Posted on 03 January 2022 by admin
अभी पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछा गया कि ’वे अपना आदर्श किसे मानते हैं?’ तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया कि ’अगर बात धर्म व संस्कार की हो तो वे अपना आदर्श अपने गुरू महंत अवैधनाथ और अपने माता-पिता को मानते हैं और अगर बात राजनीति की हो तो मेरे गुरू आदरणीय नरेंद्र मोदी हैं’। सो, जो लोग मोदी-बनाम योगी का खटराग अलाप रहे थे, योगी ने एक तरह से उन्हें चुप कराने का प्रयास किया है। वहीं एसआईटी जांच में अजय टेनी को बेनकाब कर कहीं न कहीं योगी ने भाजपा के नंबर दो को भी साधने का प्रयास किया है। सब जानते हैं कि टेनी के पीछे मजबूती से कौन खड़ा है जो लगातार उन्हें सियासत में अभयदान दिलवा रहा है। वहीं जब टेनी ने एक टीवी पत्रकार से बदसलूकी की तो समझा जाता है कि अमित शाह ने टेनी को तलब कर उनकी क्लास लगा दी। सो, यूपी चुनाव तक तो टेनी की गद्दी सलामत ही दिखती है।
Posted on 28 November 2021 by admin
तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी बंगाल में अपनी पार्टी के अभूतपूर्व प्रदर्शन से सातवें आसमान पर हैं। अब वह धीरे-धीरे अन्य राज्यों में भी अपने पांव पसारना चाहती हैं। ममता की पहली नज़र कांग्रेस पर है, जहां से वह असंतुष्ट नेताओं को तोड़ कर अपनी पार्टी में लाना चाहती है। ममता 2024 चुनावों में अपने को पीएम के एक वैकल्पिक चेहरे के तौर पर मजबूती से उभारना चाहती हैं। ममता के इस महत्वाकांक्षी योजना को परवान चढ़ाने का काम चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर कर रहे हैं, मुकुल संगमा ने भी इस बात का खुलासा कर दिया है। कीर्ति आजाद, पवन वर्मा से लेकर अशोक तंवर के मन में दीदी का फूल खिलाने के पीछे भी पीके ही हैं। सूत्रों की मानें तो ममता का अगला निशाना महाराष्ट्र है जहां के कद्दावर कांग्रेसी नेता चव्हाण को लुभाने की कवायद जारी है। विदर्भ के एक पुराने कांग्रेसी और राजीव ब्रिगेड में शामिल रहे नरेश पुगलिया भी तृणमूल के संपर्क में हैं। पुगलिया राज्यसभा और लोकसभा दोनों ही सदनों में कांग्रेस की नुमाइंदगी कर चुके हैं। वे कई ट्रेड यूनियनों से भी जुड़े रहे हैं, महाराष्ट्र के नवगठित जंबों कांग्रेस कमेटी में अपनी अनदेखी से नाराज़ पुगलिया लगता है कांग्रेस को बाई-बाई कर दीदी की पार्टी ज्वॉइन कर सकते हैं। आने वाले वक्त में पीके कांग्रेस में तोड़-फोड़ की यह कवायद और बढ़ा सकते हैं।
Posted on 28 November 2021 by admin
लालू जब रिम्स से छूट कर दिल्ली आए तो यहां वे अपनी बड़ी बेटी मीसा के घर में आकर रहने लगे। जहां चैबीसो घंटे उनकी निगरानी के लिए एक डॉक्टर और नर्स की तैनाती थी। उनका खान-पान भी बेहद स्ट्रिक्ट था। यह डॉक्टर ही तय करते थे कि लालू को क्या खाना है और क्या नहीं। जब बिहार में तारापुर और कुश्वेश्वर स्थान का उप चुनाव आया तो चुनाव के बहाने लालू पटना पहुंच गए, जहां उनके पुराने संगी-साथियों का जमावड़ा था। सो लालू ने दोस्तों की मंडली में बस अपने मन का किया। अपनी पसंद के समोसे-जलेबी, चाट और दही-बडे़ रोज उड़ाए। वे जिस चीज की डिमांड करते उनके शुभचिंतक तुरंत बाजार जाकर वह पैक करा ले आते, लालू के खान-पान का नियम भी टूट गया और जरूरी परहेज भी। वहां फिर से उनकी तबियत खराब होने लगी, सूत्र बताते हैं कि अब उनका परिवार इस बात पर विचार कर रहा है कि क्यों नहीं अब उन्हें आगे के इलाज के लिए लंदन या सिंगापुर ले जाया जाए। सिंगापुर इसीलिए कि वहां उनकी बेटी रोहिणी रहती हैं।
