Posted on 17 December 2010 by admin
देश के एक प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा सियासी बियांवा में इस कदर कभी नहीं भटके थे, आम तौर पर राजनैतिक दल और इनके नेताओं से पर्याप्त दूरी बनाए रखने वाले टाटा के लिए 2जी स्पेक्ट्रम और नीरा राडिया गले की हड्डी साबित हो रहे हैं। बीपीएल के राजीव चंद्रशेखर से उलझने के बाद टाटा ने भाजपा व एनडीए पर जहां सीधा हमला बोल दिया है, वहीं वे अपनी नाराजगी गृह मंत्री चिदंबरम से भी नहीं छुपा पा रहे हैं, टाटा को लगता है कि इस कॉरपोरेट वॉर में स्वयं गृह मंत्री ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने का उपक्रम साधा है, टाटा ने अपनी शिकायत से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया है, सो बहुत मुमकिन है कि आने वाले दिनों में मीडिया में नए टेप लीक हों, जिनमें मामले के अन्य लाभार्थियों की दास्तां कैद है।
Posted on 10 December 2010 by admin
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 24 नवंबर की तारीख में प्रधानमंत्री को एक धमाकेदार पत्र लिखा है, इस पत्र में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनकी दो बहनों अनुष्का व नाडिया पर सीधा हमला साधा गया है, स्वामी का आरोप है कि स्पेक्ट्रम घोटाले में इन दोनों बहनों में प्रत्येक को बतौर रिश्वत 18 हजार करोड़ रुपए मिले। स्वामी ने सोनिया, उनकी दोनों बहनों और उनके परिवार की मलेशिया, हांगकांग, दुबई, यूरोपीय देशों खासकर लंदन यात्रा को भी लेकर सवाल उठाए हैं। स्वामी के मुताबिक सोनिया व उनका परिवार तो दुबई तक की यात्रा शिडयूल्ड फ्लाइट से करता है और वहां से आगे की यात्रा एक कॉरपोरेट घराने द्वारा प्रदत्त चार्टर्ड विमान से करता है, जो कि डीजीसीए के नियमों के मुताबिक भी गैर कानूनी है। स्वामी ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में सोनिया परिवार पर यह भी आरोप लगाया है कि अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह परिवार किस पासपोर्ट पर ऐसी यात्राएं करता है।
Posted on 01 December 2010 by admin
लखनऊ में सुब्रत राय की भांजी की शादी का मौका था, इस विवाह समारोह में तीन ऐसे भूले-बिसरे मित्र शामिल थे, जिनकी कभी दांत कटी रोटी हुआ करती थी। एक अमर सिंह, जो अनिल अंबानी का जहाज लेकर लखनऊ पधारे थे, उनके कल के बड़े भैया अमिताभ, जो सीधे-सीधे खेतों में ट्रैक्टर चला व अपनी पत्नी जया के साथ वहां आए थे, और इन दोनों की आंखों के नूर मुलायम सिंह जो एक कोने में चुपचाप बैठे थे। इन तीनों में से कोई भी एक-दूसरे का सामना नहीं करना चाह रहा था, एक-दूसरे से कन्नी काट रहे थे, सबसे खुश था वहां कोई तो वे थे राज बब्बर, जिनकी इन तीनों ने मिलकर सामूहिक तौर पर कभी उनका बैंड बजाया था।
Posted on 21 November 2010 by admin
गोवा फिल्म फेस्टीवल का उद्धाटन सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी के बजाए रेल मंत्री ममता बनर्जी कर रही हैं, यह खबर थोड़ी चौंकाने वाली है, पर कम लोगों को मालूम है अंबिका सोनी इन दिनों बीमार है और वह हृदय रोग से जूझ रही है। लगता है बिग बी को इतना बड़ा राष्ट्रीय अवार्ड देना उन्हें भारी पड़ गया, बच्चन परिवार से गांधी परिवार की नाराजगी किसी से छुपी नहीं है, सो बतौर कैबिनेट मंत्री सोनी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अमिताभ बच्चन को अवार्ड के लिए हरी झंडी दिखा दी, पर जिस दिन राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह आयोजित हो रहा था, उसी दिन वह बीमार पड़ गईं, स्टेज पर ही वह चक्कर खा गईं, तो माननीय राष्ट्रपति ने फौरन उन्हें अपने बगल की कुर्सी पर बिठाया, पर क्या कुर्सी भी किसी की सगी हुई है?
