Archive | विशेष

भंवरी क्यों हुई गायब?

Posted on 06 November 2011 by admin

सीबीआई को अब तलक भंवरी देवी का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है, पर सूत्र बताते हैं कि भंवरी देवी पिछले 5 सालों से निरंतर मदेरणा के संपर्क में थीं, जिनसे उनकी अंतरंगता बढ़ी। मदेरणा ने भंवरी को आश्वासन दे रखा था कि वे भंवरी को विधायक व मंत्री बनवाएंगे, सो भंवरी की राजनैतिक महत्त्वाकांक्षाएं उफान पर थीं, पर जब मदेरणा उसके लिए कुछ नहीं कर पाए तो कथित तौर पर एक विंडो एसी में कैमरा छुपा कर भंवरी ने मदेरणा के साथ अपनी एक सीडी बनवा ली, कहा जाता है कि इस सीडी को लेकर वह राजस्थान भाजपा की सबसे बड़ी नेत्री के पास पहुंची और उनसे कहा कि अगर वे दो करोड़ दें तो गहलोत की सरकार गिर सकती है, भाजपा की मैडम ने सीडी देखी और कहा कि मदेरणा कोई इतना बड़ा प्लेयर नहीं कि उन पर आरोप साबित होने पर सरकार गिर जाए। मामला सामने आने पर उन्हें सरकार से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। जब इस सीडी का पता मदेरणा को चला तो उन्होंने भंवरी से यह सीडी मांगी, कहा जाता है कि मदेरणा के प्रति भंवरी का रवैया रोषपूर्ण था, चुनांचे उसने कहा कि औरों के लिए 2 करोड़ पर तुम्हारे लिए सीडी की कीमत है 5 करोड़। लेकिन इसके बाद से ही भंवरी गायब हो गई और आज तक लापता है।

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भूटान का मेहमान

Posted on 30 October 2011 by admin

एक प्रमुख मीडिया समूह ने भूटान नरेश और उनकी नव विवाहिता रानी साहिबा के सम्मान में दिल्ली के एक प्रमुख पंचतारा होटल मौर्या शेरेटन में एक जोरदार रिसेप्शन रखा। यह मीडिया समूह कुछ शिक्षण संस्थाएं भी चलाता है, और अपना एक स्कूल भूटान में भी खोलने को इच्छुक है। इस रिसेप्शन में दिल्ली के लगभग तीन सौ चुनींदा लोगों को आमंत्रित किया गया था। भूटान नरेशर् कुत्ता-पाजामा में थे और रानी साड़ी में जबकि नरेश इसी होटल के कॉफी शॉप में अक्सर जींस में नजर आते थे। रानी साहिबा को टि्वटर पर बने रहने का बहुत शौक है और राजा साहब को रानी के हर शौक का खूब ध्यान है क्योंकि उन्हें इस बात का बखूबी इल्म है कि रानी साहिबा उनसे उम्र में 11 साल छोटी हैं।

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दादा के घर नया आगंतुक

Posted on 30 October 2011 by admin

इस बार दिवाली के मौके पर प्रणब मुखर्जी के घर आगंतुकों की लिस्ट में एक नया नाम जुड़ गया था, जो दिवाली के ऐन पहले प्रणब दा के घर एक बड़ा गिफ्ट लेकर पहुंचा था और इतना ही नहीं उन्होंने दादा के घर में मौजूद छोटे बड़े हर कर्मचारी को उपहारों से लाद दिया। अनिल, मुकेश व विजय माल्या का तो दिवाली के मौके पर दादा के घर पहले से आना- जाना है, पर इस नए आगंतुक की एक बड़ी रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट लवासा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और इस पर टैक्स की बड़ी देनदारी भी हैं। सो, ऐसे में दादा से अनुकंपा की आशा तो वाजिब ही है।

