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क्या सोनिया की असली पसंद नहीं हैं दादा?

Posted on 18 June 2012 by admin

अब तो यह राज राज भी न रहा कि प्रणब दा सोनिया की पहली पसंद नहीं थे। अगर राष्ट्रीय परिदृश्य पर ममता ड्रामा घटित नहीं हुआ होता तो प्रणब दा की उदात्त राजनैतिक महत्वकांक्षाएं सियासी नेपथ्य की भेंट चढ़ जातीं। बुधवार को ममता और मुलायम ने जब साझा प्रेस कांफ्रेंस की तो उसके बाद ही सोनिया एंड कंपनी को बैकफुट पर आना पड़ा। उसी शाम प्रणब के पास सोनिया का फोन आया और उन्होंने दादा से कहा कि ‘हमने तो बस आपका अकेला नाम लिया था, ममता ये ख्वामखाह का बखेड़ा कर रही हैं।’ सोनिया ने दादा से ये भी कहा कि वे सुबह दस जनपथ आकर उनसे मिलें।

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क्रिकेट के भगवान का नया मुकाम

Posted on 04 June 2012 by admin

हिन्दुस्तां में क्रिकेट के भगवान कहे जाने सचिन तेंदुलकर ने आखिरकार वक्त निकाल ही लिया राज्यसभा में अपने शपथ ग्रहण के लिए। सोमवार की सुबह वे दिल्ली पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से सीधे संसदीय राज्य मंत्री राजीव शुक्ला के उनके 5 सफदरजंग रोड स्थित सरकारी निवास को जाएंगे। वहां चाय-नाश्ते के बाद सचिन शुक्ला जी के साथ उनकी ही गाड़ी में संसद भवन की ओर प्रस्थान करेंगे, अब तक यही संभावना व्यक्त की जा रही है कि सचिन संसद भवन के गेट नंबर 12 से संसद में प्रवेश करेंगे, पर मीडिया व कैमरों की भीड़ के मद्देनजर आखिरी वक्त भी सचिन का प्रवेश द्वार बदल सकता है, शपथ ग्रहण के बाद सचिन उप राष्ट्रपति से औपचारिक मुलाकात करेंगे, उसी रोज शाम को 4 बजे उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है, सोमवार की शाम ही सचिन मुंबई के लिए वापिस लौट जाएंगे। सियासत व पीआर में माहिर शुक्ला जी ने अपने ‘रेखा-एक्सपीरियेंस’ से कई सीख ले ली है, रेखा भी अपने शपथ ग्रहण के रोज सीधे शुक्ला जी के सरकारी आवास पर पहुंची थीं फिर वहां से संसद भवन। पर वहां पत्रकारों की इस कदर रेलमरेल थी कि वे बहुत देर तक तो अपनी कार से बाहर नहीं आ पाईं थी, शुक्ला जी सचिन को लेकर इतने चिंतित नहीं हैं, वे जानते हैं कि सचिन मीडिया फ्रेंडली हैं और पत्रकारों को हेंडिल करना उन्हें बखूबी आता है, शुक्ला जी भी एक पूर्व पत्रकार रह चुके हैं और सचिन ने उन्हें भी अब तक ठीक-ठाक ‘हेंडिल’ किया है।

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कुमार को उपहार

Posted on 28 May 2012 by admin

आखिर तमाम मशक्कतों के बावजूद भी प्रणबदा का नाम कांग्रेस की ओर से सामने क्यों नहीं आ रहा है? दरअसल इसके केंद्र में ममता हैं और कहीं न कहीं 10 जनपथ का दादा के प्रति कोई पुराना अविश्वास है। समझा जाता है कि जब ममता बनर्जी की पिछले दिनों सोनिया गांधी से मुलाकात हुई थी तो ममता ने एक झटके में प्रणब की उम्मीदवारी को नकार दिया था। ममता सोच रही है कि अगर देश का राष्ट्रपति पहले से ही एक बंगाली हो तो पीएम पद के लिए उनका दावा कैसे पेश हो सकता है। फिर सोनिया ने ममता से डा. मनमोहन सिंह के बारे में जानना चाहा तो ममता ने सीधे तौर पर मीरा कुमार का नाम ले लिया। मीरा के नाम के बिहारी कार्ड का नीतीश भी विरोध नहीं कर पाएंगे और मुलायम भी इस दलित कार्ड के साथ होंगे, यानी ममता, मुलायम व नीतीश के समर्थन से मीरा कुमार राष्ट्रपति पद की प्रमुख दावेदार के तौर पर उभर सकती हैं।

