Posted on 19 October 2010 by admin
गुजरात में नगर निगम के चुनाव हैं, पर भाजपा-कांग्रेस ने इन चुनावों को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। भाजपा की ओर से पार्टी के तमाम बड़े नेता चाहे सुषमा स्वराज हों या जेटली सभी चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं। नरेंद्र मोदी तो एक-एक निगम सीट पर कई-कई बार जा रहे हैं। कांग्रेस ने भी अपने तमाम स्टार प्रचारकों की टीम झोंकी हुई है, अशोक गहलोत, जयपाल रेड्डी से लेकर राजीव शुक्ला तक ने वहां धूनी रमा रखी है। कांग्रेस फिल्मी सितारों की भी सेवाएं ले रही है। महिमा चौधरी, मिनिषा लांबा से लेकर ईशा कोप्पिकर तक के ग्लैमर को भुनाने के प्रयास हो रहे हैं। वाक युध्द भी जारी है, मसलन जब मोदी ने कहा कि वे अमेरिका के न्यूयार्क शहर के स्टेच्यू आफ लिबर्टी से बड़ी आदमकदर् मूत्ति सरदार पटेल की लगवाएंगे, तो कांग्रेस के स्टार प्रचारक शुक्ला ने सूरत में एक सभा में चुटकी ली-मोदी को तो अमरीका का वीजा मिला ही नहीं वे क्या जानें स्टेच्यू आफ लिबर्टी, उसमें तो लोग चप्पल-जूते पहने घूमा करते हैं। क्या मोदी सरदार पटेल जैसी महान हस्ती का वैसा ही हश्र करवाना चाहते हैं? और जिस जसवंत सिंह ने सरेआम सरदार को धिक्कारा आज वे ससम्मान भाजपा में वापिस आ गए हैं। यानी तरकश से तीर भी निकल रहे हैं, और मन से पीर भी।
Posted on 19 October 2010 by admin
क्या हुआ राहुल गांधी के यंगिस्तान के सपनों का ? उनकी पूरी यंग ब्रिगेड हालिया दिनों में जिस तरह फेल हो रही है वह पूरी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है। सोनिया उमर की जगह फारूख को कश्मीर सौंपना चाहती थीं, पर राहुल यंग उमर के पक्ष में अडिग रहे, आज कश्मीर के हालात बद से बदतर हुए जाते हैं। उमर की भाषा व भंगिमाएं देखिए कितनी अतिवादी सोच की परिचायक हैं। गुलाम नबी के जमाने में कश्मीर में एक बार तो विदेशी पर्यटकों की वापसी हो गई थी आज वहां के हालात किस कदर विस्फोटक हैं। राहुल की यंग ब्रिगेड का अब तक संसद में कैसा प्रदर्शन रहा है यह बात किसी से छुपी नहीं। जितिन प्रसाद जैसे युवा मंत्रियों के कामकाज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। यहां तक कि युवा कांग्रेस के विभिन्न राज्यों के चार अध्यक्षों को पिछले दिनों भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बिहार के इस दफे टिकट बंटवारे में राहुल के युवा खेवनहारों ने लेन-देन के नए मसौदे लिख डाले हैं, राहुल जी, कैसे सुधारेंगे अपनी भूल?
Posted on 19 October 2010 by admin
76 बैच के आईपीएस नीरज कुमार की पुत्री एक प्रशिक्षित नृत्यांगना हैं, चुनांचे जब पिछले दिनों दिल्ली के एक ऑडिटोरियम में उनका परफॉरमेंस हुआ तो नौकरशाहों के साथ-साथ अदद राजनेताओं की मौजूदगी भी वहां महसूस की गई, माने तो वह एक तरह से नीरज कुमार की पीआर एक्सरसाइज ही थी क्योंकि अगले कुछ महीनों में दिल्ली के मौजूदा पुलिस कमिश्नर डडवाल के कार्यकाल के 3 वर्ष पूरे होने वाले हैं और सरकार अभी से उनके उत्तराधिकारी की तलाश में जुट गई है। वैसे तो डडवाल भी कोई कम महत्वाकांक्षी नहीं, उन्होंने कॉमनवेल्थ खेलों का दिल्ली में सुरक्षापूर्ण व चाकचौबंद आयोजन करा खूब वाह-वाही लूटी है और उनकी नजरें सीबीआई में एक अहम पोस्ट पर लगी है। नीरज कुमार को पूरी कॉयस्थ लॉबी का मूक समर्थन हासिल है, यहां तक कि भाजपा में भी उनके चाहने वालों की एक लंबी फेहरिस्त है यानी कि शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर रविशंकर प्रसाद और यशवंत सिन्हा तक, और शायद यही बात कुछ हद तक उनके खिलाफ भी जाती है कि उनके तार भगवा सियासत से बखूबी जुड़े हैं। पर इन बातों से अनजान नीरज कुमार को इन दिनों पीएमओ और गृह मंत्रालय में सक्रिय लॉबिंग करते देखा जा सकता है। पर नीरज कुमार की दावेदारी को चुनौती देने के लिए कई और नाम भी मैदान में हैं, मसलन 75 बैच के बी.