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पटेल का दिमागी खेल

Posted on 20 October 2009 by admin

अहमद पटेल इन विधानसभा चुनावों में एक नया फार्मूला लेकर आए हैं कि पार्टी बागियों को अपना दुश्मन न माने, पटेल का मानना है कि 93 के चुनाव में कांग्रेसी बागियों ने ही भाजपा-शिवसेना गठबंधन को गद्दी दिला दी थी। सो, इस बार अगर एनसीपी के खिलाफ कोई कांग्रेस का मजबूत बागी खड़ा है तो कांग्रेस पार्टी उसे अंदरखाने से भरपूर मदद दे रही है, और यह खुला खेल फरूर्कावादी है यानी कांग्रेस ने एनसीपी से भी साफ कर दिया है कि किसी सीट पर कांग्रेस के किसी अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ अगर एनसीपी का कोई दमदार बागी खड़ा हो जो सीट जीतने का माद्दा रखता हो तो एनसीपी अपने वैसे बागियों का भी दिल खोलकर साथ दें। यानी चित्त भी पटेल की और पट भी पटेल की।

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मुंडे की मुंडी

Posted on 20 October 2009 by admin

गोपीनाथ मुंडे की पुत्री अपने पिता के संसदीय क्षेत्र बीड के पर्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं, पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान इस विधानसभा सीट पर मुंडे ने कोई 50 हजार वोटों से बढ़त बनाई थी। सो, माना जा रहा है कि यहां से मुंडे पुत्री की जीत आसान होगी, वैसे भी वह पहले से अपने पिता की संसदीय सीट का जिम्मा संभालती रही है, और कंप्यूटर में प्रशिक्षित होने के बावजूद पिता की चीनी मिलों की देखभाल का जिम्मा भी उसी का रहा है।

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छुट्टी पर ‘रॉ’

Posted on 05 October 2009 by admin

देश में हड़ताल का मौसम है पहले जेट के पायलेट हड़ताल पर चले गए, कभी आईआईटी के प्रोफेसर तो कभी एयर इंडिया के पायलेट, रही सही कसर ‘रॉ’ के 5 वरिष्ठ अफसरों ने पूरी कर दी है, ये सभी तीन महीने पहले लंबी छुट्टी पर गए थे पर अभी तक काम पर वापिस नहीं लौटे हैं। ये सभी अफसरगण अपने प्रमोशन को लेकर सरकार से नाराज हैं। अपनी नाराजगी जताने के लिए ये प्रधानमंत्री से भी मिले थे और प्रधानमंत्री ने भी इन्हें सब ठीक हो जाने का भरोसा दिलाया था, पर कुछ भी ठीक नहीं हुआ। सो, अपना विरोध दर्ज कराने की नीयत से ये अभी भी काम पर नहीं लौटे हैं और लौटेंगे भी या नहीं इस बात की पक्के तौर पर कोई गारंटी भी नहीं।

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आम आदमी पर भगवा मेहरबानी

Posted on 05 October 2009 by admin

कहते हैं दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है, जब से इस लोकसभा में भाजपा की इस कदर दुर्गत हुई है, पार्टी ने मौजूदा विधानसभा चुनावों में न सिर्फ अपनी रणनीति बदल ली है, बल्कि नई चुनावी नीति बुनने में भी पार्टी हर संभव सतर्कता बरत रही है। लोकसभा चुनावों में भगवा पार्टी अडवानी की आत्ममुग्धता में इस कदर डूबी थी कि उसने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निजी हमले से भी परहेज नहीं किया। पर मौजूदा विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी के एजेंडे पर सबसे मुखर होकर सामने आया है हाशिए का सिपाही आम आदमी। सो, पार्टी के आचार-व्यवहार से यह साफ झलक रहा है कि उन्हें आम-आदमी की किस कदर फिक्र है, सो भगवा पार्टी को फिक्र है बेलगाम बढ़ती महंगाई की, बेरोजगारी की, किसानों के दुख दर्द की। और इस दफे भगवा पार्टी इस बात की खासतौर पर चिंता कर रही है कि लोकसभा चुनाव की तर्ज पर कोई वरुण गांधी पार्टी के मौलिक एजेंडे का हरण न कर ले कि अकारण उग्र हिंदुत्व के लहराते परचम से पार्टी की पेशानी पर यूं अकारण चिंता की लकीरें खिंच जाएं।