Posted on 14 November 2010 by admin
अगर महाराष्ट्र की इस नए सियासी विद्रूपताओं को खालिस शब्दों का जामा पहनाया जाए तो आप कह सकते हैं कि शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने ‘गन प्वाइंट’ पर अपने चाचा से अपने लिए उपमुख्यमंत्री पद की गद्दी लूट ली। अजित पवार ने राकांपा के लगभग 60 विधायकों को अपने साथ कर लिया था, ऐसे में बेबस हो गए थे पवार। क्या यही कारण था कि अजित पवार के शपथ ग्रहण समारोह में शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल नहीं पहुंचे, सिर्फ वहां रस्मी तौर पर सुप्रिया सूले मौजूद थीं। और वहां कहीं भी पोस्टर-बैनर-परचम में शरद पवार का चेहरा नजर नहीं आ रहा था, जिधर देखो बस अजित दादा पवार के फोटो यानी एनसीपी में एक नए सियासी महाभारत का शंखनाद हो चुका है।
Posted on 28 October 2010 by admin
लुईस फिशर ने अपनी पुस्तक ‘द् लाइफ ऑफ महात्मा गांधी’ में गांधी जी को उदृत करते हुए यह खुलासा किया है कि बापू ने 30 जनवरी 1948 को गोड्से की गोली खाने के बाद ही ‘हे राम’ पहली बार नहीं कहा था, ऐसा वे दक्षिण अफ्रीका में एक बार पहले भी कह चुके थे, गांधी जी के शब्दों में- ‘इससे पहले कि मैं अपनी बात पूरी कर पाता मेरे सिर पर एक जोरदार मुक्का पड़ा, मैं गश खाकर गिर पड़ा और मेरे मुंह से बरबस यही निकला-हे राम!’ सवाल उठता है कि अगर आज गांधी जी जीवित होते तो कॉमनवेल्थ लूट पर क्या वे फिर से नहीं कह उठते-‘हे राम!’ अब तक जांच समिति ने न कलमाड़ी, न भनोत, न शीला दीक्षित या फिर जयपाल रेड्डी को ही तलब किया है। पर जांच चल रही है। इतना तो तय समझा जा रहा है कि अगले लोकसभा चुनाव में कलमाड़ी को पुणे से कांग्रेस का टिकट नहीं मिलेगा, पर जानने वाले जानते हैं कि कैसे कालांतर में भी उन्होंने ऐसी सूरत में राज्यसभा का रास्ता तलाश लिया था। कहते हैं कि कलमाड़ी को सबक सिखाने पर शरद पवार आमादा हैं, कभी पवार से ही कलमाड़ी ने सियासत के गुर सीखे थे, आज दोनों में छत्तीस का आंकड़ा है। और गडकरी से पवार की दोस्ती भी जगजाहिर है, सो लगता नहीं कि आने वाले दिनों में कलमाड़ी को भाजपा चैन से रहने देगी।
Posted on 19 October 2010 by admin
इस कॉलम के अंतर्गत पहले ही लिखा जा चुका था कि कॉमनवेल्थ खेल खत्म होते ही इसके घोटालों की जांच शुरू हो जाएगी, वही हुआ, घोटालों की जांच के लिए प्रधानमंत्री ने एक कमेटी भी बना दी है जिसे 3 माह के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। छोटी मछलियां तो कई फंसेगी, कई बड़ी मछलियां भी जांच की आंच में घिर सकती हैं, कलमाड़ी, भनोत के अलावा शीला दीक्षित और दिल्ली के उप राज्यपाल के इर्द-गिर्द भी शक की सुई मंडरा सकती है। उप राज्यपाल को शायद अब कोई एक्सटेंशन न मिले, मैडम दीक्षित की जगह कपिल सब्बिल के नाम पर विचार चल रहा है। 8 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है और गेम्स में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा कांग्रेस को घेरने की पूरी तैयारी में है, सो कांग्रेस आलाकमान भी किसी को बख्शने की मूड में नहीं, नाम चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो?
