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यूपी में युवराज की तूती

Posted on 19 September 2009 by admin

ताजा उपचुनावों में भले ही कांग्रेस का सिक्का नहीं चला हो, खास कर इन उपचुनावों में तो बिहार में कांग्रेस कुछ भी चमत्कार नहीं दिखा पाई, लालू-रामविलास भले ही अपने खोए हौंसले पाने में कामयाब रहे हों पर भला हो राहुल गांधी का जिनके पुण्य प्रताप से यूपी में कांग्रेस का ग्राफ निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। यूपी में भाजपा और समाजवादी पार्टी के विधायक निरंतर कांग्रेस के संपर्क में हैं, पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के तकरीबन 11 और भाजपा के 6 विधायक कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंचे और उन्होंने कांग्रेस में आने की इच्छा जताई है। क्या अमर भैय्या सुन रहे हैं।

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भगवा लड़ाई बड़ी दुखदाई

Posted on 19 September 2009 by admin

भाजपा में दूसरी पांत के नेताओं के बीच लड़ाई है कि थमती नहीं, अभी पिछले दिनों भाजपा के एक देदीप्यमान नेता ने कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह से अपनी एक सहधर्मी नेता के बारे में कुछ अजीबो-गरीब टिप्पणी जड़ दी, भगवा नेता ने अपनी पार्टी के ही नेता के बारे में कहा कि ‘आपको गली के कुत्ते के बारे में जरा भी इल्म नहीं होता कि न जाने वह कब काट ले…।’ वाह क्या उपमा है और क्या संस्कृति धन्य पार्टी है।

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साही की वाहवाही

Posted on 14 September 2009 by admin

यूपी के नए अध्यक्ष के बारे में पार्टी जनों और संघ की राय ताक पर रखकर राजनाथ अपनी पसंद का एक ‘लो की’ अध्यक्ष लाना चाहते हैं जो उनकी ‘डमी’ की तरह आचरण करे। पढरौना के एक भूमिहार हैं सूर्य प्रताप साही, जो पूर्व में यूपी सरकार में आबकारी मंत्री रह चुके हैं, और चुनाव हारने में राजनाथ की तरह ही इनका भी एक विकट रिकार्ड है पिछले दो बार से यह विधानसभा चुनाव में पराजय का मुंह देख रहे हैं, पर राजनाथ हैं कि इसी पराजित योध्दा में भाजपा की जीत का मूलमंत्र ढूंढ रहे हैं।

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चिंतन पर प्रश्न

Posted on 06 September 2009 by admin

अब भाजपा में चिंतन बैठक की प्रासंगिकता पर ही सवाल उठने लगे हैं? कई नेताओं ने अब यह सवाल उठाया है कि अगर शिमला में पार्टी ने लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार पर चिंतन-मनन किया तो फिर उसमें उन लोगों को क्यों नहीं आमंत्रित किया गया जिनके ऊपर चुनावों में टिकट बांटने की जिम्मेदारी थी, यानी पार्टी की चुनाव समिति को। पार्टी के ‘कोरग्रुप’ को बुलाया गया संसदीय बोर्ड के सदस्यों को भी बुलाया गया पार्टी के महासचिवों को भी आमंत्रित किया गया,फिर इलेक्शन कमेटी के सदस्यों पर नजरें इनायत क्यों नहीं?

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पंजाब का पंगा

Posted on 06 September 2009 by admin

पंजाब में अकाली व भाजपा की मिली-जुली सरकार है जिसके मुखिया प्रकाश सिंह बादल हैं, हालिया दिनों में बड़े बादल के प्रिय पुत्र सुखबीर बादल उपमुख्यमंत्री की गद्दी पर सुशोभित हो गए हैं, कायदे से उपमुख्यमंत्री की गद्दी भाजपा के कोटे में जानी चाहिए थी पर दिल्ली आकर छोटे बादल ने भाजपा के राष्ट्रीय मुखिया राजनाथ सिंह को 10 की क्या पट्टी पढ़ाई कि दो बोल बोलने वाले बलबीर पुंज तक की जुबान मूक हो आई। अब राजनाथ राजी तो कोई क्या करेगा प्रा जी।

