सेंट्रल हॉल में हालिया दिनों में तेजी से प्रचलित हुए कुछ उपनामों पर गौर फर्माएं-जयराम रमेश-चीते का बाप, मणिशंकर अय्यर सरकार के राखी सावंत, प्रणबदा-रानी मुखर्जी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को संभावना सेठ के पुकार नामों से विभूषित किया जा रहा है।
Posted on 01 August 2010 by admin
सेंट्रल हॉल में हालिया दिनों में तेजी से प्रचलित हुए कुछ उपनामों पर गौर फर्माएं-जयराम रमेश-चीते का बाप, मणिशंकर अय्यर सरकार के राखी सावंत, प्रणबदा-रानी मुखर्जी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को संभावना सेठ के पुकार नामों से विभूषित किया जा रहा है।
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Posted on 01 August 2010 by admin
बड़ी आलीशान गाड़ियों में घूमने का शौकीन सोहराबुद्दीन का आतंक इस कदर तीन राज्यों में था कि उसकी रंगदारी की सलाना आमदनी करीबन 25 करोड़ रुपए थी, सोहराबुद्दीन को गुजरात पुलिस ने 24 नवंबर 2005 को पकड़ा और फिर आईपीएस पुलिस अधिकारी अभय चुदस्मा ने कथित तौर पर उससे मार्बल लॉबी को फोन करवा कर तकरीबन 16 करोड़ की रंगदारी उगाही फिर काम हो जाने पर 26 नवंबर को मुठभेड़ दिखाकर उसे मार गिराया गया। सवाल अहम है कि फिर कहां गए वो 16 करोड़?
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Posted on 24 July 2010 by admin
प्रधानमंत्री ने पिछले सप्ताह कैबिनेट-बैठक में एक प्रस्ताव रखा, जिस मंत्री के पास काम करते उनके निजी सचिव या ओएसडी को 10 साल हो गए हैं ऐसे अधिकारियों को उनके मूल कैडर में वापिस भेजा जाए। सबसे पहले शरद पवार ने विरोध दर्ज कराया कि चाहे जो हो वे अपना पीएस नहीं बदल सकते, देखा-देखी घटक दलों के दो-एक मंत्रियों ने भी आवाज उठाई, फिर क्या था प्रधानमंत्री को अपना यह प्रस्ताव वापिस लेना पड़ा।
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Posted on 24 July 2010 by admin
गजब की सियासी आपाधापी में लोग भूल गए कि आखिरकार सोहराबुद्दीन था कौन, जिसके कथित फर्जी एनकाऊंटर मामले ने पूरे गुजरात सरकार की नींद हराम की हुई है? दाऊद की डी-कंपनी का गुर्गा, टाडा में दोषी और मार्बल लॉबी से रंगदारी वसूलने का आरोपी, गुजरात के गृह मंत्री अमित शाह पर सीबीआई ने कोर्ट में जो चार्जशीट दाखिल की है उसमें 15 को दोषी ठहराया गया है। इसके साथ अमित शाह की रात भर की बातचीत की रिकार्डिंग भी है, इस चार्जशीट को पढ़ने के बाद जब कोर्ट वारंट जारी करेगा तब ही इस मामले में गिरफ्तारियां हो सकेंगी और सीबीआइ दोषियों पर शिकंजा कसने के लिए कुछ सरकारी गवाह भी बना सकती है।
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Posted on 21 July 2010 by admin
आगामी मानसून सत्र में भाजपा का एक नया पैंतरा देखने को मिल सकता है, भाजपा नेताओं का तर्क है कि अगर कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेसी विधायकों का सोना लोकतंत्रीय परंपरा में जायज है तो फिर यह ड्रामा संसद में भी देखने को मिल सकता है, लोकसभा में भाजपा के 116 सांसद है, इनमें से कईयों को अभी भी लोकसभा कोटे से उनका आवास आबंटित नहीं हुआ है, सो सियासी ड्रामे को रोचकता का पुट देने के लिए कई भगवा सांसद अपना बोरिया-बिस्तर लेकर संसद भवन टपक सकते हैं, वहीं खाएंगे, रहेंगे, सोएंगे और अगर आंख खुली तो कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाएंगे, जय हो जनतंत्र!
