Posted on 26 July 2011 by admin
एनआईए की चार्जशीट में संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार का नाम नहीं है, सरकार ने अपने इरादे जाहिर कर दिए, वह नहीं चाहती थी कि अपनी ओर से इंद्रेश का नाम चार्जशीट में दे। यदि कोर्ट गवाहियों के आधार पर स्वयं सम्मन करता है, फिर ठीक है, सरकार बिलावजह मामले को तूल दिए जाने की पक्षधर नहीं।
Posted on 26 July 2011 by admin
ग्रेटर नोएडा जमीन मामले में कोर्ट में जो पीआईएल दाखिल करवाई गई है उसमें कांग्रेस के अलावा एक बिल्डर समूह भी शामिल है, जिन्हें मुख्यमंत्री का करीबी समझा जाता है। यूपी चुनाव से ऐन पहले बिल्डरों के ऊपर कोर्ट का बुल्डोजर चलने से सत्ता के कंगूरे पर बड़ी हलचल मची है। कोर्ट के आदेश के बाद एक लाख फ्लैट कैंसिल हो गए हैं और 5 हजार एकड़ से कहीं ज्यादा भूमि मुक्त हो गई है। किसान बम-बम हैं, बिल्डरों से कह रहे हैं कि सीधी हमसे जमीन खरीद लो पर ये रेट आसमान छू रहे हैं, बिल्डरों के खाते खाली हैं, बिचारे क्या करें, कहां से जमीन खरीदें और कैसे निवेशकों का पैसा वापिस करे।
Posted on 18 July 2011 by admin
केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद अब राज्यपालों के फेरबदल की बारी है, कर्नाटक के भारद्वाज, बिहार के देवानंद कुंवर और तमिलनाडु के बरनाला बदले जा सकते हैं। शिवराज पाटिल को दस जनपथ राज्यसभा में लेकर आना चाहता था पर उन्होंने मना कर दिया है, वे महाराष्ट्र के किसी पड़ोसी राज्य में अपना ट्रांसफर चाहते हैं।
Posted on 18 July 2011 by admin
जाट नेता अजीत सिंह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से बेतरह नाराज हैं और वे अब हर तरफ यह कहते घूम रहे हैं कि वे दो कांग्रेसी दिग्गज अहमद पटेल व दिग्विजय सिंह के आपसी शीतयुध्द की बलि चढ़ गए हैं। चूंकि अजीत का मंत्रिमंडल में आना पक्का था और यह संधि द्वार राहुल द्वारपाल दिग्विजय के मार्फत खुला था। सो, अजीत की माने तो पटेल ने एक सुविचारित नीति के तहत उनके इस मंसूबों के रेत महल को ढा दिया। कांग्रेस अजीत को एक कैबिनेट व एक राज्य मंत्री का बर्थ दिए जाने को तैयार भी थी, क्योंकि राहुल ने हालिया दिनों में जिस प्रकार जाट बहुल्य क्षेत्रों में किसानों की राजनीति की है उसे वोट के रूप में पल्लवित-पुष्पित होने में अजीत जैसे माली का साथ चाहिए था, अब तो आलम यह है कि राहुल अजीत को मिलने का भी वक्त नहीं दे रहे। अजीत दो बार कांग्रेसी युवराज से मिलने का वक्त मांग चुके हैं, राहुल ने अजीत पुत्र जयंत को जरूर मिलने का वक्त दिया पर इससे बात बनी नहीं।
Posted on 03 July 2011 by admin
भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में वकीलों का बोलबाला है कांग्रेस में चिदंबरम, कपिल सिब्बल, जयंती नटराजन, सलमान खुर्शीद आदि तो भाजपा में अरुण जेतली, रवि शंकर प्रसाद, राम जेठमलानी आदि का बोलबाला है। भाजपा ने एक ओर जहां संसद में 2जी पर हाय-तौबा मचाई हुई है, वहीं भाजपा के राज्यसभा सदस्य व अडवानी करीबी राम जेठमलानी 2जी केस में कनिमोझी का बचाव कर रहे हैं और अदालत में तर्क दे रहे हैं कि 2जी कोई घोटला है ही नहीं, जसवंत सिंह भी इसे स्कैम नहीं मान रहे, यानी दोनों पार्टियों के वकीलों को पार्टीलाइन से इतर लाइन लेने की भरपूर छूट मिल रही है। महात्मा गांधी ने भी एक वकील जवाहर लाल नेहरू को सबसे ज्यादा प्रमोट किया था, पर सनद रहे कि नेहरू एक ‘नान पैक्टिसिंग लॉयर’ थे, जमाना बदल गया है, सियासत और सियासत के दस्तूर भी बदल गए हैं सो आज की पार्टियां अपने वकील सदस्यों को अदालत में मुकदमों की पैरवी की भी भरपूर इजाजत दे रही है और पार्टी लाइन को धत्ता बताने की भी।
Posted on 03 July 2011 by admin
