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त्रिवेदी की पटरी छोड़ती रेल

Posted on 06 November 2011 by admin

केंद्रीय रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी व तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के रिश्तों में खटास लगातार बढ़ती जा रही है, त्रिवेदी का कॉरपोरेट आचार-व्यवहार दरअसल ममता को रास नहीं आ रहा है और पिछले दिनों जिस तरह से रेल वैगन के 26 हजार करोड़ का काम बगैर टेंडर सिर्फ नॉमिनेशन के आधार पर पब्लिक सेक्टर कंपनी भेल को दिया गया उस पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सूत्र बताते हैं कि भेल ने काम को सबकांट्रेक्ट पर एक प्राइवेट कंपनी टीटागढ़ वैगन को दे दिया है। इस प्राइवेट कंपनी के मालिकों की कथित तौर पर प्रफुल्ल पटेल और दिनेश त्रिवेदी से काफी नजदीकियां हैं। इस पूरी डील को सरंजाम देने में सैम पित्रोदा की भी एक महती भूमिका रही है जिसे त्रिवेदी ने रेलवे की आधुनिकीकरण कमेटी का प्रमुख बनाया हुआ है।

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गांधी हुए टेक्नो सेवी

Posted on 06 November 2011 by admin

दो गांधी भाईयों राहुल और वरुण में कौन सी बात सबसे कॉमन है? दोनों ही बड़े टेक्नो सेवी हैं। राहुल अपने ब्लैक बेरी फोन के दीवाने हैं तो उनके छोटे भाई को टि्वटर के बगैर चैन नहीं। पार्टी की अहम बैठकों में भी राहुल अपने ब्लैक बेरी मैसेंजर पर अक्सरां बिजी नजर आते हैं, तो वरुण कई ज्वलंत मुद्दों को उठाने में सोशल नेटवर्किंग साइट ‘टि्वटर’ का बतौर हथियार बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। एफ-1 रेस में टैक्स चोरी का मामला हो, केजी बेसिन का या स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन का वरुण के टि्वट न सिर्फ खासा चर्चा बटोर रहे हैं, पार्टी में दिग्गज नेताओं की पेशानियों पर बल भी ला रहे हैं। पर वरुण को मना करने की जुर्रत करे कौन?

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अरुणाचल में छल

Posted on 06 November 2011 by admin

समझा जाता है कि अरुणाचल में नेतृत्व परिवर्तन का अकस्मात निर्णय दस जनपथ का अपना था। नार्थईस्ट में अरुणाचल प्रदेश और असम दो राज्य ऐसे हैं जहां ईसाईयों के अलावा अन्य धर्मावलंबियों की संख्या भी कहीं ज्यादा है। अरुणाचल व असम में तो संघ भी काफी सक्रिय है और संघ की काट के तौर पर इन दोनों राज्यों में ईसाई मिशनरियां भी खासी एक्टिव है। अरुणाचल चीन की सीमा से लगा है और यहां बौध्द धर्मावलंबियों की संख्या कहीं ज्यादा है। अरुणाचल के दो जिलों तिरप और चांगलांग में नगा गुट काफी सक्रिय हैं, जिन पर अक्सरां ये आरोप लगता है, कि ये गुट लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करता है, यानी यह गुट सीधे तौर ईसाई मिशनरियों को फायदा पहुंचाता है,अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री जारबोम गामलिन ने नगा गुट पर काफी सख्ती बढ़ा दी थी, सो ईसाई मिशनरियां इस बात से उनसे काफी नाराज थीं, सो नायिशी कम्यूनिटी के नबम टुकी को सोनिया के निर्देश पर राज्य की कमान सौंप दी गई, सनद रहे कि टुकी का ईसाई धर्म में अटूट विश्वास है और उनको मुख्यमंत्री बनाने के लिए राज्य के गिरिजा घरों में खूब प्रार्थनाएं भी हुई थीं, प्रार्थना प्रभु तक जरूर पहुंची होगी तभी तो मैडम ने सुन लिया।

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श्री-श्री पर कांग्रेस की नजर

Posted on 30 October 2011 by admin

श्री-श्री रवि शंकर पर दिग्विजय सिंह का हमला एक सोची समझी रणनीति के तहत है, दरअसल दिग्विजय ने वे सारे कागजात जुटा लिए हैं जिससे इस बात का पता चलता है कि रामलीला मैदान पर 13 दिन तक चले अन्ना आंदोलन की श्री-श्री ने किस प्रकार तन मन व धन से मदद की थी। टेंट-पंडाल से लेकर देसी घी की पूरियों का रोजाना का कोई साढे छह लाख रुपयों का खर्च श्री-श्री की संस्था वहन कर रही थी। रविशंकर महेश योगी के चेले रह चुके हैं, उनके भाजपा में खास कर आडवानी से बहुत गहरे संबंध हैं, सो रविशंकर पर अब इसीलिए कांग्रेस की नजरें तिरछी हैं।

