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इजराइल की चेतावनी पर भारत ने क्यों नहीं कान धरे?

Posted on 20 February 2012 by admin

नई दिल्ली बम बलास्ट की चेतावनी इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने भारत को कहीं पहले दे दी थी। इजराइल को कहीं न कहीं ऐसा लग रहा था कि ईरान में न्यूक्लियर वैज्ञानिक की मौत और वहां के न्यूक्लियर रिएक्टर में तोड़ फोड़ के लिए ईरान उसे ही दोषी ठहरा रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए इजराइल ने आनन-फानन में अपने सभी दूतावासों और दूसरों देशों में रहने वाले अपने नागरिकों को चेतावनी दे दी थी कि वे पर्याप्त सर्तकता बरतें। पर लगता है भारत सरकार ने इजराइल द्वारा दी गई इस चेतावनी को यथोचित गंभीरता से नहीं लिया।

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(English) Why did Khare have to go?

Posted on 07 February 2012 by admin

Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.

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पीएम टि्वटर पर

Posted on 31 January 2012 by admin

लगता है प्रधानमंत्री के नवनियुक्त सलाहकार पंकज पचौरी ने अपनी नई हैसियत में काम-धाम शुरू कर दिया है, प्रधानमंत्री का एक नया टि्वटर एकाऊंट ‘पीएमओ इंडिया’ प्रकाश में आया है और सबसे खास बात तो यह कि यह एकाऊंट किसी को ‘फॉलो’ भी नहीं कर रहा।

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बच गईं जिया

Posted on 24 January 2012 by admin

2 महीने पहले बांग्लादेश में भी खालिदा जिया के तख्ता पलट की सारी तैयारियां हो चुकी थीं, वहां की आर्मी जिनका भारत विरोधी रूख जगजाहिर है, उसने खालिदा को सत्ताच्युत करने की पूरी तैयारियां कर ली थी, वह तो भला हो भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ का जिसने समय रहते इसकी सूचना खालिदा तक पहुंचा दी और खालिदा ने आनन-फानन में डैमेज कंट्रोल कर लिया।

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उमा को ना

Posted on 14 January 2012 by admin

उमा को लेकर यूपी के भाजपा नेताओं में ही ‘ऊई मां’ मची है, भाजपा नेताओं का एक वर्ग उमा भारती को बुंदेलखंड की बबीना विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाना चाहता था, पहले तो उमा इसके लिए तैयार नहीं थी पर पार्टी के केंद्रीय नेताओं के समझाने बुझाने से उमा मान गई थी, उमा से यह कहा गया कि अगर वह खुद चुनावी मैदान में होंगी तो इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। वैसे भी बबीना उमा के लिए कोई मुश्किल सीट नहीं थी, क्योंकि यहां लोध वोटरों की तादाद सबसे ज्यादा है। जैसे ही उमा चुनावी मैदान में उतरने को तत्पर हुई कलराज मिश्र, विनय कटियार सरीखे यूपी भाजपा के नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया, उन्हें कहीं न कहीं डर था कि इससे तो उमा अपने को भगवा पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शुमार कर लेंगी। इन नेताओं का विरोध रंग लाया और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया है कि उमा अब सिर्फ 2014 का लोकसभा चुनाव ही लड़ेंगी, इस बारे में खुद उमा ने अभी तक अपना मंतव्य स्पष्ट नहीं किया है।

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शाही इमाम की 15 सूत्री मांग

Posted on 11 January 2012 by admin

इस हफ्ते जब मुलायम सिंह दिल्ली में थे तो उन्होंने अपने तार जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी से जोड़ लिए, अहमद बुखारी की सक्रियता भी देखते ही बनती थी। मुलायम चाहते थे कि शाही इमाम यूपी के मुसलमानों के लिए एक अपील जारी करें कि इस दफे के यूपी चुनाव में राज्य के मुसलमान सपा के पक्ष में वोट करेंगे। शाही इमाम ने इसके लिए फौरन हामी भर दी और कहा कि वे अपील जारी करने को राजी हैं, पर पहले मुलायम उनके 15 सूत्री मांग की एक फेहरिस्त स्वीकार करने की हामी भरे, जो मांगे प्रदेश के मुसलमानों की बेहतरी से जुड़ी हैं। इमाम साहब की उम्मीदों के विपरीत मुलायम इन मांगों को मानने के लिए एक पल में तैयार हो गए। और उन्होंने इमाम साहब से अर्ज किया कि वे अपनी मांगों की सूची फौरन उन्हें सौंप दें। शाही इमाम अब जाकर मुस्लिम बुध्दिजीवियों को याद कर रहे हैं कि वे जल्दी से ऐसे 15 सूत्री मांगों की एक सूची तैयार करें, जिन्हें मुलायम के आगे रखा जा सके। मुलायम सिंह को इस बात का बखूबी एहसास है कि जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी का साथ यूपी चुनाव में उनकी नैया पार लगा देगी।

