Archive | विशेष

…और अंत में

Posted on 04 December 2011 by admin

कभी जब जगन मोहन रेड्डी कांग्रेस के सांसद हुआ करते थे तो उन्हें सत्ता पक्ष की सीटों में ठीक राहुल गांधी की बगल वाली सीट आबंटित थी। पर जब से उन्हाेंने कांग्रेस छोड़कर कडप्पा उप चुनाव में जीत हासिल की है, उन्हें लोकसभा में सबसे आखिरी यानी 11वीं पंक्ति में डिविजन नंबर 363 की सीट एलॉट हुई है, जाहिर है यह सीट सत्ता पक्ष की बेंचों से काफी दूर हैं, इस दूरी को जगन भी समझते हैं, और कांग्रेस भी।

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25 दिसंबर की भाजपा रैली

Posted on 27 November 2011 by admin

यूपी में भाजपा प्रत्याशियों की लिस्ट घोषित होने में देरी से भले ही पार्टी के अंदर असंतोष कुलबुला रहा हो, पार्टी के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह का साफ मानना है कि उम्मीदवारों की लिस्ट 10 जनवरी से पहले घोषित न की जाए। राजनाथ 25 दिसंबर को अटल जी के जन्मदिन के मौके पर लखनऊ में भाजपा की एक बड़ी रैली आयोजित कर रहे हैं जिसमें पार्टी के तमाम कद्दावर नेता हिस्सा लेंगे। सो, राजनाथ का मानना है कि अगर इससे पहले उम्मीदवारों की घोषणा हो जाएगी तो ये सभी उम्मीदवार अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में जुट जाएंगे तो फिर रैली के लिए भीड़ कौन जुटाएगा? और जिन लोगों को पार्टी का टिकट नहीं मिलेगा वे रैली की जड़ में मट्ठा डालने में जुट जाएंगे। गडकरी व संघ भी राजनाथ की दलीलों से सहमत हैं और जो नहीं सहमत हैं वे ठहरे पार्टी के मामूली से कार्र्यकत्ता उनके मंसूबों से किसी का बाल बांका हुआ है कभी।

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गडकरी के मानव कंप्यूटर

Posted on 27 November 2011 by admin

यूपी भाजपा के एक दबंग नेता रमाकांत यादव अपने 9 लोगों की लिस्ट लेकर पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी से मिलने पहुंचे तो गडकरी ने उन्हें अपने मानव कंप्यूटर अरूण नरेंद्रनाथ के पास भेज दिया। नरेंद्रनाथ के लेपटॉप में बटन दबाओ और इच्छुक निर्वाचन क्षेत्र की 5 टर्म की कुंडली पेश हो जाती है। निर्वाचन क्षेत्र का डेमोग्राफिक चार्ट, वहां के जातिगत समीकरण, इच्छुक उम्मीदवारों की लंबी-चौड़ी सूची, उम्मीदवारों का विवरण, मतों का गणित आदि-आदि। सो, जब नरेंद्रनाथ यादव जी को समझाने लगे कि फलां सीट पर यादव उम्मीदवार देना संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि वहीं भूमिहारों-ब्राह्मणों का वर्चस्व है तो वे उखड़ गए और पांव पटकते हुए वापिस आ गए। रमाकांत यादव ने पार्टी हाईकमान से साफ कर दिया है कि उनके इलाके में कंप्यूटर से चुनाव नहीं लड़ा जाता और जिससे लड़ा जाता है उसे ‘डंडा’ कहते हैं।

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मजे में माल्या

Posted on 19 November 2011 by admin

पर क्या विजय माल्या की हालत सचमुच इतनी खस्ता है या वो एक गरीब कंपनी के अमीर मालिक हैं? कागजों पर कंपनी को कोई 7800 करोड़ का घाटा है, पर असल में घाटा इससे भी कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। इनको तो कंपनी के लिए जहाज खरीदने में भी फायदे हैं तभी तो वो एक पल की देर किए बगैर 641 करोड़ में एफ1 की टीम खरीद लेते हैं। क्या अब उनके मैनेजमेंट पर वित्तीय संस्थानों का इतना भी भरोसा नहीं रहा जो अब उनकी कंपनी के अकाऊंट का देखभाल बैंक करेंगे।

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पंजाब में काले झंडे क्यों?

Posted on 19 November 2011 by admin

पंजाब के दौरे पर अडवानी को काले झंडे दिखाए गए जो किंचित अप्रत्याशित था, क्योंकि वहां अकाली दल व भाजपा की मिली-जुली सरकार है। काले झंडे का प्रमुख कारण यह था कि अडवानी ने अपनी किताब में ‘आपरेशन ब्लू स्टार’ का समर्थन किया था। इसी बात से नाराज होकर अमृतसर स्वर्ण मंदिर में उन्हें सरोपा भी भेंट नहीं किया गया। अडवानी को लेकर भाजपा व अकालियों के रिश्तों में भी थोड़ी खटास आई है, पर अकालियों ने साफ कर दिया है कि पंजाब के लोगों को नाराज कर वह अडवानी का समर्थन करने की हद तक नहीं जा सकते।

