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यादें राजीव गांधी की बकौल अशोक दुबे :

Posted on 20 May 2011 by admin

ऐसे मिला, ऐसा जुड़ा और ऐसे बिछड़ा राजीव जी से
हमारी पहली मुलाकात अजीब थी, पर वे पहली नजर में मुझे भा गए थे, शायद मैं भी उन्हें पसंद आया था

त्रिदीब रमण, नई दिल्ली, 20 मई 2011
मैं आकाशवाणी में संवाददाता था। तत्कालीन प्रधानमंत्री यानी इंदिरा गांधी जी के साथ एक सफदरजंग रोड पर सप्ताह में 2 दिन डयूटी लगती थी। आपातकाल के दौरान दूरदर्शन यानी टीवी में आ गया। हरीश अवस्थी दोस्त थे बोले न्यूजरीडर की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ तुम रिपोर्टिंग भी करो और रिपोर्टिंग के लिए मुझे प्रधानमंत्री बीट दे दी गई। इंदिरा जी से सप्ताह में 2 बार मुलाकात तो होती ही थी। राजीव गांधी से आमना-सामना कम ही हो पाता था। इंदिरा जी को मैं ‘मैडम’ कहता था। संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव गांधी का राजनीति में पदार्पण का यह पहला दिन था, अच्छी तरह याद है। सफदरजंग रोड का दरवाजा खुला। मैडम और राजीव जी साथ-साथ गेट से बाहर निकल रहे थे। लॉन में युवक कांग्रेस के कई कार्यकर्ता मौजूद थे। इतने में रामवीर सिंह विधुड़ी ने नारा लगाया ‘राजीव गांधी जिंदाबाद’। राजीव गांधी रामवीर सिंह के पास गए और बेतरह नाराज होते हुए बोले कि ‘मुझे यह पसंद नहीं।’ मेरे साथ साथ दूरदर्शन का कैमरामैन प्रकाश था। उन्होंने कैमरा ऑन कर दिया था। राजीव जी आगे बढ़े और प्रकाश के हाथों से कैमरा छीन लिया और उस एरिफ्लेक्स कैमरे की फिल्म निकाल कर जेब में रख ली और कहा-‘मुझे यह सब पसंद नहीं।’ राजीव जी पैंट-शर्ट पहने हुए थे। मैंने राजीव गांधी से कहा-‘भाई साहब,’ गलती मेरी है चूकि मैं रिपोर्टर हूं, यह तो कैमरामैन है यह तो वही करेगा जो मैं कहूंगा।’ इस पर राजीव जी बोले-‘वेन आई से नो,मीन्स नो।’ यह राजीव जी से पहली मुलाकात थी। पर मुझे काफी कुछ समझ में आ गया था। दो दिनों के बाद मेरे पास एक संदेश आया कि नौकरी छोड़ दो और राजीव जी को ज्वॉइन करो। मैंने वैसा ही किया नौकरी छोड़ दी और राजीव जी (जिन्हें मैं भाई साहब कहता था) से जुड़ गया। भाई साहब के दो बॉडीगार्ड थे रवि और महेंद्र। मैं कभी रवि के साथ तो कभी महेंद्र के साथ होता था। मेरा काम क्या था यह भाई साहब, मैडम और मेरे अलावा किसी को नहीं मालूम था। बहुत कम लोग जानते थे कि मैं कौन हूं। आर.के.धवन बस पत्रकार के नाते जानते थे। जॉर्ज थोड़ा-बहुत जानते थे क्योंकि मेरे कहीं भी आने-जाने का इंतजाम वे ही किया करते थे। सोनिया जी ज्यादा बात नहीं करती थीं, वह बस इतना जानती थीं कि मैं अमेठी देखता हूं। अक्सर अमेठी राजीव जी के जाने से पहले जाना होता था, चुनाव के दौरान तो ज्यादातर वहीं रहता था। राजीव जी ने एक दिन एक कैमरा लाकर मुझे दिया, मुझे कैमरा चलाना आता नहीं था। एक मीटिंग हो रही थी और मैं कैमरे का इस्तेमाल बिल्कुल अनाड़ी के जैसे कर रहा था। राजीव जी ने देखा तो मेरे पास आए, बोले ऐसे चलाया जाता है यह कैमरा, बिल्कुल नई तकनीक का है, फिर उन्होंने वह सोनी का कैमरा मुझे आपरेट करना सिखाया।
