Posted on 10 February 2010 by admin
शरद पवार के रवैए से पूरी कांग्रेस नाराज हैं। कांग्रेस कार्यसमिति की पिछली बैठक में तो जैसे हर कांग्रेसी ठान आया था कि उन्हें पवार से रार लेनी है, स्वयं प्रधानमंत्री पवार से काफी नाखुश दिखे और तो और अपेक्षाकृत शांत समझे जाने वाले ए.के.एंटोनी ने भी पवार की जमकर बखिया उधेड़ी, बस एक प्रणबदा ही थे जो पूरे समय तक शांत बने रहे और उन्होंने पवार के खिलाफ एक शŽद भी नहीं बोला। मगर €यों? €या यह भी बताने की बात है।
Posted on 10 February 2010 by admin
कांग्रेस देश में न्यायिक सुधार को लेकर किंचित गंभीर जान पड़ती है, केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली बड़ी वीरता से ‘ज्यूडिशयल रिफार्म’ का खटराग अलाप रहे हैं। मोइली साहब संसद के इसी आगामी बजट सत्र में एक ऐसा बिल लाना चाहते हैं जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष से बढ़ाकर 68 वर्ष करने का प्रस्ताव है, हाईकोर्ट के जज की रिटायरमेंट की उम्र 62 से 65 वर्ष तथा जिला न्यायालयों के जजों की सेवा निवृिžा की आयु 60 से 62 वर्ष करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। अगर संसद के बजट सत्र में यह बिल पेश भी हो जाता है तो इस प्रस्ताव को स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष लाना आवश्यक है, और इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम तीन माह का समय लग सकता है। देश के निवर्तमान मुय न्यायाधीश इसी वर्ष मई में रिटायर हो रहे हैं सो लगता नहीं उन्हें इस विधेयक का कोई लाभ मिलने वाला है।
Posted on 10 February 2010 by admin
भाजपा की यह एक आम परंपरा में शुमार हो चुका है कि जब भी किसी को कुछ मिलना होता है या उनसे कुछ छिनना होता है तो पर्चे तो बंट ही जाते हैं। याद कीजिए श्याम जाजू को, एक शर्मीले, संस्कारवान व ईमानदार व्यि€त जो महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक मंडल अध्यक्ष मात्र थे। उन्हें प्रमोद महाजन दिल्ली लेकर आए और दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय कार्यालय के वे एक मान्य चेहरा के तौर पर स्थापित हो गए। जैसा कि पर्चे में दावा हुआ है कि आज की तारीख में जाजू अपार दौलत व बेनामी संपिžायों के मालिक हैं, भाजपा शासित राज्यों में उनका सि€का भी चलता है और उसकी खनक भी। उनके पास चार से पांच पैन कार्ड बताए जाते हैं और जब भाजपा कार्यालय से करोड़ों उड़े तो शक की सुई उनकी ओर भी गई। सो जाजू से कह दिया गया है कि वे अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर जाने के लिए तैयार रहे, जैसे ही 9 तारीख को विधिवत गडकरी गद्दी संभालेंगे जाजू की जगह किसी और नए दाजू की ढूंढ शुरू हो जाएगी।
Posted on 07 February 2010 by admin
लौट के नेताजी घर को आए, अमर क्या गए उनका पुराना समाजवाद जाग उठा है, जब नेताजी पूरी तरह अमर के रंग में रंगे थे तो जाने-अनजाने उनके ऊपर ‘कॉरपोरेट कलचर’ भी हावी हो गया था, कभी मैले कुर्चेलेर् कुत्ते व धोती में सियासी पगडंडियों पर महात्वाकांक्षाओं का सफर तय करने वाले मुलायम सिंह हालिया दिनों में दिन में चार से पांच दफे तो अपनी धोती बदलने लगे थे, पुराने दोस्तों से निष्ठा तो न जाने उन्होंने कब की बदल ली थी। पर अब नेताजी को एक-एक कर उनके पुराने खांटी समाजवादी मित्र याद आने लगे हैं। पिछले दिनों जनेश्वर मिश्र की शोकसभा में नेताजी के पुत्र अखिलेश यादव के.सी.त्यागी के बगलगीर नजर आए, सुना जाता है कि के.सी.त्यागी के पुत्र की शादी में मुलायम सिंह 6 फरवरी को अपने दल-बल के साथ शरीक हो रहे हैं।
Posted on 07 February 2010 by admin
बिहार भाजपा में घमासान बेहद भीषण है। नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर चहुंओर तलवारें खींची है। बिहार भाजपा के स्वयंभू सरताज सुशील मोदी एक ब्राह्मण नेता मंगल पांडे को अध्यक्ष बनाने की कवायद में जुटे थे कि मोदी विरोधियों ने राज्य में एक नया मोर्चा खोल दिया है। मोदी विरोधी समवेत स्वरों में इस खटराग को हवा दे रहे हैं कि उन्हें ऐसा अध्यक्ष नहीं चाहिए जो मोदी की खड़ाऊं उठा कर चले और घोषित तौर पर उनका ‘रबर स्टैंप’ हो। सो एक नया नाम निकलकर सामने आया है और वह नाम है छात्र संघ की राजनीति से भगवा राजनीति में पर्दापण करने वाले हरेंद्र प्रताप का जो बक्सर के पांडेय हैं, यह पूर्व में पार्टी के संगठन मंत्री भी रह चुके हैं और इनका बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी बेहतर तालमेल है।
