Posted on 07 February 2010 by admin
यूपी में एमएलसी के चुनावों में सपा को बुरी तरह से मुंह की खानी पड़ी है और इसके लिए अखिलेश संसाधनों की कमी का रोना रो रहे हैं। अखिलेश का कहना है कि अमर सिंह ने पार्टी फंड में कोई पैसा नहीं दिया जिसकी वजह से सपा उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ा। मुलायम बंधुओं का दावा है कि जब नेताजी सत्ता में थे तो उन्होंने पार्टी फंड को मुकम्मल बनाने की गरज से अमर सिंह को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा विकास प्राधिकरण और एक्साइज में खुला हाथ दे रखा था, पर जब वक्त आया तो अमर हाथ की सफाई दिखा गए।
Posted on 29 January 2010 by admin
एक न्यूज चैनल जो कि अपने बंगाल और बंगाली प्यार के लिए खासा मशहूर है वयोवृध्द मार्क्सवादी नेता ज्योति बसु के निधन के बाद जब उनका शरीर दान कर दिया गया तो चैनल ने खूब बजाया कि बसु पहले राजनेता थे जिनका शरीर इस तरह से मृत्योपरांत दान कर दिया गया, जबकि हकीकत में मधु दंडवते पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपनी मृत्यु के बाद शरीर दान की इच्छा पहले ही व्यक्त कर दी थी, और उनका शरीर जिस अस्पताल को दान किया गया उस अस्पताल ने कभी कोई ढिंढोरा नहीं पीटा।
Posted on 29 January 2010 by admin
जब से अमर सिंह को यह मालूम पड़ा है कि सपा और कांग्रेस में अंदर ही अंदर खिचड़ी पक रही है और इन दोनों पार्टियों में इस बात पर लगभग समझौता हो चुका है कि 2012 का यूपी विधानसभा चुनाव कांग्रेस और सपा मिलकर लड़ेगी और वह भी प्रदेश की आधी-आधी सीटों पर, तब से अमर ने कांग्रेस की ओर रुख करना बंद कर दिया है। और अब शशांक शेखर के मार्फत उन्होंने अपनी चिरपरिचित दुश्मन मायावती को संदेशा भिजवाया है कि साइकिल से उतारे जाने के बाद भी वे हाथी की सवारी गांठने को तैयार हैं, पर माया अब तक किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाई है।
Posted on 23 January 2010 by admin
सनद रहे कि इस कॉलम में पहले इस बात का जिक्र हुआ था कि कैसे भारत की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के चार वरिष्ठ अधिकारी अपना विरोध दर्ज कराने की खातिर पिछले वर्ष जून से ही छुट्टी पर चले गए थे, छुट्टी जो लंबी हुई जाती है, विरोध का कारण साथी अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर है। इन चारों नाराज अफसरों में से एक कर्नाटक मूल के अरनी काम पर लौट आए हैं। मगर शेष तीन की ‘प्रोटेस्ट लीव’ अब भी बरकरार है। इन तीन में से दो अधिकारियों ने जिनमें सी.के.सिन्हा और शरद कुमार शामिल हैं, उन्होंने ‘रॉ’ प्रमुख बी.के.वर्मा को संवाद भिजवाया है कि अगर वे एक फोन भर कर दे तो ये दोनों भी काम पर लौटने को तैयार हैं। पर अब तक ‘रॉ चीफ’ की ओर से न तो कोई फोन आया है और न ही कोई संदेशा, अब इन्हें सता रहा है किसी अनहोनी का अंदेशा।
Posted on 13 January 2010 by admin
दिवंगत राजशेखर रेड्डी के पुत्र सांसद जगनमोहन रेड्डी के जब आंध्र के सीएम बनने की महत्वाकांक्षाओं पर ग्रहण लगने लग गया तो रोसैया की तो जैसे बांछे खिल आई थीं। पर जगन ने हिम्मत नहीं हारी है अब उनका पहला एजेंडा रोसैया को उनके पद से अपदस्थ करने का है। लगता है जगन की कोशिशें रंग लाने लगी है, अब कांग्रेस हाईकमान भी मानने लगा है कि तेलंगाना के मुद्दे पर रोसैया बतौर-ए-मुख्यमंत्री असफल साबित हुए हैं। सो अब पार्टी रणनीतिकारों ने एक नया फार्मूला इजाद किया है कि क्यों नहीं तेलंगाना के ही किसी नेता को आंध्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया जाए। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी और बंगाल व झारखंड के कांग्रेसी प्रभारी के.केशवराव का नाम इस सूची में सबसे आगे चल रहा है।
Posted on 13 January 2010 by admin
भाजपा के पोस्टर ब्यॉय इन दिनों सचमुच बम-बम हैं, कभी अमिताभ बच्चन के साथ मुस्कुराते हुए फोटो खिंचाते नजर आते हैं अपने डिजाइनर कपड़ों में, तो कभी कच्छ महोत्सव में डेनिम की जींस, स्वेड की शर्ट और गले में मफलर लगाए नजर आते हैं। उनकी कपड़ों को लेकर इन दिनों दीवानगी देखी जा सकती है क्योंकि जब पिछले दिनों वे नर्मदा के दौरे पर आए तो उनका पूरा परिधान ही भूरे रंग का था, वहीं कहीं जब वे राजनैतिक सभाओं में जाते हैं तो अपने खास स्टाइल की आधी बाजू की कमीज और पायजामा पहनना पसंद करते हैं, अब राजनैतिक हलकों में सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि आखिर कौन है मोदी का डे्रस डिजाइनर?