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प्रतिभा की द्विविधा

Posted on 06 September 2009 by admin

भाजपा की शिमला की चिंता या चिंतन बैठक में महज पार्टी के 23 शीर्ष नेताओं की मौजूदगी थी, पर वहां प्रतिभा अडवानी क्या कर रही थीं? जसवंत के पार्टी के निष्कासन की घोषणा के बाद लंच के दौरान प्रतिभा हर किसी नेता नेत्री के पास जाकर दुख व्यक्त कर रही थीं कि जसवंत सिंह के साथ बड़ी ज्यादती हुई है, पर प्रतिभा की बातों पर सिवा अडवानी के किसी भी नेता नेत्री ने कान नहीं धरा सिवा अडवानी के, जिन्होंने अपने भाषण में जसवंत का संजीदगी से जिक्र किया।

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अडवानी फिर वही कहानी

Posted on 06 September 2009 by admin

अडवानी को लेकर संघ की चिंताए बढ़ती ही जा रही है। चिंतन बैठक शुरू होने से पूर्व संघ ने अडवानी को बड़े दुलार-प्यार से समझाया था कि वे पार्टी में युवाओं के आगे आने का मार्ग प्रशस्त करें और पार्टी में युवा नेतृत्व को फलने-फूलने का मौका दें, यानी संघ की अडवानी को अपरोक्ष यही राय थी कि वे हटें, नेता विपक्ष की गद्दी भी खाली करें और पार्टी नेतृत्व की भी। पर जब अडवानी टस से मस नहीं हुए तो संघ को बैकफुट पर आना पड़ा और बयान देना पड़ा कि ‘भाजपा में हमारा दखल नहीं।’ जबकि संघ के लोग अडवानी को लंबे समय से समझा रहे हैं कि आप सोनिया गांधी की तरह बस संसदीय दल का चेयरमैन हो जाइए। पहले अटल जी ने भी इसी परंपरा का अनुसरण किया था, वे नेता विपक्ष नहीं बने थे। पर अडवानी ठहरे चिकने घड़े कहते हैं कि अगर अटल जी का स्वास्थ्य ठीक रहता तो वे नेता विपक्ष जरूर बनते।

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सवाल सच झूठ का

Posted on 06 September 2009 by admin

जब फैक्ट फाईडिंग रिपोर्ट के ऊपर प्रेस कांफ्रेंस में बोलने जा रहे थे अरुण जेतली तो पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राय दी कि चतुराई से रिपोर्ट को दाएं-बाएं कर दो, पर प्रबंधन के उस्ताद जेतली जोश-जोश में कह गए कि ऐसी कोई रिपोर्ट है ही नहीं, जबकि अडवानी कैंप ने यह रिपोर्ट मीडिया में पहले ही लीक कर दी थी और कई टीवी चैनलों पर यह पहले से दिखाया भी जा रहा था। अब यह जेतली के विश्वसनीयता का सवाल था और उनके फेस सेविंग का भी सो पार्टी ने अंत समय तक ऐसी किसी रिपोर्ट की बात से इंकार किया।

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शादी होगी सादी

Posted on 05 September 2009 by admin

दिल्ली से लगे एक कांग्रेसी मुख्यमंत्री के सांसद पुत्र दूसरी शादी रचाने जा रहे हैं वो भी एक बेहद सादे समारोह में, मुख्यमंत्री पुत्र की पत्नी एक निवर्तमान महिला कांग्रेसी सांसद की छोटी बहन हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके घर बहू नहीं, बेटी आ रही है जिसे बेटे की एक नई भूमिका में अवतरित होना है।

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…और अंत में

Posted on 27 August 2009 by admin

दिल्ली के एक पंचतारा होटल के 360 डिग्री रेस्टोरेंट में जब यशवंत सिन्हा, दिग्विजय सिंह और रंजन भट्टाचार्य मिले तो रंजन ने दोनों नेताओं को बीमार अटल के मनोभावों से परिचित कराया कि जसवंत के पार्टी निकाला से अटल जी किस कदर दुखी हैं और अटल ने इसे पार्टी की अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी बताया है। सब जानते हैं कि अटल जी इन दिनों किस कदर बीमार हैं कि वे ठीक से बोल भी नहीं पाते और अपने मनोभावों को व्यक्त करने के लिए उन्हें तो बस अपने दत्तक दामाद जी का ही आसरा है, पर क्या विचार भी कभी दत्तक हो सकते हैं?

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