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बहिन जी भाई पर मेहरबान

Posted on 19 September 2009 by admin

बहन मायावती कभी अपने भाईयों को, अपने परिवार वालों को अपनी सत्ता की परिधि से दूर-दूर रखती थीं, पर आज वक्त बदल गया है और बहिन जी भी अपने भाई के लिए बदल गई हैं, उनके नोएडा का सारा काम-काज इन दिनों उनके सगे भाई सिध्दार्थ देख रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से माया ने अपने प्यारे सतीश मिश्रा से भी खासी दूरियां बढ़ा ली हैं।

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संघ की दुविधा

Posted on 18 September 2009 by admin

संघ पार्टी पदों से अडवानी की रुखसती भी चाहता है और लगे हाथ उनसे यह भी अपेक्षा रखता है कि भाजपा चलाने में अडवानी संघ को सहयोग करे। यानी संघ का निवेदन बड़ा ही स्पष्ट है कि ‘बारात में पगड़ी पहनकर तो जाओ, पर दूल्हे की नहीं।’ संघ यह भी नहीं चाहता कि अडवानी रिटायर होकर घर बैठ जाए और यह भी नहीं चाहता कि अडवानी सक्रिय राजनीति में पहले की ही भांति सक्रिय बने रहे। बिचारे अडवानी आखिर करें तो क्या?

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मुश्किल में मोदी

Posted on 18 September 2009 by admin

कांग्रेस के निशाने पर दो लोग बड़े साफ तौर पर हैं, वे हैं-मोदी और अमित शाह। कांग्रेस को लगता है कि इन दोनों नेताओं पर हल्ला बोलने के लिए यह मौका सबसे अच्छा है, क्योंकि इस वक्त भाजपा मन से मोदी के साथ नहीं है सो एसआईटी रिपोर्ट मोदी के खिलाफ जा सकती है। मोदी को दंडित करने वाले किसी आर्डर के इंतजार में कांग्रेस अब भी है। क्या अब वक्त आ गया है कि भाजपा मोदी के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दे?

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…और अंत में

Posted on 14 September 2009 by admin

अभी बीजिंग में भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के एक आला अधिकारी को दो चीनी बालाओं के साथ मौज-मस्ती करते धरा गया है। दोनों चीनी बालाओं से हमारे गुप्तचर अधिकारी की इस कदर यारी थी कि बीजिंग स्थित उनके अपार्टमेंट में इन बालाओं का धड़ल्ले से आना-जाना लगा रहता था, अब दिल्ली इस बात को लेकर खासा चिंतित है कि इन चीनी सुंदरियों ने महज ‘रॉ’ अधिकारी का दिल ही लूटा है या हमारे कई अहम राज और खुफिया जानकारियां भी उड़ा ली हैं।

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भाजपा की ‘बा’

Posted on 06 September 2009 by admin

एकता कपूर के सोप ओपेरा की ‘बा’ हो गए हैं अडवानी, सो उन्हें नश्वर शरीर छोड़ने की जरूरत क्यों? सौ दो सौ साल की तो बात है, अब ‘बा’ को ही देखिए वह कभी मरती हैं क्या? मर भी गईं तो किसी और अवतार में सामने आ जाती हैं, सो अडवानी भक्ति-भाव में डूबे राजनाथ सिंह बेजा क्या कह रहे हैं अगले 50-100 सालों तक भी भाजपा के नेता तो अडवानी ही रहेंगे, अभी वर्तमान में है कल को भूत बनकर।

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…और अंत में

Posted on 05 September 2009 by admin

भाजपा में आज कल 3 शब्दों का बोलबाला है-छपास, दिखास और ओरल डायरिया। ‘ओरल डायरिया’ एक नया मिथ है जिसे रचने का श्रेय भाजपा के दो मुस्लिम नेताओं को जाता है वे हैं मुख्तार अब्बास नकवी और सैय्यद शहनवाज हुसैन।

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