Posted on 08 July 2013 by admin
यूं तो सियासत भी एक खेल है। इस बात को नौकरशाहों से बेहतर और कौन जान सकता है। सो आइएएस-आइपीएस अफसर अब अपने मनचाहे तबादलों के लिए मंत्रालयों की खाक छानने की बजाए आराम से टोपी लगाए गोल्फ खेलना पसंद करते हैं। क्योंकि इन दिनों ऐसी बहुत सारी बातें गोल्फ कोर्स में ही तय हो जाती हैं। सो, तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारियों में गोल्फ कोर्स की मेंबरशिप पाने की होड़ मची है। हालिया दिनों में रिटायर हुए केंद्रीय गृहसचिव आर.के.सिंह भी गोल्फ के उतने ही बड़े शौकीन हैं। मसलन, एक सीनियर आईपीएस दिलीप त्रिवेदी को बिना उनकी वष्ठिता देखे सिर्फ गोल्फ क्लब की दोस्ती के आधार पर बीएसएफ का अतिरिक्त महानिदेशक नियुक्त कर दिया गया था। इस नियुक्ति में कई सीनियर अफसरों की वरिष्ठता को नारअंदाज कर दिया गया। सिंह जाते-जाते उनसे सीआरपीएफ का अगला महानिदेशक बनाने का वायदा भी कर गए हैं। सनद रहे कि सीआरपीएफ के मौजूदा डीजी प्रणय सहाय का कार्यकाल इसी 31 जुलाई को समाप्त हो रहा है।
Posted on 08 July 2013 by admin
इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ से सुर्खियों में आए आईबी के स्पेशल डायरेक्टर राजेंद्र कुमार आने वाले 31 अगस्त को अपनी नौकरी से रिटायर हो रहे हैं। यही सबसे बड़ी वजह है कि आईबी ने सीबीआई को उन्हें ‘प्रोसिक्यूट’ करने की इााजत नहीं दी। सो, सीबीआई चाह कर भी अपनी चार्जशीट में राजेंद्र कुमार का नाम नहीं ला पाई। सो, इतना साफ है। वैसे भी किसी के रिटायरमेंट के बाद सीबीआई को उसके ‘प्रोसिक्यूशन’ की आवश्यकता नहीं होती।
Posted on 29 June 2013 by admin
चूंकि जगन की अम्मा का हिन्दी-अंग्रोी भाषाओं पर उतनी पकड़ नहीं, चुनांचे जगन ने तय किया है कि दिल्ली की राजनीति में वह अपनी पत्नी भारती रेड्डी को आगे करेंगे जिन्हे तेलुगु के अलावा हिन्दी-अंग्रोी मीडिया हेंडिल करने का भी अच्छा खासा अनुभव है। अभी पिछले दिनों भारती अपनी दोनों बेटियों के साथ दिल्ली आयी थीं और नई दिल्ली के लोदी एस्टेट स्थित जगन के सरकारी निवास में ठहरी थीं। जगन ने दिल्ली की जिस नामचीन पीआर एजेंसी की हालिया दिनों में सेवाएं ली हैं, इस एजेंसी के मालिक को दस जनपथ का बेहद करीबी माना जाता है और इत्तफाक देखिए कि पीआर में माहिर इस युगल की दिग्विजय से नहीं पटती है। सो, ये भी चाहेंगेकि कांग्रेस में जगन कनेक्शन को राहुल की बजाए सोनिया का वरदहस्त प्राप्त हो। जगन ने यह भी तय किया है कि उसकी पत्नी अब महीने में दो-तीन दिन दिल्ली में गुजारेंगी, दिल्ली के मीडिया से बेहतर संपर्क स्थपित करेंगी और जगन की नई पार्टी के लिए केंद्र में बेहतर संभावनाएं तलाश करेंगी।
Posted on 18 June 2013 by admin
देश में लोकसभा चुनाव तय समय पर ही होंगे। भाजपा के लोग नवंबर में चुनाव का शोर मचा रहे हैं पर इस बारे में कांग्रेस बेफिक्र है। कांग्रेस अभी किसी जल्दी में नहीं है। कांग्रेस देखना चाहती है कि नरेंद्र मोदी के आकस्मिक अभ्युदय को जो भाजपा के नेता नहीं पचा पा रहे हैं वे अपने घर में और कितना हंगामा खड़ा करते हैं। यूपीए सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार ने एक बड़ा फंड रखा हुआ है। मीडिया में इसकी आहटें दिखने लगी हैं। यूपीए सरकार ‘डायरेक्ट कैश टांसफर’ से लेकर ‘फूड सिक्यूरिटी बिल’ जैसे कई अहम मसलों का ढिंढोरा जनता में पीटना चाहती है, सो इसके लिए उसे वक्त चाहिए। साथ ही कांग्रेस इशरत जहां और सोहराबुद्दीन जैसे मामलो में तेजी लाकर जनता व मीडिया में मोदी की और किरकिरी करना चाहती है।
Posted on 18 June 2013 by admin
