Posted on 05 October 2009 by admin
शत्रु भैया की नाराजगी अपने पार्टी से कम होने का नाम नहीं ले रही। हालिया दिनों में न सिर्फ उन्होंने अपनी भंगिमाएं बदली हैं अपितु आलाकमान के समक्ष पेश अपनी शर्तों में उन्होंने यथोचित संशोधन भी कर दिया है। शत्रु अभी भी इस बात पर अड़े हैं कि उनकी पत्नी पूनम सिन्हा को पार्टी बिहार से राज्यसभा में लेकर आए, शत्रु को संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया जाए ( उनकी पिछली मांग महासचिव बनाने की थी) शत्रु यह भी चाहते हैं कि उन्हें मध्य प्रदेश फिल्म विकास निगम का अध्यक्ष बनाया जाए और अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल हो। और इतने पर भी शत्रु भैया मौके बेमौके राहुल गांधी की तारीफ में कसीदे पढ़ना नहीं भूल रहे, क्या कांग्रेस की ओर से उन्हें पक्के तौर पर कोई आश्वासन मिला है?
Posted on 05 October 2009 by admin
कभी माकपा को चीन का एजेंट बताने वाली भाजपा की सोच में एक आमूल-चूल बदलाव परिलक्षित होता है। भगवा पार्टी के कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस.येदुरप्पा अभी पिछले दिनों चीन की यात्रा पर गए थे, अपनी यात्रा से माननीय मुख्यमंत्री इस कदर उत्साहित हुए कि उन्होंने आनन-फानन में तय कर दिया कि उनकी विधानसभा के कोई दो सौ विधायक अगले कुछ दिनों में चीन की यात्रा करेंगे, यह सीएम के ‘मैसिव लर्निंग प्रोसेस’ का एक प्रमुख एजेंडा बन गया है, और येदुरप्पा पर चीन की धुन कुछ इस कदर सवार है कि उन्होंने राज्य से छह सौ किसानों को सिर्फ इसीलिए चीन भेज दिया ताकि वे वहां से आधुनिक-वैज्ञानिक खेती के कुछ महत्वपूर्ण गुर सीख कर आएं, यह चीन को आप किस दूरबीन से देख रहे हैं माननीय मुख्यमंत्री जी।
Posted on 18 September 2009 by admin
वसुंधरा राजे सिंधिया को माननीय भाजपा अध्यक्ष ने 4 सितंबर की डेटलाइन दी थी कि तब तक वह अपने पद से इस्तीफा दे दें, तो वसुंधरा ने 9 सितंबर तक का समय मांगा था, क्योंकि वसुंधरा अधिकारिक तौर पर तब वायरल बुखार की चपेट में थीं। अब तो दिल्ली और आसपास में खूब झमाझम बारिश भी हो रही है और बरसात में तो वायरल बढ़ता ही है, क्या राजनाथ जी के आर्डर पर वसुंधरा का त्रिया हठ भारी पड़ गया है? या माननीय राजनाथ भाजपा के बहादुरशाह जफर साबित हो रहे हैं?
Posted on 18 September 2009 by admin
पर मोदी हैं कि आज पार्टी में निपट अकेले पड़ गए हैं, उनके साथ न तो संघ है, न पार्टी और न ही ब्यूरोक्रेसी। भाजपा के कई सीनियर नेताओं का मानना है कि अब मोदी युग के अवसान गीत गाने का समय आ पहुंचा है। और अडवानी भी बस तब तक मोदी की चिंता करने वाले हैं जब तक कि उनकी लाडली प्रतिभा संसद की दहलीज नहीं लांघ जातीं, वह भी गुजरात से।
Posted on 18 September 2009 by admin
शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा का अगला अध्यक्ष बनने की अपनी अनिच्छा सार्वजनिक कर दी है, शिवराज ने संघ के अपने चहेते नुमाइंदे सोनी से साफ-साफ कह दिया है-‘मैं अभी-अभी मुख्यमंत्री बना हूं, कृपया मेरी भ्रूण हत्या मत करिए। मैं और मेरी लाडली लक्ष्मी खुब खुश हैं, सो अध्यक्ष बनाना है तो किसी सीनियर लीडर को बनाइए।’ शिवराज के इस नए आगाज के क्या कहने!
