Posted on 03 January 2010 by admin
अपने संसदीय क्षेत्र जंगीपुर में पिछले दिनों प्रणबदा को एक स्कूल के उद्धाटन दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था। यह स्कूल एक भद्र बंगाली महिला (अब दिवंगत) के नाम पर शुरू होना था, जिनसे प्रणबदा की पुरानी जान-पहचान थी, सो उनका वहां आना बनता था, कार्यक्रम दोपहर दो बजे से शुरू होना था, पर प्रणबदा आए कोई घंटे भर की देरी से, जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ प्रणबदा ने माइक अपने हाथों में पकड़ा और फिर शुरू हो गए, आयोजक हैरान, तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक तो प्रणब मुखर्जी को बतौर चीफ गेस्ट सबसे आखिर में बोलना था, आयोजकों के हैरान-परेशान मुद्राएं भांपते हुए दादा ने खुद ही स्थितियां संभाल ली-‘मैं जानता हूं कि मुझे सबसे आखिर में बोलना था, पर माफ करिए अगर मैंने ज्यादा देर की तो फिर मेरा यह हेलीकॉप्टर कोलकाता के लिए उड़ नहीं पाएगा…और फिर धारा-प्रवाह बोलते रहे प्रणबदा!’
Posted on 03 January 2010 by admin
अपनी शिष्टाचार मुलाकात के लिए जब भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष नितिन गडकरी अपने नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज से मिलने सुषमा के 8 सफदरजंग स्थित उनके सरकारी निवास पर पहुंचे तो वहां उनका जर्बदस्त स्वागत हुआ। सुषमा ने स्वयं गडकरी युगल की आरती उतारी, उनका तिलक किया, उन्हें शॉल भेंट की और उन्हें घर के अंदर लेकर गईं। सुषमा को मालूम था कि चूंकि गडकरी डायबिटिज के मरीज हैं सो वे मीठा से परहेज करेंगे, सो उनके यहां नमकीन व्यंजनों की बहार लगी थी, सबको मालूम है कि गडकरी खाने-पीने के खूब शौकीन है, उनके इस अच्छा खाने-पीने की आदत पर किसी पत्रकार ने जब सवाल कर दिए तो गडकरी ने अपने खास अंदाज में सफाई दी-भाजपा के पार्टी संविधान में ‘पैसा खाने पर रोक है, अच्छा भोजन खाने पर नहीं…’ और वे पूर्ववत ही अपने खाने-पीने के कार्यक्रम में जुटे रहे।
Posted on 23 December 2009 by admin
इस संसद सत्र में गवर्नर की रेस के इच्छुक अभ्यर्थियों को ज्यादातर समय सेंट्रल हॉल में बैठे-घूमते बतियाते और अपने हिस्से की लॉबिंग करते देखा गया। मौसम का मिजाज बताता है कि आने वाले दिनों में कुछ राज्यपालों के स्टेट बदले जा सकते हैं, कुछ ऐसे भी राज्यपाल हैं जिनके पास दो-दो राज्यों की दोहरी जिम्मेदारियां है यानी अब समय आ गया है कि कुछ नए राज्यपालों का ऐलान भी होगा। कांग्रेस आलाकमान को ऐसा लगता है कि एन.डी.तिवारी आंध्र प्रदेश के राजभवन में रहते हुए तेलंगाना के मुद्दे का एक सर्वमान्य राजनैतिक हल ढूंढ पाने में विफल रहे हैं, सो एन.डी.तिवारी को किसी अन्य राज्य में ‘शिफ्ट’ किया जा सकता है, शिवराज पाटिल की भी राज्यसभा की मियाद खत्म हो रही है सो उन्हें भी उपकृत किया जाना है। प्रधानमंत्री के सचिव टी.के.ए.नायर भी गवर्नर की रेस में शामिल हैं। पंजाब के नए गवर्नर के लिए संतोष मोहन देव, पद्मनाभैया व शिवराज पाटिल के नाम सामने आ रहे हैं, पूर्व रक्षा सचिव शेखर दत्त जो कि सोनिया चहेते पुलक चटर्जी के नजदीकी रिश्तेदार हैं, वे भी गवर्नर की रेस में शामिल हैं। ऐसे में सरकार के समक्ष समस्या विकट है कि वह किस-किस को उपकृत करे।
Posted on 23 December 2009 by admin
