Archive | विशेष

काले चश्मे के पीछे का अंधेरा

Posted on 27 February 2011 by admin

सोनिया जयललिता के साथ जाना नहीं चाहतीं, इसीलिए कांग्रेस की मजबूरी है द्रमुक को पटाए रखने की। वैसे भी कांग्रेस को कहीं गहरे तक यह बात मालूम थी कि अगर सीडब्ल्यूजी से विपक्ष और देश का ध्यान भटकाए रखना है तो 2जी पर जांच भी जरूरी है और जेपीसी भी। सो, केंद्रनीत सरकार ने अपने तार भली-भांति करुणानिधि से जोड़ रखे हैं, काले चश्मेवाले बाबा को कलाईगर टीवी पर छापे की पहले से खबर थी, चुनांचे उन्हें सब दुरुस्त करने का वक्त भी मिल गया था। और यह रेड शुरू भी हुई रात के साढ़े बारह बजे और खत्म हो गई सुबह के 5.15 बजे। यानी इस बात का पूरा ध्यान रखा गया कि टीवी के ज्यादातर सीनियर अधिकारियों को कोई तकलीफ न उठानी पड़ जाए।

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क्या है दादा का इरादा

Posted on 23 February 2011 by admin

प्रणब दा भी अपने ठसके में रहने के आदी हैं। उन्हें अब भी यह गुमान सताए जाता है कि जब वे देश के वित्त मंत्री थे तो मनमोहन उनके पांचवें नंबर के अफसर हुआ करते थे, और तब उनके लिए दादा से सीधा मिल पाना प्रोटोकॉल के लिहाज से इतना आसान नहीं था, तो अब अपने उसी पुराने असफर से दादा सीधा निर्देश कैसे ले सकते हैं? दादा ने अभी दो एक रोज पहले मंत्रालय का एक बड़ा प्रोग्राम किया कि बैंकों को कैसे गांवों की ओर ले जाया जाए, उस कार्यक्रम में सोनिया तो उपस्थित थीं, पर प्रधानमंत्री को बुलाने की या न्यौता देने की दादा ने जरूरत ही नहीं समझी। यानी जंग का ऐलान अब हो चुका है।

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पीएम की पत्नी का दखल

Posted on 23 February 2011 by admin

कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव टी.के.ए.नायर न सिर्फ प्रधानमंत्री की पत्नी के मुंहलगे हैं अपितु राज-काज चलाने की जरूरी सलाहें भी उनसे लेते हैं और यह दैनंदिन के राजकाज में परिलक्षित भी होता है। सबसे बड़ा मामला कोलकाता के एक चर्चित कोलमाफिया से जुड़ा है, कोई दो साल पहले कोल इंडिया की एकमात्र शेष रह गई कोलफील्ड पर इस माफिया की बहुत पहले से नजर थी, पर कोयला मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव व राजस्थान कैडर के आइएएस राजीव शर्मा यह कोल फील्ड निजी हाथों में दिए जाने के खिलाफ थे। शर्मा का तर्क था कि अगर यह एकमात्र कोलफील्ड (जो सोने की खान है) भी निजी हाथों में सौंप दी गई तो इस निकाय में पहले से काम कर रहे 60 हजार कर्मचारियों का क्या होगा? सूत्रों की मानें तो चूंकि प्रधानमंत्री की पत्नी गुरुशरण कौर की बहन के पति किसी भांति ‘कोयला’ से संबंधित थे, सो ऐसा माना जाता है कि शर्मा जी के तमाम दलीलों को खारिज करते हुए उस कोल माफिया को उपकृत कर दिया गया, और ऐसा करने के लिए इस प्रस्ताव का कोल इंडिया के बोर्ड से पास होना जरूरी था, चूंकि शर्मा कोल इंडिया बोर्ड में भी थे, सो इस प्रस्ताव को बोर्ड में लाया ही नहीं गया।

