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प्रणब दा को गुस्सा क्यों आता है?

Posted on 19 November 2011 by admin

प्रणब दा को इन दिनों जल्दी गुस्सा आ जाता है। संसद की लाइब्रेरी में मीरा कुमार की अध्यक्षता में जब सर्वदलीय बैठक चल रही थी तो कम्यूनिस्ट पार्टी के वासुदेब आचार्य ने ‘पेंशन रेग्यूलेशन’ को लेकर कुछ सवाल उठाए इस पर प्रणब दा उखड़ गए और बोले, ‘अगर आप इस बिल के मेरिट पर कुछ सवाल उठाना चाह रहे हैं तो इसके लिए यह मीटिंग नहीं बल्कि पार्लियामेंट है।’ लालू भी ब्लैक मनी वाली लिस्ट को सार्वजनिक करने की बात कर रहे थे, इस पर प्रणब दा ने तल्खी से कहा कि ‘स्विस सरकार से जो हमारा समझौता हुआ है उसके मुताबिक हम खाताधारियों को भारत में टैक्स जमा करवाने के लिए बाध्य कर सकते हैं पर हम उन पर मुकदमा नहीं चला सकते।’ पर जब लालू प्रणब दा जवाब से संतुष्ट नहीं हुए तो प्रणब दा ने चिढ़कर कहा, ‘हमसे पहले जो सरकारें थीं उन्होंने काले धन मसले पर अब तक क्या किया?’

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पवार पर कांग्रेसी वार

Posted on 13 November 2011 by admin

शरद पवार करीबियों पर कांग्रेस का शिकंजा कसता ही जा रहा है और जो भी हो रहा है एक बड़ी सुविचारित रणनीति की तहत। पहले चरण के लिए पवार करीबी के स्वामित्व वाली कंपनी ल्वासा को भले ही पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिल गई हो पर कड़ी शर्तों के साथ, कोई 500 शतर्ें कंपनी के ऊपर लाद दी गई हैं। पवार करीबी ललित मोदी पहले से ही संकटों में घिरे हैं और देश छोड़ लंदन में रह रहे हैं। 2जी मामले में शाहिद बलवा जेल में है। पवार को सबसे बड़ा झटका एयर बस खरीद मामले से लग सकता हैं, जिनमें उनके सबसे दुलारे प्रफुल्ल पटेल पर गाज गिर सकती है। इस मामले की जांच जारी है, जांच एजेंसियों का दावा है कि प्रति एयर बस कोई 5-6 मीलियन डॉलर (कोई पच्चीस करोड़ रुपए) की किक-बैक दी गई है, और कोई 110 एयर बस खरीदी गईं हैं तो क्या यह पैसा ल्वासा व डीबी रियलिटी में लगा है? सरकार इसी बात की जांच में तो जुटी है।

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पीआर के धनी शुक्लाजी

Posted on 06 November 2011 by admin

यूं तो संसदीय राज्य मंत्री राजीव शुक्ला के जिम्मे राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में मदद करना है, पर शुक्ला जन संपर्क के धनी नेताओं में शुमार होते हैं, सो कांग्रेस ने राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा के विपक्षी नेताओं के साथ भी लॉबिंग की जिम्मेदारी शुक्ला को सौंप दी है। सो इस बार दिवाली के मौके पर वे थोकभाव में दिवाली गिफ्ट के साथ विपक्षी नेताओं के घर पधारे। क्या बसपा, सपा या भाजपा वे तो लालू और शरद यादव से भी मिल आए। भाजपा में अरुण जेतली और सीपीएम में सीताराम येचुरी उनके अभिन्न मित्रों में से हैं, चुनांचे शुक्ला जी का तो उनसे मिलना-जुलना होता रहता है, शुक्ला की भांति ही जेतली को भी सियासत से अलहदा कई और खेल खेलने पसंद है मसलन क्रिकेट सो शुक्ला जी से उनकी टयूनिंग जबर्दस्त है। सिर्फ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज से शुक्लाजी नहीं मिल पाए जबकि सुषमा के दफ्तर से उन्होंने दो बार मिलने का वक्त मांगा, पर सुषमा के दफ्तर से उन्हें दो टूक बता दिया गया कि ‘इस दफे मैडम दिवाली नहीं मना रही है, क्योंकि चंद महीने पूर्व ही उनके भाई का देहांत हुआ है।’

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चिरंजीवी पर कांग्रेसी दांव

Posted on 30 October 2011 by admin

आंध्र में कांग्रेस अपनी रणनीति चिरंजीवी के इर्द-गिर्द बुन रही है, क्योंकि यह तेलुगु सुपरस्टार जिस कापू जाति से आते हैं इस जाति का तटीय आंध्र की 12 लोकसभा सीटों पर खासा असर है, और यहां प्रतिवार सीट पर 25 फीसदी तक कापू वोट हैं जो किसी भी उम्मीदवार की हार या जीत को प्रभावित कर सकते हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि तटीय आंध्र में वह ‘स्वीप’ कर सकती है अगर पार्टी ने यहां दलित, मुस्लिम, पिछड़ी जातियां व कापू का जातीय समीकरण ठीक से तैयार कर लिया। रही बात रायलसीमा की तो यह जगन के प्रभाव वाला क्षेत्र है, कांग्रेस चाह कर भी यहां अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी, क्योंकि जगन अपने या अपनी पार्टी की कीमत पर भी कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए आमादा हैं, जाहिर है इसका फायदा चंद्रबाबू नायडू उठा ले जाएंगे।

