Posted on 01 May 2011 by admin
सोनिया गांधी इस बात को लेकर तनिक हैरानी में हैं कि पिछले कुछ समय से ऐसा क्यों हो रहा है या क्या यह महज इत्तफाक है कि जब भी वह अपनी किचेन कैबिनेट की बैठक आहूत करती है तो उनके घर के पास वाली सड़कों पर वीआईपी रूट लग जाता है और उनके खास लोग इस वजह से मीटिंग में पहुंचने में अक्ंसरा लेट हो जाते हैं, देर से ही सही, मैडम सोनिया को यह बात पते की समझ तो आई।
Posted on 01 May 2011 by admin
2जी मामले में हर दिन एक नया मोड़ आ रहा है, दिल्ली के सियासी गलियारों में इन दिनों एक पर्चा खूब विचरण कर रहा है कि कैसे एक ईडी (अब रिटायर) को रिश्वत देने की पेशकश हुई। इस पूरे मामले में एक समाचार चैनल का हेड सक्रिय है, जो बाद में ईडी को ब्लैकमेल करने के प्रयासों में जुट गया था। कथित तौर पर ईडी ने फौरन इस बात की शिकायत सीबीआई से कर दी, तत्कालीन सीबीआई डायरेक्टर ने तब ईडी से कहा था कि वह अपनी शिकायत औपचारिक ढंग से दर्ज कराएं, जिसमें समय, स्थान, तारीख व संबंधित व्यक्तियों का जिक्र हो। पर तब बात आई गई हो गई थी, अब सीबीआई एक बार फिर से हरकत में आ गई है और उस अधिकारी से पूछ रही है कि आपने अब तक फॉर्मल कॉम्पलेन क्यों नहीं दर्ज कराई है?
Posted on 23 April 2011 by admin
88 बरिस के हो गए बलराम जाखड़ पर उनके और उनकी महत्वाकांक्षाओं के बीच उनकी उम्र कहीं आड़े नहीं आ रही है, टनाटन, झकाझक बंद गले के सूट में शुक्रवार की सुबह सवा दस बजे वह कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिले और अपने राजनैतिक पुनरूत्थान के लिए उनसे आग्रह किया…भौंचक सोनिया बस उन्हें देखती ही रह गईं।
Posted on 23 April 2011 by admin
25 अप्रैल को 2जी मामले में जो नई चार्जशीट फाइल होने जा रही है उसमें कई बड़े खिलाड़ियों का नंबर लग सकता है। लूप टेलिकॉम जो एस्सार वालों का है, वीडियोकॉन तथा कानीमोझी भी इस नए चार्जशीट में निशाने पर हो सकते हैं। कईयों को जेल हो सकती है, तो जेल की चक्की पीस रहे कुछ बड़े खिलाड़ियों को बेल भी हो सकती है।
Posted on 17 April 2011 by admin
मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली पीएसी का टर्म 30 अप्रैल को समाप्त हो रहा है यानी की 28-29 अप्रैल तक 2जी मामले में पीएसी की रिपोर्ट प्रकाश में आ जाएगी। वैसे भी 1 मई को नई पीएसी गठित होनी है, उसे लेकर जोड़-तोड़ अभी से शुरू हो गई है।
Posted on 17 April 2011 by admin
इसी मई में एमसीआई यानी मेडिकल काऊंसिल ऑफ इंडिया के मुखिया डा. शिव कुमार सरीन रिटायर होने वाले हैं, आजाद व उनके करीबी अफसर इस ताक में हैं कि कब सरीन रिटायर हों और एमसीआई की वर्तमान कमेटी भंग कर दी जाए, यानी एक बार फिर से एमसीआई पर केतन देसाई एंड कंपनी का कब्जा हो सकता है, क्या अन्ना हजारे सुन रहे हैं?
