Posted on 10 December 2010 by admin
अपना चाल, चरित्र व चेहरा बदलने का उद्धोष करने वाली पार्टी का असली चरित्र क्या है यह पार्टी के सिरमौर ने अपने बेटे की शादी पर देश दुनिया को बता दिया है। गडकरी के भोज की सियासी हलकों में अब भी धूम मची हुई है। उससे पूर्व भाजपा नेता राजीव प्रताप रूढी ने अपनी भतीजी की शादी के मौके पर एक जर्बदस्त पार्टी दी थी, अकबर रोड के उसी घर में जो कभी शिवराज पाटिल का आधिकारिक निवास हुआ करता था, उस पार्टी में स्पीकर मीरा कुमार, कमलनाथ के अलावा राहुल गांधी की भी उपस्थिति रही, भाजपा के आला नेता तो आए ही थे, उससे पहले बलबीर पुंज ने भी एक धमाकेदार पार्टी दी थी, भाजपा के पार्टी कल्चर की जय हो।
Posted on 01 December 2010 by admin
चूंकि बिहार चुनाव में कांग्रेसी युवराज ‘फुस्स’ साबित हुए हैं, सो कांग्रेस बिहार की हार को गंभीरता से ले रही है, कांग्रेस को 50 सीटें मिलने का भरोसा था, पर सीटें आईं 4, मुकुल वासनिक की टीम पर कई गंभीर आरोप लग रहे हैं, समझा जाता है नयों की आड़ में जीत सकने वाले पुराने कांग्रेसियों के टिकट काट दिए गए, 112 ऐसे एकदम नए उम्मीदवार मैदान में उतारे गए जिन्होंने जुम्मा-जुम्मा अभी कांग्रेस में कदम ही रखा था, यानी लेन-देन के आरोप उछल रहे हैं। कांग्रेस कार्यकारिणी से पहले संगठन में रिक्त हुए पद भरने जरूरी हैं, पर कांग्रेस में हारे हुए को पदोन्नति मिलना पुराना दस्तूर है। गुजरात, मध्य प्रदेश,कर्नाटक,जम्मू-कश्मीर,के बाद अब बिहार में भी हार मिली है, हराने वाले नेताओं मसलन ऑस्कर फर्नांडीस, मुकुल वासनिक, बी.के. हरिप्रसाद, पृथ्वीराज चव्हाण जैसों की तो पहले ही पदोन्नति हो चुकी है इनमें से कईयों को कैबिनेट में लिया जा चुका है, अब आगे क्या?
Posted on 01 December 2010 by admin
कर्नाटक में अपनी कुर्सी बचाने में सफल होते ही येदुरप्पा ने सबसे पहले अपने बेटे-बेटी व दामाद को मुख्यमंत्री आवास से बाहर का रास्ता दिखाया, फिर वे अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों की कार्यकाल की फाइलों को खंगालने में जुट गए कि उनके कार्यकाल में कितने डिनोटिफिकेशन जारी हुए थे, इस पर नंबर वन पर रहे एस.एम.कृष्णा जिनके अकेले मुख्यमंत्रित्व काल में 600 डिनोटिफिकेशन हुए थे। इसके बाद जी.एच.पटेल, गुंडुराव, देवेगौड़ा, बंगरप्पा और कुमारस्वामी का नंबर आता है। पर इन तमाम जांच पड़ताल में येदुरप्पा को एक भी ऐसा मामला नहीं मिला है जिसमें डिनोटिफिकेशन मुख्यमंत्री परिवार के किसी सदस्य के नाम पर हुआ हो। अपनी कुर्सी बचाए रखने की एक बड़ी कीमत अदा कर रहे हैं येदुरप्पा और वे भाजपा के चंद केंद्रीय नेताओं और संघ को हर माह एक भारी चढ़ावा चढ़ा रहे हैं।
Posted on 14 November 2010 by admin
‘…देखा था जिसे मैंने कोई और था शायद वह कौन था जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती।’ सहज यकीन नहीं होता कि यह वही सोनिया गांधी हैं जो मामूली से कांग्रेसी कार्र्यकत्ताओं से बतियाने के लिए किंचित भी एसपीजी घेरे की परवाह नहीं करती थीं, पर पिछले दिनों जो दिखा वह बदलती सियासत और बदलते सियासतदां की असली बयानी थी, दिल्ली में आहूत हुए कांग्रेस के एक दिवसीय अधिवेशन के बाद सोनिया गांधी के आवास दस जनपथ पर कांग्रेसी नेताओं का ‘फोटो सेशन’ था, सो कांग्रेस का हर अदना-सा नेता भी हवाओं के हिंडौलों पर सवार था, ताजा-ताजा हजामत बनवा कर आए थे, नहाए-धुलाए, कपड़े भी नए, भंगिमाएं भी नई, हाथों में मैडम के लिए गिफ्ट, आंखों में चमक, होठों से लरजती मुस्कान। पर जैसे ही यह फोटो सेशन का दौर शुरू हुआ उनके उछाल मारते उत्साह पर जैसे मनों घड़े पानी फिर गया हो, मामूली नेताओं ने पाया कि उनके और सोनिया गांधी के बीच उनके सुरक्षाकर्मियों ने एक रस्सी बांध दी है, रस्सी के एक तरफ सोनिया गांधी और दूसरी तरफ फोटो खिंचाने के इच्छुक अभ्यर्थी, इस विभाजक रेखा को लांघने की इजाजत बस कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों को थी, बाकी के कांग्रेसी नेता तो बस विभाजक रेखा के सियासी रुखेपन से बेजार होते रहे,’…बुलंद हैं तो इसका यह मतलब नहीं कि गैर भी हैं जमीं के लिए ही तो आसमां होता है।’