वह तो प्रणब मुखर्जी झारखंड में चुनाव प्रचार को गए हुए थे और माओवादियों को एक कड़ा संदेश देने का उपक्रम गांठ रहे थे कि इस अधबीच माननीय गृह मंत्री का तेलंगाना पर वह चर्चित बयान आ गया, साथ ही तेलंगाना के मुद्दे पर कांग्रेस का ‘साफ्ट स्टैंड’ भी सामने आ गया। इस पर दादा खासा उखड़ गए, हालांकि चिदंबरम ने फोन पर दादा को सफाई देनी चाही कि उनके कहने के निहितार्थ क्या हैं, पर दादा का गुस्सा कम न हो सका। जब वे दिल्ली लौट कर आए तो सोनिया ने उन्हें बुलाया और तेलंगाना के मुद्दे का कोई सर्वमान्य हल ढूंढने को कहा। तब दादा ने यूपीए गठबंधन के सहयोगी दलों की बैठक बुलाई। और उसमें इस मुद्दे को विचाराधीन रखा, यानी आने वाले दिनों में तेलंगाना की मांग को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है, कांग्रेस का जो नुकसान होना था, वह तो हो ही गया है।
Posted on 20 December 2009 by admin
अपनी अध्यक्षीय कुर्सी छिनने के बाद मौजूदा पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह करेंगे क्या? यह भी कोई पूछने की बात है और हम पहले भी इस कॉलम में इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि ठाकुर नेता अब अपना सारा ध्यान यूपी पर लगाएंगे और राहुल गांधी के मिशन 2012 के समक्ष एक महती चुनौती पेश करेंगे, राहुल भी युवा हैं और राजनाथ भी अपने को युवा ही समझते हैं सो वे यूपी के नेताओं को इन दिनों दनादन फोन दाग रहे हैं और अपने घर आमंत्रित कर रहे हैं चाय-पानी पर, पर राजनाथ की लिस्ट में ज्यादातर वैसे क्षत्रप शुमार हैं या तो जो चुनाव हारे हुए हैं या जिनका राज्य में कोई खास जनाधार नहीं, मसलन कलराज मिश्र, ओम प्रकाश सिंह, विनय कटियार आदि-आदि।
Posted on 20 December 2009 by admin
भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की डॉक्टर पुत्री का विवाह अभी शुक्रवार को पुणे में संपन्न हुआ, विवाह का मर्ुहुत्त शाम छह बजकर 21 मिनट पर था, पर चूंकि अडवानी की फ्लाइट लेट हो गई तो वे कोई रात के 9.20 बजे अपने प्रिय अरुण जेतली के साथ विवाह स्थल पर पधारे। और आने वाले प्रमुख मेहमानों की सूची में भी शायद अडवानी का नंबर सबसे आखिरी था, क्योंकि अडवानी के आने से पूर्व राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, रामलाल,अशोक चव्हाण, छगन भुजबल, नारायण राणे, वेंकैया नायडू और सुधांशु मित्तल सरीखे नेता पहुंच चुके थे। अशोक चव्हाण, मित्तल, राजनाथ सिंह और वेंकैया शायद सबसे पहले आने वाले नेताओं में शुमार थे।
Posted on 10 December 2009 by admin
अब सवाल अहम है कि भगवा पार्टी के नए अध्यक्ष अपनी टीम कब तक बनाएंगे? शायद अप्रैल तक और सबसे धमाके दार वापसी हो सकती है कथित सीडी कांड का दंश झेल रहे संजय जोशी की। गडकरी की नई टीम में जोशी की एक असरदार भूमिका रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है। और अब तो यह राज भी कथित तौर पर बेपर्दा हो गया है कि संजय जोशी को सीडी कांड में लपेटने में गुजरात के मुख्यमंत्री की क्या भूमिका रही थी? खुलासा तो इस बात का भी हो रहा है कि उस कथित सीडी में असली चेहरा तो सोहराबुद्दीन और कौसरबी का था, सोहराबुद्दीन के चेहरे को ‘मॉर्फ’ करके जोशी का चेहरा लगाया गया था, इस तथ्य को देखो, चेहरा न देखो, तथ्य सच्चा और चेहरा झूठा…पर क्या जोशी अपने विरोधियों पर पलटवार को तैयार हैं?
