Posted on 18 July 2011 by admin
कुछ बात है कि नितिन गडकरी पर से संघ का विश्वास डिगता ही नहीं है, संघ अब गडकरी को दूसरा टर्म दिए जाने की बजाए पार्टी अध्यक्ष का कार्यकाल ही 5 साल किए जाने की वकालत कर रहा है। जाहिर है इसके लिए पार्टी संविधान में संशोधन करना होगा, सनद रहे कि गडकरी का अध्यक्षीय कार्यकाल दिसंबर 2012 में पूरा हो रहा है।
Posted on 03 July 2011 by admin
बाबा रामदेव प्रकरण पर सोनिया व मनमोहन की नीतियों में एक साफ विभाजक रेखा दिखी, अव्वल तो सोनिया मंत्रियों को बाबा की अगवानी में एयरपोर्ट भेजने की पक्षधर नहीं थी, अलबत्ता केंद्रीय मंत्रियों को एयरपोर्ट भेजने से पहले पीएमओ ने सोनिया से जरूरी राय लेना भी मुनासिब नहीं समझा। सोनिया बाबा समर्थकों पर किसी कठोर कार्यवाही के पक्ष में नहीं थीं, जबकि चिदंबरम, कपिल सिब्बल व प्रणब पीएम को समझाने में कामयाब रहे कि पुलिसिया कार्यवाही किए बगैर बाबा का अनशन तुड़वाना आसान नहीं, सिब्बल व चिदंबरम ने सच्चे वकील के मानिंद जिरह की, वैसे भी वकीलों का सुलह में कितना विश्वास होता है?
Posted on 03 July 2011 by admin
लगता है बाबा रामदेव व काले चश्मे वाले बाबा करुणानिधि के पचड़ों से कांग्रेस उबर गई है। तभी तो सोनिया ने बेखटके इटली की उड़ान पकड़ ली है। सो केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार भी अब 10-12 दिनों के लिए बस टला समझिए, अब जो होगा मैडम गांधी के स्वदेश वापसी के बाद होगा। फिलवक्त तो कांग्रेस का सारा ध्यान बाबा प्रकरण से निपटने में है। ईडी और सीबीडीटी अपना काम कर रहे हैं, आस्था-जागरण चैनलों के खरीद के अलावा स्कॉटलैंड में अवस्थित पीस आइलैंड के खरीद-फरोख्त के कागजों को भी खंगाला जा रहा है। यह द्वीप बाबा ने अनिवासी भारतीय पोद्दार दंपत्ति से खरीदी थी। बाबा के विदेशों में योग के जितने भी कार्यक्रम होते हैं उसका संचालन केंद्र भी यही है, इस द्वीप के बारे में खास तौर पर यह मशहूर है कि अगर समलैंगिक लोग यहां आकर रहने लगे तो यहां की आबोहवा कुछ ऐसी है कि उनकी समलैंगिक आदतें भी पल भर में छू-मंतर हो सकती है।
Posted on 03 July 2011 by admin
तपती दिल्ली में खबरें सुलग रही है, हर पल ब्रेकिंग न्यूज का…सुनते हैं 10 जनपथ और 7 रेस कोर्स की अघोषित जंग को नित्य नए बहाने मिल रहे हैं, ऐसे में निर्विकार भाव-भंगिमाओं से लैस कांग्रेस की महारानी सोनिया गांधी दबे पांव चुपके से दुबई की फ्लाइट में सवार हो जाएं तो उसे आप क्या कहेंगे, दुबई से वह इटली के लिए उड़ जाएंगी सीधे अपनी मां के पास, शायद एक दो रोज में राहुल और प्रियंका भी मां व नानी को इटली में मिलें। यह कोई नई बात नहीं है सोनिया का अपनी मां के साथ जैसे एक अघोषित-सा करार है उनकी मां क्रिसमस की छुट्टियाें में जरूर इंडिया आएंगी और गर्मी की छुट्टियों में सोनिया सपरिवार नियम से इटली जाएंगी।
Posted on 23 May 2011 by admin
इंसानी मौन को उन्होंने बस एक किताब समझ रखा है, पढ़ा है उसे अब तलक एक मर्सिया की तरह, पर यह तो केंचुल के भीतर छुपी एक नपुंसक आकांक्षा है, फन उठाने भर की देर है, फैल जाएगा जहर नस-नस में… यह जनाब भाजपा के एक शीर्ष पुरुष के लिए बड़ी-बड़ी डील फिक्स करते हैं, सान मुंबई के हैं, जलवा दिल्ली में हैं, जड़ें पूरे हिंदुस्तान में। जनाब संकटमोचक हैं, हर बड़े-बड़ों को उबारने में इनका सानी नहीं। एक दिन ये सीधे जगन मोहन रेड्डी के पास जा पहुंचे, उन्हें विश्वास दिलाया कि वे उन्हें (जगन को) तमाम तरह के केसों से निजात दिला सकते हैं, खासकर इंकम टैक्स के मामलों में। जगन ने कहा कि ‘मेरे केस के कुछ प्रूफ लेकर आओ’, जवाब में जनाब पूरी फाइल लेकर आ गए। जगन ने इस फाइल को अपने वकीलों को सौंप दिया, वकीलों ने बताया कि यह पूरी फाइल ही फर्जी है, यहां तक कि विभागों के लेटरहेड भी जाली हैं। लिहाजा कल तक जो जगन भाजपा के प्रति इतना सॉफ्ट दिखते थे, अब उसका नाम सुनते ही उखड़ जाते हैं।
Posted on 23 May 2011 by admin