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Posted on 21 July 2010 by admin
सीबीआई को शक है कि 2006 के बाद हुए कम से कम 7 बम विस्फोटों में कथित तौर पर हिंदू आतंकवादियों का हाथ है, हिंदू आतंकवाद भले ही अपने नव संक्रमण काल में हो पर सीबीआई उसकी ताकत को कम करके नहीं आंक रही। चुनांचे 18 फरवरी 2007 के समझौते एक्सप्रेस विस्फोट, 29 सितंबर 2008 के मालेगांव विस्फोट, 4 जून 2008 के थाणे सिनेमा विस्फोट, 16 अक्तूबर 2009 के गोवा बम धमाके, अगस्त 2008 के कानपुर व नांदेड़ बम धमाका तथा 11 अक्तूबर 2007 के अजमेरशरीफ धमाके में सीबीआई हिंदू आतंकियों का हाथ बता रही है। पर इससे पहले सीबीआई को देश को कई अनुत्तरित सवालों के जवाब देने होंगे, कि इन धमाके में देश की शीर्ष खुफिया एजेंसी आईबी और एमआई यानी मिलिट्री इंटेलिजेंस के चंद अधिकारियों की क्या भूमिका थी, और इन एजेंसियों को आदेश कहां से मिल रहे थे…सवाल मौजूं है और इनके जवाब निहायत जरूरी तौर पर दिए जाने चाहिए।
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Posted on 11 July 2010 by admin
भाजपा में पर्चे, परचम व फर्रे बंटने-बांटने का आयोजन व अनुभव पुराना है, इस बार ‘सच का सामना’ नामक नए सीरीज में अडवानी, जेठमलानी, गुरर्ूमूत्ति, गडकरी आदि पर निशाना साधा गया है, उम्दा पेपर, बढ़िया प्रिंटिंग, बेहतर जुमला (मैं भी सिंधी-तुम भी सिंधी) के साथ भाजपा के एक उपेक्षित व रूठे नेता ने पार्टी के अपने साथियों के टेंट-तंबू उखाड़ने का जबर्दस्त उपक्रम साधा है, सवाल मौजूं है और भावनाएं आहत, पार्टी जाती है तो जाएर् गत्त में।
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Posted on 11 July 2010 by admin
समझा जाता है कि किम डेवी 1988 से ही मुंबई और भारत के अन्य हिस्सों में आता-जाता रहा था और उसने कई भारतीय राजनेताओं की कथित तौर पर पैसों से मदद की थी। हैरत की बात देखिए कि उसका पासपोर्ट भी एक दो वर्ष के मृत बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर बना था यानी कि उसकी असली पहचान हमेशा से छुपी रही या हमारे सियासतदां ने जान बूझ कर उसकी पहचान छुपाए रखी। फिर भी वो बेखटके भारत आता-जाता रहा और अपने नापाक मंसूबों को भारतीय सरजमीं में हवा देता रहा।
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Posted on 05 July 2010 by admin
अपने इस्तीफे पर अडिग रहे कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े की नजरें वास्तव में कहीं और टिकी हैं, सूत्र बताते हैं कि वे फिलवक्त सियासी संभावनाओं के दोहन में जुटे हैं और शायद वे राज्यसभा से यानी ऊपरी सदन में आने की तैयारी में हैं, यानी उनकी उद्दात महत्वाकांक्षाओं के प्रस्फुटन के लिए अब दिल्ली दूर नहीं है, वैसे भी संतोष हेगड़े की पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में हुई है और उनकी पत्नी पर भी दिल्ली का खासा असर है, क्योंकि वह पंजाबी परिवार से ताल्लुकात रखती हैं। जस्टिस हेगड़े पहले सुप्रीम कोर्ट में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल थे, बाद में ये सुप्रीम कोर्ट में जज बन गए। जस्टिस हेगड़े के पिता के.एस.हेगड़े पहले राज्यसभा के सदस्य थे, फिर वे कर्नाटक हाई कोर्ट में जज बने और फिर वे सुप्रीम कोर्ट में जज हो गए, बाद में अपने पद से इस्तीफा देकर इन्होंने बेंगलूरु से 1977 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और सांसद बने, बाद में ये लोकसभा के स्पीकर भी बने थे। यानि परिवार में कानून व सियासत की परंपरा पुरानी है।
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Posted on 05 July 2010 by admin
भाई अमर सिंह सियासी तौर पर चाहे जितने भी तन्हा हो, अपने नए खटराग से वे अपने पुराने मित्रों को जरूर विचलित कर रहे हैं, इन दिनों वे मैडम सोनिया और युवराज राहुल की तारीफों के कसीदे पढ़ते नजर आ रहे हैं, ख्वाविश बस इतनी सी है कि कांग्रेस उन्हें उनके पुराने गुनाह माफ कर अपने यहां पनाह दे दे।
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