के.गुप्ता जो तिहाड़ जेल के डीजी हैं। 77 बैच के एक सक्षम अधिकारी अजय चङ्ढा।
Posted on 06 October 2010 by admin
बीसीसीआई ललित मोदी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की तैयारी में है। जैसे आईपीएल के दौरान एक विदेशी घड़ी कंपनी से मोदी ने करार किया, कंपनी पूरे आईपीएल काल में मात्र 35 घड़ियां ही बेच पाई, जिसमें से 24 तो मोदी के कब्जे में है, जिसका पैसा कंपनी को आज तक नहीं मिल पाया। कलर्स चैनल के साथ सौदा फाईलों में तो 35 करोड़ का है, पर कलर्स वाले कह रहे हैं कि मोदी ने मुंह जुबानी 5 करोड़ माफ कर दिए थे। पूर्व उप राष्ट्रपति स्व. कृष्णकांत के बेटे रश्मिकांत की कंपनी ‘जूम’ को भी करोड़ों का फायदा पहुंचाने का आरोप मोदी पर है। मोदी ने रश्मिकांत की कंपनी को 45 करोड़ एडवांस तथा 35 करोड़ किराया देने का करार कर लिया था, और इन उपकरणों के किराए भी हर साल बढ़ने थे। अब जाकर बीसीसीआई ने इस डील को रद्द किया है। यानी अब मोदी के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज होंगे और अगर वे सुनवाई के दौरान लंदन से भारत नहीं आते हैं तो भारत-ब्रिटेन की प्रत्यर्पण संधि के मुताबिक मोदी को धर पड़कने के लिए इंटरपोल की मदद ली जाएगी। यानी आने वाले दिन मोदी के लिए और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं।
Posted on 19 September 2010 by admin
भाजपा का नया प्रमोद महाजन कौन? यकीनन पीयूष गोयल। गडकरी के नए संकटमोचक के तौर पर उभरे हैं पीयूष झारखंड हो या मामला पावर प्रोजेक्ट या पॉवर बैलेंस का, हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। इन दिनों उन्हें विजय माल्या के साथ-साथ देखा जा रहा है, चाहे फ्लाइट पर या खास सियासी जगहों पर। अब तो यह बात भी राज नहीं रह गई है कि इस राज्यसभा चुनाव में माल्या को भाजपा का समर्थन व इसके विधायकों के वोट दिलवाने में पीयूष गोयल की ही सबसे महती भूमिका थी।
Posted on 19 September 2010 by admin
भाजपा में पर्चे-परचम की परंपरा निहायत पुरानी है और पार्टी के स्थापित नेतागण ही छुपे-दबे तौर पर अपने साथी नेताओं के घोटालों, संबंधों आदि को बेनकाब करने के लिए पर्चे-सीडी आदि बंटवाते रहे हैं। ताजा मामला उत्तराखंड के मुख्यमंत्री निशंक का है, उनके कथित घोटालों की कहानी सियासी गलियारों में बांटी-परोसी जा रही है, जाहिर सी बात है कि निशंक खेमा इस बात से खासा आहत है और इशाराें-इशारों में पार्टी के बड़े नेताओं से बता रहा है कि यह कारस्तानी कोश्यारी खेमे की है।
Posted on 19 September 2010 by admin
भूले-बिसराए तांत्रिक चंद्रास्वामी अभी भी स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं, पिछले दिनों वे स्वाइन फ्लू की गंभीर चपेट में आ गए थे और उन्हें दिल्ली के एक पंचतारा अस्पताल के आईसीयू में कई हफ्तों तक भर्ती रहना पड़ा था, जब स्वामी जी की तबियत कुछ सुधरी तो उन्हें वापिस आश्रम ले आया गया, पर इतने गंभीर रूप से बीमार पड़े स्वामी जी के खैर मकदम पूछने के वास्ते कोई भी वीआईपी नेतागण नहीं पधारे, समय-काल का फर्क देखिए।
