Posted on 29 June 2013 by admin
सियासी दांव-पेंच के माहिर खिलाड़ी दिग्विजय सिंह से बेरूखी दिखाते हुए पार्टी ने जब उनके हाथों से यूपी लेकर अहमद पटेल के खासम-खास समझे जाने वाले मधुसूदन मिस्त्री के हाथों में इस प्रदेश की बागडोर सौंप दी तब भी दिग्गी राजा ने हिम्मत नहीं हारी, उन्होंने आंध्र प्रदेश का प्रभार संभालते ही सबसे पहला फोन दिवंगत वाइ.एस.आर.रेड्डी की पत्नी और जगनमोहन की मां को किया और उन्हें याद दिलाया कि एक जमाने में उनकी वाइएसआर से कितनी निकटता थी। सो, दिग्गी ने जगनमोहन की पार्टी और कांग्रेस में एक अघोषित तालमेल की बात की, पर जगन की मां की ओर से उन्हें कोई ठोस आश्वासन प्राप्त नहीं हुआ। जगन की मां विजय लक्ष्मी ने दिग्गी को यह कहते हुए टाल दिया कि इस बारे में वह पहले जेल में बंद अपने बेटे से बात करेगी फिर कांग्रेस की ओर दोस्ती का कोई हाथ बढ़ा पाएंगी। जबकि सच तो यह है कि जगन की मां निरंतर कांग्रेस के उस्ताद खिलाड़ी अहमद पटेल के संपर्क में हैं और वह दिल्ली में कई दफे पटेल से मिल भी चुकी हैं। यानी दो कांग्रेसी दिग्गजों की आपसी शह-मात की बिसात पर जगन की अम्मा अपना हर सियासी दांव बेहद सोच-समझ कर चल रही हैं।
Posted on 18 June 2013 by admin
दवा, दुआ व दगा के तमाम उलाहनों व आहटों के बीच बिहार में जद-यू और भाजपा के दरम्यान एक नया सियासी मंच सजने लगा है। टूटते रिश्तों के भग्नावेशों पर कड़वाहट तेजी से पांव पसार रही है। नीतीश एंड कंपनी ने अपने आगे का रास्ता सोच रखा है। सोच में पड़ी भाजपा टूटते रिश्तों के दंश से चाहे लाख बिलबिला रही हो, पर इस दफे वह नीतीश के समक्ष घुटने टेकने को तैयार नहीं। भाजपा के ही कुछ विभीषण अब भी नीतीश की हर मुमकिन मदद को तैयार हैं, पर भाजपा का एक बड़ा वर्ग नीतीश पर जवाबी हमले को तैयार है, निशाने पर होगी नीतीश की मीडियाजनित धवल व स्वच्छ छवि। जद-यू के एक बागी नेता गुपचुप तौर पर बताते हैं कि अभी केंद्र सरकार नीतीश के ‘मॉरीशस कनेक्शन’ की बानगियों को तलाश रही है। इस नेताजी का यहां तक दावा है कि मॉरीशस के कई निर्माणाधीन पंचतारा होटलों में इस समाजवादी पुरोधा की बड़ी हिस्सेदारी है, बड़े निवेश हैं, बड़े बिजनेस स्वार्थ हैं लेकिन जब तक सरकार के हाथों कोई पुख्ता कागजात नहीं लग जाते, तब तक भाजपा भी इस बारे में कुछ नहीं बोलेगी। इस बारे में भी नहीं कि आखिरकार नीतीश इतना क्यों बोल रहे हैं?