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हार कर भी जीत गए गडकरी

Posted on 28 May 2012 by admin

भले ही फौरी तौर मुंबई के मसले को मोदी की जीत व गडकरी की हार के तौर पर देखा जा रहा हो, पर सच तो यह है कि हार कर भी जीत गए हैं गडकरी और एक नए सियासी बाजीगर के तौर पर उनका अवतार हुआ है। यानी कि मोदी की जीत में वैसे कई नेता नेत्रियों की हार छुपी है जो जाने-अनजाने तौर पर संघ के निशाने पर रहे हैं। यह भी संकेत मिलने लगे हैं कि अपनी नई अध्यक्षीय पारी में गडकरी कुछ बड़े निर्णय ले सकते हैं। इस बात पर भी सियासी धुंध साफ हो गई है कि लोकसभा के अगले आम चुनाव यानी 2014 में नरेंद्र मोदी ही भाजपा का चेहरा होंगे, उन्हें ही पीएम कैंडीडेट के तौर पर प्रोजेक्ट कर पार्टी चुनाव में जाएगी, नीतीश रुठे तो रुठें भाजपा नीतीश की जगह अपने नए गठबंधन साथियों की तलाश में जुट गई है-मोदी व जयललिता की मित्रता वैसे भी किसी से छुपी नहीं है।

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बाबा रामदेव मीडिया वाले

Posted on 21 May 2012 by admin

बाबा रामदेव एक नए मीडिया मुगल के तौर पर अवतरित हो रहे हैं, जब से उन्होंने सत्ता पक्ष यानी कांग्रेस से रार ठान ली है वे नई सियासी भंगिमाओं से ओत-प्रोत अभिव्यक्ति के हर हथियार का बखूबी इस्तेमाल जान गए हैं। बाबा को शक है कि कांग्रेस पोषित मीडिया का हमला उन पर कहीं ज्यादा पैना है, सो उन्होंने तय कर लिया है कि अपने धार्मिक चैनलों से अलहदा वे आने वाले दिनों में दो न्यूज चैनल लेकर आएंगे। सूत्रों से मिली जानकारियों पर अगर एतबार किया जाए तो न्यूज चैनलों के अलावा बाबा एक साथ अपने तीन राष्ट्रीय अखबार भी शुरू करेंगे अंग्रेजी, हिंदी और ऊर्दू में, यानी सत्ता पक्ष भी अब बाबा के चौतरफा वार के लिए तैयार रहे।

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मोदी का मुंबई आना

Posted on 21 May 2012 by admin

नितिन गडकरी को दूसरा टर्म दिए जाने का विरोध शुरू हो गया है और इस विरोध की चिंगारी को हवा देने का काम पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेता तथा अडवानी कैंप के दूसरी पांति के कुछ नेतागण कर रहे हैं। यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे पार्टी नेताओं ने तो यहां तक धमकी दे डाली है कि अगर संघ गडकरी को दुबारा बनाने की जिद जारी रखता है तो वे मुंबई में 24-25 मई को आहूत होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी का बहिष्कार करेंगे। नरेंद्र मोदी पहले दिन के सेशन में आने को तैयार बैठे हैं पर उन्हें पार्टी के ही कुछ प्रबुद्द नेता समझा रहे हैं कि उनके मीटिंग में शामिल होने से गडकरी का हौंसला और बढ़ जाएगा। गडकरी की आसन्न ताजपोशी को देखते हुए मीडिया में भी यकबयक उनके खिलाफ स्टोरी प्लांट होनी शुरू हो गई है। ये तमाम स्टोरी ‘ऑफ द् रिकॉर्ड’ की ‘ऑन द् रिकॉर्ड’ प्रस्तुति हैं।

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क्या सिब्बल से अन्ना की दोस्ती हो गई है?

