Archive | विशेष

पुलक से पुलकित दस जनपथ

Posted on 26 September 2011 by admin

दस जनपथ व सोनिया गांधी को यूपीए के शासनकाल में जाने-अनजाने ऐसा लगने लगा था कि एक ओर तो केंद्र सरकार पर राज-काज पर उनकी पकड़ ढीली पड़ गई है वहीं प्रधानमंत्री व उनकी सरकार की नाकामियों का खामियाजा भी सोनिया गांधी को ही भुगतना पड़ रहा है। तब ही नेपथ्य से यह व्यूह रचना रची गई कि दस जनपथ वफादार पुलक चटर्जी को टी.के.ए.नायर की जगह लाया जाए तो पिछले सात वर्षों से पीएमओ में डटे हुए हैं, पर पीएम नायर को छोड़ने को तैयार नहीं हैं, वे नायर को राज्य मंत्री का दर्जा देकर अपना ‘एडवाइजर’ बनाना चाहते हैं, वहीं दस जनपथ चाहता है कि नायर को राजस्थान का गवर्नर बना दिया जाए, तर्क है कि शिवराज पाटिल को इन दिनों पंजाब के साथ-साथ राजस्थान की भी दोहरी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ रहा है। दस जनपथ को मालूम है कि अगर नायर प्रधानमंत्री के इर्द-गिर्द रहेंगे तो दस जनपथ के बेहद भरोसेमंद व 1974 बैच के यूपी काडर के आइएएस पुलक चटर्जी के लिए पीएमओ में सोनिया की इच्छाओं को सिरे चढ़ाना इतना आसान नहीं होगा।

Comments Off on पुलक से पुलकित दस जनपथ

माया की साया करीबियों पर

Posted on 18 September 2011 by admin

विकीलिक्स के खुलासे को चाहे मायावती ‘बड़ा-झूठा’ बता गई हो, पर उसके बाद से ही उनके अफसरों व वैसे नेताओं के इर्द-गिर्द खुफिया तंत्र गहरा गया है, जिनकी मायावती दरबार में आसानी से आवाजाही है। बहिनजी को शक है उनके बीच का ही कोई है जो अंदर की बात को बाहर लीक कर रहा है। नहीं तो उनकी सेंडिल व ‘फूड टेस्टर’ की कहानी इतनी भी मनगढंत नहीं।

Comments Off on माया की साया करीबियों पर

जगन व गंगावरम का क्या है रिश्ता?

Posted on 18 September 2011 by admin

गंगावरम पोर्ट का मामला फिर से गर्माने वाला है, समझा जाता है कि इसी मसले पर पूर्व स्टील मंत्री वीरभद्र सिंह की कुर्सी चली गई थी। क्योंकि गंगावरम पोर्ट को परमानेंट करने की मुहिम उनके वक्त ही शुरू हुई थी और बोर्ड ने भी बकायदा इसके 15 साल का एग्रीमेंट स्वीकृत कर दिया था। पर लगता है निवर्तमान मंत्री अपने पूर्ववर्ती मंत्री की रुखसती से कोई सबक नहीं सीखा है, वे भी उपकृत होने को तैयार हैं यानी गंगावरम को उनकी स्वीकृति किसी भी पल मिल सकती है। आखिर गंगावरम से कांग्रेस आलाकमान की इतनी नाखुशी का राज क्या है? जबकि इसका उद्धाटन राजशेखर रेड्डी के मुख्यमंत्रित्व काल में स्वयं सोनिया गांधी के करकमलों से हुआ था। सूत्र बताते हैं कि इस पोर्ट में जगन मोहन रेड्डी का एक बड़ा शेयर है, जिसकी रखवाली उनके फ्रंटमैन डी.वी.एस.राजू करते हैं। वैसे भी विशाखापत्तनम में ही एक और बंदरगाह है काकीनाडा, पर यहां 50 हजार टन से कम वजन के मालवाहक जहाज आ सकते हैं, जबकि गंगावरम पोर्ट केप साइज (50 हजार टन से डेढ़ लाख टन) जहाज के ज्यादा उपयुक्त है। गंगावरम को स्थायी करने की योजना लंबे समय से चल रही है पर अब तक कोई केंद्रीय मंत्री इस पर अपनी स्वीकृति की मुहर नहीं लगा पाया है अब मंत्री जी यह घृष्टता करने को तत्पर हैं तो कोई क्या करे?

Comments Off on जगन व गंगावरम का क्या है रिश्ता?