राजीव जी जहाज में हमेशा कॉकपिट में बैठते थे जब इंडियन एयरलाइंस या एयर इंडिया का विमान होता था तो सबसे आखिर में चढ़ते थे और बगल की सीट पर अपना हैंड बैग (जिसमें फाइलें होती थीं) रख देते थे। सीट के पीछे बॉडीगार्ड बैठता था यदि सोनिया गांधी या कोई वीआईपी साथ हो तो वह बगल की सीट पर बैठता था। बगल की सीट पर अमूमन उन्हें किसी को बिठाना पसंद नहीं था, क्योंकि कानाफूसी उन्हें सख्त नापसंद थी। सिंफनी म्यूजिक वॉकमैन लगाकर सुनते थे, हिंदी गाने उन्हें उतने पसंद नहीं थे। सोनिया गांधी के साथ अक्सर ताज होटल (मानसिंह रोड) में डिनर करने जाते थे, चाइनीज रेस्तरां उनका पसंदीदा था। स्पोर्ट्स शूज पहनना पसंद था। सोनिया गांधी के साथ शॉपिंग करने जाते थे। अरुण सिंह, कैप्टन सतीश शर्मा, तरुण गोगोई, के.पी.सिंहदेव, गुलाम नबी आजाद से ज्यादातर संपर्क में रहते थे। राजीव जी को मैंने कभी रिलेक्स करते नहीं देखा। कभी-कभी तो वह सोते ही नहीं थे। 3 बजे रात तक मीटिंग लेते और मुझे सुबह चार बजे आने को कह देते थे कि चलना है। चार बजे तैयार हो जाते थे। कभी उन्हें खांसी, जुकाम या बुखार होते नहीं देखा। किसी को नीचा दिखाना या किसी को अपमानित करना उनके स्वभाव में शामिल नहीं था, वे एक क्षमाशील व्यक्ति थे।
यूथ कांग्रेस में यंग टीम डेवलेपमेंट का काम सौंपा था डी.पी.राय को। जिसमें जिलेवार कॉर्डिनेटर बनाने थे। राजीव जी को जब भी कोई जानकारी चाहिए होती थी सीधे कॉर्डिनेटर से पूछते थे।
एक दिन वे शूटिंग के बारे में एक किताब पढ़ रहे थे। जब पूछा तो उन्होंने बताया राहुल को शूटिंग सिखाने के लिए पढ़ रहा हूं। चूंकि मैं अमेठी का इंचार्ज भी था सो हर दो साल बाद मुझे एक नई जीप मिल जाती थी, अपनी पुरानी जीप मैं अपने नीचे काम करने वाले को दे देता था, और नीचे वाला अपनी जीप अपने से नीचे वाले को। यह क्रम चलता रहता था। जमरूदपुर के एक गैरेज में गांधी परिवार की सारी गाड़ियां ठीक होने जाती थी, मैं एक दिन वहां अपनी जीप लेकर पहुंचा, मेकेनिक ने जीप का पुराना ऑयल फिल्टर निकाला और उसे वहीं जमीन पर फेंक दिया, बिल्कुल काला पड़ चुका था वह उसने पैकबंद एक नया फिल्टर निकाला और उसे लगाने लगा कहा फिल्टर सारे कूड़े कचरे गंदगी को अपने में सोख लेता है ताकी इंजन को साफ सांसें मिल सके, तब तक वहां सिध्दार्थ रेड्डी आ पहुंचा, आंखें गमगीन, चेहरा उतरा हुआ, आंध्र का एक उत्साही युवक, पढ़ा-लिखा मैडम का सबसे विश्वासी था, सिध्दार्थ ने मुझसे कहा कि हमारा काम भी फिल्टर का है, अपने नेता के रास्ते में आने वाली सारी गंदगी को अपने में समाने का ताकि वे स्वस्थ सांसे ले सके,जब हमारी मियाद पूरी हो जाती है तो हमें भी बदल लिया जाता है, बाद में हमें पता चला कि मैडम ने सिध्दार्थ को नौकरी से निकाल दिया है।
कोई बीस बरस पहले की बात है, अमेठी में चुनाव था। मैं और राजीव जी गौरी गंज में थे, गोधूलि बेला थी, किसी गांव की पंगडंडी पर हम बढ़े चले जा रहे थे। राजीव जी को ज्यादा लोगों को साथ रखना पसंद नहीं था। पास में एक बैल खड़ा था उसके तेवर कुछ ठीक नहीं लग रहे थे इससे पहले की वह हम पर हमला करता मैंने उसके सींग पकड़ लिए। राजीव जी ने देखा मुस्कुराए और आगे बढ़ गए। मैं तेजी से चलते हुए उनके पास पहुंचा और कहा-‘मैं आपके साथ चल रहा हूं।’ बोले, ‘यहां चुनाव चल रहा है तुम्हारा यहीं रहना ठीक है।’ मैं सोचने लगा पहली बार उन्होंने मुझे अपने साथ चलने से मना किया है। इससे पहले कभी मुझे किसी बात के लिए ‘ना’ नहीं कही। थोड़ी देर बाद वह दिल्ली चले गए। मेरी और उनकी वह आखिरी मुलाकात थी, अगले दिन उन्हें दक्षिण भारत के दौरे पर निकलना था। वह श्रीपेरंबदूर पहुंचे। उसके बाद जो हुआ वह सब इतिहास है।

