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किस तोते में बाबा की जान

Posted on 03 July 2011 by admin

कांग्रेस का एक खेमा बाबा रामदेव के उन तोतों की पड़ताल की वकालत कर रहा था जिसमें बाबा की जान बसती है। जैसे बाबा को सहारा श्री सुब्रत राय से बहुत लगाव है, बाबा अक्सर सहारा का चार्टर्ड विमान इस्तेमाल करते देखे जा सकते हैं और अब तो बाबा घोषित तौर पर अरबपति हो गए हैं सो चार्टर्ड से क्या गुरेज। वैसे ही मुंबई के एक बड़े बिल्डर माफिया सुधाकर शेट्टी बाबा के अनन्य भक्तों में शामिल हैं। कहते हैं बाबा के अनशन में कोई 20 हजार लोग शेट्टी के खर्चे पर मुंबई से आए थे। सहारा ने हाल के दिनों में कोई 2 हजार करोड़ की कथित रकम अदा कर सेंट्रल लंदन के सबसे सभ्रांत हाईड पार्क इलाके में एक शानदार पंचतारा होटल ग्रोवनर हाउस खरीदा है, कांग्रेसी इस डील को बेपर्दा करवाना चाहते हैं।

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क्या होगा टाटा का

Posted on 03 July 2011 by admin

टाटा को बेशक सीबीआई ने अपनी ओर से क्लीनचिट दे दी है, पर कोर्ट का रुख अभी देखना बाकी है, यूं भी अनिल अंबानी पर अब भी खतरे की तलवार लटक रही है। ज्ञात हो कि अनिल की कंपनी पर कथित तौर पर एक प्रमुख भारतीय बैंक का 65 हजार करोड़ रुपयों का कर्ज है।

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फल की चिंता में उमा

Posted on 03 July 2011 by admin

उमा भारती इस दफे तनिक बदले अवतार में अपने घर भाजपा में वापिस आई हैं, अब न तो उनके तेवर पहले से उग्र हैं, और न ही वाणी असंयमित, वह फूंक-फूंक कर चल रही हैं। पार्टी में अपने चिरंतन विरोधियों से समय मांग कर उनसे उनके घर मिलने भी जा रही हैं। भाजपा की एक प्रमुख नेत्री के घर वह लंच पर पहुंची तो उन्होंने खुलासा किया कि इन दिनों जबसे वह गंगा मैया की सेवा में है अन्न का त्याग कर रखा है, सो वह सिर्फ फलाहार करेंगी। उमा को फल की चिंता करते देख भाजपा की इस शीर्ष नेत्री को अच्छा लगा।

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तैयारी में थे बाबा

Posted on 03 July 2011 by admin

बाबा अपनी पूरी सियासी तैयारी के साथ अनशन पर बैठने आए थे, बाबा की पूरी योजना थी कि जब रामलीला ग्राउंड पर उनका अनशन टूटेगा तो उसी वक्त एक राजनैतिक पार्टी के गठन की घोषणा कर दी जाएगी। बाबा ने बकायदा अपनी नई पार्टी को चुनाव चिन्ह आबंटित करवाने के वास्ते चुनाव आयोग में अर्जी भी दाखिल कर रखी थी। भाजपा का इरादा 2014 के लोकसभा चुनाव में सभी 543 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का था। वह तो भला हो यूपीए सरकार के कनफुसिए सलाहकार सिब्बल व चिदंबरम का जो उन्होंने भाजपा को संजीवनी दिलवा दी, नहीं तो रामदेव के उम्मीदवार वोट किसका काटते?

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जागते रहे गडकरी

Posted on 03 July 2011 by admin

अनशनकारियों पर इतनी बर्बरतापूर्ण अंदाज में पुलिसिया कार्यवाही हुई है इसका पता सोनिया को सुबह आठ बजे चला, भाजपा के दो बड़े नेताओं को सुबह सात बजे के आस-पास यह ज्ञात हो सका। बड़े नेताओं में भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ही एकमात्र थे जिन्होंने इस पूरी पुलिसिया कार्यवाही का न्यूज चैनलों पर लाइव देखा।

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गुफ्तगू के दौर भी चले

Posted on 03 July 2011 by admin

पर सिर्फ रामदेव को घेरने का उपक्रम भर नहीं साधना चाहती सरकार, वह जाहिरा तौर पर बाबा को बचाव का रास्ता भी मुहैया कराने को आतुर है, केंद्र सरकार भली-भांति इस तथ्य से वाकिफ हो चुकी है कि फिलहाल बाबा जन-आंकाक्षाओं के केंद्र बन गए हैं और उनको छेड़ना यानी कि जन भावनाओं को सरकार विरोधी बनाना है। सो, कई नए तारणहार सामने आ रहे हैं। श्री-श्री रवि शंकर की मध्यस्थता की पेशकश में चाहे दम ना भी हो पर, असल खेल तो मुकेश अंबानी खेल रहे हैं, वह इस संकट से सरकार को उबारने का हर संभव उपक्रम साध रहे हैं। इस हेतु उन्होंने अपने पारिवारिक गुरु मोरारी बापू की भी सेवाएं ली हैं, सनद रहे कि मोरारी बापू से बाबा के संबंध काफी मधुर हैं, सो बाबा को मनाने में बापू की एक महती भूमिका हो सकती है, फिलहाल तो सरकार की सारी चिंताएं इस बात को लेकर है कि बाबा अपना अनशन तोड़ें, इसके लिए सरकार कई नए-नवों को जोड़ने को भी तैयार हैं।

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इस दफा उल्फा

Posted on 01 April 2011 by admin

इस दफे के असम चुनाव में किसका पलड़ा भारी रहेगा, यह अतिवादी संगठन उल्फा के रुख पर निर्भर है। एक परेश बरुआ का अंडर ग्राउंड उल्फा है, वह कांग्रेस के खिलाफ है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक बरुआ अभी आईएएस के पे-रोल पर हैं और वे फिलहाल चीन में रहते हुए वहीं से भारत में आतंकवादी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। दूसरी उल्फा अरविंद राजखोवा की है जो ओवर ग्राउंड रहकर कांग्रेस की मददगार है। सो अभी यह भविष्यवाणी जल्दबाजी होगी कि असम में कौन जीतेगा?

