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कौन है राजेंद्र्र?

Posted on 29 June 2013 by admin

इशरत जहां मुठभेड़ मामले में भले ही जाहिरा तौर पर आईबी व सीबीआई में ठन गई लगती हो पर सच तो यह है कि आईबी केंद्र सरकार के मौजूदा रुख को लेकर खासी आहत है। आईबी के जिस स्पेशल डायरेक्टर राजेंद्र कुमार के ऊपर आगामी चार जुलाई को सीबीआई चार्जशीट फाइल करने जा रही है और आने वाले दिनों में उनकी गिरफ्तारी की धमक सुनाई दे रही है, इनकी गिनती आईबी के सबसे कर्मठ अफसरों में होती है। राजेंद्र कुमार का रिकार्ड है कि इन्होंने भारत में काम कर रहे कोई 300 पाकिस्तानी जासूसों की शिनाख्त कर उन्हें पकड़वाया है। आईबी अपने एक काबिल अफसर के साथ सीबीआई की पुलिसिया पूछताछ शैली से भी नाराज है, इसके फौरी असर दिखने लगे हैं। प्रधानमंत्री के पास जरूरी खुफिया सूचनाओं का निरंतर अभाव हो रहा है।

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सीबीआई का यू-टर्न

Posted on 18 June 2013 by admin

सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा के चाहने वालों में अब विपक्षी दल भी शामिल हो गए हैं, क्योंकि यह पहली दफा है जब सीबीआई एक स्वतंत्र एजेंसी के मानिंद काम कर रही है और वह कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में भी लगी है। समझा जाता है कि अब कोल की आंच पीएमओ तक जा पहुंची है। सीबीआई पिछले काफी समय से मनमोहन सिंह के एक चहेते अफसर कुट्टीनायर से पूछताछ की इााजत मांग रही थी, पर पीएमओ सीबीआई को कोई टाइम देने को तैयार नहीं था। सो, पीएमओ पर दबाव बनाने की नीयत से ही सीबीआई ने कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल और पूर्व मंत्री दासारि नारायण राव पर अपना शिकंजा कसा है यानी की अगला नंबर पीएमओ का हो सकता है, इंशा अल्लाह।

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खेल क्रिकेट का

Posted on 18 June 2013 by admin

देश में क्रिकेट की सियासत तेज है, श्रीनिवासन संकट के दौर में पवार विरोधियों ने एकजुट होकर डालमिया के पुनर्अभ्युदय पर अपनी मुहर लगा दी। सितंबर में बीसीसीआई अध्यक्ष का चुनाव होना है, यह साऊथ जोन का टर्म है। सो, मुमकिन है कि मौजूदा अध्यक्ष को ही एक साल का विस्तार मिल जाए। इसके बाद सितंबर 2014 में इस्ट जोन का टर्म है। अब अरूण जेटली खुद नॉर्थ जोन के हैं पर बीसीसीआई चुनाव गाइडलाइन के मुताबिक इस्ट जोन अपनी और से नॉर्थ जोन के किसी व्यक्ति का नाम भी अध्यक्ष के लिए आगे कर सकता है। झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष और एक पूर्व आइपीएस अफसर अमिताभ चौधरी की भाजपा नेता अरूण जेटली से काफी नजदीकियां है, चुनांचे वे अभी से जेटली का नाम आगे बढ़ा रहे हैं। वैसे भी अमिताभ चौधरी रांची संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें जेटली की मदद चाहिए होगी, यानी यह मामला एक-दूसरे की मदद का है।

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तिवारी का सपा प्रेम

Posted on 10 June 2013 by admin

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक प्रमुख नेता प्रमोद तिवारी की नजदीकियां इन दिनों सपा से काफी बढ़ गईं हैं। सपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि तिवारी को सपा की ओर से एक आकर्षक पैकेज का ऑफर हुआ था, जिसके तहत उनके लिए राज्यसभा की सीट, उनकी पत्नी रत्ना को सपा के टिकट पर लोकसभा लड़वाने का आश्वासन तथा उनकी पुत्री को अखिलेश सरकार में मंत्री बनाने की बात हुई थी। इस बात की ंखबर कांग्रेस हाईकमान को वक्त रहते लग गई और फिर तमाम जांच एजेंसियां तिवारी जी के इर्द-गिर्द मंडराने लगीं। कांग्रेस से जुड़े एक विश्वस्त सूत्र ने दावा किया है कि हालिया दिनों में तिवारी जी ने नई दिल्ली के एक पॉश इलाके में 18 करोड़ रूपए में एक घर खरीदा है, जांच एजेंसियां उनसे इस बाबत पूछताछ में जुट गईं हैं। जाहिर है यह पूछताछ तब तक चलती रहेगी जब तक कि तिवारी जी अपना इरादा न बदल लें।

