Posted on 14 September 2009 by admin
संघ ने तय किया है कि इस दफे भाजपा को एक ‘लो-प्रोफाइल’ अध्यक्ष मिलेगा, जिससे कि भगवा पार्टी पर उसकी पकड़ और नियंत्रण सतत् बनी रहे, वस्तुत: संघ भाजपा की कमान अब सीधे अपने हाथों में रखना चाहता है और भाजपा के दैनंदिन कारोबार को भी प्रभावित करना चाहता है। सो, भाजपा का अगला अध्यक्ष कोई भी हो सकता है, कोई भी यानी कोई भी, चाहे बाल आप्टे ही क्यों नहीं।
Posted on 14 September 2009 by admin
सो संघ की सोच को आगे बढ़ाने की गरज से राजनाथ ने चिंतन बैठक का आह्वान किया और हार की कारणों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय ‘फैक्ट फाइडिंग कमेटी’ बना दी, इस कमेटी की रिपोर्ट पर चिंतन बैठक में चिंतन-मनन होना था। पहले तो अडवानी कैंप का सारा उपक्रम इस बात को लेकर था कि किसी भांति यह चिंतन बैठक ही टाल दी जाए, यह सबको मालूम था कि वरना चिंतन बैठक में निशाने पर कौन रहने वाला है, पर संघ ने अडवानी कैंप की तमाम दलीलों को खारिज करते हुए चिंतन बैठक को हरी झंडी दिखा दी। बैठक में शामिल होने वाले उन 24 प्रमुख नेताओं की ‘किट’ में इस रिपोर्ट को पहले ही रख दिया गया था, आगे तो यह सर्वज्ञात है कि कैसे बाद में इस रिपोर्ट के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लगा दिए गए थे…और क्यों?
Posted on 05 September 2009 by admin
सुरेश सोनी ने शिवराज सिंह चौहान को अगला भाजपा अध्यक्ष बनवाने के लिए सारा जोर लगा दिया है, संघ की यह लॉबी चाहती है कि अगर खुदा ना खास्ते शिवराज पार्टी अध्यक्ष हो जाते हैं तो मध्य प्रदेश में सीएम की कुर्सी नरेंद्र सिंह तोमर को सौंपी जाए और प्रभात झा को मध्य प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया जाए। क्या नेक विचार हैं वाह! चाहे पार्टी जाए रसातल में, पर दुकान तो अपनी चलनी चाहिए।
Posted on 05 September 2009 by admin
वाह री भाजपा वाह! असमय चौटाला का दामन झटक अब अजीत सिंह से नजदीकियां बढ़ा रही है, इस नए समीकरण के सूत्रधार कहते हैं कि अजीत और भाजपा के साथ लड़ने से भाजपा को जाट वोटों का फायदा होगा, चुनांचे अगर जाट वोट ही चाहिए थे तो चौटाला क्या बुरे थे, और भाजपा ने असमय कुलदीप बिश्नोई की मित्रता की पेशकश क्यों ठुकरा दी थी? यह तो राजनाथ बेहतर बता सकते हैं या फिर सुषमा!
Posted on 27 August 2009 by admin
जब फैक्ट फाईडिंग रिपोर्ट के ऊपर प्रेस कांफ्रेंस में बोलने जा रहे थे अरुण जेतली तो पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राय दी कि चतुराई से रिपोर्ट को दाएं-बाएं कर दो, पर प्रबंधन के उस्ताद जेतली जोश-जोश में कह गए कि ऐसी कोई रिपोर्ट है ही नहीं, जबकि अडवानी कैंप ने यह रिपोर्ट मीडिया में पहले ही लीक कर दी थी और कई टीवी चैनलों पर यह पहले से दिखाया भी जा रहा था। अब यह जेतली के विश्वसनीयता का सवाल था और उनके फेस सेविंग का भी सो पार्टी ने अंत समय तक ऐसी किसी रिपोर्ट की बात से इंकार किया।
Posted on 27 August 2009 by admin
भाजपा की शिमला की चिंता या चिंतन बैठक में महज पार्टी के 23 शीर्ष नेताओं की मौजूदगी थी, पर वहां प्रतिभा अडवानी क्या कर रही थीं? जसवंत के पार्टी के निष्कासन की घोषणा के बाद लंच के दौरान प्रतिभा हर किसी नेता नेत्री के पास जाकर दुख व्यक्त कर रही थीं कि जसवंत सिंह के साथ बड़ी ज्यादती हुई है, पर प्रतिभा की बातों पर सिवा अडवानी के किसी भी नेता नेत्री ने कान नहीं धरा सिवा अडवानी के, जिन्होंने अपने भाषण में जसवंत का संजीदगी से जिक्र किया।