अडवानी के संत अनंत

Posted on 13 September 2011 by admin

अडवानी को सियासत के नेपथ्य में धकेलने वालों (संघ) के लिए इस बूढ़े शेर की नई हुंकार एक नई चुनौती के समदृश है, अडवानी ने जैसे यह साबित करने को ठान लिया है कि न तो वे टायर्ड (थके) हैं न रिटायर्ड हैं। अडवानी कहते हैं कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ रथ यात्रा निकालने के लिए बकायदा गडकरी से विचार विमर्श किया है, पर गडकरी खेमे का कहना है कि अडवानी ने बस इसकी सूचना भर दी थी। यानी कौन कहता है कि प्रधानमंत्री की दौड़ में अडवानी शामिल नहीं है। पर सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह कि अडवानी की इस प्रस्तावित रथ यात्रा के सारथी बने हैं, श्रीकथा अंनते के प्रमुख सूत्रधार अनंत कुमार। अनंत कुमार अब भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने की मुहिम के अगुआ बने यह बात सहज गले से उतरती नहीं क्योंकि उनके बारे में सबसे ज्यादा यही बात मशहूर है कि वे जहां खड़े हो जाते हैं, भ्रष्टाचार वहीं से शुरू होता है।

Comments Off on अडवानी के संत अनंत

निशंक को कैसे लगा डंक

Posted on 13 September 2011 by admin

आखिर बैठे-बिठाए निशंक के सिर पर यह आसमान क्यों टूट पड़ा? एक अदद मुरली मनोहर जोशी और दूसरे राजनाथ सिंह जाने कब से उनकी मुखालफत कर रहे थे। पर संघ व गडकरी भक्ति से ओत-प्रोत निशंक का बाल बांका नहीं हो पा रहा था। पर बोतल से जिन्न गडकरी-जेतली विश्वासपात्र अरुण नरेंद्रनाथ के एक सर्वे रिपोर्ट की वजह से बाहर आया। नरेंद्र नाथ भाजपा के लिए जनमत सर्वेक्षण के कार्यों को अंजाम देते हैं, अभी उनका उत्तराखंड को लेकर एक ताजा सर्वे प्रकाश में आया है जिसमें वहां भाजपा की लगातार पतली होती हालत का जिक्र है, इस सर्वे में खुलासा हुआ कि भाजपा को वोट देने के इच्छुक मतदाताओं में भी 46 प्रतिशत का समर्थन भुवनचंद्र खंडूरी के साथ था, निशंक सिर्फ 15 फीसदी की पसंद थे, 8 फीसदी कोश्यारी के साथ थे। गडकरी को अब एक बड़ी जीत का इंतजार है, इसीलिए वे कोई राज्य हारना नहीं चाहते। अब चूंकि 12 तारीख से श्राध्द शुरू हो रहा है और हिंदू मान्यताओं के मुताबिक इस अवधि में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता, चुनांचे इसीलिए निशंक के इस्तीफे और खंडूरी की ताजपोशी के लिए इतनी जल्दी मचाई गई।

Comments Off on निशंक को कैसे लगा डंक

बढ़ रही हैं अमर की परेशानियां

Posted on 04 September 2011 by admin

अमर सिंह की परेशानियों का अंत होते नहीं दिखता। एक ओर जहां ‘कैश फॉर वोट’ मामले में चार्जशीट में उनका नाम आ जाने के बाद यह मांग उठने लगी है कि उन्हें संसद की स्थायी समिति से हटाया जाए। वहीं क्लिंटन फाऊंडेशन को कथित तौर पर 26 करोड़ के चंदे के मामले ने एक बार फिर से सिर उठाना शुरू कर कर दिया है। समझा जाता है कि इस मामले की जांच में तेजी आ गई है और क्राईम ब्रांच बहुत जल्दी अपनी रिपोर्ट प्र्रवत्तन निदेशालय को आगे की कार्यवाही के लिए सौंपने वाला है। एक वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी (जो कई वरिष्ठ कांग्रेसी मंत्रियों के करीबी माने जाते हैं) ने सबसे पहले यह पूरा मामला उठाया था और उन्होंने बकायदा कोर्ट में हलफनामा दायर कर इस मामले में हवाला मनी के इस्तेमाल का अंदेशा जताया था। तब रिवर्ज बैंक ने भी स्पष्ट किया था कि उससे ऐसी किसी रकम को बाहर भेजने की अनुमति नहीं ली गई है, तब वकील साहब ने बकायदा ईडी से भी शिकायत की थी। अब जबकि अमर से कांग्रेस को अपने कई मंतव्य साधने हैं, सो, वह एक हथियार के मानिंद इस मामले का इस्तेमाल सिध्दहस्ता से करना चाहती है।

Comments Off on बढ़ रही हैं अमर की परेशानियां

सुषमा का इरादा

Posted on 04 September 2011 by admin

जन लोकपाल पर शनिवार को संसद में बहस के दौरान भाजपा की ओर से हर कोई बोलना चाहता था, यशवंत सिन्हा से लेकर अनंत कुमार तक, पर नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने टीआरपी के इस महादिन पार्टी के अपने युवा साथी वरुण गांधी को मौका दिया, दरअसल सुषमा का आइडिया राहुल (वे शुक्रवार को बोले थे) के बैक ड्रॉप पर अपनी पार्टी के गांधी का प्रक्षेपण था ताकी लोग दो भाईयों, दो गांधियों व दो विचारधाराओं का तुलनात्मक विवेचन कर पाएं, जिसमें वे पूरी तरह सफल रहीं। यहां तक कि अडवानी भी इस राय के थे कि रिज्यूलेशन जल्दी से जल्दी पारित हो जाए इसके लिए वे एक बार खड़े भी हो गए थे, पर सुषमा ने अपनी पार्टी के दूसरे स्पीकर की बारी आने का शांतिपूर्वक इंतजार किया, इंतजार में घंटों गुजर गए, सुबह से शाम हो गई पर सुषमा का इरादा नहीं बदला।