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मनमोहन को लेक्चर

Posted on 24 October 2011 by admin

क्या राहुल गांधी मनमोहन सिंह के उदारीकरण के फार्मूले से सहमत नहीं है? नहीं तो ऐसी क्या बात है कि राहुल ने येल विश्वविद्यालय के जिस चर्चित प्रोफेसर थॉमस पोग को नई दिल्ली लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया है, वे उदारीकरण के सख्त आलोचकों में से हैं। जिस राजीव गांधी इंस्टीटयूट ऑफ कंटेंपरेरी स्टटीज ने पोग को अपना व्याख्यान देने के लिए भारत न्यौता है, राहुल उसके ट्रस्टी हैं। यह जर्मन प्रोफेसर बुधवार को दिल्ली में उदारीकरण, न्याय आधिकारिता विषय पर बोलेंगे, क्या राहुल का यह पूरा उपक्रम मनमोहन व प्रणब को सुनाने के लिए है, ये दोनों लोग उदारीकरण के प्रबल पैरोकारों में से हैं।

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…अब बस

Posted on 16 October 2011 by admin

अडवानी का यह रथ पुणे में तैयार हुआ है और इसको तैयार करवाने में प्रकाश जावड़ेकर की सबसे महती भूमिका रही है। इस रथ में दो जेनरेटर लगे हैं, एक शानदार साउंड सिस्टम है और एक लिफ्ट लगी है। इसके दरवाजे हाईड्रोलिक हैं जो रथ के चलते ही अपने आप बंद हो जाते हैं। उस दिन जब सारा हंगामा बरपा तो शुरूआत रथ में लगे एक्जॉस्ट फैन टूट जाने की वजह से हुई, जैसे ही फैन टूट कर नीचे गिरे जेनरेटर का धुंआ एयर कंडिशनर के डक्ट में जाने लगा। और यह धुंआ धीरे-धीरे केबिन में भरने लगा। धुंआ इतना ज्यादा होने लगा कि उसमें मौजूद कॉर्बन मोनोक्साइड से केबिन में बैठे लोगों के दम घुटने लगे। उस वक्त जेतली वहां सो रहे थे, वे सोते-सोते बेहोश हो गए। सी.पी.ठाकुर को उल्टियां शुरू हो गई। पर रथ का दरवाजा था कि वह खुल ही नहीं रहा था क्योंकि दरवाजे रथ रूकने के बाद ही खुल सकते थे और अडवानी नहीं चाहते थे कि रथ रूके और उनकी यात्रा बाधित हो। पर जब पानी सिर से गुजरने लगा तो रथ रूकवाया गया। दरवाजे खुले और लोग बाहर आ पाएं। रथ के आगे-आगे रास्ता बनाते रूढ़ी चल रहे थे पर वे भी कहीं आगे निकल गए थे। उन्हें फिर बुलाया गया क्योंकि रथ के साथ कोई और गाड़ी नहीं चल रही थी। फिर डॉक्टरों के दल को बुलाया गया, कार्डियोलोजिस्ट ने जेतली को रात की यात्रा नहीं करने की सलाह दी, सुषमा का बीपी (13580) और ऑक्सीजन लेवल (97) ठीक आया। सी.पी.ठाकुर का प्राथमिक उपचार किया गया। फिर नेताओं को अलग-अलग गाड़ियों से वहां से ले जाया गया। यह रथ जब आगे बढ़ा तो फिर आरा में हिचकोले खा गया, ऊंचाई को लेकर जब फंस गया तो टायरों की हवा निकाली गईं फिर निकालने के बाद पंचर टायरों की मरम्मत हुई और उसमें हवा भरी गई। पर इन बातों से अडवानी की हवा कम नहीं हुई है।

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क्यों नहीं मान रहीं ममता

Posted on 11 October 2011 by admin

ममता दीदी की नाराजगी कांग्रेस को लेकर कम नहीं हो रही है, खासकर प्रणब दा से उनके सुमधुर रिश्तों पर ग्रहण लग गया है। ममता इस बात को लेकर केंद्र सरकार से बहुत खफा है कि उनकी पार्टी को आखिरकार आयकर का नोटिस क्यों थमाया गया है? क्यों ईडी पार्टी की आय संबंधी जानकारियां मांग रहा है? ममता ने प्रणब को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उनकी पार्टी ने बंगाल में इस दफे का चुनाव मां, माटी, मानुष के मुद्दे पर लड़ा है, ऐसे में केंद्र सरकार कहीं इंकमटैक्स के डंडे से तृणमूल पार्टी की छवि कलुषित तो नहीं करना चाहता? प्रणब से भी खास तौर पर ममता की नाराजगी इसी बात को लेकर है कि प्रणब के वित्त मंत्री रहते आयकर वालों का नोटिस उनके पास आया है यानी ‘तेरे रहते लुटा है चमन बाग बां, कैसे मान लूं कि तेरा इशारा न था…’ शायद यही वजह है कि इन दिनों केंद्र सरकार के सभी महत्त्वपूर्ण संदेश ममता को जयराम रमेश के मार्फत मिल रहे हैं।