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अन्ना से नाराज सोनिया

Posted on 27 December 2011 by admin

लोकपाल के मुद्दे पर संसद में बहस के दौरान जिन लोगों ने वहां मौजूद सोनिया गांधी की भाव भंगिमाएं देखी होंगी, उन्हें सहज समझ आ गया होगा कि अन्ना के प्रति कांग्रेस का रुख आज इतना हमलावर और आक्रामक क्यों है? लोकपाल व अन्ना पर चुटकी लेते हुए लालू के भाषण के रसास्वादन के दौरान मुस्कराती-खिलखिलाती सोनिया के इरादे क्या हैं इसे लोग बखूबी समझ चुके हैं। आखिर अन्ना से नाराज क्यों हैं इतनी सोनिया? दरअसल, कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी पर सीधा हमला साध कर अन्ना ने सोनिया को बेतरह नाराज कर दिया है। आखिर राहुल ना सिर्फ कांग्रेस के देदीप्यान नक्षत्र हैं अपितु वे ‘पीएम इन मेकिंग’ भी हैं। सो, इस दफे अन्ना से बराबरी का हिसाब चुकता करने की जुगत में है कांग्रेस पार्टी।

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जरदारी क्यों गए दुबई?

Posted on 11 December 2011 by admin

यह जरदारी को बचाने की अमरीकी कवायद का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है कि पहले उन्हें दुबई और फिर उन्हें वहां से लंदन भेजा जाएगा। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पुख्ता जानकारी थी कि जरदारी को आईएसआई से जान का खतरा है। वैसे भी अमेरिका की नीति पाक राष्ट्रपति को लंदन और पाक प्रधानमंत्री को सऊदी अरब में पुनर्वासित करने की है। और जरदारी मामले में भी अमेरिका ने यह साबित कर दिया है कि अपने खैरख्वाहों को लेकर कितना फिक्रमंद है वह।

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सब खेल गिनती का है

Posted on 04 December 2011 by admin

खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के मुद्दे ने भारतीय सियासत में तूफान ला दिया है। पक्ष-विपक्ष में घमासान का यह आलम है कि मध्यावधि चुनाव की गुपचुप आहटें भी सुनी जा सकती हैं। भाजपानीत विपक्ष एक समय गिनती के दौर में आगे चल रहा था, समझा जाता है कि एफडीआई के विरोध में अलख जगाने के लिए उसे लोकसभा में 295 सांसदों का समर्थन हासिल हो गया था, यानी परिस्थितियां इतने विस्फोटक मुहाने पर पहुंच चुकी थीं कि मनमोहन सरकार फ्लोर पर औंधे मुंह लुढ़क भी सकती थी। ऐसे में सरकार के संकटमोचक कांग्रेसी मैनेजर हरकत में आए, तृणमूल व डीएमके जैसे यूपीए के बड़े घटक दलों को मनाने की कवायद शुरू हुई, कांग्रेसी मैनेजरगण ने तो करुणानिधि को आसानी से मना लिया, पर ममता अड़ गई है, उन्हें बमुश्किल इस बात के लिए राजी किया जा रहा है कि अगर एफडीआई के मुद्दे पर सदन में वोट की नौबत आई तो तृणमूल सदन से अनुपस्थित रहेगा, अनुपस्थिति तो डीएमके भी दर्ज कराने वाला है क्योंकि यह फार्मूला भी उन्हीं का सुझाया हुआ है। सदन के बाहर तृणमूल और डीएमके दोनों ही रिटेल में एफडीआई का विरोध जारी रखेंगे और कांग्रेस भी यही चाहती है कि तब तक सदन के काम काज में व्यवधान जारी रहे जब तक वह फिर से 272 के जादुई आंकड़े को छू नहीं लेती है।

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अब दिल्ली की बारी है

Posted on 27 November 2011 by admin

सूची प्राप्त होते ही वित्त मंत्रालय हरकत में आ गया। आनन-फानन में एक टीम गठित की गई, वित्त मंत्रालय में पदस्थ एडवाइजर स्तर के एक उच्च पदस्थ अधिकारी को इस पूरे ऑपरेशन की बागडोर सौंपी गई। इस टीम ने इस लिस्ट को आधार बनाकर देशव्यापी छापे डाले। सबसे ज्यादा छापे मुंबई और गुजरात में डाले गए। गुजरात के कई डायमंड मचर्ेंट इन छापों की जद में आ गए। अब दिल्ली की बारी है। पकड़े जा रहे लोगों से कहा जा रहा है कि वह 35 फीसदी की दर से रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करें अन्यथा उन्हें फेमा, प्रिवेंशन ऑफ मनी लांडरिंग एक्ट एवं इंकम टैक्स एक्ट के तहत बुक किया जा सकता है। इसमें महज रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर देने से ही काम नहीं चल रहा है, कथित तौर पर अधिकारियों की जेबें भी गर्म हो रही हैं। पर कुछ के वकीलों ने पंगा खड़ा कर दिया है कि कहीं कुछ भी टैक्स जमा कराने की जरूरत नहीं है, आखिर इस लिस्ट की विश्वसनीयता क्या है? पर ऐसे लोगों पर सरकार सख्ती बरतने का मूड बना चुकी है।

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