अपनी अतृप्त इच्छाओं को नहला-धुलाकर नए कपड़े पहना दो, सोते हुए जागने का भ्रम भी छोड़ दो…जो होना है वह होकर रहेगा, तुम चाहो, न चाहो…गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह की जमानत रद्द हो सकती है, तुलसी प्रजापति मामले का नया अध्याय खुलने वाला है। इस मामले में तब एक नया मोड़ सामने आ गया जब जेल में बंद, दाहोद के पूर्व एसपी विपुल अग्रवाल (औद्योगिक घराना परसरामपुरिया के दामाद भी हैं) ने इस केस में अप्रूवर बनने की दरख्वास्त दे दी है। समझा जाता है कि इस मामले में उन्होंने अमित शाह का नाम भी लिया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहले से है जिसे कोर्ट ने सीबीआई के सुपुर्द किया हुआ है। मामला तुलसी प्रजापति के कथित फर्जी एनकाऊंटर से जुड़ा है।
Posted on 15 May 2011 by admin
अमर सिंह के लिए कांग्रेस की संभावनाओं के द्वार पर अब भी अनिश्चय का ताला जुड़ा हुआ है, सूत्र बताते हैं कि वे पिछले 3-4 महीनों से राहुल गांधी से मिलने का समय मांग रहे थे, पर उन्हें समय नहीं मिला। सो, जब उन्हें पता चला कि भट्टा पसरौल गांव में किसानों की मांगों के समर्थन में राहुल धरने पर बैठे हैं तो अमर ने सीधे ग्रेटर नोएडा की ओर रुख कर लिया। पर उन्हें वहां राहुल के बजाए दिग्विजय, हाशमी, राज बब्बर व रीता बहुगुणा जोशी ही मिल पाए, अमर उनके साथ ही दो घंटे तक वहीं जमे रहे, पर राहुल से गुफ्तगु मुमकिन नहीं हो पाई, जैसा कि एक कांग्रेसी नेता कहते हैं कि-‘वे (अमर) अब हमारे लिए महज पेपर नेपकिन रह गए हैं, पर उनकी हसरत रूमाल बनने की थी, जब से अमर ने अपने लरजते जिगर को अपनी आंखों के साथ चस्पां कर लिया है।’
Posted on 15 May 2011 by admin
असम में आम मान्यताओं के अनुरूप कांग्रेस प्रवासियों की पार्टी मानी जाती रही है, तो अगप-भाजपा लोकल की। पर इस चुनाव में जिस कदर एआइडीयूएफ का अभ्युदय हुआ (भाजपा ने कथित तौर पर इस पार्टी की पैसों से खूब मदद की) उसे लोकल हिंदू या असमिया मुस्लिम लोगों ने ज्यादा बड़े खतरे के तौर पर देखा और वे ऐन वक्त कांग्रेस के पाले में चले गए। उल्फा के अरविंद राजखोवा खेमे ने भी खुलकर कांग्रेस की मदद की, इस खेमे को ऐसा लगा कि कांग्रेस सरकार ने उनके नेता राजखोवा को रिहा कर अपना वादा पूरा किया। भाजपा की दुर्गति प्रभारियों की भरमार को लेकर भी थी। वरुण गांधी को चुनाव प्रचार के लिए तो खूब दौड़ाया गया पर टिकट बंटवारे में उनकी एक न चली। जिनकी चली, उनकी मतदाताओं के आगे चल नहीं पायी।
Posted on 15 May 2011 by admin
पाकिस्तान के पंजाबी कवि उस्ताद दामन की अर्जे बयानी देखिए- ‘लाली अख्खां दी एहो पई दस्स दी ए रोए तुसीं वी हो, रोए असी वी हां’ यानी आंखों की लालिमा बताती है कि रोए तुम भी हो और रोए हम भी हैं, असम के चुनाव परिणाम सामने आते ही भाजपा व अगप की कहानी भी बस यही थी, अगप को 10 सीटें, भाजपा की 5। कहां भाजपा अध्यक्ष बढ़-चढ़ कर दावे कर रहे थे कि इस दफे असम में तो अगप-भाजपा की ही सरकार बनेगी। प्रफुल्ल महंत व पटवारी की आपस में गुत्थम-गुत्था किस कदर थी कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, दोनों ही नेता मतदाताओं में जाने की बजाए भाजपा के केंद्रीय नेताओं को पटाने में ज्यादा वक्त जाया कर रहे थे कि भाजपा सीएम के लिए ‘इनका’ नाम ले, भाजपा के एक केंद्रीय नेता ने भी अगप के साथ एक अजीब सा अंदरूनी समझौता किया हुआ था, ‘फ्रेंडली फाइट’ के तुर्रे ने तो रही-सही कसर भी पूरी कर दी। जहां कथित तौर पर भाजपा का दावा मजबूत था, वहां अगप ने कमजोर उम्मीदवार उतारे, भाजपा ने भी अगप के साथ ऐसा ही किया, इसका फायदा कांग्रेस उठा ले गई।
Posted on 08 May 2011 by admin
जगन मोहन की तरह रजनीकांत भी भाजपा नेताओं पर लाल पीले हो रहे हैं, जब पिछले दिनों रजनी के स्वास्थ्य का हाल-चाल पूछने एस.गुरुमूर्ति उनसे मिले तो यकबयक भाजपा के एक शीर्ष नेता के प्रति दक्षिण के इस सुपरस्टार का गुस्सा फूट पड़ा, बोले-‘ये (भाजपा वाले) मेरे नाम का क्यों बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं, अगर मुझे जाना ही था तो देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी से पहले ही मेरे पास ऑफर आ चुका था। भाजपा वालों के तो मैं फोन भी लेना पसंद नहीं करता।’ उल्टे पांव लौट आए गुरुमूर्ति अपनी मांद में।