प्रदीप कुमार का नया सीवीसी होना, मल्लू लॉबी के घटते वर्चस्व का परिचायक है। पूरी मलयाली लॉबी ने रिटायर गृह सचिव जी.के.पिल्लई के लिए सारा जोर लगाया हुआ था, हालांकि बिजॉय चटर्जी, नरेश दयाल, अलका सिरोही, आर.पी.अग्रवाल, विजयलक्ष्मी गुप्ता, आर.एस.पांडे समेत सीवीसी की रेस में कोई 28 लोग शामिल थे, जिसमें से ज्यादातर आइएएस या पूर्व आइएएस थे। हरियाणा कैडर के 1972 बैच के आइएएस और रक्षा सचिव प्रदीप कुमार और जी.के.पिल्लई में सबसे नजदीकी जंग थी, पर पिल्लई की राह में यूं अचानक प्रणब मुखर्जी और दस जनपथ आ गए। प्रणब दा को रंज था कि चिदंबरम के कहने पर पिल्लई ने ही उनकी जासूसी करवाई, वहीं दस जनपथ मलयाली लॉबी के एकछत्र साम्राज्य पर रोक लगाना चाहता था, सो पिल्लई की जगह प्रदीप कुमार का नंबर लग गया। हो सकता है इसमें सुषमा स्वराज का हरियाणा कनेक्शन भी शामिल हो।
Posted on 23 May 2011 by admin
अब सवाल उठता है कौन तुलसी प्रजापति? तुलसी प्रजापति और सोहराबुद्दीन दोनों ही राजस्थान के गैंगस्टर हामिद लाला की हत्या के आरोपी थे। तुलसी पर अहमदाबाद के एक प्रॉपटी डीलर की हत्या का भी आरोप था। तुलसी सोहराबुद्दीन व कौसर बी एनकाऊंटर मामले का गवाह भी था। तुलसी को जब राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था तब उसने अदालत और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखकर दिया था कि गुजरात पुलिस उसे फर्जी मुठभेड़ दिखाकर मार सकती है। इतने में गुजरात पुलिस ने उसे रिमांड पर ले लिया, कहते हैं कि मार्बल लॉबी से गुजरात पुलिस के कुछ बड़े अफसरों को इस काम के लिए मोटा पैसा मिल गया, और तुलसी का काम तमाम हो गया।
Posted on 15 May 2011 by admin
कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस बात को लेकर स्पष्टत: दो खेमों में बंटा नजर आता है कि कांग्रेस को ममतानीत तृणमूल सरकार को ज्वॉइन करना चाहिए या फिर उसे बाहर से समर्थन देना चाहिए। मानस भुईंया समेत बंगाल की पूरी प्रदेश कांग्रेस कमेटी, राहुल व सोनिया गांधी ममता सरकार को ज्वॉइन करने के पक्षधर नहीं, वहीं प्रणब मुखर्जी की राय इससे दीगर है, प्रणब दा का मानना है कि अगर कांग्रेस बंगाल में ममता सरकार में शामिल नहीं होती है तो केंद्र की यूपीए-नीत गठबंधन सरकार की सेहत के लिए यह कदम किंचित अच्छा नहीं रहेगा।
Posted on 15 May 2011 by admin
संघ व नितीन गडकरी के तमाम प्रयासों के बावजूद उमा भारती की भाजपा में पुनर्वापसी टल गई लगती है, अभी पिछले दिनों दिल्ली में भाजपा की कोर-ग्रुप की बैठक में गडकरी यह मुद्दा पार्टी-फोरम पर लेकर आए थे पर पार्टी की दूसरी पांत के नेताओं ने अध्यक्ष जी के इस निर्णय के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया, सबसे पहले अनंत कुमार बोले-‘उमा का यूपी में क्या काम?’ फिर जेतली व वेंकैया बोले, अंत में सुषमा ने भी अपने मंतव्य जाहिर किए कि उमा की वापसी को लेकर शिवराज सिंह चौहान के मन में कुछ डर व शंकाएं हैं, पहले उसका निराकरण होना चाहिए। वैसे उमा इन दिनों गंगा-सफाई की योजना से जुड़ी हैं, उतनी ही जरूरी भाजपा वालों के मन व दिल की सफाई भी है।
Posted on 08 May 2011 by admin
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमण सिंह काएदे के डॉक्टर हैं, सियासी नब्ज बूझना उन्हें बखूबी आता है, रफ्ता-रफ्ता अपना सियासी सफर तय करते हुए रमण बगैर किसी शोर-शराबे के भगवा पार्टी के कद्दावर नेताओं में शुमार हो गए हैं, और अब तो दबे-छुपे तौर पर उनके प्रशंसक उन्हें भी 2014 में प्रधानमंत्री पद का दावेदार बता रहे हैं। ठकुर सुहाती के भावों से ओत-प्रोत वे राजनाथ को तो पहले ही पटा चुके हैं, अब बारी गडकरी की है, रमण के दिल्ली में मीडिया एडवाइजर राजकुमार शर्मा छत्तीसगढ़ भवन के बजाए पार्टी अध्यक्ष के 13 तीन मूर्ति आवास से ही अपना दफ्तर चला रहे हैं, कहने को तो वे गडकरी का मीडिया मैनेज कर रहे हैं, पर किंचित चतुराई से वे गडकरी को ज्यादा मैनेज कर रहे हैं। संघ नेतृत्व भी हालिया दिनों में डॉ. रमण की बदली भाव-भंगिमाओं से सकते में है, पूरा छत्तीसगढ़ बस रमणमय है, भगवा राज कहीं नेपथ्य में चला गया है। स्थानीय मीडिया इस कदर रमणर्-कीत्तन में लीन है कि कभी-कभी भाजपा नेतृत्व भ्रम में पड़ जाता है कि क्या इस छोटे-से प्रदेश में उनकी सरकार चल रही है?