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बलि वेदी पर त्रिवेदी

Posted on 30 October 2011 by admin

दिनेश त्रिवेदी व ममता बनर्जी के रिश्तों में खटास आ गई लगती है। ममता को लगता है कि त्रिवेदी के तृणमूल सांसदों के साथ अच्छे रिश्ते नहीं है। वहीं त्रिवेदी ने रेल मंत्रालय में पहले से काबिज ममता के मुंहलगे लोगों को किनारे लगाना शुरू कर दिया है, जैसे रतन मुखर्जी, जयंतो साहा, अशोक सुब्रह्मण्यम ये सभी नए रेल मंत्री के काम-काज से नाखुश बताए जाते हैं। दिनेश अपना पीएस भी बंगाल कैडर की एक महिला आइएएस को लेकर आए हैं, जो पंजाबी हैं और जिन्हें दबी जुबान से जूनियर ओमिता पॉल पुकारा जाता है। कहा जाता है कि पिछले दिनों जब त्रिवेदी ममता से कोलकाता में मिले थे तो ममता ने इस बात पर आपत्ति उठाई थी कि त्रिवेदी उद्योगपतियों से रेल मंत्रालय के अपने ऑफिस के बजाए अपने घर पर मिलना क्यों पसंद करते हैं। यानी कि त्रिवेदी की रेल कभी भी पटरी से उतर सकती है।

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टीम राहुल के हाथों में है कमान

Posted on 30 October 2011 by admin

इतना तो तय हो चुका है कि इस दफे उत्तर प्रदेश चुनाव की पूरी कमान राहुल ब्रिगेड के पास रहेगी, पंजाब व उत्तराखंड पर भी टीम राहुल की पैनी निगाहें हैं। दिग्विजय सिंह पहले से ही सूत्रधार की भूमिका में अवतरित हो चुके हैं। पॉलिटिकल मैनेजमेंट व क्राइसिस मैनेजमेंट के लिए इस दफे खास तौर पर टीम राहुल अप्रत्याशित रूप से अहमद पटेल की सेवाएं ले रही है, एक पटेल को छोड़ दें तो सोनिया वफादारों की पूरी टीम नेपथ्य में चली गई है, जो लोग खासे एक्टिव हैं उनमें परवेज हाशमी, जितिन प्रसाद, संजय निरूपम, ज्योतिरादित्य सिंधिया, आर.पी.एन.सिंह, रवनीत सिंह, भंवर जितेंद्र सिंह, मीनाक्षी नटराजन, अशोक तंवर, सचिन पायलट, प्रदीप जैन आदि। प्रियंका गांधी भी खास तौर पर राहुल का साथ देने के लिए एक्टिव हो रही हैं पर उनकी जिम्मेदारियां चुनाव प्रचार तक ही सीमित रह सकती हैं।

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वार को तैयार पवार

Posted on 24 October 2011 by admin

शरद पवार को करीब से जानने वाले लोग इसे उनका अब तक का सबसे बड़ा सियासी दांव बता रहे हैं। कोई ऐसा दिन नहीं गुजर रहा कि पवार अन्य राजनैतिक दलों के नेताओं से संपर्क नहीं साध रहे। ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, मुलायम सिंह यादव और बाल ठाकरे से उनके घोषित तौर पर अच्छे संबंध हैं, और अपने इन संबंधों को मौके-बे मौके वे खाद-बीज भी डालते रहते हैं। इन दिनों उन्होंने जयललिता से भी अपने तार जोड़ रखे हैं, भाजपा में नितिन गडकरी और अडवानी से वे सतत् संपर्क में रहते हैं। अडवानी की ताजा जन चेतना यात्रा को उनका कई तरह से सहयोग प्राप्त है। सो यह अनायास नहीं है कि यूपीए-2 और प्रधानमंत्री को लेकर उनका इतना तल्ख बयान आया है, उनका यही हमलावर अंदाज 8-9 नवंबर के बीच और कहीं ज्यादा मुखर हो सकता है। पर सरकार ने भी डैमेज कंट्रोल की पूरी तैयारी कर रखी है, पवार के कुछ व्यावसायिक मित्र तिहाड़ में हैं, उनके बारे में कुछ अहम टिप्पणियां सरकारी रिकार्ड में दर्ज है, मौका आने पर सरकार भी पलटवार से नहीं चूकेगी।

