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…जाने से पहले

Posted on 31 January 2012 by admin

मौजूदा राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल जिनका कार्यकाल इस वर्ष जुलाई में समाप्त हो रहा है, उन्हाेंने करीने से अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली हैं, अपनी रुखसती से पहले वह देश के सभी राज्यों के दौरे का प्रोग्राम बना चुकी हैं, मई में वह भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव व उनके ऊपर के अधिकारियों से मिलेंगी। इसके साथ ही वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, प्रमुख मीडिया कर्मियों तथा देश के कुछ चुनींदा एनजीओ के कर्णधारों से भी मिलेंगी। जुलाई के प्रथम सप्ताह में वे केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों से मिलना भी प्लॉन कर रही हैं, राष्ट्रपति भवन में उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से ही ऐसी अस्फुट खबरें सुनने को मिल रही हैं।

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वाय दिस धोखाधड़ी जी?

Posted on 24 January 2012 by admin

चर्चित तमिल अभिनेता धनुष के ‘कोलावरी डी’ गाने की धूम उत्तराखंड चुनाव में भी सुनाई दे रही हैं। युवा मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए सियासी दलों ने ‘कोलावरी डी’ के धुन पर चुनावी धुनें तैयार करवायी हैं। हाल में ही नैनीताल में भ्रष्ट नेताओं के पोल खोलने के लिए वहां के स्थानीय युवाओं ने पूरे मनोयोग के साथ एक गाना तैयार किया और उसे आनन-फानन में यू-टयूब पर भी डाल दिया है जहां यहां गाना खूब पॉपुलर हो रहा है, जरा इस गाने के बोल देखिए, ‘वाय दिस धोखा धड़ी जी’ कहना न होगा कि उत्तराखंड की चुनावी फिजां में वाकई ‘कोलावरी डी’ की धूम मच गई है।

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(English) No love for Imran from the US

Posted on 24 January 2012 by admin

अमरीका को नहीं प्यारे इमरान
पाकिस्तान में सेना संविधान के अंतर्गत तख्ता पलट चाहती है, मौजूदा सरकार वैसे भी वहां की आर्मी की पसंद की नहीं रही है। आर्मी इमरान खान को आगे कर रही है, उनकी सभाओं में भीड़ भी जुटा रही है, पर अमरीका को इमरान पसंद नहीं। मुशर्रफ भी 30 से पहले पाकिस्तान वापिस लौट सकते हैं। मुशर्रफ का मानना है कि चाहे जो हो जाए आर्मी उन्हें कभी जेल नहीं भेजेगी, वहीं रावलपिंडी में रहने देगी।

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क्यों गए खरे?

Posted on 24 January 2012 by admin

प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार हरीश खरे का जाना वस्तुत: हिंदी व अन्य क्षेत्रीय मीडिया की विरोध की वजह से था। उनकी बार-बार यह शिकायत आ रही थी कि खरे बेहद अंग्रेजी दां हैं, अड़ियल हैं व हिंदी तथा भाषायी पत्रकारों को तरजीह नहीं देते हैं। दस जनपथ बनाम सात रेस कोर्स की लड़ाई सार्वजनिक होने से और आए दिन इसके बारे में खबरें छपने से पीएम का खरे से पहले ही मोहभंग हो चुका था। सो, जब खरे से यह कहा गया कि अब वे पुलक चटर्जी को रिपोर्ट करें तो इसके लिए खरे राजी नहीं हुए। उनकी जिद थी कि वे बस पीएम को ही रिपोर्ट कर सकते हैं। तो ऐसे में उनके स्थानापन्न की तलाश शुरू हो गई। नाम तो प्रणय रॉय, भारत भूषण, आलोक मेहता, विनोद शर्मा आदि के चल रहे थे पर इन पत्रकारों की भी यही जिद थी कि वे पुलक को रिपोर्ट नहीं करेंगे।

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उत्तराखंड में खेल फिक्सिंग का

Posted on 14 January 2012 by admin

लगता है उत्तराखंड में भाजपा व कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच एक सांठ-गांठ हो गई है, बतर्जे ‘तुम मेरी खुजलाओ, मैं तुम्हारी खुजलाता हूं’ सो कोई भी बड़ा नेता सामने वाली पार्टी के बड़े नेता के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ना चाहता, कमाल की बात तो यह है कि ये वही नेतागण हैं जो खम्म ठोंककर खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार साबित करने पर तुले हैं। मसलन उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे प्रमुख नेता हरक सिंह रावत की परंपरागत सीट लैंस डाउन थी, पर वहां उत्तराखंड रक्षा मोर्चा के टीपीएस रावत के मैदान में आ जाने से उन्होंने दोईवाला का रुख कर लिया, पर वहां भूले भटके निशंक आ टपके। अब रावत निशंक से भी नहीं भिड़ना चाहते थे सो वे दबे पांव रुद्रप्रयाग चले गए। दिलचस्प तो यह है कि हरक सिंह के खिलाफ भाजपा ने जो अपना उम्मीदवार रुद्रप्रयाग में उतारा है, वे मतबार सिंह कंडारी हरक सिंह के नजदीकी रिश्तेदार हैं। रावत व कंडारी रिश्ते में जीजा-साले हैं। वैसे ही मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूरी के खिलाफ कांग्रेस ने कोटद्वार में कमजोर उम्मीदवार उतारा है, सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत कहते हैं भाजपा की मर्जी से रामनगर आई हैं, बाज की तेज नजर वाले यशपाल आर्य का बाजपुर आना भी कुछ ऐसी ही दास्तांबयानी करता है।