Posted on 28 November 2021 by admin
जब से राहुल दरबार से के. राजू की विदाई हुई है, सियासी बियांवा में भटक रहे वी.जॉर्ज की गांधी परिवार में जोरदार वापसी हुई है। अभी हाल में ही पार्टी ने एके एंटोनी की अध्यक्षता वाले अनुशासन समिति की गठन का ऐलान किया है, जिसका तारिक अनवर को सदस्य सचिव बनाया गया है। वी जॉर्ज ने अपने प्रिय पी.परमेश्वर को इसमें शामिल करा दिया है। अंबिका सोनी को भी इसका एक मेंबर बनाया गया है, यह वही अंबिका सोनी हैं जिन्होंने राहुल की लीडरशिप को कभी स्वीकार नहीं किया। पर जॉर्ज राहुल को यह समझाने में कामयाब रहे कि अगर जी-23 ग्रुप में फूट डालनी है तो सोनी को कोई अहम जिम्मेदारी देनी होगी। पहले इस कमेटी के लिए सलमान खुर्शीद का भी नाम तय था, क्योंकि वे एक कुशल वकील भी हैं, पर उनकी ही ’पुस्तक बम’ ने उनकी बलि ले ली। आने वाले दिनों में वी.जॉर्ज को और भी ज्यादा प्रो-एक्टिव मोड में देखा जा सकता है।
Posted on 28 November 2021 by admin
अभी भले तीनों कृषि कानूनों के निरस्त होने में वक्त लगेगा, पर भाजपा ने इसके विस्तार की राजनीति पर कार्य करना अभी से शुरू कर दिया है। पंजाब में तो कैप्टन अमरिंदर खुल कर भाजपा के पाले में आ गए हैं तो वहीं यूपी की किसानों के प्रभाव वाले सौ-सवा सौ सीटों पर भगवा पार्टी का डैमेज कंट्रोल अभियान भी शुरू हो चुका है। इनमें से ज्यादातर सीटें पश्चिमी यूपी की हैं जो जाटों के प्रभुत्व वाला क्षेत्र है। वैसे भी जाट शुरू से भाजपा के परंपरागत वोटों में शुमार होते हैं, याद कीजिए अमित शाह का 40 मिनट का वह लीक ऑडियो क्लिप जिसमें दावा हुआ था कि जाट भाई तो हमारे अपने हैं। एक ओर अब जहां भाजपा के जाट नेता पश्चिमी यूपी के गांव-गांव घूम कर नाराज़ जाटों को मनाने का काम करेंगे कि ‘देखो प्रधानमंत्री जी ने आपकी बात मान ली है, अब गुस्सा छोड़ो, साथ आओ।’ वहीं जाटों के एक प्रमुख नेता चौधरी चरण सिंह के पौत्र जयंत चौधरी की ओर भाजपा अब दोस्ती का हाथ बढ़ा रही है। भाजपा रणनीतिकार जयंत को यह समझाने के प्रयासों में जुटे हैं कि रालोद को सपा या कांग्रेस से मित्रता कभी रास नहीं आई है, इन पार्टियों से गठबंधन कर 2014 और फिर 2019 के आम चुनावों में रालोद की झोली बिल्कुल खाली रही। 2017 में सपा से गठबंधन कर इन्हें मात्र एक विधानसभा सीट पर ही जीत का मुंह देखने को मिला, वहीं अटल के जमाने में जब 2009 में पार्टी ने भाजपा से गठबंधन कर 7 सीटों पर चुनाव लड़ा तो पार्टी ने उसमें से 5 सीटों पर जीत दर्ज कर ली। जयंत फिलवक्त जनता का मूड भांपने में लगे हैं कि क्या सचमुच जाटों ने भाजपा को माफ कर दिया है? इसके अलावा भाजपा रणनीतिकारों ने लगातार बसपा सुप्रीमो मायावती से भी अपने तार जोड़ रखे हैं, चुनावी नतीजों के बाद अगर भाजपा बहुमत से 15-16 सीटें पीछे रह जाती है तो यह कमी मायावती पूरी कर सकती हैं।