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जा सकते हैं गहलोत

Posted on 24 October 2011 by admin

लगता है आज न कल अशोक गहलोत को जाना ही होगा, भंवरी देवी प्रकरण में घिरे मदेरणा को बचाने के आरोप गहलोत पर भले ही उतने गंभीर न हों, राज-काज में उनकी अक्षमता को कांग्रेसी हाईकमान गंभीरता से ले रहा है। प्रदेश में जातीय समीकरणों को मांजने व साधने की बाजीगरी में भी वे पिछड़ गए हैं, आम तौर पर राजस्थान में यह कांग्रेसी फार्मूला चलता था कि चाहे मुख्यमंत्री किसी भी जाति का हो प्रदेश अध्यक्ष हमेशा राज्य की जातीय समीकरणों को मद्देनजर रखकर बनाया जाता था, पर गहलोत ने अपने एक खास चंपू चंद्रभान को प्रदेश अध्यक्ष बनवा कर राज्य के जाट मतदाताओं को बिल्कुल नाराज कर दिया है। गहलोत की जगह लेने के लिए कांग्रेसी हाईकमान दो नामों पर विचार कर रहा है, वह हैं शांति धारीवाल और सी.पी.जोशी। यानी गहलोत को भ्रष्टाचार के आरोपों की कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं दूसरी ओर पार्टी में इस बात को लेकर भी गहरा असंतोष है कि गहलोत बाहर से आए लोगों को ज्यादा तरजीह देते हैं।

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गडकरी की दिवाली पार्टी

Posted on 24 October 2011 by admin

दिवाली के मौके पर शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने दिल्ली के पत्रकारों के लिए रात्रि भोज का आयोजन किया। गडकरी के उनके 13 तीनमूर्ति लेन आवास पर पत्रकारों का खूब जमावड़ा जुटा, भीड़ नहीं, भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। पर गडकरी सहज भाव से हर छोटे-बड़े पत्रकार से मिल रहे थे, और गर्व से बता भी रहे थे कि बीते दिनों में उन्होंने अपना 11 किलो वजन कम कर लिया है। खाने के शौकीन गडकरी पूरे समय खाने की टेबल से दूर ही रहे। रूढ़ी ने उनके साथ संगत जमा रखी थी, निर्मला सीतारमण महिला पत्रकारों से घिरी थीं, तरुण विजय जरूर थोड़े अलग-थलग दिख रहे थे। गडकरी के मीडिया सलाहकार अशोक टंडन, व राज कुमार शर्मा मेजबान के अंदाज में पत्रकारों के हाल-चाल ले रहे थे, मनोज गायकवाड सबसे एक्टिव दिख रहे थे, हर टेबल पर जाकर पत्रकारों का खैर मकदम पूछ रहे थे। डिनर में महाराष्ट्रीय व्यंजनों की बहार थी- झुंपा-भाकरी से लेकर मराठी स्टाइल में बैंगन का चोखा तक। गडकरी डायबिटिक होने के नाते भले ही मीठे से परहेज रखते हों पर पत्रकारों के लिए जलेबी, गुलाब जामुन से लेकर आइस्क्रीम तक की व्यवस्था थी, आईस्क्रीम भले ही सख्त जमी थी, पर गडकरी पत्रकारों के समक्ष पिघले-पिघले से नजर आ रहे थे।

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सलमान के बयान के मायने

Posted on 16 October 2011 by admin

2जी मामले पर केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद का चर्चित बयान जाने-अनजाने उद्योगपतियों के पक्ष में और कोर्ट के खिलाफ चला गया है। स्वयं कांग्रेस पार्टी में खुर्शीद के इस बयान को लेकर हैरानी है, दस जनपथ ने सिर्फ इसीलिए वीरप्पा मोइली की जगह खुर्शीद को बिठाया था कि आम फहम में यह संदेश दिया जा सके कि कांग्रेस एक मजबूत कानून मंत्री के पक्ष में है। अब खुर्शीद का यह बयान 10 जनपथ के निर्देश पर आया है या औद्योगिक घरानों की उनकी निकटता की वजह से, पार्टी में यह धुंध अभी छंटी नहीं है। क्योंकि खुर्शीद जब पूर्व में कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्टर थे तो कई औद्योगिक घरानों से उनकी काफी घनिष्टता हो गई थी, वैसे भी खुर्शीद के ऐसे संपर्कों की कमान उनकी पत्नी लुईस संभालती हैं।

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