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क्या करें येदुरप्पा

Posted on 19 November 2011 by admin

येदुरप्पा जेल से बाहर आ चुके हैं और अब वे पार्टी में अपना पुनर्वास चाहते हैं। येदुरप्पा चाहते हैं कि अब वक्त आ गया है कि उन्हें कर्नाटक प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया जाए। इस मुहिम को परवान चढ़ाने के लिए येदुरप्पा ने अपने प्यारे सदानंद गौड़ा को अडवानी के पास भेजा, पर वहां येदुरप्पा के प्रखर विरोधी अनंत कुमार की महत्वाकांक्षाएं आड़े आ गईं। अडवानी ने टाल-मटोल करते हुए कह दिया कि संसद के शीतकालीन सत्र के बाद इस मामले पर पार्टी हाईकमान विचार कर सकता है। इस पर येदुरप्पा ने अपनी फरियाद पार्टी अध्यक्ष गडकरी तक पहुंचा दी। गडकरी खुलकर येदुरप्पा के समर्थन में उतर आए हैं। गडकरी का साफ मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति से भला संसद सत्र का क्या लेना-देना?

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भाजपा की जड़ में मट्ठा

Posted on 19 November 2011 by admin

कर्नाटक में भाजपा की जड़ों में मट्ठा डालने के कार्य में कांग्रेस अभी से जुट गई है। बेल्लारी सांसद जे. शांता और रायचूर से भगवा सांसद एस. पकिरप्पा से कांग्रेसी मैनेजरों ने लगातार संपर्क बनाया हुआ है। ये दोनों सांसद वाल्मीकि नायक समाज से आते हैं। समझा जाता है कि इन दोनों सांसदों पर सबसे पहले कांग्रेसी नेता देशपांडे (प्रफुल्ल पटेल के समधी) ने डोरे डाले। फिर इन दोनों सांसदों से प्रणब दा की बात कराई और एक तरह से प्रणब दा ने इन्हें आश्वस्त किया है कि अगर ये सांसद चाहें तो वे अगला चुनाव कांग्रेस की टिकट पर लड़ सकते हैं, क्योंकि कांग्रेस का हाथ अब उनके साथ है।

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…और अंत में

Posted on 13 November 2011 by admin

पेट्रो पदार्थो के बढ़ी कीमतों पर समर्थन वापसी का डर दिखाने वाली ममता बनर्जी ने यूपीए सरकार के समक्ष हथियार डाल दिए हैं। समझा जाता है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल को 19 हजार करोड़ के केंद्रीय पैकेज का ऐलान हो सकता है, यह पैकेज ममता के मंसूबों से भी कहीं ज्यादा बडे हैं।

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गडकरी का ऐलान-ए चुनाव

Posted on 13 November 2011 by admin

नितिन गडकरी जो भी बयान देते हैं उसके सूत्र कहीं न कहीं गहरे होते हैं। नहीं तो क्या वजह है कि संघ अडवानी को चुपके से कहता है कि वे अब चुनावी राजनीति से तौबा कर लें और बस पार्टी को मार्गदर्शन देते रहें, यानी संघ का अडवानी को साफ निर्देश आता है कि वे 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ने की न सोचे, उसके अगले कुछ रोज बाद पार्टी अध्यक्ष का बयान आ जाता है कि भाजपा में वही लोग प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे जो लोकसभा में चुनकर आएंगे। और इसके साथ ही गडकरी खुद की लोकसभा लड़ने की अपनी सद्इच्छा जाहिर कर देते हैं, दिल्ली से पत्रकारों का एक बड़ा लाव-लश्कर पार्टी के खर्चे पर नागपुर ले जाते हैं और वहां लोगों को अपनी चुनावी महत्त्वांकाक्षाओं के दीदार कराते हैं। कहीं जाने-अनजाने संघ व गडकरी के निशाने पर पार्टी के वे दो महत्त्वपूर्ण नेता तो नहीं जो लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ते यानी नरेंद्र मोदी या अरुण जेतली। पर इन दोनों नेताओं के लिए लोकसभा का चुनाव लड़ना कोई बड़ा तुर्रा नहीं, चुनावी राजनीति में ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।

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माकन के पीछे कौन?

Posted on 13 November 2011 by admin

बीसीसीआई को लेकर खेल मंत्री अजय माकन के तेवर और भी तल्ख हुए जाते हैं, वैसे भी उनकी आईपीएल प्रमुख और सरकार में अपने साथी मंत्री राजीव शुक्ला से कभी नहीं बनी, लिहाजा जब वे बयान देते हैं कि आईपीएल की जांच होनी चाहिए तो वे भूल जाते हैं कि पिछले एक वर्ष से लगातार आईपीएल की जांच प्रगति पर है। बीसीसीआई के कुछ उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि माकन के ‘खेल विधेयक’ लाने को हवा दे रहे हैं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जस्टिस जिनकी खेलों व खेल संगठनों की राजनीति में गहरी रुचि है। वे नौकरी से भले रिटायर हो गए हों पर अपनी उद्दात महत्त्वाकांक्षाओं से नहीं। वे अब नई नौकरी के इच्छुक हैं, सो जब स्पोट्र्स बिल पुन: रिड्रॉफ्ट के लिए भेजा गया तो उसमें बदलाव कर उसमें ट्रिब्यूनल भी डाल दिया गया है।

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