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सुकमा के विलेन

Posted on 04 June 2013 by admin

छत्तीसगढ़ नक्सली हमले की जांच एनआईए कर रही है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि अभी पिछले दिनों गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल की पुत्री की तरफ से एनआईए को एक शिकायत दर्ज करायी गई है। इस शिकायत में अजित जोगी और कोंटा के स्थानीय कांग्रेसी विधायक लखमा की भूमिका की तरफ उंगुली उठाई गई है। एनआईए इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि सुकमा में इतना बड़ा हादसा हो गया और इस पूरे नक्सली हमले में स्थानीय कांग्रेसी विधायक जिन पर रास्ता बदलवाने की बात भी कही जा रही है को खरोच तक नहीं आई, उल्टे आक्रमणकारी नक्सलियों ने इस हमले के दौरान स्थानीय विधायक को कथित तौर पर मोटरसाइकिल पर बिठाकर वहां से बाहर निकलने में मदद की। रही बात अजित जोगी की तो उनका हेलिकॉप्टर जगदलपुर उतरा जहां मीटिंग होनी थी, तो वहां चंद पुलिसवाले मौजूद थे। कहते हैं कि तब जोगी ने यह जानने की जहमत भी नहीं उठायी कि आखिरकार उनकी पार्टी के अन्य नेतागण कहां रह गए? और जोगी वहां से लौट आए। आज एक बदले परिदृश्य में अजित जोगी छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे हैं।

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राष्ट्रपति बनेंगे अडवानी?

Posted on 26 May 2013 by admin

अडवानी कैंप भले ही अपने पुरोधा को भगवा पार्टी में उन्हें प्रधानमंत्री का सबसे सशक्त उम्मीदवार ठहरा रहा हो, पर अडवानी को लेकर संघ के इरादे कुछ और हैं। सूत्र बताते हैं कि संघ का मंतव्य अडवानी को लेकर बड़ा साफ है। एक तो उन्हें लगता है कि अडवानी अब इतने खर्च हो चुके हैं कि 2014 में उनके ऊपर दांव लगाना खतरे से खाली नहीं रहेगा। दूसरा उनका चेहरा सामने रखने से युवा और फ्लोटिंग वोटर्स बिदक सकते हैं। चुनांचे संघ को लेकर एक ताजातरीन राय यह बनी है कि अगर 2014 के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहता है उसके पास अच्छी सीटें आ जाती हैं तो फिर अडवानी को एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। क्योंकि अडवानी के प्रति न सिर्फ कांग्रेस का रूख नरम है अपितु सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह भी उनकी जी खोलकर तारीफ करते हैं।

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(English) Saffron Mauni Baba

Posted on 14 May 2013 by admin

Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.

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चीन की तान

Posted on 07 May 2013 by admin

भारत को उम्मीद थी कि चीन मंगलवार तक अपने ट्रूप्स लद्दाख सीमा से हटा लेगा। पहले भी कई दफे ऐसा हो चुका है कि चीनी जवान हाथ में तख्तियां लेकर आगे बढ़ता है और भारतीय जवान भी उन्हें चुनौती उछालते हुए उनके सामने जा खड़े होते हैं। फिर दोनों और से हाथ मिलाए जाते हैं, सिगरेट की अदला-बदली होती है और चीनी जवान वापिस लौट जाते हैं। पर इस दफे ऐसा नहीं हुआ। ण

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(English) Mamta’s relief

Posted on 30 April 2013 by admin

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देश में चुनाव समय पर

Posted on 25 April 2013 by admin

मध्यावधि चुनाव का खटराग अलापने वाली पार्टियों को कांग्रेस अब किंचित गंभीरता से नहीं ले रही है। कांग्रेस में शीर्षस्तर पर इस बात को लेकर एका कायम है कि देश में लोकसभा चुनाव अपने तयशुदा वक्त पर ही होंगे। कांग्रेस को कोई जल्दी नहीं है और न ही वह भाजपा सरकार की पूर्व की गलतियों को दुहराने का इरादा रखती है। ममता बनर्जी और मुलायम सिंह ने अपने-अपने राज्यों में जो जनमत सर्वेक्षण करवाए हैं उसमें इन पार्टियों की हालत पतली है। बंगाल में ममता की तृणमूल संसदीय चुनाव में दस का आंकड़ा भी नहीं छू पा रही है। वहीं यूपी में मुलायम जहां 70 संसदीय सीट जीतने का सब्ज बाग देख रहे हैं, सपा के लिए सांसदों का अपने वर्तमान आंकड़े को बचा पाना ही मुश्किल हुआ जाता है। सो, ये दोनों ही नेता अभी वक्त चाहते हैं कि अपनी-अपनी पार्टियों को और दुरूस्त कर सकें। शायद यही वजह है कि जब भी यूपीए सरकार गिराने की बात आती है या संसद में शक्ति प्रदर्शन की, ममता व मुलायम दोनो ही एक स्वर में ना कहते हैं। इस ना ने कांग्रेस के अरमां को पुनर्जीवित तो कर ही दिया है।

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