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खराशें में कुरैशी

Posted on 15 May 2011 by admin

मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई.कुरैशी शुक्रवार की शाम क्या कर रहे थे? जब तक कि 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम भी सामने आ चुके थे। कुरैशी इस बात को लेकर खासे संतुष्ट थे कि उन्होंने बंगाल जैसे राज्य में भी बिहार पैटर्न पर शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न करा लिए। सो, शुक्रवार को नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित कामायनी ऑडिटॉरियम में उन्हें गुलजार द्वारा रचित और सलीम आरिफ द्वारा दिग्दर्शित ‘खराशें’ के मंचन में लुत्फ उठाते पाया गया। उस शो में गुलजार भी मौजूद थे और वे कुरैशी के बगलगीर भी थे।

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क्रैश एक संभावनाओं का

Posted on 08 May 2011 by admin

अरुणाचल के हेलिकॉप्टर दुर्घटना में देश ने एक उदीयमान शासक खो दिया तो कांग्रेस ने वहां अपना भविष्य। दुर्घटना के कारणों की पड़ताल हो रही है और प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह नेविगेशन सिस्टम की फेल्योर की वजह से हुआ। सो केंद्र सरकार गंभीरता से इस बारे में विचार कर रही है कि उत्तर-पूर्व की उड़ानों के तमाम नेविगेशन प्रणाली का जिम्मा गृह मंत्रालय के अधीनस्थ कर दिया जाए। हेलिकॉप्टर के लिए एक सख्त व सामान्य नियम है कि उसे हमेशा बादलों के नीचे उड़ना चाहिए, मगर बादल पहाड़ पर जमे हों तो? ऐसे में पायलट कोशिश करता है कि वह उसे बादलों के ऊपर से उड़ाए, मानव चूक हो सकती है, ऊंचाई मापने में गलती हो गई हो। एक सर्वप्रमुख रहस्योद्धाटन हुआ है कि नार्थ-ईस्ट की कई पहाड़ियों का मैगनेटिक फील्ड बहुत ही सशक्त है, जैसे हॉफलांग का जटिंगा, उसके ऊपर से (एक खास एरिया में) अगर कोई पंछी भी उड़ान भरता है तो वह धम्म से नीचे आ गिरता है, दोरजी खांडू के सिंगल इंजिन हेलिकॉप्टर मामले में भी इन्हीं संभावनाओं को टटोला जा रहा है।

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शीला तेरी कहानी

Posted on 01 May 2011 by admin

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी में शीला दीक्षित के प्रति असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है, अब यह चिंगारी कांग्रेस के निगम पार्षदों तक जा पहुंची है, जब से शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट आई है, चौधरी बीरेंद्र सिंह ने दिल्ली कांग्रेस का प्रभार संभाला है और कलमाड़ी अंदर गए हैं, पार्टी में शीला का मुखर विरोध शुरू हो गया है। पिछले दिनों एक मीटिंग में निगम बंटवारे की बात से नाराज कांग्रेस के निगम पार्षद जीतेंद्र कोचर ‘जीतू’ ने बीरेंद्र सिंह, जे.पी.अग्रवाल, अनीस अहमद की मौजूदगी में शीला को हटाने की मांग कर डाली, कोचर का कहना था कि कॉमन वेल्थ लूट का 60 फीसदी पैसा शीला को गया है, और इसमें से अधिकांश पैसा संदीप दीक्षित के संसदीय क्षेत्र में लगा है, कोचर के सवाल पर बैठक में मौजूद पार्टी के दिग्गज मौन रहे, क्या वे भी शीला विरोधी आग को हवा दे रहे हैं?