Posted on 21 May 2012 by admin

सवाल लाख टके का है कि क्या कपिल सिब्बल और अन्ना हजारे में अंदरखाने का समझौता हो गया है? क्या कारण है कि सिब्बल पर सदा कुपित रहने वाले हजारे ने अब किंचित अपना रुख बदल लिया है। यहां तक कि बाबा रामदेव भी पिछले कुछ समय से सिब्बल पर सीधा हमला करने से बच रहे हैं। अन्ना ने भी पिछले काफी समय से सिब्बल को आड़े हाथों नहीं लिया है। सूत्र बताते हैं कि तकरीबन 4 माह पूर्व सिब्बल के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी अपने दो मराठी मित्रों (जिनका अन्ना से पुराना परिचय था) रालेगण सिध्दि पहुंचे थे, और उस आइएएस अधिकारी ने किसी सिध्द संत के मानिंद अन्ना को साध लिया, जिसकी परिणति अब सबके सामने है।

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जावेद का जवाब

Posted on 13 May 2012 by admin

भाजपा नेता एस.एस.आहलूवालिया भले ही झारखंड से राज्यसभा का चुनाव हार गए हों, उनकी हार में भी कई पार्टी नेताओं को अपनी जीत की झलक दिखाई दे रही थी, जैसे ही झारखंड से राज्यसभा चुनावों के परिणाम घोषित हुए माया सिंह, राजीव प्रताप रूढ़ी और अरुण जेतली ने राज्यसभा के मनोनीत मेंबर जावेद अख्तर से चुहल की, ‘जावेद भाई, झारखंड चुनाव में आपकी इस कदर दिलचस्पी हैरान करने वाली है, और आप नतीजे आने के बाद बेतरह खुश दिख रहे हैं।’ जावेद ने भी नहले पर दहला मारा-‘नहीं जनाब, मैं तो बस बीजेपी के मेम्बरान को फॉलो कर रहा हूं।’

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जयराम की जय

Posted on 13 May 2012 by admin

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश चाहे जिस मुद्दे को छू लें उसे उतना ही चर्चित बना देते हैं, जयराम का सबसे हालिया शगल शौचालय है, वे चाहते हैं कि प्रत्येक गांव के हर घर में सुलभ शौचालय का निर्माण हो। सुलभ आंदोलन वाले जब मध्य प्रदेश की बैतूल की अनिता नरे को ढूंढ लाए और उन्हें इस बात के लिए जब पुरस्कृत किया कि ससुराल में शौचालय न होने पर वो अपने प्रियतम का घर छोड़ आईं तो जयराम ने उस अनिता को हाथों हाथ उठा लिया, उन्हें राष्ट्रपति से भी मिलवा लाए, तााा मामला यूपी के महाराजगंज की प्रियंका का है, वह भी अपने शौचालय विहीन ससुराल छोड़ आई है, सुलभ वाले उसे भी दो लाख का ईनाम दे रहे हैं, क्या अब जयराम प्रियंका का भी डंका बजाएंगे?

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हमने जो कहा, वही हुआ

Posted on 13 May 2012 by admin

महज एक पखवाड़े पूर्व इसी कॉलम में यह दावा किया गया था कि संघ ने तय कर लिया है भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को दूसरा टर्म मिलेगा, गडकरी के दुबारा चुनाव के खिलाफ अलख जगाने वाले और माहौल बनाने वाले पार्टी के चंद वरिष्ठ नेताओं से दो टूक बतियाने के वास्ते संघ प्रमुख मोहन भागवत नागपुर से दिल्ली आए थे और उन्होंने अडवानी व मुरली मनोहर जोशी जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से साफ कर दिया था कि अब समय आ गया है कि वे अपनी अति राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं को तिलांजलि देकर पार्टी के अभिभावक या संरक्षक की नई भूमिका में अवतरित हो जाए। संघ के कड़े तेवरों को देखते हुए अडवानी कैंप के दूसरी पंक्ति के वैसे नेता या नेत्रियों ने भी हथियार डाल दिए जो कालांतर में बात-बेबात गडकरी का विरोध करते रहे थे। संघ की भूमिका व उसके डंडे का ही यह असर था कि शुक्रवार को नई दिल्ली में आहूत पार्टी पदाधिकारियों की एक बैठक में गडकरी को दुबारा चुने जाने के लिए एक सर्वानुमति जैसा माहौल बन गया। जैसा कि इस कॉलम में पूर्व में बताया गया था कि 24-25 मई को आहूत होने वाली पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इस बारे में पार्टी संविधान में जरूरी संशोधन कर लिया जाएगा।

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