जून के आखिर में या फिर जुलाई के प्रथम सप्ताह में मनमोहन सरकार में एक और फेरबदल मुमकिन है। सूत्रों की मानें तो कोई 6 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं, इनमें से तीन सोनिया के और तीन राहुल के कोटे से मंत्री हो सकते हैं। पवन बंसल व अश्विनी कुमार के झटके खाने के बाद 10 जनपथ मनमोहन के लोगों को लेकर तनिक सशंकित है। सो, उम्मीद जताई जा रही है कि इस फेरबदल में मनमोहन की नहीं चलेगी। राहुल अपने कई विश्वासपात्रों को वापिस संगठन में लेकर आना चाहते हैं। राहुल के कोटे से वही चंद पुराने नामों की चर्चा है, मसलन माणिक टैगोर, मीनाक्षी नटराजन, राज बब्बर, ज्योति मिर्धा आदि। दस जनपथ आने वाले 6 राज्यों (झारखंड समेत) के विधानसभा चुनावों को मद्देनजर रखते हुए चुनाव वाले राज्यों को प्रमुखता देना चाहता है। यानी इन राज्यों से आने वाले नेताओं की मंत्री बनने की कहीं ज्यादा संभावनाएं हैं। राजस्थान के महत्त्व को रेखांकित करने के मकसद से सी.पी.जोशी को पूर्णकालिक रेल मंत्री बनाया जा सकता है।
Posted on 10 June 2013 by admin
सीबीआई के मौजूदा डायरेक्टर रंजीत सिन्हा अपने दोस्ताना व्यवहार के चलते पक्ष-विपक्ष दोनों दलों के नेताओं में खासे लोकप्रिय हैं, कांग्रेस तो कांग्रेस, भाजपा में भी उनके कई दोस्त हैं। बिहार-झारखंड बैकग्राउंड के कुछ नेता ऐसे भी हैं जो महज उन्हें जानते भर हैं पर बेहद नजदीकी होने का दावा करते हैं। भाजपा के एक ऐसे ही सांसद ने दिल्ली के एक बड़े रीयल एस्टेट कारोबारी को तकरीबन 6 करोड़ का चूना लगा दिया, कहा उनका काम हो जाएगा काम तो नहीं हुआ अब तो उस सांसद ने उस कारोबारी के फोन उठाने भी बंद कर दिए हैं। यह कारोबारी अपनी शिकायत लेकर भाजपा के कई बड़े नेताओं से मिल चुका है, पर अब तलक उस सांसद का बाल कांका नहीं हो पाया है।
Posted on 04 June 2013 by admin
कांगेसी नेता अजित जोगी व उनके पुत्र अमित जोगी से विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों अमित जोगी का एक ट्रेवल एजेंट से उनके बकाया बिल चुकाने को लेकर खासा विवाद हो गया और विवाद इस कदर बढ़ा कि कथित तौर पर अमित जोगी ने उस ट्रेवल एजेंट को एक थप्पड़ रसीद कर दिया। नाराा ट्रेवल एजेंट अमित के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने जा रहा था। वहां उपस्थित लोगों ने हालात की गंभीरता को देखते हुए जैसे-तैसे यह मामला शांत करवाया।
Posted on 04 June 2013 by admin
राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह के यह सियासी अभ्युदय का काल है। पंकज न सिर्फ इन दिनों सियासी तौर पर बेहद सक्रिय हैं अपितु वे पिता के काम-काज में भी हाथ बंटा रहे हैं। इस बार युवा मोर्चा के पदाधिकारी नियुक्त करने में दो लोगों की सबसे ज्यादा चली, एक तो मुरलीधर राव जो मोर्चा के प्रभारी हैं, दूसरे पंकज सिह जिनके कहने पर राष्ट्रीय स्तर पर 4-5 पदाधिकारियों की नियुक्तियां हुईं। सूत्र बताते हैं कि पंकज सिंह लोकसभा का अगला चुनाव लड़ने की तैयारियों में भी जुटे हैं। इस दफे अगर राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव लड़ते हैं तो पंकज गौतमबुध्द नगर या गााियाबाद से अगला संसदीय चुनाव लड़ सकते हैं।
Posted on 26 May 2013 by admin
कर्नाटक की हार के बाद से भाजपा में स्टार नेता नरेंद्र मोदी का भाव पार्टी में तनिक गिरा है। सूत्र बताते हैं कि कर्नाटक ेचुनाव के नतीजे आने से पहले पार्टी के नियमित कामकाज में मोदी की दखलंदाजी कहीं ज्यादा थी। वे हर दूसरे-तीसरे दिन पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को फोन करके कहते थे फलां-फलां मुद्दा उठाना चाहिए, पार्टी अध्यक्ष के फलां मुद्दे पर इस प्रकार के बयान आने चाहिए आदि-आदि। कर्नाटक चुनाव के दिन राजनाथ सिंह ने नमो को फोन कर कहा था कि ‘आपको पर्लियामेंट्री बोर्ड की मीटिंग में आमंत्रण है, आइएगा जरूर। भले ही वहां पार्टी की हार हो, पर आपके मीटिंग में आने से पार्टी नेताओं का हौंसला बुलंद होगा।’ तब मोदी ने हामी भर दी थी। पर जैसे ही कर्नाटक के नतीजे आए मोदी ने दांत में दर्द का बहाना कर दिल्ली आने से मना कर दिया। यह बात पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को नागवार गुजरी, चुनांचे अब पार्टी बेहद अहम मसलों पर मोदी की राय को उतनी तवज्जो नहीं दे रही है।
Posted on 14 May 2013 by admin
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