Posted on 05 September 2010 by admin
ममता बनर्जी बंगाल के पत्रकारों को पहले भी राखी भेजती रही हैं, पर इस दफे रक्षा-बंधन के मौके पर उन्होंने दिल्ली के भी प्रमुख पत्रकारों को राखी भेजी है, ताकि पत्रकार भैया बहना की लाज को अक्षुण्ण रख सकें। चलिए अब सारी जिम्मेदारी महिला पत्रकारों के कंधों पर आ गई है, कम से कम दीदी, तृणमूल व रेलवे के बारे में वे सोलहों आने सच तो लिख पाएंगी।
Posted on 29 August 2010 by admin
बिहार के पटना के एक अनजाने से शख्स अनिल अग्रवाल का इतिहास मात्र 35 साल पुराना है। इनकी कंपनी वेदांता बस इसीलिए फली-फूली कि इसने पुरानी खान या घाटे में चल रही कंपनियों का औने-पौने दाम पर अधिग्रहण किया और फिर उसे एक मुनाफा देने वाली यूनिट में तब्दील कर दिया। सनद रहे कि एनडीए के शासनकाल में अग्रवाल ने बाल्को का सौदा भी महज 500 करोड़ रुपए में कर लिया था। अनिल की तस्मानिया में भी अपनी माइन्स हैं। इनकी कंपनी वेदांता लंदन में रजिस्टर्ड है, जहां वे दूसरे नंबर के अमीर भारतीय हैं। भले ही वे अंग्रेजी रूक-रूक कर बोलते हों, पर ब्रिटिश सरकार में इनका खासा रसूख है। शायद यही कारण है कि केयर्न ऑयल कंपनी को वेदांता ने इतनी आसानी से खरीद लिया। केयर्न के राजस्थान और कृष्णा गोदावरी बेसिन में ऑयल फिल्ड्स हैं, चुनांचे अगर वेदांता ऑयल फिल्ड्स बिजनेस में आ जाता है तो वह अंबानी के रिलायंस से भी बड़ा खिलाड़ी बन जाएगा। सो, इसी वर्चस्व की लड़ाई में फिलहाल मुकेश अंबानी ने अनिल अग्रवाल को पछाड़ दिया है।
Posted on 29 August 2010 by admin
वयोवृध्द कांग्रेसी नेता अर्जुन सिंह का परिवार इस स्थापित परंपरा से दीगर अपनी धूनी रमा रहा है, हालांकि अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह उर्फ राहुल सिंह पहले से कांग्रेस में है और इनकी पुत्री को जब इस दफा सतना से पार्टी का टिकट नहीं मिला तो वह बतौर निर्दलीय चुनाव में खड़ी हो गई थीं, पर एक सच्चे कांग्रेसी के मानिंद तब अर्जुन सिंह ने सतना से कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में और अपनी पुत्री के खिलाफ चुनाव प्रचार किया था। बात अजय सिंह की हो रही थी जो प्रदेश सरकार में पूर्व में मंत्री भी रह चुके हैं, उनके युवा पुत्र अरुणोदय सिंह ने सियासत के बजाए फिल्मों में अपना कैरियर बनाने की ठानी है। अरुणोदय सिंह को ब्रेक देने का बीड़ा उठाया था निर्माता सुधीर मिश्रा ने, फिल्म सिकंदर में ये सेकेंड लीड में थे, इस फिल्म को पीयूष झा ने डायरेक्ट किया था, पर यह फिल्म नोटिस नहीं हो सकी, अभी हालिया रिलीज फिल्म ‘आइशा’ में उन्होंने सोनम कपूर के मित्र धु्रव का एक छोटा सा किरदार निभाया है, पर अभी अरुणोदय के भाग्य का उदय होना है और उन्हें बतौर हीरो किसी फिल्म में आना बाकी है।
Posted on 22 August 2010 by admin
आईपीएल खत्म होने के चौथे दिन ही इसके बर्खाश्त कमिश्नर ललित मोदी ने लंदन की फ्लाइट पकड़ ली थी, तब से वे भारत नहीं लौटे हैं, दरअसल उनके वकीलों ने मोदी को इस कदर डरा रखा है कि जैसे उनके खिलाफ कोई ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ जारी हो कि भारतीय एयरपोर्ट पर उतरते नहीं उन्हें धर लिया जाएगा। सो, मोदी हर ओर जा रहे हैं, यूरोपीय देशों के खूब चक्कर लगा रहे हैं। दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड को 3 करोड़ का बोनस या रिश्वत मामले से निबटने और बाहर आने की तैयारियों में भी जुटे हैं, साथ ही फेरा मामलों के विशेषज्ञ वकीलों से भी सलाह मशविरा ले रहे हैं, पर स्वदेश वापसी के नाम पर अब भी कांप जाते हैं। पर सुना है कि जबसे उन्हें खबर मिली है कि राजस्थान के म्युनिस्पल चुनावों में वसुंधरा के नेतृत्व में भाजपा ने कांग्रेस को शिकस्त दे दी है, तब से वे अपने इरादों को नई मजबूती देने में जुट गए हैं। तो क्या स्वदेश की धरती पर निकट भविष्य में पांव धरेंगे मोदी?