Comments Off on सुषमा का इरादा

पीएम इन वेटिंग राहुल

Posted on 28 August 2011 by admin

अगली बात यहां से शुरू करे कि क्या कांग्रेसी युवराज सरकार व प्रधानमंत्री के आधिकारिक लाइन में पलीता लगाने आए थे? या राहुल गांधी पार्टी के अंदर के एक नए सियासी खेल को कहीं आगे ले जाना चाहते हैं, वैसे भी राहुल की तमाम तरह के खेलों में पहले से दिलचस्पी रही है, विश्व कप में भारत की जीत के बाद वे मुंबई में सलमान खान के घर गए थे जहां रात भर जश्न हुआ था, पर राहुल को इस बात में ऐसा कुछ नहीं लगा कि एक बार अन्ना से मिलने वे अनशन स्थल तक जा पाते, राहुल अपनी स्पीच में ‘माईंड चेजिंग गेम’ का हवाला दे गए, कांग्रेस के अंदरखाने में भी कुछ ऐसा ही गेम शुरू हो चुका है। पहले के लोग पीछे हो गए हैं और राहुल की पूरी टीम ने एक तरह से अन्ना व लोकपाल के मसले को हाईजैक कर लिया है। यहां तक कि स्वयं प्रधानमंत्री से भी राहुल की इस मसले पर एक या दो बार बात हुई, वरिष्ठ नेताओं में सिर्फ प्रणब मुखर्जी से टीम राहुल निरंतर संपर्क में है, वरना अहमद पटेल सरीखे पार्टी के पुराने संकटमोचकों को भी दरकिनारे कर दिया गया है, इसे पूरे मसले पर अहमद पटेल से टीम राहुल ने उनकी राय लेनी भी जरूरी नहीं समझी। यानी लोकपाल कांग्रेस के नए द्वारपाल के लिए संभावनाओं की आहट खोल रहा है, पूरी टीम राहुल, उनकी बहन प्रियंका का संसद के दर्शक दीर्घा में यूं आना, शायद हौले से इस बात की चुगली कर रहा है-‘क्या तेज जगमगाती थी कातिल के हाथ में अब उसकी आस्तीन में तो खंजर भी न रहा।’

Comments Off on पीएम इन वेटिंग राहुल

भाजपा के दर पर कलावती

Posted on 21 August 2011 by admin

भाजपा भी किसानों के मुद्दे पर गंभीर रुख अख्तियार कर रही है, राजनाथ सिंह इस मुद्दे की अगुवाई कर रहे हैं, राजनाथ जब इस मुद्दे को लेकर विदर्भ पहुंचे तो उनकी एक सभा में राहुल गांधी की चर्चित कलावती भी आ पहुंची, वो सभा के बाद व्यक्तिगत तौर पर राजनाथ सिंह से मिलने आईं और उनसे कहा कि राहुल के आने से उन्हें व्यक्तिगत तौर पर नाम और पैसा दोनों मिल गया, पर इससे विदर्भ में किसानों के हालात बदले नहीं है। उनकी जैसी अभी भी यहां कोई 2 हजार विधवाएं दर-दर की ठोकरें खा रही हैं जिसे कोई राहुल गांधी नहीं मिल पा रहा है।

Comments Off on भाजपा के दर पर कलावती

अण्णामय होते वरुण गांधी

Posted on 21 August 2011 by admin

पार्टी लाइन से दीगर भाजपा के भगवा गांधी वरुण अण्णा पर जो स्टैंड ले रहे हैं इससे युवाओं में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है, टि्वटर पर भी उनके ट्वीट को जहां जबर्दस्त रिस्पांस मिल रहा है, वहीं पार्टी भी अब कमोबेश उनके स्टैंड को मजबूती देने के लिए लामबंद हो रही है। सनद रहे कि पहले वरुण ने अण्णा को अनशन के लिए अपना घर देने की पेशकश की थी, बाद में वे जन लोकपाल बिल को बतौर प्राइवेट मेंबर बिल लाने के लिए प्रत्यनशील हुए। यहां तक कि वे अण्णा आंदोलन को समर्थन देने राजघाट भी गए। सियासी हलकों में अटकलें तेज हैं कि बतौर प्रधानमंत्री राहुल की ताजपोशी का वक्त आ गया है, ऐसे में वरुण की सियासी सक्रियता के निहितार्थ को सहज समझा जा सकता है।

Comments Off on अण्णामय होते वरुण गांधी

Download
GossipGuru App
Now!!