असर भी है, इसे भांपते हुए मायावती ने अपने बयान में आगे जोड़ दिया कि ‘साहू जी महाराज भी कुर्मी थे, पर उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर को पढ़ने के लिए अपने खर्चे पर बाहर भेजा था।’

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प्रणब ने सोनिया से पीएम की शिकायत लगाई

Posted on 11 October 2011 by admin

दुर्गा पूजा पर कोलकाता जाने से पूर्व प्रणब दा व सोनिया की एक महत्त्वपूर्ण बैठक हुई, समझा जाता है कि इस मीटिंग में प्रणब अतिशय भावुकता की रौ में बह गए, दादा ने सोनिया के समक्ष अपने दिल व मन का राज खोलते हुए कहा कि ‘उन्हें लगता है पीएमओ पिछले कुछ समय से उन्हें निशाना बना रहा है।’ दादा ने प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव टी.के.ए.नायर (जो अब बकौल राज्य मंत्री पीएम के सलाहकार बन गए हैं) को आड़े हाथों लेते हुए सोनिया से कहा कि ‘2जी वाली चिट्ठी तो महज एक नोट था जिसे पीएमओ ने महज इसीलिए लीक किया कि वे और चिदंबरम आपस में भिड़ जाएं, दादा का कहना था कि ‘चूंकि नायर की अनिल अंबानी से गहरी छनती थी इस वजह से भी उनके निशाने पर मैं था, जबकि मैंने तो यह चिट्ठी जेपीसी के हवाले भी नहीं की थी, अब पुलक बाबू (पुलक चटर्जी) आ गए हैं तो वे दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे।’ सोनिया ने दादा की बातों को ध्यानपूर्वक सुना, पर उनकी ओर से इस बाबत कोई ठोस आश्वासन नहीं आया।

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प्रियंका से टूटेगा सन्नाटा

Posted on 02 October 2011 by admin

अगर कांग्रेसी सियासत में यह तूफान आने के पहले का सन्नाटा है तो फिर सन्नाटा टूट सकता है, अंदरखाने से जो खबरें निकल कर बाहर आ रही है उसके मुताबिक प्रियंका गांधी आने वाले दिनों में अपने राजनैतिक कैरियर का आगाज कर सकती हैं। बस पेंचोखम एक है, रॉबर्ट वाड्रा जिसके पीछे भाजपा के कुछ बड़े नेता और एक अदद सुब्रह्मण्यम स्वामी हाथ धोकर पीछे पड़े हैं, उनसे जुड़े तमाम कागजातों को इकट्ठा कर रहे हैं, खंगाल रहे हैं और अपने सियासी हथियार को नई धार दे रहे हैं, प्रियंका के लिए सबसे पहले इस मुसीबत से पीछा छुड़ाने की चुनौती होगी, यह अलग बात है कि प्रियंका अपने लिए बड़ी मुसीबत किसको मानती है।

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गडकरी भी कम नहीं

Posted on 02 October 2011 by admin

वहीं कहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी भी अपने ही ठस्से में दिखे, शुक्रवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी के चाय-पान के मौके पर जब एक दक्षिण भारतीय नेता ने बार-बार गडकरी से मोदी की अनुपस्थिति को लेकर सवाल पूछे तो गडकरी ने दो टूक कह दिया कि जो नहीं आए (मोदी, येदुरप्पा, निशंक आदि) उन्हें उनकी रत्ती भर चिंता नहीं, उन्हें चिंता है जो लोग आए हैं, उनकी आवभगत में कहीं कोई कमी न रह जाए।

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गडकरी का फोन नहीं ले रहे मोदी