Posted on 12 September 2010 by admin
संघ के घोषित-पोषित भाजपा के खड़ांऊ अध्यक्ष नितिन गडकरी का अब सारा ध्यान भगवा पार्टी के चाल-चरित्र-चेहरा बदलने में लगा है। नैतिकता, शुचिता व पारदर्शिता का भी ताजा-ताजा तकाजा है सो तय हुआ कि भाजपा की एक ऐसी निधि स्थापित की जाएगी जहां धन और और नीयत दोनों ही सफेद होंगे, चुनांचे दिल्ली से इस अभियान का श्रीगणेश हुआ और इसका बीड़ा दिल्ली भाजपा के नए-नवेले अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के सुपुर्द किया गया, गुप्ता जी को 10 करोड़ की रकम इकट्ठी करने का टार्गेट दिया गया। गुप्ता जी ने आनन-फानन में ही सक्रिय सदस्य बनाकर सवा करोड़ रुपए इकट्ठे कर लिए, पार्टी के ऐसे मेंबर को पार्टी अकाऊंट में चेक से बतौर सदस्यता रकम एक लाख रुपए अदा करनी होती है। वेंकैया नायडू के निवास पर एक कार्यक्रम रखा गया, मंच पर स्वयं वेंकैया, विजय कुमार मल्होत्रा, विजेंद्र गुप्ता और अध्यक्ष जी के प्रतिनिधि के तौर पर पीयूष गोयल आमंत्रित थे। वहां मौजूद भाजपा पदाधिकारियों, कार्र्यकत्ताओं व दिल्ली के पार्षदों से एक-एक कर पूछा जा रहा था कि वे कितने सदस्य बना लेंगे। पार्षद और निगम के एक जोन के चैयरमैन ने कहा-‘चार तो बना ही लूंगा’ इस पर मंच पर बैठे पीयूष गोयल उखड़ गए-‘बोले चैयरमैन होकर बस चार बनाओगे, हम तो 25 की आशा कर रहे थे, अगली बार हमें आपको चैयरमैन बनाने से पहले सौ बार सोचना होगा।’ वहां मौजूद पार्टी का हर नेता-कार्र्यकत्ता सकते में था, राजनैतिक शुचिता की यह कौन सी नई इबारत लिखवाना चाहते हैं अध्यक्ष जी, अपने चेलों के मार्फत।
Posted on 05 September 2010 by admin
लगता है अब निकट भविष्य में भाजपा का राहुल गांधी पर हमला फिलवक्त थम जाएगा, अब चाहे माननीय अध्यक्ष जी को युवा गांधी में कोई करिश्मा न भी दिखे तो वे कुछ बोल नहीं सकते। मोहन भागवत का भाजपा नेताओं को बड़ा ही स्पष्ट संदेश आया है कि वे राहुल के खिलाफ कुछ न बोलें। संघ प्रमुख का मानना है कि राहुल अभी ‘टेस्टेड’ नहीं हैं, पर वे बातें अच्छी कर रहे हैं, वैसे भी लोकसभा चुनावों में अभी साढ़े तीन साल का वक्त है, सो राहुल पर हमला अभी ‘प्रीमैच्योर’ होगा। मुमकिन है संघ प्रमुख की इस नसीहत का भाजपा नेताओं पर अच्छा असर हो।
Posted on 05 September 2010 by admin
भाजपा में प्रवक्ताओं की बहार है, छपास-दिखास की भूख कहीं ज्यादा है, सो संसद सत्र की समाप्ति के बाद सुषमा स्वराज और अरुण जेतली ने जहां नेता प्रतिपक्ष के तौर पर (लोकसभा व राज्यसभा) प्रेस कांफ्रेंस की, वहीं पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने पार्टी कार्यालय में ही एक प्रेस कांफ्रेंस आहूत कर दी, एक छोटा-सा स्टेज था सिर्फ एक कुर्सी लगी थी जिस पर रवि शंकर खुद विराजमान थे, पार्टी के अन्य प्रवक्ता सकते में थे कि आखिर उन्हें कब मिलेगी कुर्सी? राजीव प्रताप रूढ़ी, तरुण विजय, प्रकाश जावेड़कर आदि पंक्तिबध्द कुर्सी की बाट जोह रहे थे, फिर प्रसाद ने अपने सहायक से कहा कि मंच के नीचे तीन कुर्सियां और लगा दो बाकी प्रवक्ताओं के लिए, रूढ़ी ने सहायक से कहा कि उनकी कुर्सी वे मंच पर ही लगा दे,पर सहायक बॉस की भावनाएं समझता था, उसने झट से कहा डॉयस छोटा है कमजोर है, वहां और कुर्सी नहीं लग सकती, रूढ़ी का ठाकुरी भाव प्रबल हुआ, बड़बड़ाते हुए कांफ्रेंस से बाहर निकल गए।