Posted on 06 October 2010 by admin
नरेंद्र मोदी का इन दिनों चाहे कितनी भी अडवानीकरण हुआ हो पर वे चुनाव प्रचार के लिए बिहार जाने के लिए खासे उत्सुक थे। और उन्होंने बकायदा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से फोन पर बात करनी चाही, पर नाराज नीतीश लाइन पर भी नहीं आए, जाहिरा तौर पर इससे नाराज हुए मोदी। संघ चाहता था कि वरुण गांधी और नरेंद्र मोदी दोनों ही चुनाव प्रचार के लिए बिहार जाएं, पर नीतीश टस से मस नहीं हुए, तब कहीं जाकर भाजपा ने अपने 40 प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग को सौंप दी, समझा जाता है कि इसके फौरन बाद गडकरी ने अलग-अलग मोदी और वरुण से फोन पर बात की और उन्हें समझाया कि ऐसा गठबंधन की मजबूरियों के चलते हो रहा है, वरना पूरी पार्टी एकजुट इन दोनों नेताओं के साथ है।
Posted on 05 September 2010 by admin
कांग्रेसी मुख्यालय में जब सोनिया गांधी का आगमन होता है तो यूं ही कांग्रेसियों की बांछे खिल जाती हैं और उनमें अपनी पार्टी अध्यक्षा को मुंह दिखाने की एक घोषित होड़-सी मच जाती है। ऐसे में जबकि दिल्ली में झमाझम बारिश का आलम है, सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री के डायस के आगे की मिट्टी बारिश से कीचड़ में तब्दील हो चुकी थी, यानी जिस भी मंत्री-संतरी को मैडम को मुंह दिखाना था उन्हें उस कीचड़ में पैर रखना ही पड़ा, वे चाहे जयपाल रेड्डी ही क्यों न हों, कीचड़ में सने पैर, धोती-पैजामा या पतलून पर होठों पर लरजती मुस्कान, कीचड़ में कमल खिलते तो देखा था, ऐसी हंसी भी खिल सकती है मालूम नहीं था! सोनिया मैडम की जय!
Posted on 29 August 2010 by admin
वेदांता को आज जरूरत है अपने लिए एक मुफीद पीआर कंपनी की, क्योंकि पहले जो पीआर कंपनी वेदांता का काम देखती थी उसे एक बेहद आकर्षक फीस पर मुकेश अंबानी ने हायर कर लिया। वैसे भी वेदांता परियोजना को जयराम रमेश से सिर्फ इसीलिए हरी झंडी नहीं मिल पाई क्योंकि कांग्रेस का मानना है कि अनिल अग्रवाल भाजपा के ज्यादा करीबी हैं, जबकि मौजूदा गृह मंत्री पी.सी. चिदंबरम पहले इस कंपनी के बोर्ड में लंबे समय तक डायरेक्टर रह चुके हैं। जयराम को यह भी पता था कि राहुल गांधी आदिवासियों के बीच ओड़ीसा जा रहे हैं, सो युवा गांधी को आदिवासियों का घोषित मसीहा बनवाने में वे अपनी भी कोई भूमिका चाहते थे। कांग्रेस और अंबानी कनेक्शन पहले से जगजाहिर हैं, चुनांचे कोई भी कांग्रेसी मंत्री इस भावना के विपरीत कभी कैसे कार्य कर सकता है?