Posted on 13 January 2010 by admin
लोकसभा के सबसे युवा और कम उम्र सांसद हमदुल्लाह सईद जो कि पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व.पी.एम.सईद के पुत्र हैं, उन्होंने अपनी तेजतर्रार राजनैतिक भंगिमाओं से जलवायु परिवर्तन पर कोपनहेगन जाने वाले उच्चस्तरीय भारतीय शिष्टमंडल में बेहद अंतिम समय में अपनी जगह बना ली। जब कोपनहेगन जाने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल की पहली सूची में हमदुल्लाह का नाम नहीं आया तो वे कांग्रेस आलाकमान और केंद्र सरकार को यह बताने में जुट गए कि उनका इस सम्मेलन में जाना कितनी जरूरी है। क्योंकि उनका संसदीय क्षेत्र लक्षद्वीप जलवायु परिवर्तन की सबसे बुरी मार झेल रहा है। अपने युवा सांसद की दलील कांग्रेस और उनकी सरकार को इस कदर रास आई कि हमदुल्लाह सईद का नाम बेहद अंतिम क्षणों में लिस्ट में शुमार कर लिया गया। पर ऐसी ही कुछ दलील अंडमान निकोबार के भाजपा सांसद तथा दिल्ली के मेयर ने भी दी थी, पर कांग्रेसी आकाओं ने इन दोनों की दलीलें विचारयोग्य भी नहीं समझी, मसला क्या है? क्या पंजा के मिजाज इस कदर आक्रमाक हो उठा है कि वह कमल को दबोचने को कभी भी तत्पर है।
Posted on 03 January 2010 by admin
सूत्र बताते हैं कि भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष नितिन गडकरी नए वर्ष के मार्च तक अपनी नई टीम बनाएंगे। सूत्र बताते हैं कि गडकरी की नई टीम में अनंत कुमार, पीयूष गोयल, किरिट सोमैया तथा संजय जोशी की एक महती भूमिका रहेगी। गडकरी की वैसे भी अनंत कुमार से पुरानी मित्रता है और अध्यक्ष बनने से पूर्व ही जब भी दिल्ली आते थे तो अनंत कुमार के घर ही अपना डेरा-डंडा जमाते थे। सूत्र बताते हैं कि गडकरी कलराज मिश्र को उपाध्यक्ष तथा अनंत कुमार एवं मनोहर परिक्कर को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना सकते हैं। पीयूष गोयल पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष हो सकते हैं और उन्हें राज्यसभा से भी नवाजा जा सकता है। गोयल और गडकरी दोनों का ही अंबानी कनेक्शन जगजाहिर है। गडकरी संजश जोशी को संगठन में कोई महती जिम्मेदारी दे सकते हैं, और भाजपा को एक युवा चेहरा प्रदान करने की गरज से वे गांधी परिवार के भगवा चिराग वरुण गांधी को भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष बना सकते हैं।
Posted on 23 December 2009 by admin
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रियरंजन दास मुंशी जर्मनी से अपना इलाज करा स्वदेश वापिस लौट आए हैं और नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में फिर से भर्ती हो गए हैं। जर्मनी में उनके मस्तिष्क में सफलतापूर्वक ‘स्टेमसेल’ का प्रत्यारोपण कर दिया गया है, डॉक्टरों का भरोसा है कि तीन महीने में इस ‘स्टेमसेल’ में ग्रोथ होने लग जाएगा और इस क्रमिक ग्रोथ के साथ दासमुंशी के स्वास्थ्य में भी एक क्रमिक सुधार परिलक्षित होने लगेगा। निश्चय ही यह एक अच्छी खबर है।
Posted on 20 December 2009 by admin
ऐसे हालात में जबकि भाजपा के कोई 16 विधायक अन्य पार्टियों में जाने की जुगत भिड़ा रहे हैं, राजनाथ सिंह अपना सारा ध्यान यूपी पर ही केंद्रित रखना चाहते हैं और अपने लिए राज्य में एक ऐसी युवा टीम गठित करना चाहते हैं जिन नेताओं की औसत उम्र 45 से 55 वर्ष हो। सो राजनाथ की टीम चुन-चुन कर भाजपा के ऐसे नेताओं को फोन लगा रही है और उनसे आग्रह कर रही है कि अपने बेहतर भविष्य के लिए वे राजनाथ में अपना दिल लगाएं। पर कौन सुनता है, फोन रखते ही ज्यादातर लोग नानादि प्रकार की भाव-भंगिमाओं से राजनाथ का चरित्र उकेरने की कोशिश करने में जुटे हैं और ज्यादातर पर तो परिस्थितिजन्य किर्ंकत्तव्यविमूढ़ता हावी है, और शायद यही तो राजनाथ राजनीति का मूल चरित्र है।