एम्स में जंगलराज

December 13 2016


आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य देने का दावा करने वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की तबियत इन दिनों किंचित नासाज लगती है, यहां के मौजूदा डायरेक्टर एम सी मिश्रा (30 जनवरी 2017 को रिटायर होने वाले हैं) जो अपने मनमाने फैसलों के लिए ख्यात हैं, उन्होंने इस दफे कुछ गजब ही कर दिया है। उन्होंने एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलोजी विभाग का मुखिया अपने एक ऐसे खास व्यक्ति डा. उमेश कपिल को बना दिया है जो हुयूमन न्यूट्रीशन विभाग से संबंध रखते हैं। गैस्ट्रोएंटरोलोजी विभाग के मुखिया होने की पात्रता में उस डॉक्टर का एमडी (मेडिसिन) और इसी विधा में डीएम होना शामिल हैं, पर डा. कपिल इन दोनों ही पात्रता को पूरी नहीं करते हैं। सूत्र बताते हैं कि डा. कपिल कुछ ऐसे डॉक्टरों की फेहरिस्त में शुमार होते हैं, शायद यही वजह है कि 1997 में उस विभाग के तत्कालीन मुखिया डा. राकेश टंडन ने डा. उमेश को हटाने की सिफारिश की थी। इस पूरे मामले में सबसे हैरतअंगेज वाकया यह है कि एम्स के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है कि किसी विभागाध्यक्ष की नियुक्ति के पत्र पर स्वयं निदेशक के हस्ताक्षर हों, नहीं तो आम प्रचलन के मुताबिक कोई भी नियुक्ति या पदोन्नति पत्र फैकल्टी सेल से आता है, जिसमें निदेशक की ओर से आदेश दिया जाता है। एम्स से जुड़े सूत्रों का दावा है कि डा. मिश्रा का यह सारा उपक्रम इस बात को लेकर था कि इस पद के उपयुक्त दावेदार डा. अनूप सराया को किनारे लगाया जा सके, क्योंकि डॉ सराया को ही अनुभव व वरिष्ठता के हिसाब से इस विभाग का मुखिया बनना था। एक ओर तो एम्स में डॉक्टरों की कमी का रोना रोया जाता है, वहीं काबिल डॉक्टरों को प्रशासनिक कार्यों में लगा दिया गया है, सेलेक्शेन बॉडी में प्राइवेट प्रैक्टिशनर को सदस्य बना दिया गया है, बावजूद इसके डा. मिश्रा अपने लिए सेवा विस्तार चाहते हैं और इसकी लॉबिंग में जुटे हैं। एम्स के नए निदेशक की रेस में अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्तेदार डा. रसिक वाजपेयी, डा. रणदीप गुलेरिया, डा. जगदीश प्रसाद, डा. ए बी डे के नाम आगे हैं।

 
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