Posted on 28 November 2021 by admin
योगी आदित्यनाथ इन दिनों अपने चहेते अफसरों से परेशान हैं। सीएम ऑफिस के तीन सबसे शक्तिशाली ब्यूरोक्रेट्स यानी नवनीत सहगल (अपर मुख्य सचिव, सूचना) एसपी गोयल (प्रिंसिपल सेक्रेटरी) और मिनी सीएम अवनीश अवस्थी (अतिरिक्त चीफ सेक्रेटरी) में संग्राम छिड़ा है। कहते हैं कि ये सभी अफसर एक-दूसरे के खिलाफ कागज बांट रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में अदानी के साथ नवनीत सहगल के रिश्तों को लेकर एक बड़ा खुलासा होने जा रहा है। योगी इस बात को लेकर भी परेशान हैं कि उनके कई मंत्री (मसलन ब्रजेश पाठक) और विधायक भाजपा छोड़ कर सपा ज्वॉइन करने के लिए बेकरार हैं।
Posted on 28 November 2021 by admin
देश के हालिया उप चुनावों के नतीजों में साफ-साफ दिखता है कि अब मतदाताओं का खंडित जनादेश में कोई आस्था नहीं रहा, वह आर-पार के नतीजे चाहते हैं। जो पार्टियां जीतने का दम-खम नहीं रखतीं यानी कि ’वोट कटवा’ पार्टी में शुमार है, उसे बाहर का दरवाजा दिखा दिया गया, बिहार में ऐसा कांग्रेस और चिराग की पार्टी के साथ भी हुआ, उनके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। उप चुनावों के नतीजों ने यह भी बता दिया कि भाजपा का वोट शेयर भी तेजी से लुढ़का है, मध्य प्रदेश में बागियों की बदौलत भले ही शिवराज ने पार्टी की लाज बचा ली हो पर वहां भगवा पार्टी का वोट शेयर 7 फीसदी तक गिरा है। कांग्रेस के वोट शेयर में भले ही 4.5 प्रतिशत का इजाफा दर्ज हुआ पर पार्टी इसे सीटों में कन्वर्ट नहीं कर पाई। भाजपा का वोट शेयर बंगाल में भी धड़ाम हो गया, 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा का वोट शेयर 40.71 प्रतिशत था, वहीं तृणमूल का 43.3 प्रतिशत, 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत गिर कर 38.09 प्रतिशत पर पहुंच गया, वहीं ममता बढ़ कर 47.97 फीसदी पर जा पहुंची। इस बार के उप चुनाव में तो टीएमसी ने 75 फीसदी का रिकार्ड वोट हासिल कर लिया, जबकि भाजपा फिसल कर 14.50 फीसदी पर जा पहुंची, अगर वोट प्रतिशत का यही ट्रेंड जारी रहा तो ममता 2024 में बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों को जीतने का लक्ष्य तय कर सकती हैं।
Posted on 28 November 2021 by admin
एक बात और है जो जांच एजेंसियों को बेतरह परेशान कर रही है कि आखिरकार नवाब मलिक को एनसीबी के समीर वानखेड़े के बारे में इतनी सटीक जानकारियां कौन मुहैया करा रहा है? जांच एजेंसियों को कुछ कुरेदने पर पता चला है कि यह वानखेड़े की पहली पत्नी डॉ. शबाना कुरैशी हो सकती हैं जो नवाब की रिश्तेदार भी लगती हैं। वानखेड़े की दूसरी यानी मौजूदा पत्नी क्रांति रेडकर मराठी फिल्मों से जुड़ी रही हैं, वह अपने लिए बॉलीवुड में एक सम्मानजनक एंट्री चाहती थीं, सूत्रों की मानें तो समीर वानखेड़े ने अपनी पत्नी को बॉलीवुड में ब्रेक दिलवाने के लिए शाहरूख खान से भी संपर्क किया था, जिनकी ’रेड चिली’ एक बड़ी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी है। पर कहते हैं शाहरूख ने जब वानखेड़े के इस प्रस्ताव पर कान नहीं धरे तो फिर वानखेड़े ने भी अपने असली रंग दिखा दिए।