Posted on 10 June 2013 by admin
गोवा के भगवा समुद्र मंथन में चाहे भाजपा की लाख किरकिरी हुई हो, पर रविवार आते-आते भाजपा वालों को नमो-अमृत की नायाब रेसेपी हाथ लग गई, अब तो यह छुपी बात नहीं रह गई है कि अडवानी कैंप मोदी के इतने आकस्मिक अभ्युदय को बिल्कुल पचा नहीं पा रहा, सो अडवानी का पेट खराब हो गया, वे शुक्रवार को गोवा नहीं आ पाए। अडवानी के परचम-परचे की बागडोर थामे जो गोवा पहुंचे भी वे अपने मंतव्य में ‘लेट’ थे। मोदी ने अपने कुशल प्रबंधन की वजह से माहौल अपने पक्ष में बना लिया है। सो, अब तो यह मुद्दा ही नहीं रह गया है कि उन्हें प्रचार कमेटी की बागडोर सौंपी जाएगी या उनके नाम पर अगला लोकसभा चुनाव लड़ा जाएगा। पार्टी की गोवा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक ने जाने-अनजाने तय कर दिया है कि बिना मोदी भाजपा की चुनावी नैया पार होने वाली नहीं। सो, आने वाले कुछ दिनों में अडवानी कैंप के कई योध्दा पाला बदल सकते हैं।
Posted on 04 June 2013 by admin
‘इंडियन पाप लीग’ यानी आईपीएल के ाख्मों को कुरेदने में और उसे हवा देने में यूपीए सरकार भी पीछे नहीं है। श्रीनिवासन पर इस्तीफे का दबाव बनाने के लिए बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष व सचिव के इस्तीफे के बाद इसके उपाध्यक्ष भी लामबध्द हो गए हैं। अगर इस क्रिकेट के हम्माम में सभी नंगे हैं तो कांग्रेस इसको लेकर दोहरा मापदंड क्यों अपना रही है? एक ओर तो कांग्रेसियों का श्रीनिवासन पर सीधा हमला निरंतर जारी है, वहीं वह अपने मंत्री और आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला का बचाव भी कर रही है। दरअसल, केंद्र सरकार डीएमके को एक जोर का झटका देना चाहती है, सो उसके निशाने पर बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन हैं, जो डीएमके के करीबियों में शुमार होते हैं। शायद यही वजह है कि फिक्सिंग विवाद के इतने दिन गुजरने के बाद कांग्रेसी मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान आया और उन्होंने श्रीनिवासन को पद छोड़ने को कहा। वैसे भी आईपीएल एक भरपूर दूध देने वाली गाय है सो, शरद पवार भी इतने एक्टिव हैं। रही बात सिंधिया की तो उनकी इमेज अच्छी है और कांग्रेस अगस्त के अंत तक उन्हें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर सकती है।
Posted on 26 May 2013 by admin
‘इंडियन पाप लीग’ यानी आईपीएल आज की तारीख में क्रिकेट नहीं केसिनो हो गया है और आज के इस परिदृश्य में सब के सब जुआरी हो गए हैं। अगर श्रीनिवासन फंसते हैं तो धोनी भी फंस सकते हैं। सो, देखना दिलचस्प रहेगा कि किस-किस का विकेट कब गिरता है? बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन का इस्तीफा कभी भी हो सकता है। हालांकि आईपीएल कमिश्नर व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला उन्हें बचाने का भरसक यत्न कर रहे हैं। रही बात यूपीए सरकार की तो वह इस मुद्दे पर असमंजस में है, क्योंकि श्रीनिवासन का पक्ष लेकर वह शरद पवार से रार लेने की इच्छुक नहीं। शरद पवार पिछले काफी समय से श्रीनिवासन का विकेट गिराने की व्यूह रचना बनाने में जुटे हैं। पवार का मुंबई पुलिस पर न केवल अच्छा प्रभाव है अपितु कुछ हद तक उस पर नियंत्रण भी है, चुनांचे श्रीनिवासन के दामाद मयप्पन को लेकर मुंबई पुलिस की अतिसक्रियता समझ आती है। पवार के तमिल महारानी जयललिता से भी अच्छे तालुक्कात हैं और इंडिया सीमेंट के मालिक श्रीनिवासन जयललिता के दुश्मन नंबर वन हैं, क्योंकि वे डीएमके व करूणानिधि के करीबियों में शुमार होते हैं। यही वजह है कि चैन्ने में उनके उपर कई केस चल रहे हैं, वहीं आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी से उनकी नजदीकियों को लेकर उन पर एफआईआर भी दर्ज है। यूं तो आईपीएल में सट्टेबाजी की जांच कई राज्यों की पुलिस कर रही है पर इस मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार की अतिसक्रियता कइयों को हैरान करने वाली है। सूत्र बताते हैं कि आईपीएल में जो कुछ हो रहा है इसको लेकर राहुल गांधी भी खासे परेशान हैं, पार्टी फोरम पर उन्होंने अपना मत स्पष्ट कर दिया है कि राजनेताओं को कम से कम खेल के खेल से अलग रहना चाहिए। क्या शुक्लाजी सुन रहे हैं?