Posted on 07 February 2010 by admin
चटवाल के नाम को पद्म पुरस्कारों की रौ में आगे करने में प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव टी.के.ए.नायर की सबसे महती भूमिका रही। चटवाल और नायर की दोस्ती वैसे भी काफी पुरानी है और खासी मजबूत भी, सो यह नायर की ही दोस्ती थी कि सिख चटवाल ने मलयाली भूमि कोचीन में जाकर अभी अपना एक होटल शुरू किया है और उस होटल का श्रीगणेश भी नायर के ही करकमलों से हुआ है। सो इस बार पद्म पुरस्कारों के लिए जो कमेटी गठित हुई थी उसमें प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटी नायर के अलावा, केंद्रीय गृह सचिव, कैबिनेट सचिव, राज्यसभा सांसद और गांधी परिवार की वफादार कपिला वात्सयायन, सीआईआई के अध्यक्ष तरुण दास भी शामिल थे। समझा जाता है कि इस कमेटी की आहूत बैठक में सबसे पहले नायर ने ही चटवाल के नाम का प्रस्ताव रखा और इसे पलक झपटते ही कमेटी के अन्य सदस्यों का समर्थन हासिल हो गया। और हां यह कहने-सुनने की बात नहीं कि मिस्टरक्लीन होने का दंभ भरने वाले डा. मनमोहन सिंह और चटवाल की जान-पहचान व दोस्ती भी उतनी ही परखी, जानी-पहचानी और पुरानी है।
Posted on 29 January 2010 by admin
अनंत कुमार और अरुण जेतली पिछले दिनों अटल बिहारी वाजपेयी के दत्तक दामाद रंजन भट्टाचार्य से मिले और उनसे आग्रह किया कि क्यों नहीं इस बात के लिए अटल जी की सहमति हासिल की जाए कि अडवानी को अटल की जगह एनडीए का चैयरमैन बना दिया जाए। दामादजी बापजी से पूछकर आए (जैसा कि उन्होंने दावा किया) और बापजी ने साफ कर दिया है कि अगर अडवानी एनडीए का कार्यकारी अध्यक्ष बनने को राजी हैं तो फिर उन्हें कोई हर्ज नहीं।
Posted on 29 January 2010 by admin
चिदंबरम इससे अलग कहां सोच रहे हैं? चिदंबरम ने हालिया दिनों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के कार्यों की परिधि तय करते हुए यह सुझाव दिया है कि एनएसए का नजरिया बाहरी सुरक्षा को लेकर ज्यादा गंभीर होना चाहिए। देश की परमाणु नीति से भी उनका मतलब होना चाहिए और उनका वास्ता उन नीतियों से ज्यादा होना चाहिए जिसे प्रधानमंत्री स्वयं देखते हों। इसके अलावा बाहरी आतंकवाद पर भी एनएसए की नजर होनी चाहिए। देश के नए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन के प्रति चिदंबरम का नजरिया सकारात्मक है उनका मानना है कि ल्हासा में पैदा हुए मेनन एक योग्य राजनयिक हैं और वे पहले भी चीन, पाकिस्तान और इस्रायल में कार्यरत रहे हैं, सो बाहरी खतरों के प्रति मेनन का नजरिया कहीं ज्यादा व्यापक है।
Posted on 23 January 2010 by admin
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के.नारायणन की रुखसती का वक्त क्या आ पहुंचा है? केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम के साथ उनके संबंधों में एक असहज तनातनी के बाद से ही लगातार यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अब नारायणन साहब को किसी राज्य का गवर्नर बनकर नारायण-नारायण भजना होगा, अगर नारायण जाते हैं तो उनकी जगह कौन ले सकता है? तीन नामों की चर्चा है, पहला नाम है एस.एस.मेनन का जिन्हें पीएमओ की मलयाली लॉबी का पुरकश समर्थन हासिल है। दूसरा नाम शक्ति लांबा का है इन्होंने अफगानिस्तान में कार्य करते हुए अमरीका के दिल को बेतरह लुभाया है, सो इन्हें पूरी अमरीकी लॉबी का समर्थन प्राप्त है। तीसरा नाम श्याम शरण का है, इन्हें सोनिया गांधी का वरदहस्त प्राप्त है और नेपाल के राजा को अपदस्थ कराने में इनकी एक महती भूमिका थी, सो अगर इनका नंबर लग गया तो सचमुच यह नेपाल के लिए एक बुरी खबर होगी।
Posted on 23 January 2010 by admin
दिल्ली का सिरमौर बनने के लिए भाजपा में घमासान बड़ा ही भीषण है, दिल्ली प्रदेश भाजपा की अध्यक्षता के लिए विजय कुमार मल्होत्रा और अरुण जेतली सरीखे धाकड़ नेता दिल्ली की पूर्व महापौर आरती मेहरा का समर्थन कर रहे हैं, विजय गोयल ने भी एड़ी-चोटी का जोर लगाया हुआ है और उनकी उद्दात महत्वाकांक्षाओं को परवान चढ़ाने में जुटे हैं रामलाल और सुधांशु मित्तल। वैसे मित्तल को आरती मेहरा का भी करीबी माना जाता है पर इस बार वे विजयी सेहरा विजय के सिर पर देखना चाहते हैं, जो लोग किसी के साथ नहीं है नंद किशोर गर्ग उन्हें अपने साथ मान रहे हैं, जैसे मदनलाल खुराना तो खुलकर गर्ग के समर्थन में उतर आए हैं, मैदान में तो जगदीश मुखी भी हैं पर उन्हें विजय कुमार मल्होत्रा पसंद नहीं करते, इसीलिए मुखी का दावा दिखावा से ज्यादा और कुछ नहीं।