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प्रणब के लिए जगह नहीं

Posted on 02 October 2011 by admin

यूं अचानक प्रधानमंत्री के बुलावे पर जब प्रणब मुखर्जी वाशिंगटन से न्यूयॉर्क पहुंचे तब रात के बारह बज रहे थे। प्रधानमंत्री अपने पूरे ताम-झाम के साथ न्यूयॉर्क पैलेस होटल में ठहरे थे, उस होटल का पूरा दो-फ्लोर प्रधानमंत्री के लाव-लश्कर के लिए बुक था। चूंकि प्रणब को ठहराने के लिए सुईट चाहिए था, पैलेस होटल में इसकी व्यवस्था नहीं हो पाई, तब प्रणब का कारवां न्यूयॉर्क के ही पार्क सेंट्रल होटल की तरफ बढ़ चला, जहां पीएम के साथ गए पत्रकारों के दल को ठहराया गया था। पर जब वहां भी दादा के लिए कोई सुईट की व्यवस्था नहीं हो पाई तो विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव विष्णु प्रकाश ने दादा के वास्ते अपना सुईट खाली कर दिया तब कहीं जाकर दादा को रात काटने की जगह मुयस्सर हो पाई। विष्णु प्रकाश का काम चूंकि साथ आए पत्रकारों की आवभगत का था इसीलिए वे उसी होटल के एक मामूली से कमरे में शिफ्ट हो गए।

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सबसे बड़ा खिलाड़ी

Posted on 26 September 2011 by admin

राजीव शुक्ला आइपीएल के नए चैयरमैन हैं, उनकी मंशा आइपीएल के ऊपर लगे दाग-धब्बों को धोने की है। वे सबसे पहले आइपीएल व इसके फ्रेंचाइजी के लिए एक नए दिशा-निर्देश को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अव्वल तो यह कि अब आइपीएल में सिर्फ 9 टीमें ही भाग लेंगी। शुक्ला भले खुद ही पेज-थ्री पार्टियों के शौकीन हों, पर मैच की पूर्व रात्रि पर फ्रेंचाइजियों द्वारा दी गई पार्टियों में खिलाड़ियों के शामिल होने की अनिवार्यता के खिलाफ हैं, उनका मत है कि देर-रात की पार्टियों से खिलाड़ियों के परफॉरमेंस पर फर्क पड़ता है। सो फ्रेंचाइजी ऐसी पार्टियों में शामिल होने के लिए अपने प्लेयर्स को मजबूर नहीं कर सकते। आइपीएल के शुभारंभ को रंगारंग बनाने की तैयारियों में शुक्ला अभी से जुट गए हैं, यह आयोजन चैन्नई में होना है और शुक्ला चाहते हैं कि ओपनिंग सिरेमनी ओलंपिक या कॉमनवेल्थ के रंगारंग कार्यक्रम की टक्कर का हो। जिसके आयोजन के लिए वे शीघ्र ही देश-विदेश की बड़ी इवेंट-मेनेजमेंट कंपनियों से आवेदन मंगाने की तैयारियों में जुटे हैं, यानी शुक्ला जी यह साबित करने में जुटे हैं कि वे हर खेल के माहिर खिलाड़ी हैं।

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अमर की चिंता में अमरीका

Posted on 18 September 2011 by admin

अमर सिंह जब तक तिहाड़ में थे परेशान-हाल थे, उनका बड़बोलापन यूं तो जेल में भी बदस्तूर जारी था, पर उनका स्वास्थ्य वहां सचमुच बिगड़ने लगा था, उनके शरीर में इंफेक्शन फैलने लगा था, शायद इसी वजह से जेल में कभी-कभी वे अपना आपा खो बैठते थे, यूं ही चिल्लाकर कहते थे-‘या तो मैं मर जाऊंगा या तो मरने से पहले अपना मुंह खोलूंगा, तो बड़े-बड़े लपेटे में आएंगे।’ जाहिर है अमर के सीने में कुछ राज दफन हैं जिनका सिरा ‘कैश फॉर वोट’ और न्यूक्लीयर डील से जुड़ता है। सबसे हैरानी तो सर्वशक्तिमान अमरीका की अमर में दिलचस्पी को लेकर है, भारत स्थित अमरीकी दूतावास अमर की खैर-मकदम व कुशलक्षेम जानने को सदैव तत्पर रहता है, अमरीका की अमर में इतनी दिलचस्पी सचमुच हैरत पैदा करने वाली है।

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