Posted on 04 June 2013 by admin
राजस्थान में वसुंधरा राजे की बढ़ती लोकप्रियता से कांग्रेस की पेशानियों पर बल पड़ रहे हैं। सो, कांग्रेसी सरकार ने वसुंधरा को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। सूत्र बताते हैं कि सीबीआई ने वसुंधरा के सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह के खिलाफ एक आर्थिक घोटाले मामले में पर्याप्त सबूत जुटा लिए हैं। चूंकि आने वाले चंद महीनों में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं सो, इस चुनाव की पूर्व बेला में मौका देख कर सीबीआई दुष्यंत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकती है जिससे कि कांग्रेस राजस्थान चुनाव में इस मामले को जोर-शोर से उठा सके। सूत्र बताते हैं कि मामले कि नजाकत को भांपते हुए दुष्यंत इस मामले को रफा-दफा कराने की गरज से कई कांग्रेसी नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। पिछले दिनों वे सचिन पायलट से मिले पर पायलट की ओर से मदद को कोई ठोस आश्वासन नहीं प्राप्त होने के चलते वे हरियाणा के मुख्यमंत्री भुपिंदर सिंह हुड्डा से मिलने पहुंचे। हुड्डा से जाट कनेक्शन का वास्ता देकर उन्होंने उनसे मदद की गुहार लगाई है और हुड्डा ने भी उन्हें मदद करने का भरोसा दिलाया है।
Posted on 26 May 2013 by admin
उद्योगपति विजय माल्या अपनी मुसीबतों से उबरते नहीं दिखते। सनद रहे कि माल्या पर देश के कोई 18 बैंको के 7 हजार करोड़ रूपयों से ज्यादा का र्का है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने तो माल्या की कंपनियों के शेयर बेचने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। दुनिया भर के कई देशों में विजय माल्या की चल-अचल संपत्ति है, इनमें से अकेले भारत में उनकी कोई 26 ऐसी संपत्तियां हैं जो बेहद प्राइम लोकेशंस पर अवस्थित हैं। विभिन्न बैंक इन संपत्तियों की बोली लगाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। पर इनमें से दो जगहें ऐसी हैं जो माल्या के दिल के बेहद करीब हैं। इनमें से एक उनका मुंबई का बंगला है और दूसरा गोवा का किंगफिशर विला। गोवा के इस विला में माल्या अपने करीबियों को एक हजार से भी ज्यादा पार्टियां दे चुके हैं। देश के सबसे बड़े थैलीशाह जो सपत्नीक माल्या की कई पार्टियों में शरीक रहे हैं उनकी नार माल्या की इन दोनों संपत्तियों पर है।
Posted on 26 May 2013 by admin
प्रणब दा एक ऐसे राष्ट्रपति हैं जो लोगों से मिलने-जुलने में ज्यादा यकीन रखते हैं। और उन्होंने अपने दिल के दरवाजे के मानिंद ही राष्ट्रपति भवन के दरवाजे भी खोल रखे हैं। प्रणब दा को राष्ट्रपति बनने के साथ ही यह सुविचार आया था कि विदेशी राष्ट्र प्रमुख जब भारत के दौरे पर अपनी लंबी-चौड़ी टीम के साथ पधारते हैं, विभिन्न पंचतारा होटलों में उनके ठहरने का बिल ही करोड़ों में आ जाता है। सो, क्यों नहीं तमाम ‘हेड ऑफ स्टेट’ यानी जो राष्ट्राध्यक्ष भारत के दौरे पर आ रहे हैं, उन्हें राष्ट्रपति भवन में ही ठहरा दिया जाए। पर लगता नहीं है कि माननीय राष्ट्रपति महोदय की इस इच्छा का कोई सम्मान हो पा रहा है, क्योंकि ज्यादातर राष्ट्राध्यक्ष महंगे पंचतारा होटलों में ठहरना पसंद करते हैं। और जब अमेरिकी प्रशासन कोई ‘बड़ा’ मसलन हिलेरी क्लिंटन भारत आती हैं तो अमरीकी सुरक्षा एजेंसियां उनकी सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें पंचतारा होटलों में ठहराना ही पसंद करती हैं।
Posted on 26 May 2013 by admin