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अन्ना मंडली की कुंडली

Posted on 23 April 2011 by admin

दिल्ली के सियासी गलियारों में अन्ना मंडली के खिलाफ कितना कुछ चक्कर लगा रहा है, जहां जस्टिस सावंत रिपोर्ट अन्ना हजारे के गले की हड्डी बनी हुई है (जिसमें मान हानि के मुकदमे में अन्ना को जेल हो गई थी बाद में राज्य सरकार ने उनकी सजा माफ कर दी थी), शांतिभूषण के खिलाफ आनंद विहार डकैती कांड के कागजात, इलाहाबाद के जमीन का मामला, तो प्रशांत भूषण के खिलाफ उनके पालनपुर के बंगले का मामला, किरण बेदी के खिलाफ मिजोरम से आईबी की वह रिपोर्ट जिसकी वजह से वह दिल्ली पुलिस आयुक्त नहीं बन पाईं तथा उनकी बेटी का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन का मामला, स्वामी अग्निवेश के खिलाफ डोनर एजेंसियों की वो चिट्ठियां जो कैलाश सत्यार्थी ने बांटी हैं, अरविंद केजरीवाल जब रेवेन्यू सर्विस में थे तो उनकी डिपार्टमेंट प्रोसिडिंग्स की फाइल के कागजात, संतोष हेगड़े के पिता के ट्रस्ट से जुड़े कागजात जो ट्रस्ट मेडिकल कॉलेज भी चलाता है…यानी दिल्ली की आबोहवा में बहुत कुछ फैला है, खबरनवीसों को बस सूंघने भर की जरूरत है।

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स्वराज का दक्षिण में आगाज

Posted on 17 April 2011 by admin

भाजपा के लिए एक अच्छी खबर हो सकती है कि इस दफे केरल व तमिलनाडु में भी उनका खाता खुल जाए। भाजपा के चंद शीर्ष रणनीतिकारों ने अपनी एक सोची-समझी रणनीति के तहत ही सुषमा स्वराज को दक्षिण भेजने का फैसला किया था, पर सुषमा ने दक्षिण में प्रचार की कमान संभालते ही अपनी खास आक्रामक शैली में सुदूर केरल व तमिलनाडु में भी कमल के प्रस्फुटन के आगाज की जमीन तैयार कर दी है। आज हालत यह है कि कभी कन्नड़ की माहिर वक्ता माने जाने वाली सुषमा 12 मिनट तमिल में और 18 मिनट मलयालम में धाराप्रवाह भाषण दे सकती हैं। मलयालम सुषमा को ज्यादा सहज लगती है चूंकि उनका मानना है कि यह भाषा अपने मूल रूप में संस्कृत की ज्यादा सहोदरी है। चुनांचे दक्षिण के चुनाव प्रचार में सुषमा का एक दिन तमिल को तो एक दिन मलयालम को समर्पित रहता था। फिलवक्त तो वह दिल्ली लौट आई हैं जहां हिंदी बोलने का फिर से अभ्यास कर रही हैं।

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असली कप भारत के पास

Posted on 10 April 2011 by admin

भारत क्रिकेट का विश्व कप तो जीत गया, कप के असली होने को लेकर भ्रांतियां अब भी कायम हैं। दरअसल मुंबई कस्टम में फंसी जिस ‘शील्ड’ को लेकर तमाम विवाद था, वह एक ‘रोविंग शील्ड’ है जो आईसीसी के वर्तमान मुख्यालय दुबई में रहती है, विजेता टीम के कप्तान को असल में यही शील्ड दी जानी थी। पर आईसीसी के चंद फिरंगी अधिकारी जो शील्ड को लेकर भारत आए थे उनसे कथित तौर पर मुबई कस्टम के अधिकारियों ने ढाई सौ फ्री-पास की मांग की थी, जब इन्होंने पास देने में असमर्थता जताई तब ही सारा बखेड़ा खड़ा हुआ है। वैसे भी रोविंग शील्ड तो महज मीडिया के समक्ष फोटो खिंचवाने के लिए होती है, असली शील्ड तो वही है जो भारत के पास है।