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खुला खेल कर्नाटक

Posted on 08 February 2011 by admin

कर्नाटक में येदुरप्पा काला जादू का चाहे लाख रोना रोएं, पर वहां आज भी खनन माफिया उतने ही सक्रिय हैं। रेड्डी बंधुओं पर कोर्ट ने माइनिंग पर रोक लगाई हुई है, पर वहां बलडोटा एंड कंपनी दोनों हाथों से चांदी कूट रहे हैं, वैसे भी उन्हें कानून का कोई खास भय नहीं क्योंकि भाजपा के एक बड़े नेता की वकील बेटी के पास कंपनी की ‘रिटेनरशिप’ है।

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दादा का पछतावा

Posted on 08 February 2011 by admin

प्रणब मुखर्जी की कांग्रेस व सरकार में काफी किरकिरी हो रही है, 2जी पर जेपीसी की विपक्षी मांग को दादा ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ‘इतने सालों से संसद में हूं, विपक्ष को देख रहा हूं, दो-चार दिनों के बॉयकाट के बाद वे लौट आएंगे और सदन सुचारू रूप से चलेगा।’ कांग्रेस के गठबंधन साथी डीएमके का खासा आग्रह था कि जेपीसी मान लो तो सीबीआई की नौबत नहीं आएगी, शरद पवार और ममता भी सीबीआई की जगह जेपीसी चाहते थे, पर दादा अड़े रहे, अब चूंकि पानी सिर के ऊपर चला गया है, सो अब दादा भी झुकने को तैयार दिखते हैं 8 तारीख के लंच में इस बात का खुलासा हो जाएगा।

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पीएम की नहीं चली

Posted on 26 January 2011 by admin

समझा जाता है कि इस पूरे फेरबदल का फेर भी अजीब है, अपने अदद प्रधानमंत्री से कांग्रेसी राजमाता ने सलाह-मशिवरा करना भी जरूरी नहीं समझा, अगर विश्वस्त सूत्रों की मानें सोनिया गांधी और अहमद पटेल के बीच चली लंबी गुफ्तगू के बाद ही फेरबदल का यह मसौदा तैयार हुआ। बेनी प्रसाद वर्मा को सिर्फ इसीलिए मंत्री बनाया गया कि वे विद्रोह को उतारू थे और मुलायम सिंह उन्हें लगातार ‘फिलर’ पर फिलर भेज रहे थे। पर लगता है कि बेनी बाबू को लेकर सपा की उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई है क्योंकि मंत्री बनाए जाने के बावजूद वे अब भी नाराज हैं, वैसे भी यह बात समझ से परे है कि जब वे पहले भी कैबिनेट मंत्री रह चुके थे तो उन्हें आखिर राज्य मंत्री क्यों बनाया गया?

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यह कैसा फेरबदल?

Posted on 26 January 2011 by admin

केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस विस्तार से हमारे गुणी प्रधानमंत्री ने साबित कर दिया है कि इससे-अच्छे लोग उनके पास नहीं हैं। इस फेरबदल पर स्पष्ट रूप से राडिया गेट की छाया दिखी। अनिल अंबानी की खुशी भी क्षणिक रही जब उन्हें मालूम हुआ कि देवड़ा से पेट्रोलियम मंत्रालय लिया जा रहा है पर पीएम ने उन्हें कॉरपोरेट अफेयर थमा दिया। कमलनाथ को प्रधानमंत्री कोई कम महत्व वाला मंत्रालय देना चाहते थे पर दस जनपथ के दबाव में हुआ इसका उल्टा, उन्हें शहरी विकास जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय मिल गया, शायद यही कारण है कि कमलनाथ की आंगतुकों की सूची अभी भी वही है जो भूतल परिवहन के वक्त हुआ करती थी। एस.एम.कृष्णा का जाना और उन्हें आंध्र का गवर्नर बनाया जाना भी तय माना जा रहा था, पर ऐनवक्त प्रधानमंत्री को दी गई उनकी चेतावनी काम कर गई।