Posted on 22 August 2010 by admin
जीएसटी की मीटिंग चल रही थी और उसमें सदन के नेता प्रणब मुखर्जी तथा नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज आपस में खूब घुल-मिल कर बातें कर रहे थे (इस मीटिंग में सभी पार्टियों के नेताओं की मौजूदगी थी) एक सांसद ने हंसते हुए कहा कि सदन में पहली बार है कि सदन के नेता और नेता प्रतिपक्ष में इतना अच्छा तालमेल है। इस पर सुषमा ने चुटकी ली-‘हां,शायद इसीलिए मेरी और प्रणबदा की लंबाई आपस में बराबर मिलती है।’ इस पर प्रणब कहां चुप रहने वाले थे, उन्होंने छूटते ही कहा-‘सच है, मेरे और अडवानी जी के कद में बहुत फर्क था और विचारों में भी।’
Posted on 15 August 2010 by admin
लालू-पासवान गठबंधन में दरार पड़ सकती है, क्योंकि पासवान अहमद पटेल के माध्यम से कांग्रेस के सत्त् संपर्क में हैं, मसला यह है कि अगर बिहार में लालू-पासवान की सरकार बनती है, तो सीएम कौन बनेगा? जाहिर है लालू सीएम की कुर्सी कभी नहीं छोड़ना चाहेंगे। ऐसे में पासवान को क्या हासिल होगा? सो, कांग्रेस ने पासवान के समक्ष चारा फेंका है कि वे कांग्रेस के साथ मिलकर बिहार में चुनाव लड़ लें, चाहे कांग्रेस-पासवान सरकार बनाने की स्थिति में न भी आएं, मगर पासवान को कांग्रेस केंद्र में मंत्री बना सकती है किसी मलाईदार मंत्रालय के साथ। पासवान जी का मन डोल रहा है, शायद इसीलिए वे राजीव शुक्ला के ‘डिप्लोमेसी डिनर’ में सबसे ज्यादा एक्टिव दिख रहे थे और घूम-घूम कर लल्लन व कांग्रेसियों से बतिया रहे थे?
Posted on 10 August 2010 by admin
कॉमनवेल्थ घोटाले मुद्दे पर माकपा की तेजतर्रार नेता वृंदा करात के सवालों का जवाब देते एक पल केंद्रीय खेल मंत्री एम.एस.गिल की जुबान भी जैसे लड़खड़ा गई, वृंदा से मुखातिब हो गिल ने कहना जारी रखा-‘आइ एम ट्राईंग टू डू माई बेस्ट, पर त्वाडे मत्थे नाल त्यौरियां ही नहीं जांदीं।'(मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश कर रहा हूं, पर आपके माथे से त्यौरियां जाती ही नहीं)। कहना न होगा कि गिल की इस गल ने वृंदा की अधरों पर मुस्कान ला दी।
Posted on 10 August 2010 by admin
नितिन गडकरी और राज ठाकरे सिर्फ मराठी मानुष नहीं, बल्कि एक दूसरे के दुख-सुख में शरीक होने वाले गहरे मित्र हैं, अब यह तो राम जाने कि मुंबई आने वाले प्रवासी उत्तर भारतीयों पर भी एक दोनों का नजरिया एक सा है, क्या राज की तरह गडकरी भी मानते हैं कि मुंबई में मलेरिया फैलाने में उत्तर भारतीय लोग संवाहक का कार्य कर रहे हैं…नाना का वो फेमस फिल्मी डॉयलॉग ‘…एक मच्छर स्… आदमी को हिंजड़ा बना देता है’…और जो पहले से हो? पूछने की बात है, तभी तो गडकरी राज ठाकरे को अपना छोटा भाई मानते हैं और जब गडकरी के हाथों महाराष्ट्र भाजपा की कमान थी तो वह राज ठाकरे के साथ भाजपा का चुनावी गठबंधन चाहते थे, एक दिन में अगर ये दोनों मित्र फोन पर बतिया न लें तो इन दोनों को चैन नहीं मिलता… और गडकरी से अब तलक भाजपा को क्या मिला है यह भी भला कोई पूछने की बात है।
Posted on 01 August 2010 by admin
अमर सिंह की सियासत को बैकगेयर में डालने के बाद अब मुलायम सिंह यादव और रामगोपाल यादव उन्हें संसद में पिछली सीट पर बिठाने के लिए आमदा है। अभी प्रोफेसर रामगोपाल और मोहन सिंह ने राज्यसभा के सभापति को यह पत्र लिखा है कि अमर सिंह को संसद की स्थायी समिति, स्वास्थ्य से हटाया जाए, मुलायम-भ्राता का आरोप है कि अमर सिंह की टर्की की एक दवाई कंपनी से सांठ-गांठ है और इसी कंपनी के लिए वे भारत में लियाजन भी करते हैं, और इसी कंपनी के बुलावे पर हालिया दिनों में उन्होंने टर्की की यात्रा भी की थी। जाने माजरा क्या है?
Posted on 01 August 2010 by admin
सियासी शह-मात के अजीबो गरीब खेल में सीबीआई इन दिनों मोहरा बनी हुई है, जाहिरा तौर पर इसकी डोर सियासतदां के हाथों में है। गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह की गिरफ्तारी हो चुकी है, अगला नंबर नरेंद्र मोदी व माया कोडनानी का हो सकता है। सीबीआई की तिरछी निगाहें गुलाब चंद कटारिया और ओम माथुर पर भी है। अजमेर ब्लास्ट की पृष्ठभूमि में संघ के कई बड़े नेताओं पर भी शिकंजा कसा जा सकता है, इंद्रेश कुमार का नाम तो पहले ही सार्वजनिक हो चुका है, इंद्रेश के अलावा सीबीआई संघ के कई अन्य प्रमुख नेताओं मसलन अशोक बैरी, देवेंद्र गुप्ता तथा संदीप डांगे को भी धर दबोचना चाहती है। इसके लिए उपयुक्त साक्ष्य अब तक इकट्ठा किए जा चुके हैं। विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल और प्रवीण तोगड़िया भी संदेह के घेरे में हैं। यानी भगवा राजनीति पर चहुं ओर से खतरा मंडरा रहा है।