Posted on 02 October 2011 by admin

अपने पुनर्वतार में नरेंद्र मोदी ने भाजपा की अंदरखाने की सियासत को हिलाकर रख दिया है। अडवानी तो बहाना भर हैं, दरअसल मोदी की असली नाराजगी अपने पार्टी अध्यक्ष को लेकर है, संजय जोशी की पार्टी में पुनर्वापसी को वे पचा नहीं पा रहे हैं। शायद यही वजह है कि पिछले 15 दिनों से मोदी गडकरी का फोन लेना भी गवारा नहीं कर रहे हैं। मोदी के बहुप्रचारित उपवास पर गडकरी की अनुपस्थिति भी इसी वजह से थी, मोदी चाहते नहीं थे कि गडकरी उनके उपवास पर आएं, सो गडकरी ने भी अपने स्वास्थ्य व हालिया ऑपरेशन का हवाला देकर मामले से कन्नी काट ली। मोदी का पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में दिल्ली नहीं आना इसी मामले की परिणति भर है।

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केजरीवाल पर सवाल

Posted on 26 September 2011 by admin

एक मैली सी गठरी लिए दबे पांव चुपचाप भाग रहा था वह, पर रहजनों की नजरों से बच पाना कब इतना आसान था, लिहाजा उसे दौड़ा-दौड़ा के मारा गया, लहूलुहान होता रहा उसका ईमान, जो उसने बड़ी जतन से अपनी गठरी में संभाल रखा था। कांग्रेसी उस घड़ी को कोस रहे हैं कि जब बेहद एक मामूली सी मांग को लेकर अरविंद केजरीवाल उनके दर पर आए थे, तो तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने केजरीवाल की एनजीओ को वह काम देने से क्यों मना कर दिया था, केजरीवाल आरटीआई को फोन और ऑनलाइन शुरू करने का प्रस्ताव लेकर चव्हाण के पास आए थे, पर चव्हाण ने अनजाने में ही इस प्रस्ताव को नकार दिया, जबकि वहीं नीतीश ने केजरीवाल को बुलाकर यही योजना बिहार में शुरू करने को कहा, आज बिहार में यह योजना फल-फूल रही है और उससे भी कहीं ज्यादा फल-फूल रही है नीतीश की उद्दात महत्त्वाकांक्षाएं क्योंकि वे जानते हैं कि टीम अन्ना का समर्थन उनके साथ है।

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देवी-देवता अवतार में तमिल नेता

Posted on 26 September 2011 by admin

हालांकि तमिलनाडु की राजनीति में राजनेताओं का देवी-देवताओं के अवतार व गेटअप में सामने आना कोई नई बात नहीं है। फरवरी 2006 में अपने 58वें जन्मदिन के मौके पर जे.जयललिता अन्न की देवी अन्नपूर्णा के अवतार में सामने आई थीं। पुष्प-कमल पर बैठी देवी अवतार में जयललिता के एक हाथ में अन्न से भरा कटोरा था तो दूसरे में कड़छी। कुछ हिंदू संगठनों ने तब इसका विरोध भी किया था। इससे पहले शहर भर में ‘वर्जिन मेरी’ के रूप में जब जयललिता के पोस्टर लगे थे तो क्रिश्चियन संगठनों के मुखर विरोध के बाद उसे हटा लिया गया था। करुणानिधि ने स्वयं को चुनावी युध्द में अर्जुन के रूप में दिखाया था और अपने पुत्र स्टालिन को अपने सारथी कृष्ण के रूप में। करुणानिधि के बड़े बेटे व केंद्र सरकार में मंत्री एम.के.अझागिरी का मन जब स्वयं को शिव व राम का अवतार दिखाने से नहीं भरा तो सन् 2008 में उन्होंने खुद को पोप बेंडिक्ट XVI के रूप में दिखा दिया, उनके इस पोप रूप की सर्वत्र भर्त्सना हुई, महज एक दो रोज के अंदर उनके सारे पोस्टर हटा लिए गए। पर चिदंबरम को कृष्ण के अवतार में दिखाने वाले पोस्टर के विरोध की न तो किसी को हिम्मत हुई और न ही इन पोस्टर-होर्डिंग्स को हटाया ही गया।

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