Posted on 07 May 2012 by admin
राष्ट्रपति चुनाव देश में बनते-बिगड़ते सियासी समीकरणों का नया बैरोमीटर बन गया है। माना जा रहा है कि इसमें तुरुप का पत्ता तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी के पास है, जिन्हें मनाने की कांग्रेस हरसंभव कोशिश कर रही है। वहीं ममता के करीबी इस बात के संकेत दे रहे हैं कि प्रणब मुखर्जी को लेकर ममता के मन में कुछ शंकाए हैं, ममता ने दबे-छुपे तौर पर इस बात को स्वीकारा भी है कि पिछले 11 महीनों में वो प्रणबदा से 20 बार मिल चुकी हैं 10 बार स्वयं प्रधानमंत्री से। जाहिर है अपने राज्य की जर्जर अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने के लिए ममता अपने राज्य के लिए केंद्र से एक बड़ा आर्थिक पैकेज चाहती है जिसके लिए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी कई बार ना-नुकर कर चुके हैं। सो ममता ने अपने करीबियों में साफ कर दिया है कि वह एक ऐसे व्यक्ति को राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन देना चाहेंगी जो कम से कम उनकी बातों को सुने, क्या प्रणबदा सुन रहे हैं?
Posted on 07 May 2012 by admin
झारखंड में पार्टी की एका व गठबंधन धर्म की एैसी-तैसी होने के बाद शुक्रवार को संसद परिसर में अडवानी के कमरे में सुषमा, यशवंत, जसवंत और रांची से ताजा-ताजा लौटे अनंत कुमार ने राज्यसभा में हारे पार्टी के उम्मीदवार आहलूवालिया की हार की समीक्षा की। इन नेताओं के तेवर तल्ख थे, अपनी ही पार्टी के चंद सीनियर नेताओं के खिलाफ। वहीं विरोधी खेमा इस बात को प्रचारित करने में जुटा है कि अगर इन्हीं नेताओं ने विवादास्पद एनआरआई बिजनेसमैन अंशुमान मिश्र को मैदान से हटने के लिए मजबूर नहीं किया होता तो यह सीट भाजपा के खाते में होती। माना जा रहा है कि उस वक्त मिश्र ने अपने लिए जरूरी बहुमत का जुगाड़ कर लिया था। अब यह भी साफ हो चुका है कि मिश्र की उद्दात सियासी महत्वाकांक्षाओं को परवान चढ़ाने में न सिर्फ गडकरी बल्कि संघ के प्रमुख नेताओं की एक महती भूमिका रही थी। महेश योगी के स्कूल से निकले और दीपक चोपड़ा के सानिध्य को प्राप्त अंशुमान को राजनैतिक दीक्षा देने वाले उनके असली गुरु अमरीका के डेनबर कॉलरेडो में कानून पढ़ाते हैं, उनका नाम है डा. वेद प्रकाश नंदा। नंदा, अमरीका में हिंदू स्वयंसेवक संघ के प्रमुख भी हैं और संघ में उनकी जड़ें कहीं गहरी हैं, वे राू भैया के समय से संघ से जुड़े हुए हैं, प्रोफेसर नंदा के संघ प्रमुख मोहन भागवत से कहीं गहरे ताल्लुकात हैं। सो, प्रोफेसर नंदा ने अंशुमान के नाम की पैरवी सीधे संघ प्रमुख से की थी, हॉवर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले डा. द्विवेदी की भी चार महीने लंदन, चार महीने अमरीका और चार महीने भारत में रहने वाले अंशुमान से गहरी छनती है, प्रोफेसर द्विवेदी के तार भी कहीं गहरे संघ से जुड़े हुए हैं, माना जाता है कि इन्होंने भी संघ में अंशुमान की जमकर पैरवी की थी। हालिया झारखंड प्रकरण से हार कर भी जीत गए हैं गडकरी।
Posted on 07 May 2012 by admin