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वरुण की रैली में सुषमा की बोली

Posted on 01 April 2011 by admin

संघ ने यूपी विधानसभा चुनावों को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है, सो भाजपा भी वहां अपनी सुप्तप्राय: भगवा कैडर को जगाने में जुट गई है और इसके लिए पार्टी की संघ के कार्र्यकत्ताओं पर पूरी तरह निर्भरता बढ़ती जा रही है। यूपी के हर जिले में 35 ऐसे समर्पित कार्र्यकत्ताओं को चिन्हित किया जा रहा है, चुनाव में जिनकी अहम भूमिका रहने वाली है। पार्टी अध्यक्ष गडकरी पहले ही कह चुके हैं कि यूपी उनके लिए कितना महत्त्वपूर्ण है। चुनांचे राहुल के मिशन 2012 के जवाब में भाजपा अपने फायर ब्रांड नेता वरुण गांधी को आगे कर रही है। पहले वरुण व पार्टी में एक असहज सी दूरी दिखती थी, गडकरी अपने निजी प्रयासों से इसे पाटने में जुटे हैं, दरअसल भाजपा इस सत्य से दो-चार हो चुकी है कि प्रदेश में जहां पार्टी आयोजित रैलियां फ्लॉप साबित हुई हैं, वहां वरुण की रैलियों में जबर्दस्त भीड़ व उत्साह नजर आया है। आगामी 3 अप्रैल को गोरखपुर व बस्ती से लगे सिध्दार्थ नगर जिले के बांसी में वरुण एक बड़ी रैली करने जा रहे हैं, जिसमें नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज बतौर मुख्य अतिथि जा रही हैं। राजा बांसी, जय प्रताप सिंह जो वरुण के खासमखास हैं, वे इस रैली को सफल बनाने में दिन-रात एक कर रहे हैं। वरुण फिलहाल अपनी शादी के बाद पहली बार विदेश में हैं, 31 मार्च की रात वे ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट से दिल्ली लौटने वाले हैं, तब तक उनके लोग उनकी उड़ान को नया आसमां मुहैया कराने की होड़ में जुटे हैं।

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आलू के भाव लालू

Posted on 01 April 2011 by admin

बिहार के प्रहार से आहत लालू यादव एक बार फिर से सोनिया की शरण में जाने की जुगत भिड़ाने में लगे हैं। लालू के खास वफादार उद्योगपति, पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद प्रेमचंद्र गुप्ता का दस जनपथ वैसे भी काफी आना-जाना है। सो यह महज संयोग नहीं है कि लालू संसद में, संसद के गलियारों में यूं सोनिया से बतकही करते रहे। कहते हैं वे अपने लिए एक नया सियासी रास्ता तलाशने की मुहिम में जुटे हैं, पर दूध की जली सोनिया इस दफे छाछ भी फूंक-फूंक कर पी रही हैं, उसने लालू से साफ कर दिया है कि उनसे दोस्ती तो बनी रह सकती है, पर 4 सांसदों वाली उनकी पार्टी को कैबिनेट में जगह मिल पानी मुश्किल है, पर इन बातों से बेखबर लालू फिलवक्त तो सोनिया के दिल में अपने लिए जगह बनाने में जुटे हैं।

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ममता से रेल छिनेगा

Posted on 01 April 2011 by admin

पश्चिम बंगाल चुनाव में एक तरह से तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी की जीत लगभग पक्की मानी जा रही है, यह बात तो बुध्ददेव भट्टाचार्य ने भी एक मलयाली दैनिक को दिए गए साक्षात्कार में मान ली है कि अब बंगाल में वामपंथी दल विपक्ष में बैठने को तैयार हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ममता दीदी रायटर्स बिल्डिंग पर काबिज हो जाती हैं तो फिर रेल भवन में उनकी जगह कौन लेगा? इसको लेकर ममता के विश्वासपात्रों मुकुल राय से लेकर दिनेश त्रिवेदी तक आपसी प्रतिद्वंद्विता में जुटे हैं। पर विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस ने एक तरह से ममता को साफ कर दिया है कि अगर वह बंगाल चली गईं तो रेल पर उन्हें अपना दावा छोड़ना होगा। कांग्रेस रेल मंत्रालय अब अपने पास रखना चाहती है। जाफर शरीफ के बाद से किसी कांग्रेसी मंत्री ने अब तलक रेल का महकमा नहीं संभाला है। कांग्रेस ने ममता को इशारों-इशारों में बता दिया है कि रेल के एवज में उनकी पार्टी को तीन कैबिनेट मंत्रालय दिए जा सकते हैं। वैसे भी यूपीए 2 में कांग्रेस तमाम महत्त्वपूर्ण मंत्रालय धीरे-धीरे घटक दलों से अपने कब्जे में ले रही है- पहले भूतल परिवहन, फिर टेलिकॉम द्रमुक से ले लिया, तो नागरिक उड्डयन राकांपा से। अब तृणमूल के त्याग की बारी है।

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