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पटेल का ऐसे बिगड़ा खेल

Posted on 26 January 2011 by admin

प्रफुल्ल पटेल को जरा भी आइडिया नहीं था कि उनसे नागरिक उड्डयन मंत्रालय ले लिया जाएगा, उन्हें भरोसा था कि उन्हें पदोन्नत कर इसी मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा, वैसे भी प्रफुल्ल के 10 जनपथ और कांग्रेसी नेताओं से अतिशय मधुर संबंध हैं। राष्ट्रपति भवन में भी शपथ ग्रहण समारोह के बाद नवनियुक्त मंत्रिगण राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के साथ ग्रुप फोटो खिंचवा रहे थे तो तमाम प्रोटोकॉल को धत्ता बताते हुए प्रफुल्ल फोटो सेशन से बाहर आकर सोनिया गांधी को बुलाने चले गए थे कि वो भी इस फोटो सेशन का हिस्सा बनें, पर सोनिया ने मुस्करा कर मना कर दिया था। कहते हैं कि राहुल गांधी के पवार के ऊपर दिए गए बयान से तिलमिलाए एनसीपी के पार्टी प्रवक्ता डी.पी.त्रिपाठी ने जब सोनिया-राहुल पर सीधा हल्ला बोलते हुए कह दिया कि कांग्रेस को साझा सरकार चलाने की कला इटली से सीखनी चाहिए। समझा जाता कि इसी बयान के बाद कांग्रेस ने जैसे तय कर लिया था कि वह अपने घटक दल एनसीपी को मजा चखाएगी, शायद इसी की गाज प्रफुल्ल पटेल पर गिर गई और वे त्रिपाठी के बड़बोलेपन के शिकार हो गए।

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चूक रहे चव्हाण

Posted on 17 January 2011 by admin

कांग्रेस के राज में इस कदर यथास्थितिवाद कभी नहीं देखा गया था, जाने कब से शोर है पहलू में कि संगठन में काम करने वाले लोग लाए जाएंगे, कई मंत्रियों को कैबिनेट से छुट्टी कर कैबिनेट में भेजा जाएगा पर सब वही ढाक के तीन पात, अब अपने पृथ्वीराज चव्हाण को ही ले लीजिए उन्हें महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बने ढाई महीने होने को आए पर आधिकारिक रूप से अभी भी वे हरियाणा और जम्मू कश्मीर के प्रभारी है, बिचारे क्या करे पास का कोई राज्य होता तो वहां अपना कोई प्रोग्राम लगवा भी लेते, अब कश्मीर की सर्दवादियों में महाराष्ट्र का कौन सा कारक ढूंढें, हाईकमान बता तो दे जरा।

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लाल चौक पर तिरंगा

Posted on 10 January 2011 by admin

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी अपने पूर्ववर्ती अध्यक्ष साथियों के मुकाबले कहीं जल्दी में है और राज्य वर राज्य जिस तरह की रिपोर्ट आ रही हैं उसमें बताया जा रहा है कि कैसे महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस-यूपीए का ग्राफ गिर रहा है और जाने-अनजाने एडवांटेज एनडीए-भाजपा का नया फलसफा तैयार हो रहा है लिहाजा गडकरी विभिन्न प्रकोष्ठ प्रभारियों, पदाधिकारियों आदि से रिपोर्ट कार्ड मांग रहे हैं उसी रिपोर्ट कार्ड के आधार पर संबंधित भगवा नेताओं के कार्यों का मूल्यांकन होना है। सो, ऐसे में जोश में आ गई है भाजपा युवा मोर्चा, मोर्चा ने फैसला किया है कि वह कोलकाता से श्रीनगर तक का एक मार्च (यात्रा) निकालेगी, 12 जनवरी को कोलकाता से यह यात्रा शुरू होगी और 26 जनवरी को श्रीनगर के प्रसिध्द लाल चौक के क्लॉक टॉवर पर मोर्चा तिरंगा फहराएगी यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगे की आन-बान की बात है। पर इस पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बुरी तरह उखड़ गए हैं, उन्होंने भाजपा को चेतावनी दी है कि अगर वे राज्य में अमन चैन का माहौल कायम देखना चाहती हैं तो अपनी प्रस्तावित यात्रा वापिस ले लें, पर भाजपा भी म्यान में तलवार वापिस रखने की पक्षधर नहीं, वैसे भी युवा मोर्चा के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर तो एक सच्चे ठाकुर हैं, सो प्राण जाए, पर वचन न जाए।

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