Posted on 03 December 2009 by admin
बेहद अंग्रेजीदां उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह का इतिहास-भूगोल को खंगालने का कार्य संघियों ने शुरू कर दिया है। और उदय सिंह का वर्तमान और इतिहास इस बात का गवाह है कि कैसे उनका कुनबा तमाम राजनैतिक दलों में बिखरा पड़ा है, जैसे इनकी बहन श्यामा सिंह और बहनोई निखिल कुमार कांग्रेस के रहमोकरम पर हैं, भाई एन.के.सिंह जो अंबानी और कांग्रेसी कनेक्शन के लिए मशहूर हैं, वे जद(यू) के कोटे से राज्यसभा सांसद हैं और इन दिनों उनका एकमात्र उपक्रम नीतीश कुमार और कांग्रेस को एक साथ एक मंच पर लाने का है। सो, संघ का मानना है कि पप्पू सिंह जैसे लोग विचारधारा की नहीं अपितु सहूलियत की राजनीति करते हैं और ये लोग पार्टी नहीं अपितु व्यक्तिवादी राजनीति के कायल होते हैं और यही उनकी आगे बढ़ने की सीढ़ी भी होती है, सो ऐसे लोगों की बातों पर कान धरने की जरूरत संघ नहीं समझता।
Posted on 03 December 2009 by admin
भाजपा के निवर्तमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह जहां अपने धोतीर्-कुत्ता के पहरावे से ग्रामीण भारत का प्रतिनिधित्व करते नजर आते हैं, वहीं इसके ‘अध्यक्ष इन वेटिंग’ गडकरी जी मुंबई स्थित अपने आवास पर ज्यादातर निकर और बंडी में नजर आते हैं। और संपत्ति के नाम पर गडकरी के पास क्या है इसकी जरा एक फेहरिस्त देख लीजिए-एक अदद चीनी मिल, एक डिस्टिलरी और एक पीवीसी पाइप की फैक्टरी। और बात करने उनका लहजा भी किसी मायने में संघी नहीं है, विभिन्न अलंकरणों की बारिश में जब तब बौने ही पड़ जाते हैं शब्दों की गरिमा।
Posted on 21 November 2009 by admin
अडवानी व्यथित हैं, कुपित हैं संघ के रवैये पर। अडवानी का दर्द उनके शब्दों से साफ झलकता है कि ‘अगर मैं 83 साल का हो गया हूं तो इसमें मेरा क्या कसूर? मोरारजी भाई भी जब 82 के हो गए थे तब भी उन्हें कहां किसी ने हटने को कहा था?’ पर संघ का अपना तर्क है, संघ का कहना है कि उसने 44 साल की उम्र में अडवानी को बागडोर सौंप दी थी, और काएदे से अडवानी को 15 वर्ष पहले ही आने वाली पीढ़ी के लिए नेतृत्व छोड़ देना चाहिए था और स्वयं ‘मेंटर’ की नई भूमिका में अवतरित हो जाना चाहिए था। पर अडवानी इस मामले में अव्वल दर्जे के हठधर्मी हैं उनका कहना साफ है कि ‘अगर पद नहीं तो फिर पॉवर भी नहीं।’ पहले संघ अडवानी के लिए पार्टी में एक नई ‘पोस्ट’ बनवाने को राजी था, पर अडवानी की हठधर्मिता ने संघ को बेचैन कर दिया है और बदली भंगिमाओं के साथ संघ तो अब बस यही गुहार लगा रहा है कि ‘अडवानी जी दिसंबर तक तो आपको जाना ही होगा।’ और अडवानी हैं कि वे रिटायर होने को कतई तैयार नहीं दिखते।