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क्या करें किरीट

Posted on 11 January 2012 by admin

बिचारे किरीट सौमेया को क्या मालूम था कि जिस राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के फंड में घपले का रिकॉर्ड वे दिन-रात एक-एक कर खंगाल रहे हैं, वही बाबू सिंह कुशवाहा एक दिन उनकी पार्टी के झंडाबरदार हो जाएंगे। समझा जाता है कि सीबीआई को कुशवाहा के खिलाफ आरटीआई से दस्तावेज निकलवाने व उन्हें उपलब्ध कराने में सौमेया की एक महती भूमिका थी, आज सौमेया बगले झांक रहे हैं बिचारे अपनी पार्टी के महान अध्यक्ष को कौन-सा मुंह दिखाएंगे?

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सिंह का हरियाणा कनेक्शन

Posted on 11 January 2012 by admin

पहले तो सेनाध्यक्ष की पत्नी की ओर से विचार याचिका प्रस्तुत की गई, फिर इनकी याचिका विचारार्थ फौज की वैधानिक समिति के पास आई। जहां इसे सरकार के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया गया। वी.के. सिंह मूलत: हरियाणा के भिवानी के रहने वाले हैं। इनकी पत्नी सोहना की हैं, इनके पिता ठाकुर विजय पाल सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के करीबियों में शुमार होते थे। जो 1977 में सोहना विधानसभा क्षेत्र से चुने गए थे। और वे 1980 में भजनलाल के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। इनके परिवार के कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ घरेलू रिश्ते हैं।

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…और अंत में

Posted on 27 December 2011 by admin

कपिल सिब्बल भी क्या करें, उनके 6 बिल लोकसभा में पेंडिंग पड़े हुए हैं। पिछले सेशन से उनका एक भी बिल पास नहीं हो रहा और ना ही आगे पास होने की उम्मीद दिख रही…।

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हड़क गए हैं हरक सिंह

Posted on 27 December 2011 by admin

उत्तराखंड चुनाव में इस दफे भले ही कांग्रेस के हौंसले बम-बम हैं, यहां कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत तनिक हैरान-परेशान हैं कि उन्हें इस दफे चुनाव लड़ने के लिए कोई मन-माफिक सीट नहीं मिल पा रही। रावत लैंसडाउन से वर्तमान विधायक हैं। पर इस बार उत्तराखंड रक्षा मोर्चा के जनक मेजर टीपीएस रावत ने हरक सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टीपीएस कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए थे और भाजपा छोड़ कर उन्होंने रिटायर्ड सैनिकों का यह मोर्चा गठित किया है। मेजर ने खम्म ठोक कर घोषणा कर दी है कि वे हरक सिंह को लैंसडाउन में महती चुनौती पेश करने के लिए वहां से खुद चुनाव लड़ेंगे। तब एक सुरक्षित सीट की तलाश में हरक सिंह ने श्रीनगर का रुख कर लिया, पर इससे पहले कि नेता प्रतिपक्ष श्रीनगर में अपना डेरा-डंडा जमा पाते, सतपाल महाराज ने वहां से अपने खास चेले पूर्व विधायक डोंडियाल को लड़ाने की घोषणा कर दी। मरते क्या नहीं करते हरक सिंह ने अदद सुरक्षित सीट की तलाश में अब अपने कदम डोईवाला में जमा लिए हैं। पहले डोईवाला सीट हरिद्वार संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती थी पर अब नए परिसीमन में यह देहरादून संसदीय सीट का हिस्सा हो गई है। यहां चौकन्ने हरक सिंह विरोधियों की पदचाप भांपने की कोशिशों में जुट गए हैं।

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श्रीकथा अनंते

Posted on 27 December 2011 by admin

ंजरा सोचिए राजनैतिक विचारधारा में नैतिकता व शुचिता की दुहाई देने वाला संघ और उसकी पोषक पार्टी भाजपा की ओर से 27 तारीख को लोकपाल के मुद्दे पर संसद में कौन बोलेगा? माननीय श्री अनंत कुमार जी, जिनकी श्रीकथा अनंता से कौन वाकिफ नहीं है। मामला चाहे हुडको घोटाला का हो या नीरा राडिया प्रकरण का अनंत की पहले ही इन मामलों में किरकिरी हो चुकी है। लगता है इसी मौके के लिए दुष्यंत कुमार ने कहा था-‘इस तरह टूटे हुए चेहरे नहीं हैंजिस तरह टूटे हुए ये आइने हैं जिस तरह चाहो बजा लो इस सभा मेंहम नहीं हैं आदमी, हम झुनझुने हैं।’

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