Posted on 18 September 2009 by admin
संघ के दूत के तौर पर भाजपा में जमे 240 संगठन मंत्रियों को लेकर पार्टी में क्या खूब हंगामा नहीं बरपा पर संघ है कि अपने इरादे से टस से मस नहीं हो रहा। संघ ने भाजपा हाईकमान से साफ कर दिया है कि उनके प्रतिनिधि के तौर पर भगवा पार्टी में बिलावजह की कदमताल कर रहे उनके सभी संगठन मंत्री बने रहेंगे और वे पार्टी की दैनंदिन कार्यकाल पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेंगे, यानी भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों की परेशानी यथावत बनी रहेगी और उनके संबंधित राज्यों में ट्रांसफर-पोस्टिंग से मलाई भी पूर्ववत ही काटी जाती रहेगी। राजनैतिक शुचिका व नैतिकता का यह कौन सा संदेश देना चाहता है नागपुर?
Posted on 14 September 2009 by admin
वक्त क्या बदला लालू प्रसाद भी बदल गए हैं अब उनकी हेकड़ी की जगह विनम्रता ने ले ली है, कभी बस दूसरों की चाल पर नजर रखने वाले लालू अब बढ़-चढ़कर पहले ही दूसरों का हाल-चाल पूछ लिया करते हैं, जब से संसद स्थित इनका दफ्तर छिन गया है संसद में भी वे थोड़े गमगीन ही नजर आते हैं, गमगीन तो अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जयललिता भी नजर आती हैं, क्योंकि इस चुनाव में उनकी पार्टी के भी मात्र 7 सांसद रह गए हैं, चुनांचे कभी संसद की दो स्थाई समितियों में उनकी पार्टी के अध्यक्ष हुआ करते थे- विज्ञान व प्रौद्योगिकी, वन एवं पर्यावरण अब जयललिता की पार्टी के पास भी हाथ मलने के सिवा और कुछ नहीं बचा है। ऐसे में तो भी बसपा सुप्रीमो मायावती की चांदी है, हालिया दिनों में राज्यसभा में गिनती के आधार पर उद्योग मंत्रालय की स्थाई समिति की अध्यक्षता बसपा के हाथ लग गई है। हाथी बम-बम हर तरफ डोल रहा है।
Posted on 14 September 2009 by admin
शुरूआत अरुण जेतली की ओर से हुई, उन्होंने बातों ही बातों में अपने पार्टी अध्यक्ष से कहा-‘राजनाथ जी आप तो ठीक हैं, पर लीकेज आपकी छत में है, सुधांशु त्रिवेदी आपका राजनैतिक सचिव मीडिया में खबरें लीक करता है, ‘स्टोरीज प्लांट’ करवाता है। पार्टी के पतन का यही सबसे बड़ा कारण है। आपने अपने मातहतों को बहुत खुली छूट दे रखी है।’ हक्के-बक्के रह गए राजनाथ, तनिक संभलते हुए बोले-‘मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं इस पर एक ‘प्राइवेट इन्क्यॉरी’ बिठाऊंगा!’ जेतली ने कहा- ‘नहीं, इन्क्यॉरी आदि से बात नहीं बनेगी, उसे आप निकाल बाहर करो।’ जेतली अपनी ही रौ में बोलते रहे देर तक …शब्द हथियार के मानिंद धारदार थे…और भावनाएं जड़ से उजड़े साधु की तरह बेलौस!
Posted on 05 September 2009 by admin
कभी मुलायम सिंह और अमर सिंह के खिलाफ कांग्रेस में अहमद पटेल मोर्चा संभालते थे, मुलायम विरोधियों को कायदे से फंड होता है, इनके खिलाफ केस-मुकदमे लड़ने वाले लोगों को धन-बल से सशक्त बनाया जाता था, आज यह कमान कपिल सिब्बल ने संभाल ली है। क्या अहमद-अमर में दोस्ती की नई इबारत लिखवाने को आतुर हैं अमर के नए नवेले चेले राजेश दीक्षित। जिन्हें अगर शनिवार को अहमद से मिलना होता है तो शुक्रवार को अपने करीबियों को एसएमएस भेज कर पूछते हैं दीक्षित कि उनका कोई एजेंडा जो अहमद पटेल तक पहुंचाना है, क्या इतने अहमक हैं अहमद?