Posted on 17 April 2011 by admin
भारत के सियासी व कारोबारी क्षितिज में अपना परचम बुलंद करनेवाली नीरा राडिया के प्रादुर्भाव की भी एक अनोखी दास्तां हैं, इस तंत्र में नीरा का आना हुआ कैसे? जब गुलाम नबी आजाद नागरिक उड्डययन मंत्री हुआ करते थे, तो तब के उनके ओएसडी रामाचंद्रन ने नीरा को पहले पहल आजाद से मिलवाया था। नीरा के आजाद ख्याल तब गुलाम नबी को भा गए थे। नीरा अपने क्राऊन एयर का प्रपोजल लेकर आजाद से मिलने आई थीं। उस वक्त आजाद की मंडली में एस.के.राव भी शामिल थे। इसके बाद जब एनडीए का शासनकाल आया तो नागरिक उड्डययन की बागडोर अनंत कुमार के पास आ गई, तब तक रामाचंद्रन अनंत के अतिरिक्त पीएस हो गए। फिर नीरा-अनंत हरिकथा अनंता वहीं परवान चढ़ी।
Posted on 10 April 2011 by admin
संजय जोशी की भाजपा में वापसी एक तरह से पक्की मानी जा रही थी कि यूं अचानक फिर से इस मामले ने यू-टर्न ले लिया है। इस दफे विरोध भाजपा से नहीं (नरेंद्र मोदी बहुत हद तक इस मामले में उदासीन हो गए हैं) अपितु जोशी की वापसी पर संघ ही किंचित दो भागों में बंटा नजर आता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत और भैयाजी जोशी सरीखे नेता एक ओर जहां जोशी की भाजपा वापिसी सुनिश्चित कराने के प्रयासों में जुटे हैं, वहीं कहीं मदनदास देवी और सुरेश सोनी जोशी के विरोध में अलख जगा रहे हैं, सो यह पेंच इस कदर फंसा हुआ है।
Posted on 03 April 2011 by admin
हिंदू आतंकवाद का नया फलसफा गढ़ने वाली कांग्रेस, भाजपा खासकर संघ नेताओं के प्रति आक्रामक तेवरों से लैस है। आतंकवाद के नाम पर कितने संघ के लोग किस कदर लपेटे जाएंगे इंद्रेश प्रकरण इस बात की गवाही देता है। इंद्रेश को सरकारी तंत्र जितना बदनाम कर सकता है वह कर चुका। अब तो ऐसे तमाम मुकदमे एनआईए के पास ट्रांसफर कर दिए गए हैं, एनआईए जो आतंकवाद से संबंधित केस देखती है। यानी तथाकथित स्वतंत्र एजेंसी सीबीआई से ये मामले सीधे अब केंद्र सरकार के कब्जे में आ गए हैं, सीबीआई तो सीवीसी के प्रति जवाबदेह होती है तो आप उसे कुछ हद तक स्वतंत्र मान भी सकते हैं, पर एनआईए तो घोषित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय यानी हिंदू आतंकवाद शब्द को ईजाद करने वाले पी.चिदंबरम के अधीनस्थ है। संघ नेताओं की सबसे बड़ी चिंता इसी बात को लेकर है। सीबीआई द्वारा चलाए जा रहे मुकदमे को सरकार नहीं हटा सकती, पर एनआईए तो खुला ऐलान है, खुली छूट है-चाहे मर्जी जिस पर लगाओ, जिससे हटाओ।
Posted on 01 April 2011 by admin
सिक्किम के चीफ जस्टिस दिनाकरण के खिलाफ संसदीय जांच कमेटी ने काफी साक्ष्य इकट्ठे कर लिए हैं, साक्ष्य इतने भरपूर मात्रा में है कि इसके आधार पर उन्हें दोषी भी ठहराया जा सकता है। इन साक्ष्यों में 12 से 15 तो अहम गवाहियां हैं। यह गवाहियां उन लोगों की है जिन्हें नकद पैसा देकर उनसे उतने ही अमाऊंट का चेक ले लिया गया। सबसे मजेदार तो यह कि एक गवाही तो एक सब्जी वाले की भी है, जिसने कहा है-‘साहब मुझे कैश देते थे, बदले में चेक ले लेते थे।’