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छुट्टी पर कम्युनिस्ट

Posted on 30 October 2011 by admin

मार्क्सवादियों के पार्टी संविधान में साफ-साफ वर्णित है कि पार्टी के नेताओं को विदेश जाने से पूर्व पार्टी से अनुमति लेनी जरूरी है, पर इन दिनों पार्टी ठेंगे पर और नेतागण बड़े आराम से विदेशों में छुट्टियां मनाते दिखे। सीताराम येचुरी की बात जाने भी दें तो वृंदा कारत ने पार्टी नियमों की कब परवाह की है। वृंदा अपनी बहन व बहनोई के साथ दक्षिण अफ्रीका छुट्टियों में चली गईं। प्रकाश कारत विदेश नहीं जाकर उत्तराखंड में अपने साढू भाई प्रणव रॉय के फॉर्म हाउस पर छुट्टियां मना रहे थे। यानी जब से बंगाल से कम्युनिस्टों की छुट्टी हुई है, उनका छुट्टी मनाने पर ज्यादा ध्यान है।

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भ्रम में निशंक

Posted on 16 October 2011 by admin

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक अब अपने लिए केंद्रीय राजनीति में नई भूमिका तलाशने की अभियान में जुटे हैं, निशंक की नजर तरुण विजय की राज्यसभा सीट पर है, उन्हें लगता है कि शाहला हत्याकांड में नाम आने के बाद से तरुण को आज न कल अपनी राज्यसभा सीट छोड़नी ही पड़ेगी, सो उस आसन्न सीट के लिए निशंक अभी से अपनी दावेदारी की धार तेज कर रहे हैं। वहीं भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व निशंक को उत्तराखंड तक ही सीमित रखना चाहता है, वह निशंक को इस झांसे में रख रहा है कि उन्हें जल्द ही स्पीकर बनाया जाएगा और उत्तराखंड विधानसभा के मौजूदा स्पीकर को खंडूरी सरकार में मंत्री बनाया जाएगा। दरअसल, पार्टी जानती है कि अगर निशंक पर ठीक से अंकुश नहीं रखा गया तो वे उत्तराखंड विधानसभा की कम से कम 10 सीटों पर पार्टी की फजीहत करा सकते हैं, इसीलिए पार्टी की योजना उन्हें ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ दिखाते रहने की है।

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बुध्ददेव को बुध्दत्व

Posted on 11 October 2011 by admin

हार सिर्फ जख्म नहीं देते, सियासत को बदले परिदृश्य में देखने की अंतर्दृष्टि भी देते हैं, याद कीजिए ये वही बुध्ददेव भट्टाचार्य हैं वे जितने समय तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे उनकी एक दिनचर्या कभी नहीं बदली, कोलकाता स्थित राइटर्स बिल्डिंग से ठीक डेढ़ बजे वे अपने घर के लिए रवाना हो जाते थे। घर का भोजन करने के बाद वे एक झपकी लेते थे और फिर से 4 बजे अपने दफ्तर वापिस आते थे। सो, कोई जरूरी मीटिंग हो या पार्टी की कोई अहम रैली अगर उसमें बुध्ददेव को रहना है तो वह या तो एक बजे से पहले होती थी या फिर चार बजे के बाद। पर हालिया चुनावी हार के बाद बुध्ददेव अपने पार्टी नेताओं व कार्र्यकत्ताओं के लिए हर समय उपलब्ध हैं, 1 से 4 के बीच भी।

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स्वामी का अमरीका कनेक्शन

Posted on 11 October 2011 by admin

सुब्रह्मण्यम स्वामी में ऐसी क्या खास बात है कि प्रधानमंत्री उनसे जब भी मिलते हैं बड़े गर्मजोशी से मिलते हैं, प्यार से बतियाते हैं। हालांकि स्वामी ने सोनिया गांधी व उनके परिवार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है, पर पीएम इन बातों से बेखबर हैं। 2 अक्तूबर के कार्यक्रम में तो बकायदा स्वामी को सबसे अगली पंक्ति में बिठाया गया, पीएम, फिर सोनिया उनके बगल में प्रोफेसर रामगोपाल यादव फिर सुब्रह्मण्यम स्वामी। कम से कम एक बात जरूर है जो मनमोहन व सुब्रह्मण्यम को एक तार से जोड़ती है, वह है उन दोनों का अमरीका कनेक्शन।