Posted on 14 May 2013 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 07 May 2013 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 30 April 2013 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 25 April 2013 by admin
नरेंद्र मोदी ने अपनी अनोखी भाव-भंगिमाओं से बंगाल के उद्योगपतियों को अपना मुरीद बना लिया है। अभी कोलकाता में मोदी की उद्योगपतियों के साथ बैठक सुपरहिट रही। कुछ उद्योगपति मोदी की गजब की स्मरण शक्ति, तो कुछ उनके होमवर्क तो कुछ उनके भाषण कला के मुरीद हो गए। दरअसल, कोलकाता के उद्योगपतियों का एक प्रतिनिधिमंडल कोई 6 महीने पूर्व गुजरात में उद्योग लगाने की संभावनाओं को तलाशते हुए गांधीनगर में मोदी से मिला था। मोदी ने उद्योगपतियों के साथ अपनी कोलकाता की बैठक में गुजरात आए उन तमाम उद्योगपतियों को न सिर्फ उनके नाम से पुकारा अपितु उनके बिजनेस प्रपोजल को भी बकायदा याद रखा था। इसके उलट ममता बनर्जी ऐसी बैठकों में या तो फोन पर बात कर रही होती हैं या अपनी घड़ी देख रही होती हैं। ममता के पूर्र्ववत्ती बुध्ददेव भट्टाचार्य ने तो अजीम प्रेमजीजैसे जाने-माने उद्योगपति को ऐसी ही एक बैठक में ‘एडम’ प्रेमजी कह कर संबोधित कर दिया था।
Posted on 25 April 2013 by admin
योजना भवन के गेट पर एसएफआई के कार्र्यकत्ताओं द्वारा ममता बनर्जी और उनके वित्त मंत्री अनिल मित्रा के अपमान के ताने-बाने में क्या कांग्रेस की भी कोई भूमिका थी? नहीं तो क्या वजह थी कि योजना भवन के सुरक्षा अधिकारियों ने ममता बनर्जी की एक जायज मांग अनसुनी कर दी। दरअसल, योजना आयोग के मुख्य दरवाजे के पास जब ममता की कार पहुंची तो वहां एसएफआई और वामपंथी कार्र्यकत्ताओं का जमावड़ा जुटा था, जिन्होंने ममता की कार को वहां पहुंचते ही घेर लिया। तब ममता ने कार के अंदर से ही फोन कर योजना भवन के एक प्रमुख व्यक्ति से आग्रह किया कि वे जल्दी से मेन गेट खुलवा दें ताकि उनकी कार अंदर आ सके। पर सुरक्षा कर्मियों की ओर से उन्हें टका सा जवाब मिला कि ‘यह गेट लॉक है और इसकी चाबी हमारे पास नहीं है आप पिछले गेट से आ जाइए।’ ममता पिछले गेट से आने को तैयार नहीं हुई। उनके और अमित मित्रा के साथ धक्का-मुक्की हुई, ममता का ब्लाउज फाड़ने की कोशिश हुई, अमित मित्रा का कुर्ता फट गया, उन्हें चोटें भी आईं, मित्रा को फौरन दिल्ली के एम्स में दाखिल करवाया गया, डाक्टरी जांच के लिए कि कहीं उन्हें अंदरूनी चोटें तो नहीं आईं हैं, क्योंकि उन्हें पहले दिल का दौरा पड़ चुका है। दीदी स्वयं कोलकाता के एक अस्पताल में चेकअप के लिएर् भत्ती हुईं, ममता ने कहा कि अब वह दिल्ली नहीं आएंगी, क्योंकि दिल्ली सेफ नहीं है।