उत्तराखंड में कांग्रेस का विवाद थमने का नाम ही नहीं लेता। ताजा विवाद वहां के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर है। वहां के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा अपनी ओर से दो नामों को आगे बढ़ा रहे हैं और चाहते हैं कि इन दोनों में से एक पर कांग्रेसी हाईकमान अपनी स्वीकृति की मुहर लगा दे। मुख्यमंत्री अपनी ओर से हीरा सिंह बिष्ट और स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी का नाम आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री का विरोधी खेमा यानी हरीश रावत कैंप प्रदीप टमटा और महेंद्र मेहरा का नाम आगे कर रहे हैं। उत्तराखंड मामलों में कांग्रेसी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की गहरी दिलचस्पी रहती है। सो, यह उन पर निर्भर है कि वे बहुगुणा या हरीश रावत कैंप में से किसको तरजीह देते हैं। वैसे वे निकाय चुनावों में कांग्रेस के लचर प्रदर्शन को देखते हुए विजय बहुगुणा से नाराा बताए जाते हैं, पर वे हरीश रावत के बागी तेवरों से भी खुश नहीं। सो, ऐसा भी मुमकिन है कि किसी निरपेक्ष नेता के हाथों उत्तराखंड में कांग्रेस की कमान सौंपी जाए। राहुल गांधी एक ऐसा नेता चाहते हैं जो कांग्रेस को मौजूदा संकट से उबार सके, क्योंकि ताजा जनमत सर्वेक्षणों में यहां कांग्रेस लोकसभा की पांचों सीटें हारती नार आ रही है।
Posted on 14 May 2013 by admin
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Posted on 14 May 2013 by admin
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Posted on 07 May 2013 by admin
चीन के साथ मौजूदा सीमा विवाद को भारत की ओर से हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन हैंडल कर रहे हैं। मेनन तिब्बत के ल्हासा में पैदा हुए थे, जहां इनके पिता कांउसल जनरल के पद पर तैनात थे। और मेनन स्वयं चीन में राजदूत भी रह चुके हैं। चुनांचे मेनन का चीनी भाषा पर पूरा अधिकार है। विदेश मंत्रालय का तर्क था कि चूंकि सीमा पर मात्र 22 चीनी जवान हैं सो वे तो आक्रमण करने आए नहीं हैं। मेनन को पुख्ता सूचना थी कि 30 अप्रैल से 4 मई के बीच सारी चीनी फौजें हट जाएगी लिहाजा इस मामले को ‘लो-की’ रखा जाए। मीडिया और विपक्ष इस मामले को ज्यादा तूल ना दे क्योंकि इन दिनों चीन की बागडोर एक तरह से हार्डलाइनर्स के हाथों में है जो प्रतिक्रिया देने में ज्यादा जल्दबााी करते हैं। पर चीन के मौजूदा रूख को देखते हुए अब स्वयं मेनन भी सकते में हैं।
Posted on 07 May 2013 by admin
भारत की मुश्किल यह भी है कि सन् 1962 में भारत-चीन युध्द के दौरान जहां चीन की सैन्य क्षमता भारत से दो गुनी ज्यादा थी, आज वह पांच गुनी ज्यादा है। चीन अब केवल भारत के उत्तर में ही नहीं है, अपितु उसने हमारे दक्षिण और पश्चिम में भी पैर पसार लिए हैं। दक्षिण में श्रीलंका के बंदरगाहों, पर पश्चिम में गादर पोर्ट पर चीन का कब्जा है। ब्लूचिस्तान के संकट को देखते हुए पाक का गादर पोर्ट पर कोई नियंत्रण नहीं। इरान के दो बंदरगाहों में से एक पर पहले से चीन का नियंत्रण है और दूसरे के लिए उसने ऊंची बोली लगा रखी है। इसके लिए भारत भी बोली लगाने की सोच रहा है। मालदीव पर पूरा चीन का प्रभाव है। नेपाल, इसके तराई क्षेत्र में चीन का पूरा प्रभाव है और बिहार सीमा पर कई एनजीओ को पैसा पंप कर चीन यहां के युवाओं तक पहुंच गया है। यहां के युवाओं में चीनी भाषा सीखने की ललक बढी है। यानी चीन ने हर तरफ से भारत की पुख्ता घेरेबंदी कर रखी है।
Posted on 30 April 2013 by admin
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Posted on 30 April 2013 by admin
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