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मोदी ने अध्यक्ष पद ठुकराया

Posted on 02 October 2011 by admin

नरेंद्र मोदी ने संघ के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है कि मोदी पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, चूंकि गडकरी का कार्यकाल दिसंबर 2012 में समाप्त हो रहा है, सो पार्टी को एक नया मोमेंटम देने के वास्ते संघ चाहता था कि मोदी केंद्र की कमान संभाले। सूत्र बताते हैं कि मोदी ने संघ को यह कहते हुए मना कर दिया है कि सीएम रहने से उन्हें कई तरह के संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, जिसकी वजह से कांग्रेस चाहकर भी उनका बाल बांका नहीं कर पा रही है, अगर एक बार उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया तो कांग्रेस उनका जीना मुहाल कर देगी, रोज-रोज के कोर्ट-कचहरी व मुकदमों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। सो, मोदी ने संघ के समक्ष यह स्पष्ट कर दिया है कि संघ को अगर उनके लिए कुछ करना ही है तो वह उसे सीएम रहते पीएम बनाने की मुहिम शुरू करे। संघ मान गया है, संभवत: इसी कारण से गडकरी को उनका अगला अध्यक्षीय टर्म मिल जाए।

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बिग बी कैसे झुके

Posted on 26 September 2011 by admin

अमर सिंह के जेल जाने व बीमार हो जाने के बाद ठाकुर नेता की सबसे करीबी जयाप्रदा ने जब बिग बी समेत उनके पुराने दिनों के बड़े भैया व मित्रों को लानतें-मलानतें भेजनी शुरू की तो महज दो दिनों के अंदर अमिताभ अमर का हाल-चाल लेने एम्स में अवतरित हो गए, पुत्री समेत। संजय दत्त भी पहुंचे और टीना भाभी भी। कहते हैं अमर-अमिताभ की यह दो घंटों की मुलाकात बेहद इमोशनल थी, पहले तो कई ‘इमोशनल अत्याचार’ झेल चुके अमर बड़े भैया को माफ करने के मूड में नहीं थे, पर रिश्तों के दरम्यान जम आई बर्फ जब पिघली तो स्मृतियों का हिमनद बह निकला। बिग बी ने कहा कि वे बहुत चाहते थे कि वे अमर से मिलने तिहाड़ आए पर अपनी व्यस्तताओं में उलझ कर रह गए। मगर फिर भी जया भाभी के नहीं आने का गम अमर को अब भी साल रहा है।

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बेनी का बंटाधार

Posted on 26 September 2011 by admin

बेनी प्रसाद वर्मा अपने को यूपी में ‘फोकस’ कर रहे हैं, अपनी इमेज ‘मेकओवर’ अभियान को भी पूरी रफ्तार से दौड़ा रहे हैं, उनके इलाके गोंडा में बड़ी संख्या में हैंडपंप लगाए जा रहे हैं, (यह काम एक पीएसयू सरंजाम दे रही है),उनके बड़े-बड़े होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर, कटआउट्स लग रहे हैं। टीवी और न्यूज पेपर में भी धड़ल्ले से उनके मुंह-दिखाऊ विज्ञापन आ रहे हैं। बेनी का सारा सियासी कारोबार उनके दो बेहद करीबियों के सुपुर्द है आर.सी.पी.सिंह और शीतल सिंह। जब ये संचार मंत्री थे तो आर.सी.पी उनके पीएस हुआ करते थे, बेनी के मौजूदा पीएस रवीश कुमार को भी आर.सी.पी का ही करीबी माना जाता है, आर.सी.पी जातिगत समीकरणों की वजह से नीतीश के भी बेहद करीबी हैं। शीतल सिंह एक पार्टटाइम पत्रकार व दिल्ली के एक बड़े धंधेबाज हैं, जिनका ज्वॉइंट सेक्रेटरी यूपी सिंह के साथ भी गहरा रिश्ता है, शीतल व आर.सी.पी मिलकर एक तरह बेनी के मंत्रालय के तमाम बड़े फैसलों को प्रभावित व नियंत्रित करने का माद्दा रखते हैं।

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