Archive | विशेष

जगन से अगन

Posted on 28 May 2012 by admin

जगन मोहन रेड्डी पर आय से अधिक संपत्ति का शिकंजा यूं अचानक नहीं कस गया है, इसकी कहानी पुरानी है। जैसे ही जगन और भाजपा के बीच खिचड़ी पकने लगी कांग्रेसी मैनेजर चौकस हो गए। समझा जाता है कि जब जगन ने अपने 18 समर्थक सांसदों की परेड भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी के समक्ष करवाई और उन्हें यह आश्वासन दिया कि वे राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार का साथ देने को तैयार हैं, तब से जगन के मामले में सीबीआई का शिकंजा और कस गया है। कांग्रेसी मैनेजरों ने जगन से साफ कह दिया है कि या तो वे यूपीए के राष्ट्रपति प्रत्याशी को समर्थन दें या फिर जेल जाने को तैयार रहें। जगन समर्थक बारंबार यह गुहार लगा रहे हैं कि यह सारी संपत्ति तो वाईएसआर के जमाने की है, तब कांग्रेस पोषित सरकार ने उनके ऊपर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की थी?

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ऐसे माने मोदी!

Posted on 28 May 2012 by admin

24 मई से भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी आहूत थी और 23 तारीख की रात तक मोदी के मान-मनौव्वल का दौर चलता रहा। एक वक्त तो ऐसा लग रहा था कि मोदी मुंबई नहीं आएंगे, पर मोदी को मनाने में गुजरात के एक अरबपति उद्योगपति जिनका तेल और पोर्ट का बड़ा कारोबार है, तथा भाजपा के एक एनआरआई शुभचिंतक ने महती भूमिका अदा की। यह एनआरआई बिजनेसमैन नितिन गडकरी के भी उतने ही नजदीकी हैं और मोदी से भी उनके बड़े पुराने ताल्लुकात हैं। इन दोनों से ही मोदी ने अपने दिल की बात बताई, उसके बाद ही संजय जोशी के राजनैतिक बलि की तैयारियां की जा सकीं।

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गडकरी की नई टीम कब?

Posted on 28 May 2012 by admin

सवाल यह भी अहम है कि गडकरी अपनी नई टीम का गठन कब करेंगे? सूत्र बताते हैं कि दिसंबर तक गडकरी अपनी इसी पुरानी टीम से काम चला सकते हैं, गुजरात में इसी वर्ष के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं, उसके बाद ही टीम गडकरी में व्यापक फेरबदल हो सकता है। और ऐसी भी संभावना जताई जा रही है कि भाजपा के नए संसदीय बोर्ड में नरेंद्र मोदी को जगह मिलेगी।

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संगमा को विपक्षियों का संग

Posted on 07 May 2012 by admin

राष्ट्रपति पद के लिए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए.संगमा पूरा जोर लगा रहे हैं और उनका ‘ट्राइबल कार्ड’ परवान चढ़ता नजर आ रहा है। संगमा के पक्ष में देश के कई आदिवासी संगठनों को एक छत के नीचे गोलबंद करने वाले पूर्व सांसद अरविंद नेताम शनिवार को दिल्ली में कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिले, सोमवार को उनकी मुलाकात कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी से होनी है। संगमा के मुद्दे पर सबसे विचित्र रुख उनके सबसे अभिन्न मित्र शरद पवार का देखने को मिला, समझा जाता है कि जब संगमा की उम्मीदवारी को लेकर कुछ लोग शरद पवार से मिलने गए तो पवार ने छूटते ही कहा कि ‘संगमा हर वक्त हर पोस्ट के कैंडीडेट होते हैं।’ पर अगर प्रणब या हामिद के नाम पर सर्वानुमति नहीं बनती है और बात चुनाव की आती है तो विपक्ष एकजुट होकर संगमा पर भी दांव लगा सकता है।

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क्या होगा सिंघवी का?

Posted on 22 April 2012 by admin

सीडी कांड से चर्चा में आए अभिषेक मनु सिंघवी के राजनैतिक भविष्य पर ग्रहण लग गया लगता है, अगर यह सीडी कांड एक-दो महीना पूर्व घटित हो गया होता तो उन्हें राज्यसभा मिलनी भी मुश्किल हो जाती। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में दरकिनार करने का सोच लिया है। माना जाता है कि इस कथित सीडी को बनाने में उन्हीं कैमरों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें सिंघवी ने अपने ऑफिस स्टॉफ पर नजर रखने के लिए लगवाया था। कहा जाता है कि महज कैमरे की दिशा बदल दी गई। इस मामले का सबसे बड़ा पेंच जज बनाने का कथित वादा है, वरना ये दो व्यस्कों की आपसी सुलह व समझदारी का मामला हो सकता था।

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कहां हैं बेनी?