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अगर सीखनी है सियासत

Posted on 03 April 2011 by admin

अगर सियासत सीखनी है किसी को तो गांधी परिवार से सीखे, हर कदम कैसे नाप तोल कर रखते हैं मां-बेटे। कांग्रेस यह मैसेज देने में कामयाब रही है कि सोनिया यूपीए के लिए हैं, तो राहुल कांग्रेस के लिए। सोनिया पश्चिम बंगाल जा रही हैं, प्रधानमंत्री भी जा रहे हैं और ये दोनों तृणमूल-कांग्रेस की संयुक्त रैली को संबोधित करेंगे, रैली की शुरुआत नॉर्थ बंगाल से होगी। जा तो राहुल भी रहे हैं पर वे संयुक्त रैली के बजाए सिर्फ कांग्रेसी उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करेंगे, जाहिर है इससे पश्चिम बंगाल कांग्रेस का वह धड़ा भी खुश हो जाएगा जिन्हें ममता के साथ जाने के बजाए ‘एकला चलो में’ ज्यादा भरोसा था और पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष मानस भुईयां इसी राय के प्र्रवत्तक नेताओं में से हैं, वहीं प्रणब मुखर्जी ममता से दोस्ती की कसीदे पढ़ रहे हैं।

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दामाद जी किसके निशाने पर

Posted on 22 March 2011 by admin

नई दिल्ली के साकेत स्थित एक शॉपिंग मॉल के ऊपर अवस्थित 60 कमरों का एक होटल है, दामाद जी ने डीएलएफ से असुरिक्षत लोन लेकर उन्हीं से वह होटल खरीद लिया, इसका बाजार भाव तकरीबन 100 करोड़ आंका जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस सारी डील के पेपर सबसे पहले छोटे अंबानी को हासिल हुआ और उन्होंने चिदंबरम और जेतली को यह पेपर सुपुर्द कर दिए। अनिल अंबानी सरकार के ऊपर एक दबाव बनाकर 2जी पचड़े से अपने को बाहर निकालना चाहते हैं, सारी कवायद इसी बात को लेकर है।

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असली धमाका तो अभी बाकी है!

Posted on 08 March 2011 by admin

सिर्फ नीरा राडिया के फोन टेप्स क्यों, इंकमटैक्स ने कई और बड़े उद्योगपतियों के भी फोन टेप किए हैं। और ये आयकर विभाग के एक बड़े अधिकारी के मार्फत लीक भी हुए हैं, नीरा के अलावा अनिल अंबानी, एस्सार के रुईया और वीडियोकॉन के द्यूत-बधुओं के भी फोन टेप हुए हैं और उसमें कई अहम जानकारियां भी कैद हैं। सीबीआई ने गृह मंत्रालय से लिखित अनुरोध किया था कि इसमें से कई बड़े उद्योगपतियों पर सीधा केस बनता है सो उन्हें गिरफ्तार करने की इजाजत दी जाए। चिदंबरम और अनिल अंबानी में गहरी छनती हैं, चुनांचे मामले को रफा-दफा करने की नीयत से गृह मंत्रालय ने इस मसले पर कानून मंत्रालय की राय मांगी। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि यूपीए सरकार की ओर से सीबीआई को निर्देश प्राप्त हुआ है कि सीबीआई अपने सारे सबूत सुप्रीम कोर्ट में पेश करे और कोर्ट में अपनी चार्जशीट भी फाइल करे, कोर्ट इस मामले में जैसा उचित समझे, जिसे चाहे बुलाना बुलाए और दोषी भी सीबीआई के बजाय कोर्ट तय करे। यानी सीबीआई को गिरफ्तारी की अनुमति गृह मंत्रालय से अंतत: नहीं मिल पाई है, पर अगर एक बार मामला सबूत के साथ कोर्ट में पहुंचा तो बड़े घरानों की कई बड़ी सच्चाईयां बेपर्दा हो सकती हैं।

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