Posted on 01 November 2021 by admin
माक्र्सवादी पार्टी की केंद्रीय समिति की तीन दिवसीय बैठक नई दिल्ली में आहूत थी, पर इस बैठक में ज्यादातर नेता अपने पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी से ही नाराज़ जान पड़ रहे थे, लगातार सवाल पूछे गए कि माकपा आखिरकार क्यों कांग्रेस की बैसाखी बनने को अभिशप्त है? येचुरी से यह भी पूछा गया कि ’उनकी राजनैतिक सोच सोनिया गांधी के आभामंडल के इर्द-गिर्द ही क्यों केंद्रित रहती है?’ एक पार्टी नेता ने तो अतिउत्साह में आकर येचुरी की तुलना अमर सिंह से कर दी, उन्होंने भरी बैठक में यह पूछने की जुर्रत कर दी वह भी अपने पार्टी महासचिव से कि ’आप अपनी भूमिका स्पष्ट करें कि यह अमर सिंह की रही है या भगत सिंह की?’ इतने तल्ख सवाल से येचुरी आहत हो गए, कहां तो वे अपने लिए एक ’टर्म’ और मांगने की सोच कर आए थे और कहां ऐसे अप्रिय सवालों से जूझना पड़ रहा था। जैसे ही इनके दूसरे टर्म की बात आई कई कम्युनिस्ट नेताओं के सामूहिक प्रतिवाद के स्वर सामने आने लगे-’केरल में पार्टी अपने दम पर आगे बढ़ी है, उसमें आपका कोई योगदान नहीं, बंगाल में हमारे साथ क्या हुआ यह सबके सामने है।’ येचुरी ने फिर कोरोना के प्रकोप की बात की जिसमें उन्होंने अपनों को खोया है, वे क्यूबा का उदाहरण देने लगे। पर नेता वह भी उनकी पार्टी के, चुप कहां हुए, कहने लगे-’रूस, क्यूबा छोड़ कर आप अपने देश की बात करिए, आखिर हम इतने ढलान पर क्यों है?’ यकीनन येचुरी को भी इन सवालों के जवाब ढूंढने ही होंगे।
Posted on 01 November 2021 by admin
भाजपा के बड़बोले नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की राज्यसभा की सदस्यता अगले साल अप्रैल में समाप्त हो रही है। भाजपा शीर्ष पर हल्ला बोल का नया अध्याय लिखने वाले स्वामी का संघ-प्रेम किसी से छुपा नहीं है। सो, पिछले दिनों स्वामी संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने पहुंचे, भागवत भी उनके यूं आने का मंतव्य भांप चुके थे। सो, उन्होंने छूटते ही स्वामी से कह दिया-’आप हर किसी पर इतने निजी हमले कर चुके हैं तो मैं आपकी राज्यसभा को लेकर किसी तरह का कमिटमेंट नहीं कर सकता।’ निराश होकर स्वामी ने आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी को उम्मीदों का डायल किया, जिनकी वे पूर्व में काफी मदद कर चुके हैं। अगले साल आंध्र से भी राज्यसभा आने वाली है, पर जगन पीएम मोदी की कोई नाराज़गी मोल नहीं लेना चाहते, सो उन्होंने भी स्वामी से दो टूक कह दिया कि ’हमसे कोई उम्मीद मत रखिएगा।’ स्वामी इस नई सियासत के नए दस्तूर का मर्म भांपने में लगे थे कि उन्हें अचानक उद्धव ठाकरे का फोन आ धमका, ’मुंबई आकर मुझसे मिलिए, हमें दिल्ली में आपके जैसे ही एक निडर व्यक्ति की जरूरत है जो बेबाकी से हमारी बातों को सामने रख सके।’ स्वामी को भी चैन आया कोई तो है जिन्हें उनके बेबाक इरादों की कद्र है।