अभिनेत्री प्रीटी जिंटा से अलगाव का गम उद्योगपति नुस्ली वाडिया के पुत्र नेस वाडिया को बिहार के मुंगेर में अवस्थित एक योग आश्रम की ओर खींचकर ले गया। मुंगेर के ‘बिहार स्कूल ऑफ योगा आश्रम’ में पिछले दिनों नेस को नियमित रूप से योग और अध्यात्म की साधना करते देखा गया, वहीं दूसरी ओर जिंटा ने आईपीएल सीजन-5 शुरु होने से पूर्व हॉवर्ड की ठौर पकड़ ली, तथा बिजनेस की और बारीकियों को जानने- समझने के लिए उन्होंने हॉवर्ड के बिजनेस मैनेजमेंट के समर प्रोग्राम को ज्वॉइन कर लिया था। सनद रहे कि तब अपनी प्रेमिका रहीं प्रीटी के लिए ही नेस ने आईपीएल की ‘किंग्स एलेवन पंजाब’ की टीम को खरीदा था, जिसके वे को-ऑनर भी हैं, टीम के स्वामित्व को लेकर नेस व प्रीटी में अब भी विवाद चल रहा है, जब से इस विवाद के निपटारे का जिम्मा आईपीएल के वर्तमान चैयरमैन राजीव शुक्ला के जिम्मे आया है, तब से प्रीटी का दिल बल्लियों उछल रहा है, क्योंकि शुक्ला से उनकी बेहद अंतरंग मित्रता है और उन्हें लगता है जब सैंया भए कोतवाल तो फिर डर काहे का।
Posted on 29 April 2012 by admin
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के लिए जस्टिस दलबीर भंडारी को विजयी बनाने के लिए न सिर्फ अमरीका स्थित भारतीय राजदूत ने अपितु कई अप्रवासी भारतीयों ने दुनिया भर में भंडारी के पक्ष में अलख जगाई। सबसे हैरत की बात तो यह है कि झारखंड राज्यसभा मसले से चर्चा में आए विवादित एनआरआई बिजनेसमैन अंशुमान मिश्र भी लगातार न्यूयॉर्क में बैठकर जस्टिस भंडारी के लिए समर्थन जुटाने में लगे रहे। सनद रहे कि अंशुमान का अमरीका में भी व्यापार है और वहां उनके कई बिजनेसमैन, राजनैतिक व डिप्लोमैटिक मित्र भी हैं। अंशुमान न सिर्फ जस्टिस भंडारी के लिए घूम-घूम कर समर्थन जुटा रहे थे, बल्कि वे भारतीय मीडिया के सतत् संपर्क में भी थे और वहां से अपने भारतीय पत्रकार मित्रों को पल-पल की जानकारी भी दे रहे थे। सो, इंडियन मीडिया को जस्टिस भंडारी की जीत का पहला एसएमएस मिश्र का ही मिला जिसकी भाषा थी-‘संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली व सेक्युरिटी काऊंसिल में हम जीत गए, दलबीर भंडारी अब आईसीजे के जज हो गए हैं।’ काश इस बात को अंशुमान पहले समझ पाते कि उनके लिए रांची से मुफीद जगह न्यूयॉर्क ही है।
Posted on 29 April 2012 by admin
क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, उद्यमी और समाज सेविका अनु आगा, बॉलीवुड की हसीन अदाकारा रेखा के राज्यसभा में मनोनयन के बाद भी ऊपरी सदन में दो सीटें अब भी रिक्त है। इनमें से एक सीट किसी वैज्ञानिक के खाते में जानी है, तो दूसरी सीट मीडियाकर्मी के खाते में। सो, शोभना भरतिया अपने एक और टर्म के लिए पूरा दम लगा रही हैं, पर उनकी उम्मीदवारी को शेखर गुप्ता और वेंकट राम रेड्डी से कड़ी चुनौती मिल रही है।
Posted on 29 April 2012 by admin
तमाम विपरीत झंझावतों से डूबते-उतराते भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अपनी दुबारा ताजपोशी के पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं। इस शुक्रवार से तीन दिनों के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत खास तौर पर दिल्ली में मौजूद रहे और उनकी इस यात्रा का एक मात्र मकसद भाजपा के सीनियर नेताओं को गडकरी के नाम पर राजी करना था। संघ ने गडकरी को लेकर अपनी मंशा व निर्णय की दृढ़ता से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अवगत करा दिया है। इसके बाद ही यह तय हुआ कि आगामी 25 मई को दिल्ली में ही भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी व अधिवेशन आहूत होगा और इसमें गडकरी को पुन:पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया जाएगा। बहुत मुमकिन है कि इसी अधिवेशन में पार्टी के संविधान में संशोधन कर राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल को 3 वर्षों का कर दिया जाए।