Posted on 14 November 2010 by admin
मिशेल ओबामा को भारत कुछ इस कदर रास आया कि जाते-जाते उन्होंने अपनी दिली इच्छा व्यक्त कर दी कि वह फिर से भारत आना चाहती हैं वह भी ‘प्राइवेट हॉलीडे’ पर अपने बच्चों के साथ।
Posted on 14 November 2010 by admin
राजा मुद्दे से निबटने के लिए कांग्रेस ने भी पूरी तैयारी कर रखी है। अगर विपक्ष का दबाव ज्यादा बढ़ा तो राजा को रंक बनाया जा सकता है, ऐसे में डीएमके से पहले ही कहा जा चुका है कि वह कोई नया नाम दे, और अगर यदि डीएमके के साथ कांग्रेस का गठबंधन गड़बड़ा भी जाता है तो पार्टी मैनेजरों को इस बात की ज्यादा चिंता नहीं। अहमद पटेल और माधवन लगातार अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता के संपर्क में हैं। इन्होंने जयललिता की सोनिया से बात भी कराई और इसके बाद ही समर्थन की बाबत जयललिता का वह अहम बयान सामने आया था।
Posted on 07 November 2010 by admin
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार लेने अमिताभ बच्चन अपने पूरे परिवार के साथ (पत्नी जया, बेटे अभिषेक, बहु ऐश्वर्या, बेटी श्वेता व दामाद निखिल) मौजूद थे, पर अब से पहले हनुमान की तरह उनके साथ हर जगह मौजूद रहने वाले उनके छोटे भाई अमर सिंह नदारद थे। आमतौर पर ऐसे मौकों पर शाम की पार्टी अमर सिंह की ओर से हुआ करती थी, इस दफे यह औपचारिकता सुहेल सेठ ने निभाई, सुहेल के डिनर में भीड़ भी खूब जुटी।
Posted on 28 October 2010 by admin
भाजपा अध्यक्ष जी को इन दिनों अपने फोटो-शूट का शौक चर्राया है और वे विभिन्न परिधानों में इन दिनों अपना फोटो खिंचवा रहे हैं। हालिया फोटो-शूट उन्होंने संघ की निकर में करवाया है। उनके चाहने वालों ने तो यहां तक ऐलान कर डाला कि इस संघीय पहरावे में अध्यक्ष जी बिल्कुल अटल बिहारी वाजपेयी की तरह लगते हैं, तब से अध्यक्ष जी के पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं, यानी भाजपा में प्रधानमंत्री पद का छठा उम्मीदवार तैयार हो चुका है, अडवानी, नरेंद्र मोदी, सुषमा, जेतली, राजनाथ व स्वयं अध्यक्ष जी गडकरी, जो अब ज्यादा हड़बड़ी में नहीं दिखते।
Posted on 28 October 2010 by admin
कॉमनवेल्थ घोटाले मुद्दे पर भाजपा के अध्यक्ष जी किंचित गंभीर है। गडकरी ने अपनी पार्टी के लोकसभा नेता प्रतिपक्ष यानी सुषमा स्वराज और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेतली से दो टूक कह दिया है कि संसद शुरू होते ही भाजपा दोनों सदनों में यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाए और इस मुद्दे पर संसद नहीं चलने देनी है। चुनांचे गडकरी की प्रबल इच्छा है कि कॉमनवेल्थ का मुद्दा एक चुनावी मुद्दा बने। सो, तय मानिए कि संसद का आने वाला शीतकालीन सत्र खासा हंगामेदार होगा।
Posted on 28 October 2010 by admin
कॉमनवेल्थ गेम्स भले ही खत्म हो गए हों पर सत्ता पक्ष की चिंताएं अब भी बदस्तूर जारी है। पिछले दिनों सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री और प्रणब मुखर्जी की इस बाबत एक गुप्त, पर महत्वपूर्ण मीटिंग हुई। प्रणब दा तनिक गुस्से में दिख रहे थे, उन्होंने कांग्रेस अध्यक्षा से मुखातिब होकर साफ-साफ पूछा कि इस पूरे मामले में बड़ी-बड़ी पार्टियों के बड़े-बड़े लोग शामिल हैं, हमारी पार्टी के भी कई बड़े लोग इसमें शामिल हैं, सो कृपया आप बताएं कि मुझे कितनी दूर तक जाना है। सोनिया ने कहा कि बेहतर होगा कि प्रणब दा के इस सवाल का जवाब स्वयं प्रधानमंत्री दें। मनमोहन सिंह ने साफ किया कि चूंकि इस पूरे मामले में सरकार की साख को धक्का लगा है, सो चाहे इस मामले में कोई कितना भी बड़ा आदमी क्यों न हो उसका लिहाज नहीं करना है। प्रणब दा जरूर ही इशारा समझ गए थे।