Posted on 22 April 2012 by admin

लोग ढूंढ रहे हैं आखिर कहां हैं बेनी प्रसाद वर्मा? कांग्रेस में ओबीसी कार्ड का भ्रम फैलाकर यूपी चुनाव में बड़े पैमाने पर कांग्रेस का बंटाधार करवाने वाले बेनी प्रसाद कांग्रेस की किसी चिंतन बैठक में भी नहीं दिखे। पता चला है कि अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर वे गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती हो गए हैं, माना जा रहा है कि उनके फेफड़े का इलाज चल रहा है, क्योंकि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। यूपी में कांग्रेस को ‘वेंटीलेटर’ पर डाल कर यूं वर्मा जी का बीमार हो जाना लाजिमी ही है।

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जीत नहीं पाए जितिन

Posted on 22 April 2012 by admin

यूपी के कांग्रेसी सांसदों के प्रदर्शन को लेकर भी राहुल खफा-खफा से हैं। राहुल के संसदीय क्षेत्र अमेठी से 2 और आर.पी.एन के पडरौना से 2 कांग्रेसी विधायक जीत पाए। नहीं तो जितिन प्रसाद के कहने पर 14 टिकट दिए गए, जिसमें से 11 कांग्रेसी उम्मीदवारों की तो जमानत जब्त हो गई, अन्य 3 भी बुरी तरह हारे, सीतापुर धौरहरा की पांचों सीटों पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर भी नहीं आ पाई। ब्राह्मण व मुसलमानों ने कांग्रेस का साथ बिल्कुल ही नहीं दिया, इसी से त्रस्त होकर जितिन इस दफे अपनी सीट बदलने की सोच रहे हैं, वे धौरहरा की जगह सीतापुर से लोकसभा का अगला चुनाव लड़ सकते हैं।

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महाभ्रष्टाचार पर आयोग

Posted on 16 April 2012 by admin

अखिलेश यादव जानते हैं कि यूपी की जनता की उनसे अपेक्षाएं कुछ ज्यादा ही है, चुनांचे अखिलेश पहले वह हर काम करना चाहते हैं जो प्रदेश की जनता के एजेंडे में सबसे ऊपर हो। सबसे पहला मामला नोएडा से लेकर बलिया तक में हुए महाभ्रष्टाचार का है। इस महाभ्रष्टाचार की जांच के लिए जल्द ही एक आयोग का गठन हो सकता है और इस आयोग के मुखिया के तौर पर विजय शंकर पांडेय की नियुक्ति हो सकती है। सनद रहे कि ये पांडे वही हैं जो मायावती सरकार में बेहद शक्तिशाली माने जाते थे और इन्हीं के मार्फत् मायावती ने ब्राह्मण कार्ड खेल कर ब्राह्मणों को निपटाया। पांडे जब मायावती के करीबियों में शुमार होते थे तब भी इन्हाेंने अपने तार सपा से जोड़ रखे थे, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह को मायावती सरकार से संबंधित तमाम अहम जानकारियां इन्हीं के मार्फत् मिला करती थी, अब सपा भी मायावती को निपटाने के लिए उनके ही एक पुराने विश्वासपात्र का सहारा ले रही है।

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कांग्रेस का दांव विफल

Posted on 11 April 2012 by admin

खबर मिली है कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने को बिल्कुल तैयार थी कि हम तुम्हें मुख्यमंत्री बनाते हैं और तुम बदले में हमारे राज्यसभा उम्मीदवार को समर्थन दो। पर सोरेन को कांग्रेस का यह दांव रास नहीं आया, वे जानते हैं कि इस वक्त विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा व भाजपा विधायकों की ताकत-19-19 की बराबर है, सो उन्होंने ज्यादा रिस्क लेना उचित नहीं समझा। दूसरा, पिछले अनुभवों के आधार पर कांग्रेस पर भरोसा करना भी मुश्किल था।

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रूठ गए फारुख

Posted on 01 April 2012 by admin

सचिन तेंदुलकर के सौवें शतक पूरे होने की खुशी में भारत के नए मीडिया मुगल में शुमार होने वाले मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता अंबानी ने मुंबई स्थित अपने निवास एंटेलिया में एक जोरदार पार्टी रखी, जिसमें राजनीति, खेल, उद्योग व फिल्म जगत की कुछ नामचीन हस्तियां शामिल हुईं। पार्टी में केंद्रीय मंत्री विलास राव देशमुख, फारुख अब्दुल्ला, प्रफुल्ल पटेल, राजीव शुक्ला भी मौजूद थे, मुकेश ने मंच पर विलास राव, प्रदेश के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और राजीव शुक्ला को तो आमंत्रित किया। पर अपने उद्गार भाषण में वे फारुख अब्दुल्ला का नाम लेना ही भूल गए, इस बात से फारुख इतने नाराज हुए कि बगैर खाना खाए ही वे पार्टी से वापिस लौट गए।

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