Posted on 22 April 2012 by admin
नरेंद्र मोदी व शरद पवार में इस बात को लेकर गजब की एकजुटता है, कि चाहे किसी भी कीमत पर हो कपास के निर्यात को खोला जाए, हालांकि ये दोनों नेता द्वय इसके लिए किसानों के हक की दुहाई दे रहे हैं, सच तो यह है कि कपास के लिए जितना निर्यात लक्ष्य रखा गया था उससे डेढ़ गुना ज्यादा निर्यात हो चुका है, वह भी एक व्यक्ति द्वारा एक ही देश को। यह व्यक्ति है एक गुजराती बिजनेसमैन भद्रेश शाह, जो मोदी व पवार के बेहद करीबी है। और वह देश है चीन। भारत के कपड़ा उत्पादक उद्योग इस बात को लेकर खासा चिंतित है कि कहीं उन्हें सूत चीन से महंगे दामों पर न खरीदना पड़ जाए।
Posted on 22 April 2012 by admin
यूपी के मुद्दे पर हुई कांग्रेस की चिंतन बैठक में राहुल गांधी ने साफ कर दिया था कि वे कांग्रेसी नेताओं की ‘अकाऊंटिबिलिटी फिक्स’ करेंगे। यानी यूपी चुनाव में जिन कांग्रेसी नेताओं के पास दायित्वों वाले ओहदे थे, उन पर सचमुच तलवार लटक रही है। इस कड़ी में दिग्विजय सिंह भी प्रभारी पद से हटाए जा सकते हैं, रीता बहुगुणा जोशी की जगह एक नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश जारी है। श्रीप्रकाश जायसवाल कैंपेन कमेटी तो राजबब्बर मीडिया कमेटी के प्रभारी थे, इनकी छुट्टी भी तय है।
Posted on 22 April 2012 by admin
कांग्रेस के अंदर बदलाव की बयार बहने लगी है। यूपी चुनाव ने राहुल गांधी को सियासत का एक नया ककहरा सिखा दिया है। राहुल की पुरानी राजनैतिक शैली में दो राजनैतिक विशेषज्ञों जोया हसन और सुधा पई का खासा दखल था, इनकी राजनैतिक सलाहों पर राहुल कहीं ज्यादा कान धरते थे। सारे डाटा इकट्ठा कर उसे कंप्यूटर में डाला जाता था और उसका विश्लेषण होता था। जो जमीनी नेता राहुल के समक्ष अपनी बात रखना भी चाहते थे उन्हें कह दिया जाता था कि वे राहुल कार्यालय को पहले ही बातचीत का ‘प्वाइंट’ बना कर भेज दें और उन्हें राहुल से जो भी कहना है बेहद संक्षिप्त में कहें। पहले तो ऐसे नेताओं को राहुल का समय भी बमुश्किल से मिलता था, अब राहुल ऐसे लोगों को ढूंढ-ढूंढ कर बुला रहे हैं। सोनिया-राजीव के पुराने वफादारों को भी अब राहुल तरजीह देने लगे हैं, उनकी बातों व सलाहों पर अमल करने लगे हैं। सोनिया के राजनैतिक सचिव पटेल से भी पिछले कुछ दिनों में राहुल की तीन दौर की लंबी वार्ता हो चुकी है। यानी कांग्रेस को बदलने के लिए राहुल खुद को बदल रहे हैं।
Posted on 16 April 2012 by admin
संघ के एक वर्ग में अडवानी को लेकर अब भी कुछ शंकाएं हैं। पर मोटे तौर पर संघ यह मन बना चुका है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में वह पार्टी के प्रधानमंत्री कैंडिडेट के तौर पर नरेंद्र मोदी को आगे करेगा। संघ मोदी के हिंदुत्व व विकास को चाशनी में लपेट कर भाजपा का अगला एजेंडा पेश करना चाहता है। संजय जोशी को भी संघ की ओर से साफ-साफ निर्देश दिया गया है कि जितनी जल्दी हो वह मोदी से अपने मन-मुटाव दूर करे। संघ मोदी को लेकर प्रवीण तोगड़िया और किसान संघ के विरोध को भी ज्यादा महत्व देने के पक्ष में नहीं है। कहीं न कहीं गडकरी को भी यह साफ लफ्जों में बता दिया गया है कि 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ही पार्टी का चेहरा होंगे।